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सुबह उठते ही गर्दन में अकड़न और चक्कर आना क्या सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का संकेत है? आयुर्वेद की राय जानिए

Information By Dr. Keshav Chauhan

2021 के Global Burden of Disease Study (GBD 2021) के मुताबिक, दुनियाभर में गर्दन दर्द (neck pain) से पीड़ित लोगों की संख्या 2 करोड़ 6 लाख 29 हज़ार से अधिक दर्ज की गई। गर्दन की तकलीफ सिर्फ बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रही — आज युवाओं और नौकरीपेशा लोगों में भी गर्दन-दर्द, अकड़न व चक्कर जैसी शिकायतें बढ़ती जा रही हैं।

यदि आप हर सुबह उठते ही गर्दन में अकड़न महसूस करते हैं, गर्दन भारी लगती है, हल्की हरकत करने पर भी खिंचाव होता है, या कभी-कभी चक्कर आता है, तो शायद यह सिर्फ थकावट नहीं है। यह आपके लिए एक ज़रूरी संकेत हो सकता है कि सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (या स्पॉन्डिलाइटिस) धीरे-धीरे अपनी शुरुआत कर रहा है।

आधुनिक जीवनशैली, जैसे लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप पर काम करना, गलत मुद्रा में बैठना, शरीर की कम सक्रियता, ने गर्दन व रीढ़ की हड्डियों को बेहद संवेदनशील बना दिया है। कई लोग इसे मामूली समझ कर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो दर्द, जकड़न, चक्कर, झनझनाहट जैसी शिकायतें बढ़ सकती हैं।

इस ब्लॉग में, हम यह जानेंगे कि सुबह-उठते ही गर्दन में अकड़न और चक्कर आने पर — क्या यह सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस हो सकता है? साथ ही, आयुर्वेद की दृष्टि से ऐसे लक्षणों को कैसे देखा जाता है और किन उपायों से आप राहत पा सकते हैं।

सुबह उठते ही गर्दन में अकड़न और चक्कर क्यों आते हैं और यह सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस से कैसे जुड़ सकता है?

सुबह उठते ही जब आपकी गर्दन भारी लगती है, अकड़न महसूस होती है या सिर हल्का घूमता है, तो इसे सिर्फ थकान मानकर छोड़ देना सही नहीं है। इसके पीछे कई कारण होते हैं, जो आपकी गर्दन की हड्डियों, मांसपेशियों और नसों को सीधे प्रभावित करते हैं:

गलत सोने की मुद्रा 

जब आप रात भर एक ही करवट में सोते हैं या बहुत ऊँचे, कड़े या नीचले तकिये का इस्तेमाल करते हैं, तो गर्दन अस्वाभाविक स्थिति में रहती है। इससे मांसपेशियों पर लगातार दबाव पड़ता है और सुबह उठते ही जकड़न और खिंचाव महसूस होता है।

वात दोष का बढ़ना 

आयुर्वेद के अनुसार बढ़ा हुआ वात नसों, हड्डियों और मांसपेशियों में कसाव और सूखापन बढ़ाता है। इससे दर्द, जकड़न और चक्कर जैसी समस्याएँ ज़्यादा महसूस होती हैं। अगर शरीर में आम जमा हो चुका हो, तो वह गर्दन जैसे कमज़ोर हिस्सों में रुकावट पैदा करता है और परेशानी और बढ़ जाती है।

अधूरी नींद या बार-बार नींद टूटना 

जब आपकी नींद गहरी और पूरी नहीं होती, तो गर्दन की मांसपेशियाँ रात में पूरी तरह ढीली नहीं हो पातीं। इसका असर सुबह उठते ही दिख जाता है — गर्दन भारी लगती है, अकड़न रहती है और दर्द ज़्यादा महसूस होता है।

रोज़ सुबह होने वाली अकड़न एक चेतावनी हो सकती है 

अगर यह समस्या रोज़ महसूस होती है, तो यह सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का शुरुआती संकेत हो सकता है। इस स्थिति में गर्दन की हड्डियाँ और डिस्क कमज़ोर होकर नसों पर दबाव डालने लगती हैं, जिससे चक्कर या अस्थिरता भी हो सकती है।

