विरेचन क्या है और उसके लाभ

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में खुद को सेहतमंद रखना किसी बड़े काम से कम नहीं है। हम अपनी रूटीन में इतने उलझ जाते हैं कि अपने ही शरीर की ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि बेवजह की कमज़ोरी, पाचन से जुड़ी दिक्कतें और कई छोटी-बड़ी बीमारियाँ हमें घेरने लगती हैं। ऐसे में आयुर्वेद ही एक ऐसा रास्ता है जो हमें बिना किसी नुकसान के अंदर से मज़बूती देता है। अगर हम अपनी रोज़ की आदतों और कुछ छोटी-छोटी चीज़ों पर ध्यान दें, तो बिना ज़्यादा मेहनत के एक अच्छी और सेहतमंद लाइफस्टाइल अपना सकते हैं।

विरेचन क्या है? 

विरेचन आयुर्वेद में शरीर की अंदर से सफाई करने का एक बहुत ही असरदार तरीका है। इसका मुख्य काम शरीर में बढ़े हुए पित्त और जमा हुई गंदगी को बाहर निकालना है। इसमें कुछ खास जड़ी-बूटियों की मदद ली जाती है, जिससे शरीर की गंदगी मल के रास्ते बाहर निकल जाती है। जब शरीर में पित्त बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है और इसकी वजह से आपकी स्किन, खून, लिवर या पाचन में दिक्कतें आने लगती हैं, तो विरेचन के ज़रिए ही इसे ठीक किया जाता है। कई लोग इसे सिर्फ कब्ज़ दूर करने का तरीका मान लेते हैं, लेकिन असल में यह शरीर को अंदर से पूरी तरह साफ करने और बढ़े हुए पित्त को बैलेंस करने का एक बेहतरीन आयुर्वेदिक इलाज है

पंचकर्म में विरेचन का स्थान

आयुर्वेद में शरीर को अंदर से साफ करने के लिए 'पंचकर्म' का तरीका अपनाया जाता है। इसमें कुल पाँच प्रक्रियाएं होती हैं, और विरेचन इन्हीं में से एक है। पंचकर्म का मुख्य काम शरीर के अंदर जमा सारी गंदगी (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालकर उसे पूरी तरह से स्वस्थ और बैलेंस करना है।

  • वमन: उल्टी के ज़रिए शरीर की सफाई करना।
  • विरेचन: मल के रास्ते से शरीर की गंदगी बाहर निकालना।
  • बस्ती: जड़ी-बूटियों वाला एनीमा देना।
  • नस्य: नाक के ज़रिए दवाई डालना।
  • रक्तमोक्षण: शरीर से खराब खून को बाहर निकालना।

सामान्य जुलाब और विरेचन में क्या अंतर है?

लोग विरेचन को पेट साफ करने वाली कोई आम दवा समझ लेते हैं, लेकिन इन दोनों में बहुत बड़ा फर्क होता है।

सामान्य जुलाब: सामान्य जुलाब बस एक ऐसी दवा या चूर्ण है जो आपके पेट को साफ करके कब्ज़ से तुरंत राहत देती है।

  • यह सिर्फ कब्ज़ दूर करने के काम आता है।
  • इसे लेने से तुरंत पेट साफ हो जाता है।
  • इसे खाने के लिए पहले से कोई खास तैयारी नहीं करनी पड़ती।
  • इसके लिए ज़्यादातर डॉक्टरों की देखरेख की ज़रूरत नहीं होती।
  • इसका असर सिर्फ आपके पेट और आंतों तक ही रहता है।
  • अगर आप इसे रोज़ लेते हैं, तो शरीर को इसकी आदत पड़ सकती है।
  • यह शरीर के वात, पित्त या कफ को बैलेंस करने का कोई इलाज नहीं है।

विरेचन: विरेचन आयुर्वेद का एक खास इलाज है, जो शरीर की गहराई से सफाई करता है और बढ़े हुए पित्त को बैलेंस करता है।

  • यह शरीर में बढ़े हुए पित्त और अंदर जमा हुई गंदगी को बाहर निकालता है।
  • यह आयुर्वेद के पंचकर्म का एक बहुत ज़रूरी हिस्सा है।
  • इसे एकदम से नहीं लिया जाता, बल्कि इससे पहले मालिश और सिकाई (स्नेहन और स्वेदन) जैसी कुछ तैयारियां की जाती हैं।
  • इसे हमेशा एक अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में ही करना सुरक्षित होता है।
  • इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है और यह शरीर को अंदर से बैलेंस करता है।
  • यह शरीर को लंबे समय तक अंदर से साफ और सेहतमंद बनाए रखता है।

अगर इसे बिना डॉक्टर से पूछे या गलत तरीके से किया जाए, तो शरीर में पानी की कमी या कमज़ोरी आ सकती है।

विरेचन के लाभ और सीमाएँ

विरेचन करवाने से शरीर को कई बेहतरीन फायदे मिलते हैं, लेकिन कुछ खास स्थितियों में इसे करने से बचना भी ज़रूरी होता है। आइए इन दोनों के बारे में जानते हैं।

विरेचन के फायदे

  • पाचन में सुधार: इससे आपका पाचन तंत्र बेहतर होता है और खाना अच्छी तरह पचता है।
  • स्किन के लिए अच्छा: शरीर से पित्त कम होने की वजह से स्किन से जुड़ी दिक्कतें दूर होती हैं और त्वचा साफ रहती है।
  • एसिडिटी से आराम: सीने में जलन और एसिडिटी की परेशानी में यह काफी राहत देता है।
  • शरीर की अंदर से सफाई: यह शरीर के अंदर जमा सारी गंदगी को बाहर निकालकर उसे एकदम साफ कर देता है।
  • पित्त को बैलेंस करना: पित्त बढ़ने से होने वाली बीमारियों को रोकने और उसे कंट्रोल करने में यह बहुत मददगार है।
  • हल्कापन और ताज़गी: शरीर की सफाई हो जाने के बाद आप खुद को बहुत हल्का और एकदम फ्रेश महसूस करते हैं।

किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है? 

