क्या आपने कभी ध्यान दिया है, कि अक्सर सर्दी के मौसम में शरीर आमतौर के मुक़ाबले ज़्यादा सुस्त, ठंडा, और सुन हो जाता है? इसका मूल कारण है रक्त संचार (blood circulation) का धीमा पड़ जाना। लेकिन ऐसा क्यों होता है? और एक साधारण प्रतिरक्षा प्रक्रिया (defense response) होने के बावजूद भी, यह कब ह्रदय स्वास्थ्य और अन्य गंभीर जटिलताओं के लिए एक संकेत बन सकता है?
इस ब्लॉग में हम आपके इन्ही सवालों के उत्तर देने का प्रयास करेंगे। साथ ही, हम आपको यह भी बतायंगे कि आयुर्वेद कि दृष्टि से आप अपने रक्त संचार को कैसे सुधार सकते हैं।
सर्दी के मौसम में रक्त संचार के धीमे पड़ने का कारण
तापमान में बदलाव होते ही हमारा शरीर अपनी प्रतिरक्षा प्रक्रियाओं के द्वारा शरीर के अंदर के तापमान को एक निश्चित स्तर पे बनाये रखने का प्रयास करता है। इन्ही प्रक्रियाओं कि वजह से, जब बाहरी तापमान ठंडा होता है, तो शरीर अपनी रक्त वाहिकाएं (blood vessels) संकुचित कर लेता है ताकि शरीर में गर्मी बानी रहे।
वाहिकाओं के सिकुड़ने के साथ-साथ, तापमान को नियंत्रित करने के लिए अधिक प्रयास के कारण, रक्त गाड़ा हो जाता है, जिससे रक्त की गति कम होजाती है और संचार भी धीमा पड़ जाता है।
ब्लड सर्कुलेशन के धीमे पड़ने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?
शरीर का रक्त संचार अत्यंत मेहेत्वपूर्ण होता है। यही संचार शरीर के हर अंग तक पर्याप्त ऑक्सीजन और आवश्यक तत्व पहुँचाने के लिए ज़िम्मेदार होता है। इसका धीमा होना इस कार्य में रूकावट और मुश्किल पैदा करता है।
रक्त संचार के धीमे होने से शरीर के बाहरी अंग, जैसे हाथ, पैर, नाक और कान, में रक्त का प्रवाह (blood flow) कम होजाता है, जिसके कारण ये अंग ठंडे और सुन पड़ जाते हैं।
रक्त वाहिकाओं के सिकुड़ने और रक्त के गाड़े होने से जिस्म में थक्के (blood clots) बन सकते हैं, और ह्रदय पे ज़्यादा तनाव पड़ने के कारण रक्तचाप (blood pressure) भी बढ़ सकता है।
जो लोग ख़राब रक्त संचार के रोगी हैं, उनके लिए सर्दी का मौसम अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह लोग शरीर में दर्द और सूजन जैसी समस्याएं अनुभव कर सकते हैं।
आयुर्वेद इसके बारे में क्या कहता है
आइये जानते हैं कि आयुर्वेदा इसके बारे में क्या कहता है। आयुर्वेद के अनुसार, सर्दी में ब्लड सर्कुलशन कम होने का मूल कारण है वात दोष का असंतुलन।यह शरीर में गति और परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है। वात दोष बढ़ने से शरीर में खुश्की बढ़ती है, और रक्त वाहिकाएं संकुचित होजाती है, जिससे रक्त संचार हल्का हो जाता है।
वात दोष बढ़ने के कुछ कारण हो सकते हैं जैसे:
- ठंडा और ख़ुष्क मौसम
- पानी की कमी: सर्दियों में प्यास कम लगने के कारण लोग अक्सर पानी कम पीते हैं, जिससे जिस्म में सूखापन बढ़ता है।
- शरीरिक गतिविधि: सर्दिओं में बढ़ी हुई सुस्ती के कारण शरीरिक गतिविधि की कमी हो जाती है। क्योंकि वात दोष संचलन के लिए ज़िम्मेदार होता है, गति की कमी के कारण यह असंतुलित होजाता है।
वात दोष के बढ़ने के लक्षण
रक्त संचार में कमी:
हाथ-पैर ठंडे पड़ना, खासकर उंगलियों और अँगूठों में, रक्त संचार का कमजोर होना। रक्त के गाड़े और रक्त वाहिकों के सिकुड़ने के कारण रक्त संचार कम हो जाता है।
सूखापन और अकड़न:
त्वचा और होंठों का रूखा होना, मांसपेशियों में अकड़न या जकड़न महसूस होना। ठंडे वातावरण के कारण शरीर में सूखापन बढ़ जाता, जिससे यह सब हो जाता है।
मानसिक लक्षण:
बेचैनी, चिंता, घबराहट और मन में अस्थिरता का अनुभव होना। क्योंकि वात दोष संचलन के लिए ज़िम्मेदार होता है, इसका असंतुलन मस्तिष्क तक आवश्यक तत्व पोहोचने से रोक देता है जिससे मानसिक लक्षण उभरते हैं।
अन्य लक्षण:
चक्कर आना, कब्ज और शरीर में दर्द। रक्त संचार धीमा होने से पाचन पे भी असर पढ़ता है, जिससे शरीर में कमज़ोरी और दर्द हो सकता है। अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन ना पोहुँचने के कारण चककर भी आ सकते हैं।
रक्तसंचार का कम होना कब अत्यंत हानिकारक हो सकता है और उसे होने वाली जटिलताएं
सर्दी के मौसम में राक्षचार का धीमा होना आम बात है। लेकिन इसका अत्यधिक घटना अन्य कई गंभीर स्थितियों का संकेत हो सकता है। यह आवश्यक है कि आप अपने लक्षणों का अत्यधिक ध्यान रखें क्योंकि घाटा हुआ रक्तसंचार जानलेवा भी हो सकता है। इससे होने वाली हानिकारक जटिलताएं हैं:
- स्ट्रोक: रक्त के गाड़े होने से और रखा वाहिकाओं के संकुचित होने से कभी कभी मस्तिष्क तक रक्त ठीक मात्रा में नहीं पोहुँच पता, जिससे स्ट्रोक के चान्सेस बढ़ जाते हैं।
- ह्रदय रोग और हार्ट अटैक: यदि ह्रदय कि नालियों में रक्त का प्रवाह रुक जाता है, तोह दिल का दौरा पढ़ सकता है।
- मधुमेह सम्बंधित जटिलताएं (diabetes related complications): खराब रखा संचार मधुमेह के रोगियों में घाव देर से भरने का और न्यूरोपैथी का कारण बनता है।
- गुर्दे का फेलियर: अपर्याप्त राकर प्रवाह पहुंचने के कारण गुर्दों के कार्य पे असर पढ़ता है जिससे किडनी फेलियर का डर बढ़ जाता है।
- अंगों को नुकसान: अपर्याप्त रक्त ना पोहुँचने के कारण अंगकन तक आवश्यक ऑक्सीजन ओर तावत नहीं पोहुँच पाते, जिससे उनके कार्य पे नकारात्मक असर पढ़ता है और नुक्सान पोहुँचता है।
- रक्त के थक्के बनना (blood clot formation): धीमे रक्त संचारे के कारण रक्त के थक्के बन सकते हैं जो अगर ह्रदय, मस्तिष्क या फेफड़ों जैसे अंगों में चले जाएं तोह बहुत खतरनाक हो सकते हैं।
यदि आपको दिए हुए लक्षण महसूस होते hain:
- लगातार ठंडे हाथ और पैर: यह खराब परिसंचरण का एक स्पष्ट संकेत है।
- सूजन (Edema): विशेष रूप से पैरों, टखनों और पैरों में सूजन।
- सुन्नता और झुनझुनी: अंगों में "पिन और सुई" जैसी सनसनी।
- मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द: चलने या शारीरिक गतिविधि के दौरान दर्द, जो आराम करने पर ठीक हो जाता है (क्लॉडिकेशन)
- त्वचा के रंग में बदलाव: त्वचा का पीला, नीला या लाल होना
- धीमे घाव भरना: घावों या कटने में सामान्य से अधिक समय लगना
तो बिना समय लगाए तुरंत अपने नज़दीकी स्वास्थ्य चिकित्सक से परामर्श करें। यदि आपको सम्पूर्ण रूप से इलाज करवाना है, तो हमारे आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉक्टर्स से तुरंत परामर्श करें।
आयुर्वेदा के अनुसार, कोनसे खाद्य पदार्थ रक्त संचार को धीमा करते हैं
हम क्या खाते हैं इससे हमारे शरीर पर सबसे ज़्यादा असर पढ़ता है। आयुर्वेदा के अनुसार वह खाद्य पदार्थ रक्त संचार को धीमा करते हैं जो वात दोष को और बढ़ाते हैं (जो ठंड के कारण पहले से ही बढ़ा होता hai)। आइए नज़र ड़ालते हैं ऐसे कुछ पदार्थों पर:
- प्रोसेस्ड और जंक फूड: चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स, बर्गर और अन्य प्रसंस्कृत स्नैक्स अक्सर सोडियम, अस्वास्थ्यकर वसा और रिफाइंड चीनी से भरे होते हैं, जो रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- तले हुए और वसायुक्त खाद्य पदार्थ: पकोड़े, समोसे और अन्य गहरे तले हुए खाद्य पदार्थ शरीर में 'आम' (चिपचिपा अवशेष) बनाते हैं, जो रक्त वाहिकाओं में जमा हो सकते हैं और प्रवाह को बाधित कर सकते हैं।
- अत्यधिक चीनी और शर्करा युक्त पेय: सोडा, पेस्ट्री और बहुत अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ सूजन पैदा कर सकते हैं और रक्त के प्रवाह को प्रतिबंधित कर सकते हैं।
- अत्यधिक नमक: बहुत अधिक नमक का सेवन उच्च रक्तचाप और धमनी की रुकावट का कारण बन सकता है, जिससे परिसंचरण धीमा हो जाता है।
- भारी और लाल मांस: अधिक मात्रा में लाल मांस का सेवन पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है और चयापचय को धीमा कर सकता है।
- डेयरी उत्पाद (कुछ मामलों में): कुछ लोगों के लिए, दूध के साथ फल जैसे असंगत खाद्य संयोजन (विरुद्ध आहार) 'आम' के निर्माण में योगदान कर सकते हैं।
- ठंडे और बासी खाद्य पदार्थ: फ्रिज में रखे पुराने या बासी खाद्य पदार्थ और बहुत ठंडे पेय पाचन क्रिया को धीमा कर देते हैं।
- कैफीन और शराब: इनका अत्यधिक सेवन रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर सकता है और परिसंचरण को प्रभावित कर सकता है।
जीवनशैली में बदलाव जिनसे रक्तसंचार बढ़े
खाद्य पदार्थ के साथ-साथ, हमें अपनी जीवनशीली में भी काफ़ी सुधार करने चाहिए जिससे हमारा वात दोष घटे और रक्तसंचार अच्छा हो। ऐसे कुछ बदलाव हैं:
- नियमित व्यायाम: दैनिक शारीरिक गतिविधि, जैसे सैर करना, टहलना, तैराकी या योग, रक्त प्रवाह को उत्तेजित करने के लिए आवश्यक है। यह परिसंचरण को स्वाभाविक रूप से गति देता है
- योग और प्राणायाम: विशिष्ट योगासन जैसे 'सूर्य नमस्कार' और प्राणायाम (साँस लेने के व्यायाम) रक्त और ऑक्सीजन के प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करते हैं
- स्वस्थ आहार: ताजे फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज और दालें जैसे सात्विक भोजन का सेवन करें। अदरक, लहसुन, हल्दी, और लाल मिर्च जैसे मसाले रक्त संचार को बेहतर बनाने के लिए जाने जाते हैं
- हाइड्रेशन: दिन भर पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएं। उचित जलयोजन रक्त की चिपचिपाहट को कम रखने में मदद करता है।
- धूम्रपान और शराब से बचें: तंबाकू और अत्यधिक शराब का सेवन रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर सकता है और परिसंचरण को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
- पर्याप्त नींद: शरीर को खुद को ठीक करने और पुनर्जीवित करने के लिए पर्याप्त आराम आवश्यक है, जो स्वस्थ परिसंचरण का समर्थन करता है।
- तनाव प्रबंधन: ध्यान, योग, या अन्य विश्राम तकनीकों के माध्यम से तनाव को कम करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि तनाव रक्तचाप और परिसंचरण पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
रक्तसंचार बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे
आयुर्वेद के अनुसार रक्तसंचार बढ़ाने के लिए बहुत से नुस्खे मौजूद हैं। ये नुस्खे घरेलु चीज़ें जैसे कुछ मसाले, घरेलु उपाय और कुछ जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करते हैं।
इन नुस्खों का मूल उद्देश्य होता है शरीर में वात दोष को कम करना, शरीर कि ख़ुश्की को कम करना, खून को पतला करना और रक्त वाहिकाओं की सिकुड़न को कम करना, जिससे रक्त कि गति बढ़े और आवश्यक तत्व हर अंग तक पहुँच पाए।
आइये देखते हैं कुछ आयुर्वेदिक नुस्खे जो रक्त संचार को बढ़ाने में मदद करते हैं:
मसाले
- हल्दी: हल्दी में सूजन-रोधी तत्व होते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। यह रक्त वाहिकाओं के कार्य को भी बेहतर करने में मदद करती है।
- अदरक: यह रक्त के प्रवाह को अच्छा करती है। आप इसे दिन में दो-तीन बार चाय के साथ आराम से ले सकते हैं।
- लहसुन: खाली पेट में लहसुन की कच्ची काली खाने से रक्त पतला होता है जिससे ब्लड प्रेशर कम होता है और ब्लड क्लॉट्स (thakke) बनने से रुकते हैं।
- लाल मिर्च: इसमें कैप्साइसिन होने के कारण यह रक्त वाहिकाओं को फैलाने में मदद करता है, जिससे रक्त संचार अच्छा होता है। इसको थोड़ी मात्रा में भोजन के साथ लिए जा सकता है।
विशिष्ट जड़ी-बूटियाँ
- ब्राह्मी- वैसे तो यह मस्तिष्क को बेहतर करने के लिए मानी जाती है, लेकिन ये सामान्य रक्त प्रवाह को भी बेहतर करने के काम आती है।
- अर्जुन: यह ह्रदय के लिए बहुत अच्छा टॉनिक माना जाता है। ये ब्लड सर्कुलशन में मदद करता है क्योंकि यह ह्रदय कि मांसपेशयों को स्वस्थ बनाता है।
- अश्वगंधा: ये मानसिक तनाव को कम करता है, जो बेहतर परिसंचरण का समर्थन करता है।
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां वैसे तो हानिकारक नहीं होती, लेकिन कोई भी जड़ी-बूटी बिना किसी योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर के परामर्श के नहीं करनी चाहिए।
अन्य घरेलु उपाय
- गुनगुना पानी: दिनभर में गुनगुना पानी पीने से शरीर को अमा निकालने में मदद मिलती है। यह रक्त को पतला रखने में भी सहायता करता है।
- तिल का तेल: तिल के तेल से अभ्यंग (oil massage) रक्त के प्रवाह में भौतिक रूप से उत्तेजना पैदा करती है।
- शहद: इसके औशधीय गुण शरीर को डेटॉक्सफाई करने में मदद करते हैं। आप शहद नींबू के रस और गुनगुने पानी के साथ सुबह ले सकते हैं।
निष्कर्ष
सर्दिओं में रक्त संचार का धीमा होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। यह शरीर को ठंडे तापमान मैं गर्म रखने के काम आती है। लेकिन, इस प्रक्रिया का अत्यधिक होना अन्य गंभीर स्थतियों का, जैसे स्ट्रोक, हार्ट रोग, ब्लड क्लॉट, और मधुमेह सम्बंधित जटिलताओं का संकेत हो सकता है।
आयुर्वेदा के अनुसार, यह बढ़े हुए वात दोष के कारण होता है, जो शरीर को सूखा कर देता है और रक्त कि गति में गिरावट करता है। इसके सामान्य लक्षणों से आयुर्वेदिक नुस्खों के द्वारा राहत पाई जा सकती है। लेकिन यदि लक्षणों बढ़ रहे हैं, और उनोई ध्यान ना दिया जाये तो यह जानलेवा भी हो सकता है।
अगर आपको अत्यधिक धीमे रक्त संचार के कोई भी लक्षण महसूस होरहे हैं, तोह तुरंत जीवा आयुर्वेदा के विशेषज्ञ चिकिस्तेंसकों से परामर्श कीजिए। जीवा आयुर्वेदा आपको खाद्य के साथ साथ जीवनशैली में अनिवार्य बदलाव भी बताएगा जो आपको एक सम्पूर्ण उपचार कि ओर लेकर जायेगा।
FAQS:-
- सर्दी में रक्त संचार धीमा क्यों हो जाता है?
