Diseases Search
Close Button
 
 

पित्त को संतुलित करने वाले 10 मुख्य आहार

आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर तीन मुख्य दोषों से बना है: वात,पित्त और कफ। इसमें से पित्त का मतलब है हमारे शरीर की अग्नि, जो हमारे खाना पचाने से लेके शरीर को ऊर्जा देने तक का काम करती है। लेकिन जब हम बहुत तीखा, खट्टा, मसालेदार या बहार का खाना खाते है तो यह असुंतलित हो जाती है जिसके कारण गैस, एसिडिटी, अपच, मुहासे, बालो का झड़ना व अन्य पेट की बीमारियां हो जाती है।  

आयुर्वेद में पित्त को शांत करने के लिए महंगी दवाई नहीं बल्कि खाने की चीज़ बताई जाती है जो की ना केवल पित्त को संतुलित करती है बल्कि आपकी पेट व शरीर की गर्मी को भी शांत करने में मदद करती है। 

पित्त को संतुलित करने के लिए 10 मुख्य आहार

हमारा खान-पान हमे स्वस्थ बनाये रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आइए जानते हैं ऐसे 10 आहार जो आपके पित्त को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं।

नारियल

आयुर्वेद के अनुसार नारियल का रस पित्त की गर्मी को शांत करने में बहुत मदद करता है । नारियल का स्वभाव ठंडा और इसका रस मीठा होता है। गर्मियों में जब आपको पसीना बहुत आता है, आपका शरीर इलेक्ट्रोलाइट्स को खो देता है, उस समय नारियल पानी के सेवन से आप इलेक्ट्रोलाइट्स को वापस पाने में और शरीर को पानी की कमी से बचाने में भी बहुत मदद करता है। यह पेट की जलन, एसिडिटी, गैस और गर्मी से होने वाली बेचैनी में बहुत आराम देता है। 

तरबूज

आयुर्वेद के अनुसार, तरबूज की तासीर बहुत ठंडी होती है और यह शरीर की गर्मी व पित्त दोष को शांत करने में बहुत असरदार फल मना गया है। तरबूज खाने से शरीर में ठंडक का अहसास होता है। आप इसे अगर इसके ठोस प्रकृति में ही खाए (इसको जूस की तरह ना पिए यह कोशिश करे) तो यह ज़्यादा लाभ देगा। यह एंटी ऑक्सीडेंट्स का एक अच्छा स्रोत है, इसमें 90 प्रतिशत पानी होता है, इसके साथ ही इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स भी होते हैं। तरबूज एक प्राकृतिक फल है जो लीवर और किडनी को सेहतमंद रखता है।

खीरा

आयुर्वेद में खीरे को सुशीतला भी कहा गया है जिसका मतलब है प्राकृतिक रूप से ठंडा, यह उन मरीज़ो के लिए फायदेमंद है जिनको मूत्र संबंधित परेशानियाँ हैं या फिर ज्य़ादा प्यास लगती है। अपने आहार में खीरे को शामिल करने से आप गर्मियों में निकलने वाली शरीर की गर्मी में ठंडक का एहसास महसूस कर सकते है । खीरे में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर के अंगों की गर्मी और पेट की जलन को कम करने में मदद करता है। यह पाचन से जुडी समस्याओ को भी शांत करता है। खीरे के टुकड़े आंखों पर रखने से गर्मी और तनाव से राहत मिलती है।

नींबू

गर्मीयों में नींबू पानी पिने से शरीर में पानी की पूर्ति बनी रहती है। यह प्राकृतिक रूप से एक औषधि है जो आपके शरीर को ठंडक पहुँचाती है। आयुर्वेद मानता है कि इसमें पाचन को बेहतर करने वाले गुण होते है, साथ ही यह आम (खाना ठीक से ना पचने की वजह से बनने वाले विषैले तत्त्व) को कम करता है और शरीर को ताज़गी प्रदान करता है। यह कोलेस्ट्रॉल को कम करके हार्ट अटैक के जोखिम को कम करता है। शरीर से विषैले तत्वों को हटाने की आयुर्वेदिक शोधक प्रक्रिया में नींबू का इस्तेमाल किया जाता है।

अंकुरित मूँग दाल

आयुर्वेद के अनुसार मूंग की तासीर ठंडी होती है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित रखती है और एसिडिटी या जलन से राहत देती है। मूंग दाल को अंकुरित करके या फिर पकाकर खाया जा सकता है। इसके अंदर शरीर को ठंडक देने वाले तत्त्व होते है और यह पित्त दोष को संतुलित करने में बहुत मदद करता है। पीली मूंग दाल पचने में आसान है और इसे रोज़ खाया जा सकता है। अंकुरित मूंग दाल गर्मियों में ठंडक देने वाला ऐसा नाश्ता है जिसमें भरपूर पोषण है।

छाछ

छाछ की तासीर ठंडी होती है, यह पाचन को बेहतर बनाने में, आम को पचाने में , मल त्याग को आसान बनाने में और पित्त दोष को शांत करने में मदद करती है। आप इसको शरीर के लिए बेहतर बनाने के लिए इसमें भुना हुआ जीरा, एक चुटकी काला नमक या साधारण नमक और थोड़ा सा धनिया पाउडर मिला सकते है। इसमें थोड़ा सा हरा धनिया या पुदीने का पेस्ट भी मिला सकते हैं। अगर आप छाछ में ये मसाले नहीं मिलाना चाहते तो इसे सादा भी पी सकते हैं।