दिनभर की गलत आदतें भी बड़ी वजह बनती हैं 

लंबे समय तक मोबाइल पर झुककर देखना, लैपटॉप पर लगातार आगे की ओर झुककर काम करना, गलत मुद्रा में बैठना या भारी बैग एक ही कंधे पर उठाना — ये सभी आदतें गर्दन पर लगातार दबाव डालती हैं। धीरे-धीरे यह दबाव सर्वाइकल की शुरुआत कर सकता है या पहले से मौजूद समस्या को बढ़ा सकता है।

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस क्या होता है और यह आपकी गर्दन को कैसे प्रभावित करता है?

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्दन की रीढ़ की हड्डियों और डिस्क में धीरे-धीरे बदलाव आने लगते हैं। इसे आप इस तरह समझ सकते हैं कि जैसे एक मशीन को लगातार बिना देखभाल के चलाया जाए, तो उसके पुर्ज़े घिसने लगते हैं — उसी तरह लंबे समय तक गलत आदतों, तनाव और उम्र के असर से गर्दन की हड्डियाँ और डिस्क कमज़ोर होने लगती हैं।

इस स्थिति में तीन मुख्य चीज़ें होती हैं:

  • हड्डियों और डिस्क का घिसना
    बढ़ती उम्र, गलत मुद्रा या कैल्शियम की कमी से हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं। इससे डिस्क पतली होने लगती है और रीढ़ के बीच कुशन जैसा काम कम हो जाता है।

  • नसों पर दबाव
    जब हड्डियों में उभार बनने लगते हैं या डिस्क दबाव में आती है, तो पास की नसों पर खिंचाव पड़ता है। इसकी वजह से दर्द गर्दन से होते हुए कंधों, बाहों या उँगलियों तक जा सकता है।

  • मांसपेशियों में सूजन और जकड़न
    गर्दन को सहारा देने वाली मांसपेशियाँ लगातार तनाव में रहती हैं। इससे उनमें सूजन और अकड़न बढ़ती है।

आयुर्वेद में इसे मन्यस्तंभ (Manyasthambha) कहा गया है, जो वात दोष के असंतुलन से जुड़ा माना जाता है। जब वात बढ़ता है, तो यह हड्डियों और नसों की शक्ति को कम करता है, जिससे जकड़न, दर्द, चक्कर और सुन्नपन जैसे लक्षण प्रकट होते हैं।

आजकल यह समस्या सिर्फ उम्र बढ़ने से नहीं, बल्कि मोबाइल देखने की आदत, लंबे समय तक झुककर बैठने, गलत तकिये, तनाव और व्यायाम की कमी की वजह से युवाओं में भी बहुत देखी जा रही है।

यदि आप सुबह उठते ही अकड़न महसूस करते हैं, दिन भर काम के दौरान गर्दन में खिंचाव रहता है, या सिर भारी-सा लगता है — तो यह स्पॉन्डिलाइटिस की शुरुआत हो सकती है और इसे समय रहते पहचानना ज़रूरी है।

कौन-से लक्षण बताते हैं कि आपका गर्दन दर्द सर्वाइकल से जुड़ा हो सकता है?

अगर आपको बार-बार कुछ खास लक्षण महसूस होते हैं, तो ये सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस का संकेत हो सकते हैं। नीचे दिए गए लक्षणों पर ध्यान दें और देखें क्या इनमें से कोई आपकी स्थिति से मेल खाता है:

  • गर्दन में लगातार दर्द या जकड़न
    दर्द कभी हल्का तो कभी तेज़ हो सकता है, लेकिन यह महसूस लगातार होता रहता है।

  • सिर घुमाने में दिक्कत
    दाएँ या बाएँ देखने पर खिंचाव या दर्द महसूस होना बहुत आम संकेत है।

  • चक्कर आना या अस्थिरता महसूस होना
    नसों पर दबाव या रक्त प्रवाह में रुकावट की वजह से चक्कर आ सकते हैं।