आयुर्वेद के अनुसार, सर्दी का मौसम वात और कफ दोष को बढ़ाता है। ठंड के कारण शरीर की पाचन अग्नि (पाचन शक्ति) धीमी हो जाती है और रक्त वाहिकाएं (ब्लड वेसेल्स) सिकुड़ जाती हैं। इससे शरीर में 'आम' (विषाक्त पदार्थ) जमने लगता है, जो रक्त प्रवाह को धीमा कर देता है।
- रक्त संचार बढ़ाने के लिए कौन से मसाले सबसे अच्छे हैं?
हल्दी, अदरक, लहसुन, दालचीनी, और काली मिर्च सर्दी में रक्त संचार बढ़ाने के लिए बेहतरीन हैं। ये मसाले शरीर में गर्मी पैदा करते हैं, 'आम' को पचाने में मदद करते हैं और रक्त पतला करने वाले प्राकृतिक एजेंट के रूप में काम करते हैं।
- क्या सर्दियों में मालिश (अभ्यंग) रक्त संचार में मदद करती है?
हाँ, बिलकुल। आयुर्वेद में 'अभ्यंग' (गर्म तेल से मालिश) को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा माना जाता है, खासकर सर्दियों में। गर्म तिल या सरसों के तेल से मालिश करने से त्वचा के नीचे रक्त प्रवाह सक्रिय होता है, जिससे शरीर में गर्माहट आती है और परिसंचरण बेहतर होता है।
- मुझे सर्दी में कैसा आहार लेना चाहिए?
आयुर्वेद गर्म, पचने में आसान और पौष्टिक खाद्य पदार्थों के सेवन की सलाह देता है। इसमें गर्म सूप, ताजा पका हुआ भोजन, जड़ वाली सब्जियाँ, और घी शामिल हैं। बासी, ठंडे और सूखे खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि वे वात दोष को बढ़ाते हैं और पाचन को कमजोर करते हैं।
- क्या जड़ी-बूटियाँ रक्त संचार को बेहतर बना सकती हैं?
हाँ, कुछ जड़ी-बूटियाँ जैसे अश्वगंधा (Ashwagandha), ब्राह्मी (Brahmi), और अर्जुन (Arjuna) रक्त संचार में सहायता कर सकती हैं। हालांकि, इन जड़ी-बूटियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करना सबसे अच्छा है।
- सर्दियों में किस प्रकार का व्यायाम करना चाहिए?
नियमित रूप से हल्का से मध्यम व्यायाम आवश्यक है। योग, प्राणायाम, या 30 मिनट की तेज सैर रक्त प्रवाह को बनाए रखने में मदद करती है। व्यायाम शरीर में गर्मी पैदा करता है और कफ दोष को संतुलित करता है।
- सर्दी में पर्याप्त पानी पीना क्यों महत्वपूर्ण है?
सर्दी में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को फिर भी हाइड्रेशन की आवश्यकता होती है। पर्याप्त मात्रा में गुनगुना या गर्म पानी पीने से रक्त की चिपचिपाहट कम होती है, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाला जाता है, और रक्त प्रवाह सुचारू रहता है।
- सर्दी में रक्त संचार खराब होने के कुछ सामान्य लक्षण क्या हैं?
सामान्य लक्षणों में ठंडे हाथ-पैर, पैरों और टखनों में सूजन, सुन्नता, मांसपेशियों में ऐंठन और त्वचा का पीला या नीला पड़ना शामिल है। यदि ये लक्षण लगातार बने रहते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

