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- Home / Therapy / पंचकर्म उपचार – सम्पूर्ण शरीर शोधन और स्वास्थ्य लाभ / शिरोधारा थेरपी – मन, नींद और तनाव के लिए आयुर्वेदिक उपचार
शिरोधारा एक आयुर्वेदिक थेरपी है। इसमें एक कटोरे या किसी विशेष बर्तन से हल्का गरम तेल, दूध, छाछ (बटरमिल्क) या जड़ी-बूटियों से बना तेल लगातार एक ही फ्लो में माथे के बीचों-बीच डाला जाता है। यह फ्लो कुछ मिनटों तक बिना रुके, एक ही सेंटर और फिक्स पॉइंट पर चलता रहता है। इसके बाद आयुर्वेदिक तेल से सिर की मालिश की जाती है और नसों को हल्के हाथ से दबाया जाता है, ताकि शरीर और दिमाग को पूरी तरह रिलैक्सेशन मिल सके और वे सही तरीके से काम करें।
आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में वात दोष का असंतुलन हो जाता है, तो दिमाग ठीक से काम नहीं करता, शरीर बेचैन रहता है, थकान महसूस होती है, तनाव और एंग्जायटी बढ़ जाती है। ऐसे समय में शिरोधारा थेरपी का उपयोग किया जाता है। इस थेरपी से मानसिक और शारीरिक तनाव से राहत मिलती है, मन शांत होता है, थकान कम हो जाती है और शरीर में नई ऊर्जा महसूस होती है। तनाव और एंग्जायटी दूर करने के लिए यह काफ़ी उपयोगी थेरपी है जब कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से परेशान होता है, दुखी रहता है या घबराहट महसूस करता है, तब भी यह थेरपी उसे रिलैक्स फील कराती है। यह एक प्राकृतिक थेरपी है, जिससे तुरंत आराम मिलता है और व्यक्ति खुद को शांत और हल्का महसूस करता है।
जब नींद न आने की समस्या हो, चिड़चिड़ापन बढ़ गया हो, या लाइफ में लगातार इरिटेशन महसूस हो रही हो, तब शिरोधारा थेरपी काफी मददगार साबित होती है। यह माइग्रेन, गर्दन और कंधों के दर्द, बॉडी पेन में भी राहत देती है और पूरे शरीर को रिलैक्स करती है।
यह थेरपी एक शांत कमरे में की जाती है, जहां कोई शोर नहीं होता। बस हल्का-सा म्यूजिक चलता रहता है। माथे के बीच एक ही फ्लो में तेल, जड़ी-बूटियों का तेल या दूध गिरता रहता है, जिससे मन को गहरी शांति मिलती है, दर्द में राहत आती है, फोकस और कंसन्ट्रेशन बढ़ता है। इसके बाद व्यक्ति खुद को एनर्जेटिक, मोटिवेटेड और फ्रेश महसूस करता है।
शिरोधारा कैसे की जाती है? पूरी प्रक्रिया विस्तार से
शिरोधारा एक प्राकृतिक थेरेपी है। यह थेरेपी प्रशिक्षित थेरेपिस्ट ही करते हैं। जब किसी व्यक्ति को तनाव, घबराहट,, कंधे या गर्दन में दर्द, नींद न आना या शरीर में जलन की समस्या होती है, तब यह थेरेपी व्यक्ति को दी जाती है ताकि वह आराम महसूस कर सके। इस थेरेपी से व्यक्ति का तनाव और घबराहट कम हो जाती है। शरीर में जो भी दर्द होता है, खासकर कंधे या गर्दन में, उसमें भी मरीज को राहत मिलती है। नींद की समस्या भी ठीक हो जाती है।