  • सिर दर्द जो गर्दन से शुरू होकर माथे तक जाए
    ऐसे सिर दर्द को अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह सीधे गर्दन की समस्या से जुड़ा होता है।

  • कंधों, बाहों या उँगलियों में झनझनाहट
    नसों पर दबाव हो तो झनझनाहट, सुन्नपन या कमज़ोरी महसूस होने लगती है।

  • सुबह उठते ही गर्दन भारी लगना
    यह वह शुरुआती संकेत है जिसे अक्सर लोग थकान समझकर नजरअंदाज़ कर देते हैं।

  • अचानक उठने पर अस्थिरता
    दर्द, जकड़न या नसों के दबाव से आपका संतुलन थोड़ी देर के लिए बिगड़ सकता है।

अगर आप इन लक्षणों को बार-बार महसूस करते हैं, तो इसे हल्का न लें। यह आपके शरीर का संकेत है कि आपकी गर्दन को आराम, सही देखभाल और जल्द से जल्द उपचार की ज़रूरत है। समय पर ध्यान देना आपकी आगे की तकलीफों को बहुत हद तक रोक सकता है।

आपकी रोज़ की आदतें सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस को कैसे बढ़ा सकती हैं?

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस केवल उम्र की वजह से नहीं बढ़ता, बल्कि आपकी रोज़ की छोटी-छोटी आदतें भी इसे तेज़ कर सकती हैं। कई बार दर्द अचानक महसूस होता है, लेकिन असल वजह आपकी ही दिनचर्या में छिपी होती है।

नीचे वे आदतें हैं जो आपकी समस्या को बढ़ा सकती हैं:

  • मोबाइल को नीचे देखकर इस्तेमाल करना
    इससे गर्दन लगातार झुकी रहती है, हड्डियों और मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है और धीरे-धीरे जकड़न बढ़ने लगती है।

  • कुर्सी और मेज़ की गलत ऊँचाई
    झुककर लैपटॉप पर काम करने से गर्दन पर खिंचाव बना रहता है, जिससे दर्द, अकड़न और चक्कर जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

  • गलत तकिये का उपयोग
    बहुत ऊँचा, कड़ा या नीचा तकिया आपकी गर्दन को अस्वाभाविक स्थिति में रखता है, जिससे रातभर कसाव रहता है और सुबह उठते ही दर्द होता है।

  • व्यायाम की कमी
    कमज़ोर गर्दन और कंधों की मांसपेशियाँ थोड़ी-सी गलत मुद्रा से भी दर्द पैदा कर देती हैं। इससे सर्वाइकल का जोखिम बढ़ जाता है।

  • तनाव और अनिद्रा
    तनाव मांसपेशियों को कस देता है और अनिद्रा शरीर को ठीक से आराम नहीं देती, जिससे गर्दन की समस्या और बढ़ती है।

  • भारी बैग को एक ही कंधे पर उठाना
    इससे रीढ़ पर असमान दबाव पड़ता है और सर्वाइकल धीरे-धीरे बढ़ सकता है।

  • लंबे समय तक वाहन चलाना
    गलत मुद्रा या गर्दन को स्थिर रखने की मजबूरी भी जकड़न और दर्द को बढ़ाती है।

इन छोटी आदतों पर ध्यान देकर आप अपनी गर्दन की सेहत में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

आयुर्वेद में मन्यस्तंभ (Manyasthambha) को कैसे समझाया गया है?

आयुर्वेद में सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस को मन्यस्तंभ कहा जाता है। यह दो शब्दों से बना है—

  • “मन्य” यानी गर्दन का क्षेत्र

  • “स्थम्भ” यानी जकड़न या अकड़न

इस स्थिति में आपकी गर्दन में लगातार खिंचाव, दर्द और भारीपन महसूस होता है।

आयुर्वेद इसे इस तरह समझाता है:

  • मुख्य कारण वात दोष का बढ़ना
    जब वात असंतुलित होता है, तो नसें, अस्थियाँ और संधियाँ प्रभावित होती हैं। इससे दर्द, सूजन, जकड़न और कमज़ोरी जैसे लक्षण बढ़ जाते हैं।