अलसी के बीज

अलसी के बीज की तासीर ठंडी होती है और गर्मियों में दिनों में किसी भी वक्त इसका सेवन किया जा सकता है। अलसी के बीज को पानी में कुछ देर के लिए भिगो लें फिर निगलने से पहले अच्छी तरह चबाएँ। अलसी के बीज को चबाने से पहले आप ग्राइंडर में इसे पीस भी सकते हैं। अलसी के बीज कब्ज़, मोटापे और हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कतों में फ़ायदा पहुँचाते हैं। 

घी

आयुर्वेद के मुताबिक घी की तासीर शरीर और दिमाग के लिए ठंडक देने वाली होती है। सही मात्रा में घी का सेवन पूरे शरीर को पोषण देता है। घी पित्त दोष को शांत करता है, इसलिए घी का सेवन भोजन से पहले या शुरुआती समय में ही कर लेना चाहिए। यह ध्यान रखें कि घी के सेवन के बाद कुछ भी ठंडा न खाएं न पिएं । भोजन के दौरान हल्का गर्म पानी पीने की सलाह दी जाती है।

पुदीना

आयुर्वेद में पुदीने का इस्तेमाल साँस की दिक्कतों, मितली, सिरदर्द और पाचन तंत्र से जुड़ी परेशानियों को दूर करने में किया जाता है। इसका ज्य़ादातर इस्तेमाल गर्मियों के पेय में किया जाता है क्योंकि इसके अंदर ठंडक देने का प्राकृतिक गुण होता है जो पित्त दोष को संतुलित करता है। फलों के जूस में पुदीना मिलाएं या फिर इसकी चटनी बनाकर खाएँ। शरीर से विषैले तत्वों को निकालने के लिए आयुर्वेद की शोधक प्रणाली में पुदीने की चाय पीने की सलाह दी जाती है।

नीम की पत्तियाँ

पित्त दोष को संतुलित करने में ज्य़ादातर कसैली चीजों को फायदेमंद माना जाता है। नीम की पत्तियों में ठंडक देने वाले गुण होते हैं जो रक्त धातु और खून को साफ़ करते हैं। नीम की पत्तियां लीवर, पैनिक्रियास की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाती हैं और रक्त शर्करा के स्तर को सामान्य करती हैं।

पित्त दोष को कंट्रोल करने के लिए कुछ आसान उपाय

आप निचे दिए गए कुछ आसान उपाय अपना सकते है जो आपके पित्त दोष को शांत करने में मदद करेंगे। 

  • बहुत तीखा, तला-भुना और खट्टा ना खाए
  • ठंडा पानी ना पिए 
  • रोज़ एक ही समय पर भोजन करे 
  • धूप में ज़्यादा देर न रहें
  • चाय-कॉफी सीमित रखें

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर आपको ये समस्याएं लगातार बनी रहें तो आयुर्वेदिक डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें:

  • रोज़ एसिडिटी या सीने में जलन 
  • त्वचा पर बार-बार जलन या दाने
  • पेट में बहुत ज़्यादा दर्द 
  • बहुत ज्यादा गुस्सा या बेचैनी होना 
  • नींद की कमी 
  • कब्ज़ या मॉल त्याग में दिक्कत होना 

निष्कर्ष

आयुर्वेद में स्वस्थ शरीर ही जीवन की सबसे बड़ी कुंजी है।  हमे हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए महंगी दवाओं की ज़रूरत नहीं बस सही आहार और दिनचर्या की ज़रूरत होती है। अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव लाने से आप अपनी सेहत को ठीक रख सकते हैं और तंदुरुस्त रह सकते हैं। 

हमारा शरीर हमे छोटे-छोटे संकेत देता है और यह बताने की कोशिश करता है की शरीर के अंदर कुछ सही नहीं है। उन संकेतों को समय पर समझ लिया जाए तो किसी बड़ी बीमारी शरीर में होने से पहले ही आप उसे खानपान व अपनी दिनचर्या के ज़रिये ठीक कर सकते है।   

References

Dosha brain-types: A neural model of individual differences - PMC 

A glimpse of Ayurveda – The forgotten history and principles of Indian traditional medicine - PMC 

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

अगर आपको ज़्यादा गर्मी महसूस हो, पेट में जलन या एसिडिटी हो, बहुत ज़्यादा गुस्सा आए, पसीना ज़्यादा आए और मुंह में छाले या दाने होने लगे तो आपका पित्त बढ़ा हुआ हो सकता है।

ठंडे और हल्के फल जैसे तरबूज, खीरा, सेब, मूंग दाल, छाछ, घी, पुदीना और हल्के मसाले खाने से पित्त शांत हो सकता है।

हां, ठंडा पानी ठीक है, लेकिन बर्फ जैसा ठंडा आपको नुकसान पहुंचा सकता है। प्राकृतिक ठंडा पानी, नारियल पानी और छाछ इसके बेहतर विकल्प है।

रोज़ एसिडिटी या पेट में जलन, बार-बार दाने या खुजली, लगातार गुस्सा, बेचैनी या नींद में परेशानी और पेट दर्द जो सामान्य खान-पान से ठीक न हो तो तुरंत डॉक्टर से मिले। 

सुबह खाली पेट भीगी हुई मूंग खाने से पाचन तंत्र मजबूत होता है, वजन नियंत्रित रहता और शरीर को भरपूर मात्रा में प्रोटीन व फाइबर मिलता है। यह ऊर्जा और पोषण का एक बेहतरीन स्रोत है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp

Treatment for other disease

Book Free Consultation Call Us