इस थेरेपी में सबसे पहले व्यक्ति को एक शांत कमरे में लाया जाता है। उसे लकड़ी की मेज या किसी दूसरी मेज पर पीठ के बल लिटाया जाता है। उसके सिर के ठीक ऊपर एक कटोरा या कोई बर्तन लटकाया जाता है। व्यक्ति की समस्या के अनुसार जैसे वात-पित्त-कफ, इनके अनुसार उस कटोरे या बर्तन में तेल, दूध, छाछ या हर्बल औषधियों का तेल डाला जाता है। यह द्रव हल्का गरम होता है और एक समान धार में लगातार मरीज के माथे पर दोनों भौंहों के बीच गिराया जाता है। इस थेरेपी से पहले मरीज को तेल से मालिश की जाती है ताकि उसे आराम महसूस हो और नसें खुल जाएं। इसके बाद तेल, दूध, छाछ या हर्बल औषधियों का तेल पूरे सिर पर कुछ मिनटों तक लगातार डाला जाता है और पूरे सिर को ढक दिया जाता है।
यह पूरी थेरेपी लगभग 30–35 मिनट की होती है। इस थेरेपी के बाद मरीज के सिर की फिर से मालिश की जाती है। उसके बाद कुछ समय तक तेल को माथे पर ही लगा रहने दिया जाता है ताकि तेल अच्छी तरह सोख लिया जाए। फिर मरीज का सिर धोया जाता है और उसे कुछ समय तक उसी कमरे में रहने की सलाह दी जाती है। तुरंत बाहर की हवा लेने के लिए मना किया जाता है। मरीज को यह थेरेपी 7, 14 या 21 दिन बाद फिर से दी जाती है।
यह थेरेपी सभी मरीजों को नहीं दी जाती। जिन लोगों को सर्दी-खांसी होती है, उन्हें यह थेरेपी नहीं दी जाती। बुखार में, या सिर में कोई चोट लगी हो, तब भी यह थेरेपी नहीं दी जाती। गर्भवती महिला को भी यह थेरेपी नहीं दी जाती। सबसे पहले डॉक्टर मरीज की समस्या को समझते हैं, उसके बाद ही मरीज की समस्या के अनुसार थेरेपी दी जाती है।
शिरोधारा का मन और मस्तिष्क पर प्रभाव
इस थेरेपी से मन, मानसिक और शारीरिक तनाव से आराम मिलता है। यह थेरेपी सीधे माइंड और ब्रेन पर असर डालती है और माइंड और ब्रेन दोनों को ही रिलैक्स फील कराती है। आज के समय में इंसान हर समय कुछ न कुछ सोचता रहता है, हर समय उसके दिमाग में कुछ न कुछ चलता रहता है। कभी टेंशन होती है या ज़्यादातर समय स्क्रीन पर रहने की वजह से दिमाग में स्ट्रेस हो जाता है। सही नींद न होने की वजह से भी दिमाग ठीक से रिलैक्स नहीं कर पाता। शरीर में दर्द रहता है, व्यक्ति डिमोटिवेट रहता है, किसी काम में मन नहीं लगता। ऐसे में यह थेरेपी मरीज को दी जाती है।
डॉक्टर सबसे पहले मरीज की प्रॉब्लम समझता है और उसके अनुसार उसे यह थेरेपी देता है। कटोरी या बाउल में से तेल, दूध या छाछ सिर पर मरीज के एक ही स्थान पर लगातार गिरती है, जिससे ब्रेन को रिलैक्सेशन मिलती है। एक ही फ्लो में ऊपर से तेल, दूध या छाछ गिरने से नर्व्स को भी रिलैक्सेशन मिलता है। यह थेरेपी शांत कमरे में दी जाती है, जहां कोई शोर-शराबा नहीं होता। इससे माइंड पूरी तरह रिलैक्स हो जाता है।
इस थेरेपी के बाद फोरहेड पर मालिश की जाती है, जिससे नर्व्स खुल जाती हैं और माइंड को भी और मरीज को भी रिलैक्सेशन महसूस होता है। इस थेरेपी से ओवरथिंकिंग कम हो जाती है। वात दोष का जो इम्बैलेंस होता है, वह बैलेंस हो जाता है। स्ट्रेस दूर हो जाता है और मरीज को रिलैक्सेशन मिलती है।