  • शरीर में आम का जमना
    जब पाचन कमज़ोर होता है, तो शरीर में आम बनने लगता है। यह आम गर्दन जैसे कमज़ोर स्थानों में जमा होकर रुकावट पैदा करता है और दर्द बढ़ाता है।

  • कमज़ोर स्थान पर प्रभाव ज़्यादा
    आयुर्वेद मानता है कि हर शरीर का एक ‘कमज़ोर क्षेत्र’ होता है। अगर आपकी गर्दन पहले से संवेदनशील है या आप गलत मुद्रा में काम करते हैं, तो आम और वात दोनों वहीं जमा होकर समस्या बढ़ाते हैं।

  • दर्द का फैलाव
    मन्यस्तंभ में दर्द सिर्फ गर्दन तक सीमित नहीं रहता। यह कंधों, पीठ और हाथों तक फैल सकता है। नसों पर दबाव बढ़ने से चक्कर और अस्थिरता भी महसूस हो सकती है।

  • गहरा असंतुलन, केवल दर्द नहीं
    यह समस्या केवल दर्द का परिणाम नहीं, बल्कि शरीर के गहरे असंतुलन का संकेत है। इसलिए आयुर्वेद इसका उपचार दोषों को संतुलित करने, आम निकालने और नसों तथा हड्डियों को पोषण देने पर केंद्रित करता है।

इस समझ के साथ उपचार अधिक प्रभावी और लंबे समय तक राहत देने वाला बन जाता है।

शरीर में वात, आम और अग्नि का असंतुलन आपकी सर्वाइकल समस्या को कैसे बिगाड़ता है?

अगर आपकी गर्दन में अक्सर दर्द, अकड़न और चक्कर आते हैं, तो इसके पीछे शरीर के भीतर चल रही प्रक्रियाएँ भी जिम्मेदार होती हैं। आयुर्वेद के अनुसार तीन मुख्य कारण आपकी समस्या को बढ़ाते हैं — बढ़ा हुआ वात दोष, शरीर में जमा आम, और कमज़ोर अग्नि।

वात दोष बढ़ने पर क्या होता है? 

वात शरीर की गति, नसों और मांसपेशियों को नियंत्रित करता है। जब यह बढ़ता है, तो नसों में कसाव आने लगता है, हड्डियाँ सूखी और कमज़ोर होने लगती हैं, और संधियों में जकड़न बढ़ जाती है। यही वजह है कि बढ़ा हुआ वात अक्सर गर्दन, कंधों और पीठ के दर्द का मुख्य कारण बनता है। बढ़ा हुआ वात आपको ठंडी हवा, तनाव या थकान में और परेशान करता है।

आम जमा होने से समस्या क्यों बढ़ती है? 

जब अग्नि कमज़ोर होती है, तो भोजन ठीक से नहीं पचता। इससे शरीर में विषैले पदार्थ यानी आम बनते हैं। ये आम नसों और हड्डियों में जाकर रुकावट पैदा करते हैं। अगर आपकी गर्दन पहले ही संवेदनशील है, तो यह आम उसी क्षेत्र में जमा होकर दर्द और अकड़न को और बढ़ा देता है। आम जमा होने पर दर्द भारी और सुस्त प्रकार का महसूस होता है।

कमज़ोर अग्नि का क्या असर पड़ता है? 

अग्नि कमज़ोर होने का मतलब है कि शरीर अपनी प्राकृतिक ताकत खोने लगता है। मांसपेशियों को पूरा पोषण नहीं मिलता, हड्डियाँ जल्दी थकती हैं और नसें कमज़ोर हो जाती हैं। इससे सुबह उठते ही जकड़न और दिन में काम करते समय दर्द बढ़ जाता है।

जब ये तीनों — बढ़ा हुआ वात, जमा हुआ आम और कमज़ोर अग्नि — एक साथ हो जाते हैं, तो आपकी गर्दन की समस्या तेज़ी से बढ़ती है। इसलिए आयुर्वेद इस स्थिति में सिर्फ बाहरी इलाज नहीं करता, बल्कि अंदरूनी असंतुलनों को ठीक करके जड़ से राहत देने की कोशिश करता है।

कौन-सी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ और औषधियाँ सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में राहत देने में मदद करती हैं?

