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अभ्यंग मसाज – पूरे शरीर का आयुर्वेदिक तेल मालिश उपचार

अभ्यंग मसाज एक तरह की आयुर्वेदिक मालिश है। यह मालिश नींद की समस्याओं को दूर करने के लिए , तनाव दूर करने के लिए, डिप्रेशन और स्ट्रेस आदि को कम करने के लिए मरीज को दी जाती है। मालिश देने के बाद मरीज रिलैक्स महसूस करता है, शरीर आराम की अवस्था में आ जाता है और तनाव कम हो जाता है। यह मालिश कई तरह की औषधियों और आयुर्वेदिक तेलों से की जाती है, जिससे इम्युनिटी बूस्ट होती है और बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो जाता है और सारे दोष संतुलित हो जाते हैं। यह मालिश एक ट्रीटमेंट की तरह होती है। इसे डॉक्टर द्वारा ट्रीटमेंट की तरह सुझाया जाता है कि मरीज को कितनी बार मालिश लेनी चाहिए, किस औषधि से मालिश करानी चाहिए और किस तेल से करानी चाहिए। यह मरीज की समस्या और बीमारी के अनुसार डॉक्टर तय करता है। इस मालिश से थकान दूर हो जाती है और शरीर में नई ऊर्जा महसूस होती है। त्वचा में जो रूखापन रहता है, वह ठीक हो जाता है। तनाव और चिंता दूर हो जाती है। पूरी बॉडी को इससे आराम मिल जाता है। मांसपेशियों की थकान को दूर करने में यह लाभदायक है और इससे स्वास्थ्य भी ठीक हो जाता है।

अधिकतर यह मालिश सिर, पैरों के तलवों, गर्दन, कंधे और पीठ पर की जाती है। मालिश 45 से 90 मिनट तक की होती है। मालिश होने के तुरंत बाद मरीज को काम करने या चलने-फिरने के लिए मना किया जाता है और उन्हें आराम करने के लिए कहा जाता है। कुछ समय बाद शरीर पूरी तरह ताज़ा महसूस करता है। इसके बाद स्नान करने की सलाह दी जाती है। इस मालिश से हृदय की सभी नाड़ियाँ खुल जाती हैं जिससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है। पूरे शरीर में रिलैक्सेशन महसूस होता है। सकारात्मक महसूस होता है। शरीर और मन दोनों को शांति मिलती है। वात दोष जब बढ़ जाता है, तो उसे कम करने के लिए भी यह मालिश सहायक होती है।

आयुर्वेद में अभ्यंग मसाज का महत्व

आयुर्वेद में इस मसाज बहुत महत्व है। आयुर्वेद के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को स्ट्रेस है, एंग्ज़ायटी है, शरीर में दर्द है, नींद नहीं आती है, तनाव है, हार्ट की बीमारी है, बीपी की बीमारी है, ब्लड सर्कुलेशन अच्छा नहीं है, नसों में पेन रहता है, तो यह मसाज इन सारी समस्याओं को हल करती है। इन सभी समस्याओं से छुटकारा दिलाती है और बॉडी की नर्व्स को रिलैक्स फील कराती है। शरीर और माइंड का स्ट्रेस कम कर देती है और इससे रिलेटेड सारी बीमारियों में भी मदद करती है।

जैसे रूखापन, डैंड्रफ और भी कई बीमारियों में यह हेल्पफुल है। यह मालिश कई आयुर्वेदिक और हर्बल औषधियों के तेल से की जाती है और यह पूरे शरीर में की जाती है। इससे त्वचा को, हड्डियों को और नसों को पोषक तत्व मिलते हैं और वे और मजबूत होते हैं। इस मालिश से इम्युनिटी भी बढ़ती है, जिससे इंसान बीमारियों से लड़ सकता है। इससे बॉडी में एक नई एनर्जी मिलती है और माइंड रिलैक्स हो जाता है।

यह मसाज कोई मज़े के लिए नहीं दिया जाता। यह मसाज एक ट्रीटमेंट की तरह दिया जाता है। यह एक बार लेने से या अपने अनुसार लेने से उतना फायदा नहीं देता। लेकिन अगर आप डॉक्टर को दिखाएंगे, तो वह आपकी प्रॉब्लम का एनालिसिस करेगा, आपके दोषों को देखेगा, फिर उसके अनुसार ही तेल या हर्बल औषधि डिसाइड करेगा और कितनी बार यह मसाज लेनी है, यह सजेस्ट करेगा। अगर आप डॉक्टर के अनुसार यह मसाज लोगे, तो यह मसाज आपको और ज़्यादा फायदा देगी और बॉडी व माइंड को बेहतर रिलैक्सेशन देगी।