यह थेरेपी मरीज की प्रॉब्लम के अनुसार उसे 7 दिन, 14 दिन, 21 दिन या एक दिन के गैप में दी जाती है। यह एक नेचुरल प्रोसेस होता है, जिससे माइंड शांत हो जाता है। एंग्जायटी, घबराहट जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं। माइंड रिलैक्स होने की वजह से नींद भी सही आने लगती है और मरीज का काम में मन लगने लगता है। व्यक्ति नेगेटिव नहीं रहता और मोटिवेट महसूस करता है।
ध्यान और मानसिक स्थिरता बढ़ाने में शिरोधारा के लाभ
शिरोधारा ध्यान और मानसिक स्थिरता बढ़ाने में बहुत सहायक है। आज के समय में व्यक्ति ज़्यादा सोचता है, ज़्यादा टेंशन में रहता है। उसका दिमाग हमेशा वर्किंग मोड में रहता है। वह शांति से एक जगह बैठ ही नहीं पाता। मेडिटेशन करता है, तब भी उसके दिमाग में कुछ न कुछ चलता ही रहता है। माइंड रिलैक्स नहीं हो पाता और इसी वजह से वह स्ट्रेस में चला जाता है, जिससे एंग्जायटी होती है। किसी भी काम में मन नहीं लगता, एक जगह पर कंसन्ट्रेट नहीं कर पाता। सही से नींद भी नहीं होती। नींद न होने की वजह से पूरी बॉडी में थकावट बनी रहती है। बॉडी सही से काम नहीं करती और किसी भी काम में इंसान का मन नहीं लगता।
व्यक्ति कोशिश करता है कि एक जगह कंसन्ट्रेट करे, एक जगह फोकस करे, लेकिन वह कर नहीं पाता। ऐसे में शिरोधारा थेरेपी बहुत सहायक होती है। इस थेरेपी में जब व्यक्ति के माथे पर दोनों भौंहों के बीच ऊपर से पदार्थ गिरता है, तो इससे नर्व्स को रिलैक्सेशन मिलती है और माइंड को भी रिलैक्सेशन मिलती है। इस थेरेपी के दौरान व्यक्ति पूरी तरह रिलैक्स हो जाता है। सिर पर मालिश की जाती है, जिससे व्यक्ति का माइंड रिलैक्स हो जाता है, नर्व्स खुल जाती हैं और बॉडी रिलैक्सेशन मोड में चली जाती है।
इस समय माइंड किसी और चीज़ पर फोकस नहीं कर रहा होता। बॉडी वर्किंग मोड में नहीं होती। माइंड बस ऊपर से जो पदार्थ गिरता है, उसी पर फोकस करता है। न आसपास कोई आवाज़ आती है, न कोई कुछ कहता है। इससे माइंड पूरी तरह से रिलैक्स हो जाता है। नर्वस सिस्टम भी रिलैक्स हो जाता है। इसके बाद हेड मसाज दी जाती है और थेरेपी के बाद माइंड रिलैक्स रहता है। तनाव और एंग्जायटी दूर करने में सहायक है।
इसके बाद व्यक्ति काम पर फोकस कर पाता है, कंसन्ट्रेशन बढ़ता है, स्ट्रेस और एंग्जायटी नहीं होती। बॉडी रिलैक्स होती है, जिससे नींद भी सही से आती है। नींद पूरी होती है तो बॉडी में नई एनर्जी आती है, पॉजिटिविटी आती है और काम करने में मन लगता है। एक जगह कंसन्ट्रेशन बढ़ता है। जब व्यक्ति मेडिटेशन करता है, तो कोई और ख्याल नहीं आते क्योंकि माइंड पूरी तरह रिलैक्स हो जाता है। इस तरह शिरोधारा थेरेपी ध्यान और मानसिक स्थिरता बढ़ाने में सहायक होती है।
आज के तनावपूर्ण जीवन में शिरोधारा क्यों जरूरी हो गई है
आजकल की ज़िंदगी पूरी तनावपूर्ण हो गई है। हर किसी की लाइफ में स्ट्रेस है। स्ट्रेस अब आम बात हो गई है। हर किसी के मूड स्विंग होते हैं, फोकस नहीं कर पाते, एक जगह बैठकर ज़्यादा ओवरथिंकिंग होती है। बॉडी में दर्द रहता है, रात में नींद नहीं आती। नींद न होने की वजह से बॉडी में थकान महसूस होती है, जिससे पूरे दिन काम करने का मन नहीं होता। बीपी हाई रहता है, मानसिक रोग होते हैं आज के समय में डायबिटीज, एंग्जायटी, घबराहट, चक्कर जैसी समस्याएं बहुत आम हो गई हैं।
