2025 में प्रकाशित सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के एक सर्वे के अनुसार — भारत में लगभग 85.5 प्रतिशत परिवारों के पास कम से कम एक स्मार्टफोन है और लगभग 86.3 प्रतिशत घरों में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है।
इसका मतलब साफ है — आज लगभग हर घर में मोबाइल या लैपटॉप मौजूद है, और कई लोग हर दिन कई घंटे इन्हीं उपकरणों पर काम, मनोरंजन या बातचीत के लिए बिताते हैं।
लेकिन इस तेज़ी से बढ़ती डिजिटल आदत के साथ एक चिंता भी है: गर्दन, कंधा और रीढ़ की हड्डियों से जुड़ी समस्याएँ (विशेषकर सर्वाइकल यानी गर्दन की समस्या) बहुत तेज़ी से आम होती जा रही हैं।
अगर आप भी रोज़ाना लंबे समय तक लैपटॉप या मोबाइल इस्तेमाल करते हैं, तो आपको यह लेख इसलिए ज़रूर पढ़ना चाहिए। यहाँ हम समझेंगे कि क्यों मोबाइल और लैपटॉप का ज़्यादा उपयोग आपके सर्वाइकल दर्द को बढ़ा सकता है, आयुर्वेद की दृष्टि से क्या कारण हो सकते हैं, और कौन-से सरल घरेलू व आयुर्वेदिक उपाय हैं, जो आपको राहत दे सकते हैं।
क्या लगातार लैपटॉप और मोबाइल इस्तेमाल करना आपके सर्वाइकल दर्द को बढ़ा रहा है?
आज जिस तरह काम, पढ़ाई और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में लैपटॉप और मोबाइल का इस्तेमाल बढ़ा है, उसी तरह गर्दन से जुड़ी समस्याएँ भी तेज़ी से बढ़ी हैं। अगर आप दिन में कई घंटे स्क्रीन पर झुके रहते हैं, तो आपको यह समझना ज़रूरी है कि यह आदत आपकी गर्दन की सेहत को सीधे प्रभावित करती है।
जब आप लगातार नीचे देखकर मोबाइल चलाते हैं या लैपटॉप पर झुककर काम करते हैं, तो आपकी गर्दन के पीछे वाली मांसपेशियों और नसों पर लगातार खिंचाव पड़ता है। यह खिंचाव धीरे-धीरे दर्द, जकड़न और सूजन में बदल सकता है। कई लोग बताते हैं कि शुरुआत में हल्का दर्द होता है, लेकिन कुछ ही दिनों में यह बढ़कर सर्वाइकल की समस्या का रूप ले लेता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि दर्द सिर्फ गर्दन तक ही सीमित नहीं रहता। यह कंधों, पीठ और कभी-कभी बाजू तक फैल सकता है। अगर आप देर तक बैठकर काम करते हैं और बीच-बीच में शरीर को नहीं हिलाते-डुलाते, तो यह समस्या और बढ़ जाती है।
आपको याद रखना चाहिए कि सर्वाइकल दर्द अचानक नहीं होता। यह आपकी रोज़ की आदतों का परिणाम होता है, जो धीरे-धीरे गर्दन की हड्डियों और स्नायु को कमज़ोर कर देता है।
गलत मुद्रा में बैठने से सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस क्यों बढ़ता है?
