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वीर्य क्या है, कैसे बनता है, वीर्य गाढ़ा करने और बढ़ाने के उपाय

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 12 Dec, 2024
  • category-iconUpdated on 22 Aug, 2026
  • category-iconSexual Health
  • blog-view-icon21414

जिस प्रकार एक अच्छी फसल उगाने के लिए एक उत्तम बीज की ज़रूरत होती है, उसी प्रकार एक स्वस्थ संतान की प्राप्ति के लिए पुरुष के वीर्य का शुद्ध और दोषरहित होना आवश्यक होता है, वीर्य एक जैविक तरल पदार्थ है जो नए जीवन की उत्पत्ति की नीव रखता है। यह वीर्याशय ग्रंथि से निकलने वाला एक जटिल मिश्रण है जो पुरुष को प्रजनन की छमता देता है। 

सप्त धातु क्या है?

रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र, ये सात धातुएं शरीर को धारण करती हैं। ये क्रमशः पुष्ट होती हैं और हमारा आहार अंत में सातवीं धातु शुक्र के रूप में परिवर्तित होती है। सातों धातुओं के पुष्ट और सबल होने पर ही हमारा शरीर स्वस्थ रहता है। इन सात धातुओं में सातवीं धातु शुक्र परम श्रेष्ठ होती है। शुद्ध और दोषरहित वीर्य गाढ़ा, चिकना, सफेद, मलाई जैसा मधुर और कांच जैसा चिकना होता है। जबकि पतला, मैला, पीला, पतले दूध जैसा, बदबूदार, झागदार और पानी की तरह टपकने वाला वीर्य दूषित, कमज़ोर और विकारयुक्त होता है।

वीर्य कैसे बनता है?

वीर्य शरीर की बहुत मूल्यवान धातु है। भोजन से वीर्य बनने की प्रक्रिया बड़ी लंबी है। जो भोजन पचता है, उसका पहले रस बनता है। पांच दिन तक उसका पाचन होकर रक्त बनता है। पांच दिन बाद रक्त से मांस, उसमें से 5-5 दिन के अंतर से मेद, अस्थि, मज्जा और अंत में शुक्र बनते हैं। इस प्रकार आहार से शुक्र बनने में करीब एक महीना लग जाता है।

दोषपूर्ण वीर्य के कारण

वीर्य के दूषित होने के पीछे निम्न कारणों की भूमिका है:

  • अत्यधिक मैथुन
  • शक्ति से अधिक श्रम
  • पोषक तत्वों की कमी
  • अप्राकृतिक तरीकों से वीर्यपात
  • प्रकृति विरुद्ध पदार्थों का सेवन
  • रोगग्रस्त व्यक्ति के साथ यौन संबंध
  • मिर्च-मसालेदार / खटाई / मादक पदार्थों का सेवन
  • चिंता/ शोक/ भय/मानसिक तनाव
  • गुप्त रोग /क्षय रोग /वृद्धावस्था

शुक्र धातु कैसे बढ़ाये?

अच्छा आहार अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है। यदि आहार अच्छा नहीं है व पाचन प्रक्रिया सही नहीं है तो रक्त कम बनेगा और रक्त कम बनने से अन्य धातुओं के साथ वीर्य भी गुण व मात्रा के रूप में कम बनता है। इसके साथ ही किसी भी तरह का रोग वीर्य बनने की प्रक्रिया को बाधित कर देता है या शरीर में संक्रमण होने से वीर्य की गुणवत्ता पर प्रभाव रहता है। 

वीर्य कम होने पर काम शक्ति और कामेच्छा भी कम हो जाती है। इसीलिए आयुर्वेद में विशेष आहार और औषधीय वनस्पतियां बताई गई हैं जिनका सेवन सम्पूर्ण स्वास्थ्य विशेष रूप से ओज व प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है। निम्न पदार्थों का सेवन शरीर में वीर्य को बढ़ाता हैः

  • मिश्री युक्त गाय का दूध
  • मक्खन / घी
  • चावल की खीर
  • उड़द की दाल
  • तुलसी के बीज
  • बादाम
  • अनार
  • खजूर
  • काले तिल
  • बबूल का गोंद
  • मुसली
  • अश्वगंधा
  • शतावर

निष्कर्ष

शुक्र धातु को बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक सिद्धांतों का पालन करना एक अच्छा और सुरक्षित विकल्प है। जीवन के इस पहलू को पोषण देने और मज़बूत बनाने का यह प्राकृतिक तरीका यह सुनिश्चित करता है कि कोई गंभीर साइड इफ़ेक्ट न हो और व्यक्ति अपना वैवाहिक जीवन खुशी-खुशी जी सके। 

References:

How Is Sperm Produced?

View of Ayurvedic management in Male Infertility w.s.r. to Oligoasthenospermia : A Retrospective Case Series

View of Shukra Dhatu - A Conceptual Study from Modern Perspective | Journal of Ayurveda and Integrated Medical Sciences

SHUKRA DHATU OF AYURVEDA AND ITS AFFILIATES IN MODERN PERSPECTIVE: A REVIEW

View of Role of Ayurvedic herbs in managing Shukra Dosha - A Review | Journal of Ayurveda and Integrated Medical Sciences

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे द्वारा खाए गए भोजन को रस, रक्त, मांस आदि धातुओं से गुजरते हुए शुक्र धातु बनने में लगभग एक महीने का समय लगता है।

वीर्य के पतले होने के पीछे मुख्य कारण पोषक तत्वों की कमी, अत्यधिक तनाव, अनुचित खान-पान , और शारीरिक कमजोरी हो सकती है।

हाँ, आयुर्वेद में अश्वगंधा, शतावरी और सफेद मूसली को 'वाजीकरण' औषधियां माना गया है। ये प्राकृतिक रूप से वीर्य की गुणवत्ता, गाढ़ापन और शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में बहुत प्रभावी हैं।

अपनी डाइट में दूध के साथ मिश्री, शुद्ध देसी घी, उड़द की दाल, खजूर, बादाम और चावल की खीर शामिल करना वीर्य को पुष्ट और गाढ़ा करने में मदद करता है।

बिल्कुल, अत्यधिक चिंता, तनाव और भय शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ते हैं, जिसका सीधा नकारात्मक असर वीर्य के निर्माण और यौन क्षमता पर पड़ता है।

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