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में सिर्फ दर्द कम करना काफी नहीं होता। आपको ऐसी जड़ी-बूटियाँ और औषधियाँ चाहिए जो नसों को मज़बूती दें, वात दोष को शांत करें, जकड़न घटाएँ और आम को बाहर निकालें। आयुर्वेद में कई प्रभावी विकल्प मिलते हैं जो आपकी गर्दन की तकलीफ़ को जड़ से शांत करने में मदद करते हैं।

अश्वगंधा 

अश्वगंधा नसों को शक्ति देती है, तनाव कम करती है और बढ़े हुए वात को शांत करती है। अगर आपकी गर्दन जकड़ती है, चक्कर आते हैं या मांसपेशियों में कमज़ोरी रहती है, तो अश्वगंधा बहुत फायदेमंद मानी जाती है। इसे रोज़ रात को गुनगुने दूध के साथ लिया जा सकता है।

दशमूल काढ़ा 

दशमूल दस जड़ों का मिश्रण होता है, जो शरीर की सूजन को कम करता है और जोडों के दर्द में आराम देता है। अगर आपकी समस्या वात और आम से जुड़ी है, तो दशमूल काढ़ा धीरे-धीरे जकड़न को खोलने में मदद करता है। इसे भोजन के बाद लेना प्रभावी माना जाता है।

योगराज गुग्गुलु या त्रयोदशांग गुग्गुलु 

ये गुग्गुलु योग वातनाशक गुणों से भरपूर होते हैं। ये हड्डियों, संधियों और नसों को पोषण देते हैं। अगर आपकी गर्दन में सूजन, दर्द या झनझनाहट रहती है, तो यह औषधियाँ खास तौर पर सुझाई जाती हैं। इनका सेवन हमेशा चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।

ब्रह्म रसायन और रसराजेश्वर रस 

ये औषधियाँ नसों की शक्ति बढ़ाने वाली मानी जाती हैं। अगर आपकी तकलीफ़ में चक्कर, कमज़ोरी, थकान या सुन्नपन शामिल है, तो ये औषधियाँ बहुत उपयोगी सिद्ध होती हैं। इनका सेवन केवल योग्य आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की निगरानी में ही किया जाना चाहिए।

इन सभी जड़ी-बूटियों और औषधियों का उपयोग तभी सही परिणाम देता है जब आप इन्हें अपनी प्रकृति और समस्या की स्थिति को समझकर लेते हैं। इसलिए बेहतर है कि आप किसी अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेकर ही इनका सेवन शुरू करें।

कौन-सी आयुर्वेदिक थेरपीज़ गर्दन दर्द, जकड़न और चक्कर में प्रभावी हैं?

आयुर्वेद में सिर्फ दवाएँ ही नहीं, बल्कि कई गहन थेरपीज़ भी हैं जो सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में तेज़ और गहरी राहत देती हैं। ये थेरपीज़ वात दोष को संतुलित करती हैं, नसों और मांसपेशियों में रक्त प्रवाह बढ़ाती हैं और जमे हुए तनाव को दूर करती हैं।

अभ्यंग

अभ्यंग गर्म तेल से की जाने वाली मालिश है, जो आपकी गर्दन और कंधों की जकड़न को खोलती है। अभ्यंग से रक्त संचार बढ़ता है, जिससे दर्द धीरे-धीरे कम होता है। अगर आपकी गर्दन सुबह उठते ही अकड़ती है, तो नियमित अभ्यंग बहुत प्रभावी होता है।

स्वेदन 

स्वेदन भाप द्वारा किया जाने वाला उपचार है। इसमें गर्म वाष्प का प्रयोग करके मांसपेशियों और संधियों में जमे हुए वात को बाहर निकाला जाता है। स्वेदन से शरीर हल्का महसूस होता है और दर्द भी कम होता है।