सही मुद्रा यानी सही तरीके से बैठना, खड़ा होना और चलना आपकी गर्दन और रीढ़ की सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है। लेकिन आज अधिकतर लोग झुककर मोबाइल देखते हैं, आगे की ओर कंधे गिराकर काम करते हैं और घंटों तक एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं। यह आदतें धीरे-धीरे सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस को बढ़ाती हैं।
जब आप झुककर बैठते हैं, तो शरीर का पूरा वजन गर्दन पर आ जाता है। इससे पानी से भरी डिस्क, जो हड्डियों के बीच कुशन का काम करती है, दबने लगती है। लगातार दबाव के कारण डिस्क पतली होने लगती है और हड्डियाँ एक-दूसरे पर घिसने लगती हैं। यह स्थिति आगे चलकर दर्द, सूजन और नस दबने जैसी समस्याओं को जन्म देती है।
गलत मुद्रा के कारण यह समस्याएँ ज़्यादा होती हैं:
- गर्दन में भारीपन और जकड़न
- कंधों में दर्द और थकान
- पीठ में जलन या खिंचाव का एहसास
- सिर में लगातार दर्द
- बाज़ू में झनझनाहट या सुन्नपन
अगर आप भी लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठते हैं और आपकी गर्दन अक्सर कड़क महसूस होती है, तो समझिए कि यह गलत मुद्रा का परिणाम है। सही तरीके से न बैठना धीरे-धीरे सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का रूप ले सकता है, जिसे ठीक करने में काफी समय लग सकता है।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि गलत मुद्रा का प्रभाव तुरंत दिखाई नहीं देता, इसलिए लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन धीरे-धीरे यह आपकी रीढ़ की सेहत पर गहरा असर डाल सकता है।
मोबाइल और लैपटॉप का ज़्यादा इस्तेमाल आपकी गर्दन की हड्डियों पर कितना दबाव डालता है?
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जब आप सिर को आगे झुकाकर मोबाइल देखते हैं, तो आपकी गर्दन पर सामान्य से कई गुना ज़्यादा वजन पड़ता है। सामान्य अवस्था में आपका सिर लगभग पाँच से छह किलो का होता है। लेकिन जैसे-जैसे आप सिर को आगे झुकाते हैं, यह वजन बढ़ता जाता है।
उदाहरण के तौर पर:
- सिर को थोड़ा झुकाने पर गर्दन पर लगभग 12 किलो का दबाव पड़ता है।
- 30 डिग्री झुकाने पर दबाव लगभग 18 किलो तक पहुँच जाता है।
- 60 डिग्री झुकाने पर यह दबाव 25 से 30 किलो तक बढ़ सकता है।
आप सोचिए — आपकी गर्दन की छोटी-सी हड्डियाँ और नाज़ुक स्नायु इतने दबाव को रोज़ अलग-अलग घंटों तक झेल रही होती हैं। यही कारण है कि लैपटॉप-मोबाइल का लगातार उपयोग सबसे ज़्यादा सर्वाइकल दर्द को बढ़ाता है।
इसके अलावा, स्क्रीन पर ध्यान जमाए रखने के कारण आप पलकें कम झपकाते हैं, गर्दन एक ही जगह थमी रहती है और रक्त संचार धीमा हो जाता है। इससे मांसपेशियाँ सख़्त होने लगती हैं और थोड़े समय बाद हल्की तकलीफ़ भी बढ़कर तेज़ दर्द में बदल सकती है।
मोबाइल और लैपटॉप का ज़्यादा इस्तेमाल आपकी नींद, तनाव और पूरे शरीर की मुद्रा पर असर डालता है। जब नींद कम आती है और तनाव बढ़ता है, तो मांसपेशियाँ पहले से ही थकी रहती हैं, जो सर्वाइकल दर्द को और बढ़ा देती हैं।
इसलिए अगर आप यह महसूस कर रहे हैं कि गर्दन में अक्सर खिंचाव रहता है, या स्क्रीन देखने के बाद दर्द बढ़ जाता है, तो यह साफ संकेत है कि आपकी गर्दन पर ज़रूरत से ज़्यादा दबाव पड़ रहा है।
सर्वाइकल के लक्षण आपको जल्दी कैसे पहचानने चाहिए?
