त्वचा जब जलने लगे, लाल हो जाए या बार-बार खुजली की वजह से आप चैन से बैठ भी न पाएं तो जीवन धीरे-धीरे असहज होने लगता है। कई लोग बताते हैं कि रात में खुजली इतनी बढ़ जाती है कि नींद तक टूट जाती है। कुछ कहते हैं कि थोड़ा-सा पसीना भी त्वचा में जलन पैदा कर देता है। किसी के हाथों पर त्वचा छिलने लगती है तो किसी के पैरों पर कड़क परत बनने लगती है। यह अनुभव सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से भी थका देने वाला होता है। इसी स्थिति को बहुत लोग एक्जिमा कहते हैं।
आयुर्वेद इस समस्या को केवल त्वचा का रोग नहीं मानता। यह शरीर में बढ़े हुए पित्त, कमजोर पाचन, रक्तदूष्य और तनाव की अभिव्यक्ति है। जब शरीर की गर्मी अनियंत्रित हो जाती है, रक्त दूषित हो जाता है और त्वचा की प्राकृतिक नमी खत्म होने लगती है तब एक्जिमा जैसी स्थिति बनने लगती है। यह लेख आपको बताएगा कि यह समस्या क्यों होती है, शरीर इसके दौरान कौन-कौन से संकेत देता है और आयुर्वेद कैसे इसे जड़ से संतुलित कर सकता है।
एक्जिमा क्या है?
एक्जिमा त्वचा की वह स्थिति है जिसमें त्वचा लाल, सूखी, खुरदरी और सूजनयुक्त हो जाती है। कई बार इसमें पानी जैसा स्राव भी निकलने लगता है। कुछ लोगों में त्वचा फटने तक लगती है और उन दरारों में जलन पैदा होती है। यह समस्या केवल स्किन के ऊपर दिखाई देती है पर जड़ शरीर के अंदर, दोषों के असंतुलन में होती है।
कई लोग शुरुआती खुजली को मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन धीरे-धीरे खुजली बढ़कर जलन, लालिमा और छिलने जैसी स्थिति में बदलने लगती है। यह बताता है कि त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा कमजोर पड़ चुकी है और अंदर की गर्मी सतह पर आ रही है।
एक्जिमा क्यों होता है?
आज के समय में एक्जिमा केवल मौसमी समस्या नहीं है। प्रदूषण, तनाव, असंतुलित भोजन और chemical आधारित उत्पादों की वजह से यह तेजी से बढ़ रहा है। कई बार तो बिना किसी साफ कारण के भी यह अचानक flare कर जाता है।
1. तेज़ पित्त और शरीर की गर्मी का बढ़ना
अगर आपका शरीर गर्म प्रकृति का है, जल्दी लाल पड़ जाता है या पित्त प्रकृति अधिक है तो एक्जिमा होने की संभावना बढ़ जाती है। पित्त त्वचा में सूजन, जलन और खुरदरापन पैदा कर सकता है।
2. पाचन अग्नि का कमजोर होना
कमजोर पाचन अपचित भोजन को आम में बदल देता है। यही आम रक्त में मिलकर त्वचा की सतह पर विकार पैदा करता है जिससे खुजली और लालिमा बढ़ती है।
3. तनाव
तनाव शरीर में गर्मी बढ़ाता है और त्वचा अत्यधिक संवेदनशील होने लगती है। बहुत से लोगों का एक्जिमा तनाव के दिनों में ही flare करता है।
4. रासायनिक उत्पादों का उपयोग
जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है उन्हें तेज़ सुगंध वाले प्रसाधन, केमिकलयुक्त हेयर डाई, साबुन और कपड़े धोने वाले रासायनिक पदार्थ से भी जलन हो सकती है। इससे एक्जिमा बढ़ने लगता है।
5. प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना
जब immunity कम होती है तो त्वचा बाहरी वातावरण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती है।
6. मौसम का प्रभाव
ठंड और गर्म दोनों मौसम में यह रोग बढ़ सकता है। सूखी हवा त्वचा की नमी कम करती है और गर्मी जलन को बढ़ाती है।
एक्जिमा किस दोष की वजह से होता है?
