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बुखार से तुरंत राहत पाने के असरदार घरेलू नुस्खे
मौसम बदलते ही श्वास-संबंधित समस्याएँ बढ़ने लगती हैं। एक सामान्य मनुष्य के शरीर का तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस या 98 डिग्री फ़ारेनहाइट होता है। जब शरीर का तापमान सामान्य से ज़्यादा होता है तो उसे ही बुखार कहते हैं।
बुखार होने पर शरीर में गर्मी, थकान, सिरदर्द, और कमज़ोरी महसूस करना आम बात है। कई बार हम इसे मौसम बदलने का असर समझकर घरेलू नुस्खे अपना लेते हैं पर बुखार अपने आप में कोई बीमारी न होकर किसी संक्रमण या किसी और स्वस्थ्य समस्या का कारन bhi हो सकता है l
सही देखभाल, पर्याप्त आराम और आयुर्वेद की मदद से बेचैनी कम हो सकती है। हालाँकि बुखार का कारण जानना और समय पर उपचार करना भी उतना ही ज़रूरी है।
बुखार के राहत पाने के लिए असरदार घरेलु नुस्खे
भारतीय घरों में एक लम्बे समय से घरेलु उपचार प्रचलित है। यदि आप भी घरेलू उपचार का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो ये उपाय लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं और कमज़ोरी और बेचैनी को कम करने के मदद कर सकते हैं :
तुलसी और लौंग का काढ़ा (Basil And Clove Decoction)
तुलसी और लौंग दोनों ही सामान्य घरों में आसानी से पाए जाते हैं। इनमें antibacterial गुण मौजूद होते हैं। इसलिए ये बुखार कम करने में सहायक भी होते हैं। थोड़े पानी में 5-6 तुलसी की पत्तियों को 3-4 लौंग के साथ उबालकर, ठंडा करके पिएँ।
अदरक और शहद (Ginger And Honey)
अदरक में antiviral गुण होते हैं और शहद इम्यूनिटी को मज़बूती देता है। एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद न दें, यह उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है। अदरक को कूटकर उसमें शहद मिलाएँ या अदरक की चाय बनाकर उसमें शहद मिलाएँ। यह बुखार के साथ गले में खराश और खाँसी से भी राहत दे सकता है।
सरसों का तेल और लहसुन (Mustard Oil And Garlic)
लहसुन में bacteriostatic गुण और सरसों के तेल में गर्म तासीर होती है। सरसों के तेल में कुछ लहसुन की कलियाँ मिलकर पैरों की मालिश करने से बुखार में आराम मिल सकता है।
गीले कपड़े से सर पोछें (Use Wet Towel)
यदि बुखार बहुत तेज़ है तो एक गीले तौलिये को ठंडे पानी में भिगाकर, निचोड़कर सर पर रखे, इससे बुखार तेज़ी से कम होता हे।
नींबू और शहद (Lemon and Honey)
नींबू में विटामिन C होता है, जो इम्यूनिटी को बूस्ट करता है और शहद शरीर को डिटॉक्स करता है। एक चम्मच शहद में नींबू का रस मिलकर खाने से बुखार के दौरान आराम मिल सकता है।
खीरा और पुदीना (Cucumber and Mint)
खीरा और पुदीना दोनों में cooling तत्व होते हैं। इनका रस निकालकर पीने से शरीर का तापमान कम होता है और बुखार में राहत मिलती है।
लहसुन और नारियल तेल (Garlic And Coconut Oil)
नारियल तेल के साथ लहसुन का मिश्रण संक्रमण से लड़ने में उत्तम होता है। बुखार के दौरान लहसुन की कुछ कलियों को पीसकर नारियल तेल में मिलाकर रात में पैरों पर लगाने से रहत मिलती है।
प्याज़ (Onion)
प्याज में प्राकृतिक कूलिंग प्रकृति होती है, जो शरीर को ठंडक पहुचाने में मदद करती है। रात में प्याज़ को छोटे टुकड़ों को पैरों के तलवों पर रगड़ने से राहत मिल सकती है।
पानी का सेवन
बुखार के दौरान ज़्यादा पानी, सूप और तरल पदार्थो का सेवन करें। क्योंकि बुखार के दौरान शरीर का तापमान बढ़ने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। हर्बल टी, नारियल पानी, और इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त पेय पदार्थ भी उपयोगी होते हैं।
हल्का और पौष्टिक भोजन