अगर इन सभी समस्याओं को समय रहते ठीक नहीं किया गया, तो आगे चलकर ये और बड़ी बीमारी का रूप ले सकती हैं, जिससे और नुकसान हो सकता है। बेहतर यही है कि इन्हें यहीं पर ठीक कर लिया जाए। शिरोधारा थेरेपी इन सभी समस्याओं को ठीक करने में बहुत हेल्पफुल है। आज की जीवनशैली में यह थेरेपी ज़रूरी हो गई है।
यह एक आयुर्वेदिक थेरेपी है, इसलिए इस थेरेपी का कोई साइड इफेक्ट या नुकसान नहीं है, बल्कि फायदा ही है। जो मूड स्विंग, ओवरथिंकिंग, एंग्जायटी और स्ट्रेस होता है, यह थेरेपी इन सब में व्यक्ति को रिलैक्स महसूस कराती है। अगर आप एक जगह फोकस नहीं कर पाते या कंसन्ट्रेट नहीं कर पाते, तो यह थेरेपी उसमें भी मदद करती है।
इससे आपका माइंड और नर्वस सिस्टम रिलैक्स हो जाता है। पूरी बॉडी रिलैक्स हो जाती है। थकान महसूस नहीं होती और बॉडी में एनर्जी आ जाती है, जिससे आप आसानी से अपना काम कर पाते हैं और कहीं भी फोकस कर सकते हैं। इस थेरेपी को आप अपनी लाइफ साइकिल में भी जोड़ सकते हैं।
एलोपैथी की जो गोलियां खाई जाती हैं, उनसे उस समय असर तो हो जाता है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने के चांस कम होते हैं। जबकि यह आयुर्वेदिक थेरेपी आपकी समस्या के रूट कॉज़ तक जाती है और आपको पूरी तरह रिलैक्स फील कराती है। माइंड को रिलैक्स करती है और नर्व्स को खोल देती है।
आजकल जिस तरह से लोगों को स्ट्रेस, एंग्जायटी, ओवरथिंकिंग और डिप्रेशन जैसी समस्याएं हो रही हैं, उन सभी समस्याओं को ठीक करने के लिए यह थेरेपी बहुत सहायक है। आज के समय में हर किसी को यह थेरेपी लेनी चाहिए। इससे पूरी बॉडी रिलैक्स हो जाती है और ये सभी समस्याएं धीरे-धीरे ठीक हो जाती हैं। यह थेरेपी आपके दोषों को भी बैलेंस करती है।
एक बार थेरेपी लेने से बहुत ज़्यादा रिज़ल्ट नहीं मिलता, लेकिन अगर आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार जितनी बार थेरेपी लेने को कहा जाए उतनी बार लेते हैं, तो आपको कन्फर्म रिलैक्सेशन महसूस होगा और आपकी सभी समस्याएं हल होंगी।
शिरोधारा थेरपी की लागत और सत्रों की अवधि
शिरोधारा थेरेपी के फायदे और उपयोग तो हमने जान लिए, लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल भी होता है कि इसकी अवधि और इसकी लागत क्या होती है। यह पूरी तरह से पेशेंट टू पेशेंट पर निर्भर करता है। हर व्यक्ति की समस्या अलग होती है, इसलिए हर किसी की अवधि और लागत भी अलग-अलग होती है। किसी व्यक्ति को एक-दो बार थेरेपी में ही आराम मिल जाता है, जबकि किसी को डॉक्टर चार-पांच बार थेरेपी लेने की सलाह देते हैं। यह पूरी तरह से पर्सन टू पर्सन वैरी करता है।
लागत भी पर्सन टू पर्सन डिपेंड करती है। डॉक्टर सबसे पहले मरीज के दोषों को स्टडी करते हैं, फिर उनके अनुसार ही थेरेपी दी जाती है। उसी के अनुसार यह तय किया जाता है कि माथे के बीच कौन-सा पदार्थ गिराया जाएगा — तेल, दूध या छाछ, और क्या चीज़ मरीज को सूट करेगी।