यह इलाज हर किसी के लिए नहीं है। यह आपकी उम्र, शरीर की प्रकृति और सेहत को देखकर ही डॉक्टर तय करते हैं।

  • प्रेग्नेंट महिलाओं को यह बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
  • अगर शरीर में बहुत ज़्यादा कमज़ोरी है या कोई बड़ी बीमारी है, तो इसे करवाने से पहले पूरी सावधानी बरतना ज़रूरी है।
  • इस इलाज के दौरान आपको हल्की थकान या कमज़ोरी लग सकती है।

इसे बिना किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख के करने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है या तबीयत बिगड़ सकती है।

विरेचन प्रक्रिया के सुरक्षा पहलू

अगर विरेचन किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में किया जाए, तो यह पूरी तरह से सुरक्षित होता है। लेकिन बिना डॉक्टर से पूछे, गलत दवा या उसकी गलत मात्रा लेने से आपको कुछ नुकसान हो सकते हैं, जैसे:

इसलिए विरेचन को सिर्फ विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए

विरेचन कैसे किया जाता है?

विरेचन कोई एक दिन का काम नहीं है, बल्कि इसे सही तरीके से करने के लिए कुछ दिनों की तैयारी करनी पड़ती है। आइए इसके सभी स्टेप्स को आसान भाषा में समझते हैं।

1. विरेचन से पहले की तैयारी: मुख्य इलाज से पहले शरीर को अंदर से तैयार करने में 3 से 7 दिन का समय लगता है। इसमें दो चीज़ें की जाती हैं:

स्नेहन (घी या तेल का इस्तेमाल): इसमें मरीज़ को पीने के लिए कुछ खास आयुर्वेदिक घी या तेल दिया जाता है। कई बार तेल से मालिश भी की जाती है। इसका काम शरीर के अंदर चिपकी हुई गंदगी को ढीला करके उसे पाचन तंत्र की तरफ लाना होता है।

स्वेदन (भाप से सिकाई): इसके बाद भाप या गर्म सिकाई के ज़रिए पसीना निकाला जाता है। इससे शरीर की नसें खुल जाती हैं और वह ढीली पड़ी गंदगी आसानी से बाहर निकलने के लिए तैयार हो जाती है।

2. विरेचन वाला मुख्य दिन

जिस दिन विरेचन होना होता है, उस दिन सुबह खाली पेट डॉक्टर एक खास दवा देते हैं। यह दवा लेने के कुछ ही घंटों बाद शरीर की सफाई का काम शुरू हो जाता है। यह पूरी प्रक्रिया डॉक्टर की निगरानी में ही होती है। विरेचन के लिए ज़्यादातर त्रिवृत लेह, एरंड का तेल (कैस्टर ऑयल), हरड़ (हरितकी) और अमलतास (अरग्वध) जैसी चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है।

किन परेशानियों में यह फायदेमंद है?

यह स्किन से जुड़ी दिक्कतों, पित्त बढ़ने, एसिडिटी, लिवर की परेशानी, पित्त की वजह से होने वाले सिरदर्द और खून से जुड़ी कुछ बीमारियों में बहुत आराम देता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे अगर निचे दिए हुए लक्षण आपको दिखाए दे:

  • बहुत कमज़ोरी या चक्कर आए
  • निरंतर दस्त रहे 
  • बहुत प्यास या सूखापन लगे 
  • तेज़ बुखार या असामान्य दर्द हो 

निष्कर्ष

विरेचन शरीर की गहराई से सफाई करने और पित्त को बैलेंस करने का बहुत ही सुरक्षित तरीका है। यह अंदर की सारी गंदगी बाहर निकालकर आपके पाचन को एकदम दुरुस्त करता है।

बस एक बात का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि इसे हमेशा किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में ही करवाएं। बिना डॉक्टर के या गलत तरीके से इसे करने पर नुकसान हो सकता है। सही तरीके से किया गया विरेचन आपको पूरी तरह से सेहतमंद रखता है।

References

Analysis of Virechana karma with Danti avaleha: A retrospective study - PMC 

Clinical study to evaluate the effect of Virechanakarma on serum electrolytes - PMC 

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, यह पुरानी कब्ज़ को जड़ से खत्म करता है और आपका पाचन बिल्कुल सही कर देता है।

नहीं, इसे हमेशा किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में ही करना बहुत ज़रूरी है।

इसकी तैयारी से लेकर मुख्य सफाई तक में लगभग एक हफ्ते से ज़्यादा का समय लग जाता है।

जिस दिन पेट साफ होता है, उस दिन हल्की कमज़ोरी लग सकती है, जो आराम करने से ठीक हो जाती है।

प्रेग्नेंट महिलाओं, बहुत छोटे बच्चों और बहुत कमज़ोर या बीमार लोगों को यह बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

यह शरीर से बढ़े हुए पित्त को निकालकर आपको अंदर से एकदम ताज़गी और मज़बूती देता है।

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