आयुर्वेद के अनुसार एक्जिमा को विचर्चिका कहा गया है। यह मुख्यतः पित्त और कफ के असंतुलन से उत्पन्न होता है। पर कई मामलों में वात भी बढ़ जाता है जिससे त्वचा सूखने लगती है और खुजली तेज़ हो जाती है।
1. पित्त का बढ़ना
पित्त की वृद्धि से त्वचा में गर्मी, जलन, लालिमा और सूजन आती है। यह एक्जिमा का प्रमुख कारण है।
2. कफ का जमाव
कफ बढ़े तो त्वचा भारी और चिपचिपी हो जाती है। इसमें पानी जैसा रिसाव भी हो सकता है।
3. वात का असंतुलन
वात की वृद्धि त्वचा को अत्यधिक सूखा बनाती है। इससे त्वचा फटने लगती है और खुजली असहनीय हो जाती है।
4. रक्तदूष्य
रक्त दूषित हो जाए तो त्वचा पर विकार उभरने लगते हैं। यह एक्जिमा का गहरा कारण माना जाता है।
आयुर्वेद का मानना है कि जब अग्नि सही से काम नहीं कर रही होती और दिमाग पर तनाव का बोझ बढ़ रहा होता है तो त्वचा अंदर से गर्म, कमजोर और संवेदनशील हो जाती है। यही संवेदनशीलता धीरे-धीरे एक्जिमा बन जाती है।
एक्जिमा के लक्षण?
एक्जिमा केवल खुजली नहीं है। यह शरीर का एक जटिल संदेश है जो त्वचा के माध्यम से बाहर आता है। कई लोग शुरुआत में इसे सामान्य सूखापन समझकर छोड़ देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे त्वचा लाल होने लगती है, जलन बढ़ने लगती है और खुजली बार-बार उभरती है। कभी-कभी तो पसीना आते ही तीखी जलन महसूस होती है, मानो त्वचा सतह पर ही चिड़चिड़ी हो गयी हो। यह सब संकेत बताते हैं कि समस्या सिर्फ ऊपर से नहीं बल्कि भीतर से पैदा हो रही है।
कुछ मामलों में त्वचा पर छोटे दाने उभर आते हैं, जो बाद में फटकर पानी जैसा स्राव छोड़ते हैं। यह स्राव त्वचा को और अधिक संवेदनशील बना देता है। कुछ लोग बताते हैं कि रात में खुजली इतनी तेज़ हो जाती है कि नींद खुल जाती है। कई बार त्वचा पर मोटी परत जमने लगती है या खुरदरापन इतना बढ़ जाता है कि कपड़ों की रगड़ भी असहनीय लगती है।
एक्जिमा के प्रमुख लक्षण
- तेज़ खुजली
- त्वचा का लाल और गर्म होना
- खुरदरापन
- त्वचा का छिलना
- पानी जैसा स्राव
- जलन
- मोटी, सूखी परत बनना
- छोटे-छोटे दाने
ये सभी लक्षण बताते हैं कि त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा, नमी और संतुलन टूट चुका है।
एक्जिमा के प्रकार
एक्जिमा एक नाम है पर इसके कई रूप हैं। हर रूप की प्रकृति अलग, लक्षण अलग और कारण भी अलग होते हैं। आयुर्वेद इन विविधताओं को गहराई से समझकर उपयुक्त उपचार का मार्ग तय करता है।
1. शुष्क एक्जिमा
इसमें त्वचा अत्यधिक सूखी और फटी हुई होती है। खुजली अधिक होती है और हर मौसम में स्थिति बिगड़ सकती है। यह वात वृद्धि का संकेत है।
2. नमीयुक्त एक्जिमा
इस प्रकार में प्रभावित स्थान पर पानी जैसा स्राव या चिपचिपापन दिखाई देता है। त्वचा भारी महसूस होती है। यह कफ की वृद्धि बताता है।
3. लालिमा वाला एक्जिमा
इसमें त्वचा लाल, गर्म और संवेदनशील हो जाती है। जलन अधिक होती है। यह पित्त की वृद्धि का संकेत है।
4. तनाव-प्रेरित एक्जिमा
कुछ लोगों में तनाव बढ़ते ही एक्जिमा flare कर जाता है। मानसिक उत्तेजना पित्त और वात दोनों को बढ़ाती है जिससे त्वचा प्रतिक्रिया देने लगती है।
5. बच्चों में एक्जिमा
बच्चों में यह स्थिति माता-पिता के लिये भावनात्मक रूप से कठिन हो जाती है क्योंकि बच्चों की त्वचा नाजुक होती है। यह अक्सर पाचन की कमजोरी और कफ वृद्धि की वजह से होता है।
एक्जिमा में लाभ देने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ
जड़ी-बूटियाँ केवल राहत नहीं देतीं, बल्कि त्वचा की जड़ से सफाई करती हैं, रक्त को शुद्ध करती हैं और त्वचा को प्राकृतिक नमी लौटाती हैं। आयुर्वेद में कई ऐसी औषधियाँ हैं जो एक्जिमा के लिये अत्यंत उपयोगी मानी जाती हैं।
1. नीम
नीम प्राकृतिक रक्तशोधक है। त्वचा की गर्मी कम करता है और लालिमा घटाता है। नीम का रस, तेल या पत्तियाँ सभी रूपों में लाभकारी हैं।
2. मंजिष्ठा
मंजिष्ठा रक्त को ठंडक देती है और सूजन कम करती है। यह उन लोगों के लिये श्रेष्ठ है जिनमें एक्जिमा बार-बार flare करता है।
3. हल्दी
हल्दी शरीर में जमा विषाक्तता को कम करती है। यह पित्तजन्य एक्जिमा में खास लाभ देती है क्योंकि इसके गुण त्वचा को शीतल और साफ रखते हैं।
4. गिलोय
गिलोय शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। यह रक्तदूष्य को भी कम करती है जिससे खुजली और सूजन में आराम मिलता है।
5. खदिर
खदिर का उल्लेख आयुर्वेद में त्वचा रोगों के लिये विशेष रूप से किया गया है। यह त्वचा को भीतर से साफ करता है।
एक्जिमा में आहार — क्या खाएँ और क्या न खाएँ?