सर्वाइकल की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है, लेकिन इसके शुरुआती संकेत आपके शरीर में बहुत साफ नज़र आते हैं। अगर आप रोज़ाना लैपटॉप या मोबाइल पर काम करते हैं, तो आपको इन लक्षणों पर ध्यान देना ज़रूरी है। जल्दी पहचान करने से आप दर्द बढ़ने से पहले ही सही कदम उठा सकते हैं।
सबसे आम लक्षण इस प्रकार हैं:
गर्दन में लगातार दर्द
शुरुआत में हल्का खिंचाव महसूस होता है, जो धीरे-धीरे तेज़ दर्द में बदल सकता है। स्क्रीन पर ज़्यादा समय बिताने के बाद दर्द आमतौर पर बढ़ जाता है।
गर्दन घुमाने में मुश्किल
अगर सुबह उठते समय गर्दन कड़क लगती है या दाएँ-बाएँ घुमाते समय खिंचाव महसूस होता है, तो यह सर्वाइकल का संकेत हो सकता है।
कंधों और पीठ में जकड़न
लंबे समय तक बैठने से कंधों और ऊपरी पीठ में कसाव शुरू हो जाता है, जो आगे चलकर सर्वाइकल दर्द का हिस्सा बन जाता है।
बाज़ू में झनझनाहट या सुन्नपन
जब नसों पर दबाव पड़ता है, तो झनझनाहट, जलन या सुन्नपन महसूस होने लगता है। यह लक्षण नज़रअंदाज़ नहीं किए जाने चाहिए।
सिरदर्द और चक्कर आना
बहुत से लोगों को गर्दन में दर्द के साथ सिरभारीपन और चक्कर आने की शिकायत रहती है। यह भी सर्वाइकल का शुरुआती संकेत है।
नींद खराब होना
गर्दन के दर्द के कारण ठीक से सोना मुश्किल होता है। रात में करवट बदलने पर भी खिंचाव महसूस हो सकता है।
दृष्टि धुंधली होना
जब नसों पर दबाव बढ़ जाता है, तो कभी-कभी आँखों के सामने धुंधलापन दिखाई दे सकता है।
अगर आप इन लक्षणों को समय रहते पहचान लें, तो दर्द को गंभीर होने से रोका जा सकता है। सबसे बड़ी गलती तब होती है जब लोग शुरुआती लक्षणों को हल्का दर्द समझकर अनदेखा कर देते हैं। जबकि सर्वाइकल का समय पर ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है।
आयुर्वेद के अनुसार सर्वाइकल दर्द बढ़ने का असली कारण क्या है?
आयुर्वेद में सर्वाइकल को ग्रीवा स्तंभ कहा गया है और इसे वात दोष की वृद्धि से जोड़ा गया है। इसका मतलब यह है कि जब शरीर में वात असंतुलित हो जाता है, तो हड्डियाँ, स्नायु, नसें और जोड़ों की गतिशीलता प्रभावित होने लगती है।
आपकी रोज़मर्रा की आदतें जैसे देर तक स्क्रीन देखना, लगातार झुककर बैठना, अनियमित भोजन, तनाव और नींद की कमी — यह सभी वात दोष को और बढ़ाते हैं। यही वात वृद्धि आगे चलकर सर्वाइकल दर्द का मुख्य कारण बन जाती है।
आयुर्वेद यह मानता है कि:
- लगातार बैठकर काम करना वात को बढ़ाता है।
- शरीर में सूखापन, थकान और कमज़ोरी वात के बढ़ने की वजह बनते हैं।
- भोजन का समय बिगड़ना या हलका पोषण रहित आहार लेना वात को तेज़ी से असंतुलित करता है।
- तनाव और नींद की कमी भी वात वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।
जब वात बढ़ता है, तो वह गर्दन की कशेरुकाओं, डिस्क और स्नायु पर असर डालता है। इस कारण गर्दन का संतुलन बिगड़ने लगता है और दर्द, खिंचाव और अकड़न बढ़ती जाती है।
आधुनिक जीवनशैली में यह समस्या इसलिए ज़्यादा देखी जा रही है, क्योंकि अधिकतर लोगों की दिनचर्या वात बढ़ाने वाली होती है — कम गतिशीलता, अनियमित भोजन, गलत बैठने की आदतें और लगातार तनाव।
इसलिए अगर आप समझते हैं कि आपका काम लैपटॉप या मोबाइल पर अधिक है, तो आपको आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से शरीर को संतुलित रखना और भी ज़रूरी हो जाता है।
वात दोष बढ़ने से आपकी गर्दन में दर्द, जकड़न और सूजन क्यों होती है?
