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शीघ्रपतन को कैसे ठीक करें?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 12 Dec, 2024
  • category-iconUpdated on 22 Aug, 2026
  • category-iconSexual Health
  • blog-view-icon17936

संभोग के दौरान आधुनिक पुरुषों में शीघ्रपतन एक बहुत ही प्रचलित समस्या बन गई है। अक्सर यह स्थिति सिर्फ एक शारीरिक समस्या नहीं होती बल्कि प्रदर्शन संबंधी चिंता और मन में नकारात्मकता से भी जुड़ी होती है। 

आजकल की तेज़ जीवनशैली और गलत खान-पान ने इस स्थिति को और भी बदतर बना दिया है। 

यदि यह स्थिति आपके आत्मविश्वास को प्रभावित कर रही है, या आपको निराश महसूस करा रही है, तो चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह समस्या आपके विचार से कहीं अधिक सामान्य है, और कई लोग उपचार और जीवनशैली में संशोधन के बाद काफी बेहतर हो जाते हैं।

आखिर शीघ्रपतन है क्या?

सरल शब्दों में कहें तो, जब पुरुष अपनी इच्छा के विपरीत बहुत कम समय में स्खलित हो जाए और पार्टनर को संतुष्ट न कर पाए, तो इसे शीघ्रपतन कहा जाता है। यह केवल शारीरिक कमजोरी का लक्षण नहीं है; इसका गहरा असर मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। तनाव और गलत आदतों के कारण लिंग की मांसपेशियों और नसों में कमजोरी आ जाती है, जिससे वीर्य को रोकने की क्षमता कम हो जाती है।

अच्छी खबर यह है कि आयुर्वेदिक उपचार और जीवनशैली में सुधार से इस स्थिति को ठीक किया जा सकता है। आयुर्वेद इस स्थिति के लिए प्राकृतिक और सुरक्षित समाधान प्रदान करता है, जो न केवल आपकी शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि आपको प्राकृतिक तरीके से एक संतोषजनक और ऊर्जावान जीवन वापस देने में भी मदद करता है।

शीघ्रपतन के मुख्य कारण

इस समस्या को जन्म देने वाले कारणों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है-

शारीरिक कारण

  •   शरीर में हार्मोन का असंतुलन और अत्यधिक थकान।
  •   यौन अंगों की नसों में कमजोरी।
  •   शरीर में किसी भी कारण से अत्यधिक गर्मी का बढ़ना।
  •   मधुमेह जैसी बीमारियां, जो नसों को कमजोर करती हैं।
  •   खून की कमी या श्रोणि क्षेत्र में रक्त संचार की कमी।

मानसिक कारण

  •   आज के जमाने का बढ़ता स्ट्रेस , चिंता और मानसिक दबाव।
  •   प्रदर्शन की चिंता और आत्मविश्वास की कमी।
  •   मानसिक थकान या डिप्रेशन।

जीवनशैली और खान-पान

  •   अनियमित नींद और रात में देर तक जागना।
  •   ज्यादा तैलीय, फास्ट फूड और गर्म तासीर वाले भोजन का अत्यधिक सेवन।
  •   धूम्रपान, मद्यपान और तम्बाकू का सेवन।
  •   अत्यधिक हस्तमैथुन की आदत या कम उम्र में संभोग।

आयुर्वेद में शीघ्रपतन का इलाज

विशेषज्ञ मानते हैं कि आयुर्वेदिक चिकित्सा केवल लक्षणों को नहीं दबाती, बल्कि यह शरीर और मन के संतुलन को सुधार कर शीघ्रपतन को जड़ से खत्म करने का प्रयास करती है।

प्रमुख आयुर्वेदिक उपाय

  • आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ- अश्वगंधा, शतावरी, सफेद मूसली और ब्राह्मी जैसी औषधियां शरीर की खोई हुई ताकत लौटाती हैं और मानसिक तनाव को कम कर संतुलन बढ़ाती हैं।
  • आयुर्वेदिक तेल से मालिश- विशेष हर्बल तेलों का उपयोग रक्त संचार को सुधारता है, मांसपेशियों को ताकत देता है और यौन क्षमता में वृद्धि करता है।
  • योग और प्राणायाम- ये तकनीकें मानसिक तनाव को कम करती हैं और शरीर में ऊर्जा के स्तर को सुचारू बनाए रखती हैं।