एक्जिमा पित्त, रक्त और अग्नि से सीधा जुड़ा हुआ है। इसलिए भोजन इस रोग के उपचार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
क्या खाएँ
- खीरा
- लौकी
- नारियल पानी
- सादा दलिए
- उबली सब्जियाँ
- मूंग दाल
- हल्का ताजा भोजन
- घी की थोड़ी मात्रा
ये भोजन शरीर की गर्मी कम करते हैं और रक्त की शुद्धि में मदद करते हैं।
क्या न खाएँ
- बहुत मसालेदार खाना
- अत्यधिक नमक
- खट्टे पदार्थ
- तली हुई चीज़ें
- देर से पचने वाली दालें
- अत्यधिक मिठाई
ये सभी पित्त और आम दोनों को बढ़ाते हैं जिससे त्वचा और अधिक संवेदनशील हो जाती है।
एक्जिमा को बढ़ाने वाले कारण?
कई छोटी चीज़ें भी एक्जिमा को flare कर सकती हैं। जिन पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।
- तेज़ सुगंध वाले प्रसाधन
- केमिकलयुक्त हेयर डाई
- कठोर साबुन
- कपड़े धोने वाले रासायनिक पदार्थ
- धूल और अत्यधिक प्रदूषण
- बहुत गर्म पानी से स्नान
- देर तक पसीना रोककर रखना
- तनाव
ये सब त्वचा की संवेदनशीलता बढ़ाते हैं और प्राकृतिक नमी को छीन लेते हैं।
एक्जिमा का आयुर्वेदिक उपचार — जड़ से संतुलन लाने वाली चिकित्सा
एक्जिमा का उपचार केवल खुजली रोकने या त्वचा पर कोई क्रीम लगाने भर से पूरा नहीं होता। आयुर्वेद मानता है कि यह रोग तब पैदा होता है जब पित्त, कफ, अग्नि और रक्तदूष्य एक साथ असंतुलित हो जाते हैं। इसलिए उपचार भी केवल ऊपरी परत को शांत करने के बजाय शरीर को भीतर से ठंडक देने, रक्त को शुद्ध करने और त्वचा की प्राकृतिक नमी वापस लाने पर केंद्रित होता है।
1. रक्तशोधन
एक्जिमा को आयुर्वेद में रक्तदूष्य विकार माना गया है। इसलिए रक्त को शुद्ध करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। मंजिष्ठा, खदिर, नीम और त्रिफला का संयोजन रक्त की गर्मी को कम करता है और त्वचा को भीतर से साफ करता है। जिन लोगों में लालिमा अधिक होती है या छोटे दाने बार-बार उभरते हैं, उनके लिये यह उपचार बहुत प्रभावी है।
2. शीतल औषधियाँ
पित्त बढ़ने से त्वचा जलन पैदा करती है। शीतल औषधियाँ त्वचा की गर्मी को शांत करती हैं और flare को धीरे-धीरे नियंत्रित करती हैं। नारियल तेल में पकाई गई औषधियाँ, गिलोय और शतावरी के मिश्रण त्वचा को ठंडक देते हैं और खुजली कम करते हैं।
3. तैल चिकित्सा
नारियल तेल, नीम तेल, यष्टिमधु तेल और कुमारी तेल त्वचा को नमी देते हैं। इनका नियमित प्रयोग त्वचा की सतह को नरम बनाता है और खुरदरापन घटाता है। कई लोगों को महसूस होता है कि तेल लगाने से धीरे-धीरे खुजली की तीव्रता कम होने लगती है।
4. विरेचन
अगर पित्त बहुत अधिक बढ़ गया हो और flare बार-बार आ रहा हो तो चिकित्सक विरेचन की सलाह देते हैं। यह शरीर की गर्मी को कम करता है और blood toxins को बाहर निकालता है। इससे त्वचा शांत होने लगती है।
एक्जिमा में आराम देने वाले घरेलू नुस्खे
घर पर अपनाए गये छोटे उपाय भी त्वचा को बहुत राहत देते हैं। ये उपाय त्वचा को शांत करते हैं, नमी लौटाते हैं और flare की तीव्रता कम करते हैं।
1. नारियल तेल और कपूर
नारियल तेल त्वचा को ठंडक देता है और कपूर खुजली कम करता है। दोनों का मिश्रण जलन शांत करने के लिये बहुत उपयोगी है।
2. खीरे का पुल्टिस