जब शरीर में वात दोष बढ़ता है, तो उसका सबसे पहला असर स्नायु, हड्डियों और जोड़ों पर दिखाई देता है। यही वजह है कि सर्वाइकल दर्द अक्सर वात असंतुलन के साथ शुरू होता है।
वात दोष हल्कापन, सूखापन, ठंडापन और गति का प्रतीक होता है। जब यह गुण शरीर में ज़्यादा हो जाते हैं, तो गर्दन के आसपास की संरचनाएँ प्रभावित होने लगती हैं।
आप समझिए कि वात बढ़ने पर क्या होता है:
- स्नायु कमज़ोर होने लगती हैं
इससे गर्दन को मजबूती देने वाला सहारा कमज़ोर पड़ जाता है और हलके काम में भी दर्द होने लगता है। - हड्डियों और डिस्क में सूखापन बढ़ता है
यह सूखापन पकड़, संतुलन और लचीलेपन को कम कर देता है। इसी वजह से गर्दन में जकड़न महसूस होती है। - नसों पर दबाव बढ़ जाता है
जब वात तेज़ होता है, तो सूजन भी बढ़ती है। इससे नसों पर दबाव आता है, जिसके कारण बाज़ू में झनझनाहट, सुन्नपन या दर्द फैलने लगता है। - रक्त संचार धीमा हो जाता है
खराब रक्त प्रवाह के कारण मांसपेशियाँ कमज़ोर और थकी हुई महसूस होती हैं, जिससे दर्द और बढ़ जाता है। - गर्दन की गति सीमित हो जाती है
आप गर्दन घुमाते हैं तो कड़कपन, खिंचाव और रूकावट महसूस होती है।
लैपटॉप-मोबाइल का ज़्यादा इस्तेमाल वात को और तेज़ी से बढ़ाता है, क्योंकि इसमें लंबे समय तक बैठना, न्यूनतम गति और लगातार तनावरहित रहना शामिल है। यही वजह है कि आधुनिक जीवनशैली के कारण सर्वाइकल के मामले पहले से कहीं ज़्यादा देखे जा रहे हैं।
क्या आपका रोज़ का मोबाइल–लैपटॉप रूटीन वात दोष को और बिगाड़ सकता है?
अगर आप दिनभर लैपटॉप या मोबाइल पर रहते हैं, तो यह सिर्फ गर्दन की हड्डियों पर दबाव नहीं डालता, बल्कि आपके शरीर में वात दोष को भी बढ़ाता है। आयुर्वेद में कहा गया है कि जब आप लगातार एक ही जगह बैठे रहते हैं, शरीर को कम हिलाते-डुलाते हैं और देर तक स्क्रीन पर झुकते रहते हैं, तो शरीर में सूखापन, थकान और कमज़ोरी बढ़ती है। यही गुण वात दोष से जुड़े होते हैं।
लैपटॉप और मोबाइल पर लंबे समय तक काम करने से यह समस्याएँ बढ़ जाती हैं:
- कम गतिशीलता
पूरे दिन बैठे रहने से शरीर सुस्त हो जाता है और रक्त प्रवाह धीमा पड़ जाता है। यह वात वृद्धि का पहला कारण है। - स्क्रीन पर झुककर बैठना
झुकने से गर्दन पर दबाव बढ़ता है, जो सीधे वात को असंतुलित करता है। आप जितना झुकते हैं, दर्द उतना बढ़ता है। - नींद की कमी
देर रात तक मोबाइल चलाने से नींद प्रभावित होती है। नींद कम होने पर वात तेज़ी से बढ़ता है और दर्द और कठोरता बढ़ने लगती है। - तनाव में वृद्धि
लगातार ऑनलाइन रहने से मन भी थक जाता है। तनाव और चिंता भी वात दोष को सीधे बढ़ाते हैं।
इसलिए आपका रोज़ का डिजिटल रूटीन, अगर संतुलित न हो, तो वात दोष को बिगाड़कर सर्वाइकल दर्द बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
सर्वाइकल दर्द में आपकी रोज़मर्रा की गलतियाँ कौन-सी हैं जिन्हें तुरंत बदलना चाहिए?