बुखार में खिचड़ी, दलिया और सूप जैसे आसानी से खाए जाने वाले भोजन लें। कम भूख होने पर कम भोजन खाएँ। पेट को भारी न बनाएँ। हल्के भोजन का सेवन करें जो पचाने में आसान होते हैं।
बुखार में घरेलू नुस्खे अपनाते समय सावधानियाँ
घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करते समय इन बातों को ध्यान में रखना ज़रूरी है:
- बिना सलाह के नुस्खे न अपनाएँ: हर घरेलू नुस्खा हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होता। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए। इसलिए कोई भी उपाय इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।
- बहुत गर्म और ठंडी चीज़ों से बचें: ज़्यादा कम व अधिक तापमान से शरीर पर असर पड़ सकता है, इसलिए बहुत ठंडे पानी से नहाने व शरीर पोंछने से बचे। इसी तरह ज़्यादा गर्म पानी के सेवन से भी बचें।
- हर्बल काढ़े का सेवन सीमित करें: अदरक तुलसी और लूंग से बने काढ़े का ज़्यादा सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए इसे बुखार का एकमात्र इलाज न समझें।
- खुद दवा न लें: वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक्स काम नहीं करतीं। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवाई न लें, इससे कुछ लोगों को side effects भी हो सकते हैं।
- लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें: बुखार के साथ अन्य लक्षण जैसे सांस लेने में दिक्कत, उल्टी, पेट दर्द या अलेर्जी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉक्टर की सलाह कब लें?
ज्वर के लंबे समय तक शरीर में रहने से कई परेशानियाँ हो सकती हैं। जीवा आयुर्वेद से अभी संपर्क करें यदि:
- आपका तापमान 103°F से अधिक हो
- बुखार में 3 दिन बाद भी सुधार न हो
- बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ हो
- प्लेटलेट्स कम होने का संदेह हो या ज़्यादा कमज़ोरी महसूस हो
- पांच वर्ष से कम बच्चे या बुजुर्ग प्रभावित हों
- गर्भवती महिला को बुखार हो
- बुखार के साथ बार-बार उल्टी हो
Reference
Physiology, Fever - StatPearls - NCBI Bookshelf
Learn More – How is fever treated in children? - InformedHealth.org - NCBI Bookshelf
Plants used in Ayurveda for Jwara or fever: A review of their antiviral studies - PMC
To Know more , talk to a Jiva doctor. Dial 0129-4264323 or click on Our Doctors.
FAQs
जब भी शरीर में फ्लू, वायरल या कोई और इन्फेक्शन हमला करता है, तो इम्यून सिस्टम एक्टिव हो जाता है। जिस कारण शरीर अपना तापमान बढ़ाता है ताकि वह उन कीटाणुओं को खत्म कर सके जो गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सकते।
बुखार होने पर सबसे पहले तापमान मापें, पर्याप्त आराम करें और पानी व अन्य तरल पदार्थ लेते रहे अगर बुखार तेज हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह ले।
अदरक और तुलसी से बना काढ़ा बुखार के दौरान गले में खराश और बेचैनी में मदद करता है।
हाँ, अगर आप बुखार में सामान्य महसूस करते हैं तो गुनगुने पानी से नहा सकते हैं। बुखार के दौरान ठंडे पानी से नहाने से बचें।
बुखार के दौरान खिचड़ी, दलिया, सूप और अन्य हल्का पौष्टिक भोजन करना चाहिए, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो।
कोई भी घरेलू नुस्खा बच्चों या बुजुर्गों को देने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। अगर 3 महीने से कम उम्र के बच्चे का तापमान 100 डिग्री फ़ारेनहाइट से ज्यादा है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
आयुर्वेदिक उपचार की सुरक्षा व्यक्ति के स्वास्थ्य और इस्तेमाल किये जाने वाले पदार्थो पर निर्भर करती है। किसी भी आयुर्वेदिक दवा या काढ़े का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के न करें।
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