खीरा शीतल प्रकृति का है। इसे पीसकर प्रभावित स्थान पर लगाने से त्वचा तुरंत ठंडी महसूस होती है।
3. ओट्स स्नान
ओट्स त्वचा को आराम देता है और खुजली घटाता है। गुनगुने पानी में थोड़ा ओट्स डालकर स्नान करने से राहत मिलती है।
4. मुल्तानी मिट्टी
मुल्तानी मिट्टी शरीर की गर्मी को खींचकर त्वचा को आराम देती है। इसे बहुत पतला लेप बनाकर लगाया जा सकता है।
5. हल्दी और एलोवेरा
हल्दी सूजन घटाती है और एलोवेरा त्वचा को ठंडक देता है। यह संयोजन flare में उपयोगी है।
एक्जिमा को नियंत्रित रखने के सबसे सुरक्षित तरीके
जीवनशैली ही वह हिस्सा है जहाँ आप रोज़ अपनी त्वचा का भाग्य तय करते हैं। छोटी-छोटी आदतें flare को रोक सकती हैं जबकि गलत आदतें स्थिति को गंभीर बना सकती हैं।
1. बहुत गर्म पानी से बचना
गर्म पानी त्वचा की नमी को छीन लेता है। इससे सूखापन और खुजली बढ़ने लगती है।
2. सूती कपड़े पहनना
सूती कपड़े त्वचा को सांस लेने देते हैं। सिंथेटिक कपड़े जलन पैदा कर सकते हैं।
3. तनाव नियंत्रित करना
तनाव सीधे पित्त और वात दोनों को बढ़ाता है। गहरी सांसें या थोड़ी देर का ध्यान flare को कम करने में मददगार है।
4. दिन में पर्याप्त पानी पीना
पानी त्वचा की नमी लौटाता है और रक्त की शुद्धि में भी मदद करता है।
5. खुजलाहट को रोकना
खुजली करते समय त्वचा की सतह टूट जाती है जिससे जलन और संक्रमण बढ़ सकता है। इसलिए खुजलाने के बजाय ठंडा दबाव देना बेहतर है।
निष्कर्ष
एक्जिमा केवल त्वचा का रोग नहीं है बल्कि शरीर के भीतर बढ़ी हुई गर्मी, रक्तदूष्यता और मानसिक तनाव का मिला-जुला संकेत है। आयुर्वेद इस रोग को सतह से नहीं बल्कि उसकी जड़ से संतुलित करता है। जब आप भोजन को हल्का रखते हैं, तनाव कम करते हैं, व्यक्तिगत औषधियों का सहारा लेते हैं और त्वचा को हमेशा शीतल तथा नम बनाए रखते हैं तब flare धीरे-धीरे घटने लगते हैं। यह यात्रा थोड़ी लंबी हो सकती है पर हर दिन छोटी-सी राहत आपको यह भरोसा दिलाती है कि सुधार संभव है और त्वचा फिर से शांत तथा स्वस्थ हो सकती है।
हर व्यक्ति में एक्जिमा का कारण अलग होता है। किसी में पित्त अधिक, किसी में कफ और किसी में वात का सूखापन। इसलिए व्यक्तिगत उपचार ही सही परिणाम देता है। जीवा आयुर्वेद में रोग नहीं बल्कि व्यक्ति का उपचार किया जाता है जिससे सुधार तेज़ और स्थायी होता है।
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FAQs
1. क्या एक्जिमा पूरी तरह ठीक हो सकता है?
स्थिति और कारण पर निर्भर करता है पर व्यक्तिगत आयुर्वेदिक उपचार से flare काफी कम हो सकते हैं।
2. क्या नारियल तेल एक्जिमा में उपयोगी है?
हाँ। यह त्वचा को ठंडक देता है और खुजली कम करता है।
3. क्या बच्चे भी एक्जिमा से प्रभावित हो सकते हैं?
हाँ। बच्चों में यह अक्सर पाचन की कमजोरी और कफ वृद्धि के कारण होता है।
4. क्या खट्टे पदार्थ एक्जिमा बढ़ाते हैं?
हाँ। खट्टा भोजन पित्त बढ़ाता है जिससे flare तेज़ हो सकते हैं।
5. क्या यह रोग केवल मौसम से जुड़ा है?
नहीं। भोजन, तनाव और त्वचा की संवेदनशीलता भी इसके महत्वपूर्ण कारण हैं।























































