इसलिए लागत और अवधि पर्सन टू पर्सन अलग-अलग होती है। लेकिन ज़्यादातर लोगों को 2–3 थेरेपी ही सजेस्ट की जाती हैं और उन्हीं में उन्हें आराम मिल जाता है। एक थेरेपी की लागत लगभग ₹1,200 – ₹3,000 तक होती है और यह पूरी तरह से आयुर्वेदिक संस्थान पर निर्भर करता है।
यह थेरेपी लगभग 30 से 35 मिनट तक चलती है। इस दौरान आपको एक शांत कमरे में लिटाया जाता है ताकि आपका माइंड पूरी तरह रिलैक्स हो सके। कई बार थेरेपिस्ट मेडिकेटेड ऑयल या कुछ एडवांस हर्बल लिक्विड्स का इस्तेमाल करते हैं, जिससे लागत थोड़ी ज़्यादा हो सकती है। यह भी पूरी तरह से आयुर्वेदिक संस्थान पर निर्भर करता है।
FAQs
1. शिरोधारा थेरपी में तेल, दूध या छाछ किस आधार पर चुना जाता है?
शिरोधारा में द्रव का चयन व्यक्ति के वात-पित्त-कफ दोष और मानसिक समस्या की प्रकृति के अनुसार किया जाता है।
2. क्या शिरोधारा थेरपी ओवरथिंकिंग और बार-बार आने वाले विचारों को कम करती है?
हाँ, लगातार एक बिंदु पर गिरती धार मस्तिष्क को शांत करती है, जिससे ओवरथिंकिंग और मानसिक बेचैनी कम होती है।
3. नींद न आने की समस्या में शिरोधारा कितनी सिटिंग में असर दिखाती है?
अधिकतर 3–7 सिटिंग में नींद की गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार महसूस होने लगता है, खासकर वात दोष से जुड़ी अनिद्रा में।
4. क्या माइग्रेन और सिर दर्द में शिरोधारा थेरपी प्रभावी होती है?
शिरोधारा माइग्रेन में ट्रिगर बनने वाले मानसिक तनाव को कम करती है, जिससे सिर दर्द की तीव्रता और आवृत्ति घटती है।
5. शिरोधारा थेरपी के बाद थकान या सुस्ती क्यों महसूस होती है?
थेरपी के बाद शरीर डीप रिलैक्सेशन मोड में चला जाता है, जिससे हल्की सुस्ती आना सामान्य और अस्थायी होता है।
6. क्या शिरोधारा थेरपी डिप्रेशन और एंग्ज़ायटी में सहायक है?
यह थेरपी नर्वस सिस्टम को शांत करती है और मानसिक दबाव घटाती है, जिससे एंग्ज़ायटी और उदासी में राहत मिलती है।
7. क्या शिरोधारा सभी उम्र के लोगों के लिए सुरक्षित है?
शिरोधारा वयस्कों और बुज़ुर्गों के लिए सुरक्षित है, लेकिन बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुखार में नहीं दी जाती।
8. शिरोधारा थेरपी के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
थेरेपी के बाद ठंडी हवा, स्क्रीन टाइम और तुरंत नहाने से बचना चाहिए ताकि लाभ बना रहे।
9. क्या शिरोधारा केवल मानसिक रोगों के लिए है या शारीरिक दर्द में भी मदद करती है?
शिरोधारा गर्दन, कंधे और तनाव से जुड़े बॉडी पेन में भी राहत देती है क्योंकि यह नर्व्स को रिलैक्स करती है।
10. शिरोधारा और हेड मसाज में क्या मुख्य अंतर है?
शिरोधारा एक चिकित्सीय आयुर्वेदिक प्रक्रिया है जो मस्तिष्क पर सीधा असर डालती है, जबकि हेड मसाज केवल बाहरी रिलैक्सेशन देती है।
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