कई बार दर्द का असली कारण कोई बड़ी बीमारी नहीं, बल्कि आपकी रोज़ की छोटी-छोटी गलतियाँ होती हैं। अगर आप सर्वाइकल से परेशान हैं, तो आपको अपनी दिनचर्या पर एक बार ध्यान देना ज़रूरी है।
सबसे आम गलतियाँ जो दर्द बढ़ाती हैं:
- एक ही मुद्रा में घंटों बैठना
अगर आप बिना उठे कई घंटे बैठे रहते हैं, तो गर्दन और पीठ की मांसपेशियाँ सख़्त होने लगती हैं। - मोबाइल को नीचे पकड़कर इस्तेमाल करना
यह आदत गर्दन पर सबसे ज़्यादा दबाव डालती है। - बहुत ऊँचा या बहुत नीचा तकिया
गलत तकिया रातभर आपकी गर्दन को खिंचाव की स्थिति में रखता है। - शरीर में पानी की कमी
कम पानी पीने से शरीर में सूखापन बढ़ता है, जो वात दोष को तेज़ करता है। - बिना ब्रेक के लगातार काम करना
जब आप समय-समय पर गर्दन नहीं घुमाते, नसों पर दबाव बढ़ जाता है। - गरम तेल की मालिश न करना
ठंडे मौसम और तनाव भरे काम के कारण गर्दन में कसाव बढ़ता है। बिना मालिश के यह कसाव जमता जाता है।
इन गलतियों को तुरंत सुधारने से दर्द कम होने में बहुत मदद मिलती है।
घर पर कौन-से आयुर्वेदिक उपाय आपको सर्वाइकल दर्द में राहत दे सकते हैं?
आयुर्वेद बहुत सरल और प्रभावी उपाय बताता है, जिन्हें आप घर पर ही आराम से अपना सकते हैं। ये उपाय वात दोष को शांत करते हैं और गर्दन व पीठ को राहत देते हैं।
- अजवाइन का गरम सेंक: अजवाइन को तवे पर हलका-सा भूनकर कपड़े में बाँधिए और गर्दन पर गरम सेंक लगाइए। यह दर्द और जकड़न को कम करने में बहुत कारगर है।
- सरसों के तेल में लहसुन की मालिश: सरसों के तेल में लहसुन भूनकर हलका गरम रहने पर गर्दन की मालिश करें। इससे रक्त संचार तेज़ होता है और स्नायु मुलायम होती हैं।
- गिलोय–हल्दी–अदरक का काढ़ा: इस काढ़े का सेवन शरीर की सूजन और दर्द कम करने में मदद करता है।
- मेथी दाना: मेथी दाना रातभर भिगोकर सुबह चबाना या दूध में मिलाकर पीना हड्डियों और स्नायु को मजबूती देता है।
- हलकी-फुलकी योग क्रियाएँ: भुजंगासन, ताड़ासन, मकरासन और गर्दन घुमाने वाले आसन दर्द कम करते हैं और लचीलेपन को बढ़ाते हैं।
- गुनगुने पानी से स्नान: गुनगुने पानी से नहाने से मांसपेशियाँ ढीली होती हैं और तनाव कम होता है।
- धूप का सेवन: रोज़ 15–20 मिनट धूप लेने से शरीर में विटामिन-डी की कमी पूरी होती है, जो हड्डियों को मज़बूत बनाता है।
ये सभी उपाय सरल हैं और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आसानी से शामिल किए जा सकते हैं।
लैपटॉप–मोबाइल उपयोग करने वालों के लिए सर्वाइकल से बचाव की सबसे जरूरी सलाहें क्या हैं?