इन उपायों का नियमित पालन करने से न केवल शीघ्रपतन की समस्या जल्दी ठीक होती है, बल्कि आप अपने दैनिक जीवन में एक नया आत्मविश्वास भी महसूस करते हैं।

घरेलू उपाय और आसान नुस्खे

कुछ सरल और प्राकृतिक घरेलू उपाय भी शीघ्रपतन को नियंत्रित करने में बहुत मददगार साबित होते हैं-

  • शहद और काली मिर्च- इसका नियमित सेवन करने से शरीर में ऊर्जा का संतुलन बनता है और यौन शक्ति बढ़ती है।
  • बादाम और अखरोट- ये मेवे आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो शारीरिक ऊर्जा और स्टैमिना बढ़ाने में विशेष रूप से मदद करते हैं।
  • संतुलित आहार- अपने भोजन में ताजी हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना बेहद जरूरी है।
  • नियमित व्यायाम- शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से शरीर फिट और मजबूत बनता है, और जननांगों की तरफ रक्त का प्रवाह बेहतर होता है।
  • योग और ध्यान- यह दिमाग को शांत कर मानसिक शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करते हैं।

शीघ्रपतन की रोकथाम में ध्यान रखने योग्य बातें

  •  ब्रह्मचर्य का संयमित रूप से पालन करें।
  •  अत्यधिक तीखे और मसालेदार पदार्थों का सेवन कम से कम करें।
  •  स्ट्रेस मैनेजमेंट के तरीकों पर ध्यान दें।
  •  किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन तुरंत बन्द कर दें।
  •  चाय और कॉफी का सेवन सीमित मात्रा में ही करें।
  •  समस्या गंभीर महसूस होने पर बिना संकोच डॉक्टर से तुरंत चिकित्सा संबंधी परामर्श लें।

क्या न करें?

  •  सुबह देर तक सोने और रात में देर तक जागने की आदत से बचें।
  •  दिनभर अत्यधिक स्त्री चिंतन या कामुक विचारों से खुद को दूर रखें।
  •  शारीरिक निष्क्रियता से बचें; इसके बजाय नियमित रूप से योगासन व प्राणायाम का अभ्यास करें।

निष्कर्ष

शीघ्रपतन कोई असंभव या लाइलाज समस्या नहीं है। आयुर्वेद के प्राकृतिक, सुरक्षित और असरदार उपायों को अपनाकर आप शीघ्रपतन को रोक सकते हैं और अपने जीवन में आत्मविश्वास वापस ला सकते हैं। आज ही अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव शुरू करें, सही और पौष्टिक आहार लें, नियमित व्यायाम करें, और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों व योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। यह कदम आपके जीवन को फिर से खुशहाल और संतोषजनक बनाने में पूरी मदद करेगा।

References:

View of The Holistic Management of Premature Ejaculation Through Ayurveda - A Case Report

Premature ejaculation: an update on definition and pathophysiology - PMC

Premature ejaculation - treatment, causes and diagnosis | healthdirect

Premature Ejaculation - PubMed

Premature ejaculation: definition and prevalence | International Journal of Impotence Research

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

सही आयुर्वेदिक उपाय, संतुलित आहार और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव करके शीघ्रपतन की समस्या को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।

हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है, लेकिन अधिकांश पुरुषों को नियमित उपचार के बाद 3-4 हफ्तों में धीरे-धीरे सकारात्मक सुधार महसूस होने लगता है।

यदि समस्या गंभीर है या लंबे समय से बनी हुई है, तो स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर या विशेषज्ञ से सही परामर्श लेना बहुत जरूरी है।

आयुर्वेदिक औषधियों और तेल का उपयोग हमेशा चिकित्सक या विशेषज्ञ के बताए गए निर्देशानुसार ही नियमित रूप से करना चाहिए।

मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन यौन स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव डालते हैं। इसलिए इलाज के साथ-साथ ध्यान, योग और प्राणायाम करना महत्वपूर्ण है।

घरेलू उपाय शुरुआती लक्षणों में बहुत मददगार होते हैं, लेकिन स्थायी और सबसे असरदार परिणामों के लिए इन्हें आयुर्वेदिक उपचार और जीवनशैली में बदलाव के साथ अपनाना चाहिए।

अत्यधिक मसालेदार, जंक फूड और गर्म तासीर वाला भोजन शरीर में गर्मी और पित्त को बढ़ाता है, जो इस समस्या का एक बड़ा कारण है। सादा और पौष्टिक आहार लेना हमेशा फायदेमंद होता है।

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