बस्ती 

बस्ती औषधीय एनीमा है, जो वात दोष के उपचार में सबसे प्रभावी मानी जाती है। जब गर्दन की समस्या बढ़े हुए वात से जुड़ी होती है, तो बस्ती उसकी जड़ पर काम करती है। इससे नसों की जकड़न, दर्द और सुन्नपन कम होता है।

नस्य 

नस्य थेरपी में औषधीय तेल या घृत को नाक के माध्यम से दिया जाता है। नस्य सिर और गर्दन के क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ाता है और नसों की सूजन तथा खिंचाव को शांत करता है। अगर आपको चक्कर आते हैं, सिर भारी लगता है या गर्दन में कसाव रहता है, तो नस्य खास लाभ देता है।

इन थेरपीज़ का असर तभी गहरा और स्थायी होता है जब इन्हें आपकी प्रकृति, आपकी बीमारी की स्थिति और आपके लक्षणों को समझकर दिया जाए। इसलिए जीवा के अनुभवयुक्त आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही इनका चुनाव और उपचार कराना सबसे सुरक्षित और परिणामदायक होता है।

निष्कर्ष

गर्दन में दर्द, सुबह की अकड़न और चक्कर जैसी परेशानियाँ आपके दिन की पूरी लय बिगाड़ सकती हैं। लेकिन आप यह समझ लें कि आपका शरीर आपको बार-बार संकेत दे रहा है कि उसे आराम, संतुलन और सही देखभाल की ज़रूरत है। सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस ऐसी स्थिति नहीं है जिसे केवल दर्द की दवा से ठीक किया जा सके। इसमें आपकी जीवनशैली, आपकी सोने-बैठने की आदतें, और शरीर के भीतर का संतुलन, सबका ध्यान रखना ज़रूरी है।

आयुर्वेद इस समस्या को सिर्फ एक दर्द नहीं मानता, बल्कि इसे वात, अग्नि और आम के असंतुलन का परिणाम समझकर उसके मूल कारणों पर काम करता है। इसलिए जब आप जड़ी-बूटियों, थेरपीज़ और दिनचर्या के बदलावों को साथ में अपनाते हैं, तो राहत न केवल तेज़ मिलती है बल्कि लंबे समय तक बनी रहती है।

अगर आप भी सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस की समस्या से जूझ रहे हैं, तो हमारे प्रमाणित जीवा डॉक्टरों से आज ही व्यक्तिगत परामर्श लें। कॉल करें: 0129-4264323

FAQs

क्या सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस में चक्कर आते हैं?

हाँ, अगर आपकी नसों पर दबाव बढ़ता है या रक्त प्रवाह प्रभावित होता है, तो आपको चक्कर आ सकते हैं। यह शरीर का संकेत है कि समस्या बढ़ रही है।

गर्दन में स्पॉन्डिलाइटिस के क्या लक्षण हैं?

आपको गर्दन में दर्द, जकड़न, सिर भारी लगना, कंधों में खिंचाव, उँगलियों में झनझनाहट और कभी-कभी चक्कर जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।

क्या गलत सोने की मुद्रा भी सुबह की गर्दन जकड़न बढ़ा सकती है?

हाँ, गलत मुद्रा या गलत ऊँचाई वाले तकिये से रातभर गर्दन पर दबाव पड़ता है, जिससे सुबह उठते ही दर्द और जकड़न बढ़ जाती है।

क्या मोबाइल देखने की आदत से सर्वाइकल बढ़ सकता है?

हाँ, लंबे समय तक झुककर मोबाइल देखने से आपकी गर्दन पर लगातार दबाव पड़ता है, जिससे नसें और मांसपेशियाँ कमज़ोर होती हैं और सर्वाइकल का खतरा बढ़ता है।

क्या सर्वाइकल में घरेलू गर्म सिंकाई मदद कर सकती है?

गर्म सिंकाई मांसपेशियों को ढीला करके दर्द कम कर सकती है, लेकिन यह अस्थायी राहत है। अगर दर्द बार-बार हो, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

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