अगर आपका काम स्क्रीन से जुड़ा है, तो आपको अपनी गर्दन की सेहत को लेकर और भी सावधान रहना होगा। छोटी-छोटी आदतें अपनाने से आप सर्वाइकल दर्द को काफी हद तक रोक सकते हैं।
महत्वपूर्ण सलाहें:
- हर 30 मिनट में एक बार उठकर शरीर को हिलाएँ: थोड़ी देर टहलने या खिंचाव करने से गर्दन का दबाव कम होता है।
- मोबाइल आँखों की ऊँचाई पर इस्तेमाल करें: इससे झुकने की ज़रूरत नहीं पड़ती और गर्दन पर दबाव नहीं बढ़ता।
- लैपटॉप को हमेशा मेज़ पर रखें: गोद में रखकर काम करना गर्दन को लगातार झुकाता है।
- सही तकिया चुनें: न बहुत ऊँचा और न बहुत नीचा। ऐसा तकिया लें जो गर्दन को प्राकृतिक स्थिति में रखे।
- शरीर को पर्याप्त पानी दें: पानी शरीर में चिकनाई बनाए रखता है और वात दोष को शांत करता है।
- दिन में हलका व्यायाम और रात में पूरी नींद लें: अच्छी नींद और नियमित व्यायाम मांसपेशियों को आराम देता है।
- तनाव कम रखें: तनाव बढ़ने से वात दोष और तेज़ी से असंतुलित होता है। इसलिए दिन में कुछ समय खुद को शांत करने के लिए ज़रूर निकालें।
ये सभी आदतें आपकी गर्दन, रीढ़ और पूरे शरीर की सेहत के लिए बहुत ज़रूरी हैं।
निष्कर्ष
सर्वाइकल दर्द आजकल सिर्फ कामकाजी लोगों की समस्या नहीं रहा, बल्कि हर उस व्यक्ति की चिंता बन गया है जो रोज़ाना कई घंटे मोबाइल और लैपटॉप पर गुज़ारता है। आपकी गर्दन जिस तरह लगातार दबाव झेलती है, वह आपको शुरुआत में महसूस नहीं होता, लेकिन धीरे-धीरे यह दर्द आपके दिनभर के काम, नींद और मन की शांति—सब पर असर डालने लगता है। अच्छी बात यह है कि अगर आप सही समय पर संकेत पहचान लें, अपनी मुद्रा सुधार लें और आयुर्वेदिक उपाय अपनाएँ, तो आपको काफी आराम मिल सकता है।
गर्दन को आराम देना, शरीर को चलाते रहना, सही आहार लेना और वात दोष को संतुलित रखना—ये सब छोटे कदम मिलकर आपकी सेहत को बहुत बेहतर बना सकते हैं। अपनी दिनचर्या में थोड़ा सा बदलाव भी आपको लंबे समय में बड़ी राहत दे सकता है।
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FAQs
लैपटॉप का उपयोग करने के बाद मेरी गर्दन में दर्द क्यों होता है?
आप जब लंबे समय तक झुककर लैपटॉप देखते हैं, तो गर्दन पर ज़्यादा दबाव पड़ता है। इससे स्नायु थक जाती हैं और दर्द शुरू हो जाता है।
सर्वाइकल को जड़ से खत्म करने के क्या घरेलू उपाय हैं?
गरम सेंक, सरसों–लहसुन तेल से मालिश, हलका योग, धूप सेवन और संतुलित आहार से धीरे-धीरे वात शांत होता है और दर्द कम होता है।
गर्दन की नस दबने से क्या-क्या प्रॉब्लम होती है?
नस दबने पर बाज़ू में झनझनाहट, सुन्नपन, कमज़ोरी और कभी-कभी तेज़ सिरदर्द भी हो सकता है। कई बार दर्द कंधे और पीठ तक फैल जाता है।
सर्वाइकल के दौरान क्या से परहेज़ करना चाहिए?
भारी वजन उठाने, झुकने, ऊँचे तकिए, ठंडी हवा, देर रात मोबाइल उपयोग, और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से बचना ज़रूरी है।
क्या लगातार स्क्रीन देखने से सर्वाइकल की समस्या बढ़ सकती है?
हाँ, लगातार नीचे देखकर काम करने से गर्दन सख़्त होती है, हड्डियों पर दबाव बढ़ता है और समय के साथ दर्द गंभीर हो सकता है।






















































