आज के तनावपूर्ण जीवन में अगर यह लाइफस्टाइल में ऐड हो जाए, तो बॉडी, माइंड, नर्व्स और बोन्स सभी के लिए फायदेमंद होगा। ओल्ड एज में जो जॉइंट पेन होते हैं, उनमें भी यह मालिश फायदा देती है, पेन में राहत मिलती है और जॉइंट्स फ्लेक्सिबल रहते हैं। यह मसाज मेंटल हेल्थ के लिए भी बहुत हेल्पफुल है और आपकी बॉडी के हर एक पार्ट के लिए बहुत फायदेमंद है।

क्योंकि कई हर्बल औषधियों के तेल मालिश के थ्रू बॉडी में एब्ज़ॉर्ब होते हैं, जिससे बॉडी को रिलीफ मिलता है और माइंड को आराम देता है। यह दोषों को बैलेंस करता है और वात दोष को बढ़ने से रोकता है।

अभ्यंग मसाज कैसे की जाती है? 

यह मालिश एक आयुर्वेदिक मालिश है जो आयुर्वेद के अकॉर्डिंग ही की जाती है। कोई भी इसे अपने तरीके से या नए ढंग से नहीं करता। यह एक ट्रीटमेंट है, तो इसका अपना एक प्रोसेस है। उसी प्रोसेस से ही मालिश की जाती है जिससे शरीर को रिलैक्स मिलता है, बॉडी को एनर्जी मिलती है, इम्युनिटी बढ़ती है। सबसे पहले एक शांत कमरे में, हल्के गर्म कमरे में पर्सन को ले जाया जाता है। उसको टेबल पर लिटाया जाता है, रिलैक्स करने बोला जाता है। पर्सन शांति से रिलैक्स करता है। फिर उसके दोषों को स्टडी किया जाता है, बीमारी को समझा जाता है। उसके अकॉर्डिंग औषधि चुनी जाती है, उसका तेल बनाया जाता है। कई औषधियों के मिश्रण से यह तेल तैयार किया जाता है, जो त्वचा के अकॉर्डिंग हो और उसको सूट करे। फिर स्टार्टिंग की जाती है सिर से, फिर गर्दन, कंधे, चेस्ट, पेट, लेग्स, फीट। यह हार्ट की दिशा में रखी जाती है ताकि सारी नर्व्स खुले और स्ट्रोक्स के चांसेज़ कम हों। यह एक कंटीन्यूअस स्पीड में ही मालिश की जाती है। 30 से 35 मिनट तक इसकी अवधि होती है।

यह मालिश इस तरह से की जाती है ताकि जो तेल है, आयुर्वेदिक औषधियाँ हैं, वो आपकी त्वचा के अंदर एब्ज़ॉर्ब हों और आपको बेनिफिट दें। पूरी तरह से तेल आपके शरीर में लगाया जाता है। इस प्रोसेस के दौरान काफ़ी आनंद आता है, रिलैक्स फील होता है। सारी औषधियाँ बॉडी में एब्ज़ॉर्ब हो जाती हैं, इनर बॉडी में भी फायदा होता है। नसों में प्रेशर दिया जाता है, दबाया जाता है, तो ब्लड सर्कुलेशन ठीक हो जाता है। आपके जॉइंट्स फ्लेक्सिबल हो जाते हैं। पेन रहता है आपकी बॉडी में तो वह भी ठीक हो जाता है। मालिश करने के बाद थोड़ी देर पदार्थ आपके शरीर में लगा रहने दिया जाता है ताकि वह ठीक से एब्ज़ॉर्ब हो जाए। इसके बाद स्नान कराया जाता है, हल्के गुनगुने पानी से नहलाया जाता है। इसके बाद बॉडी पूरी तरह से रिलैक्स हो जाती है, पूरी तरह से एनर्जी आ जाती है, बॉडी में एकदम रिलैक्स फील होता है।

अभ्यंग मसाज से किन समस्याओं में राहत मिलती है?

तनाव, स्ट्रेस और एंग्ज़ायटी

अभ्यंग मसाज तनाव, स्ट्रेस और एंग्ज़ायटी में आराम देता है। पूरी बॉडी रिलैक्स हो जाती है। मसाज इस तरह से की जाती है कि व्यक्ति को आनंद आए और रिलैक्स फील करे। इससे उसका मन शांत हो जाता है, माइंड calm हो जाता है और एक नई एनर्जी मिलती है।

नींद न आना (अनिद्रा)

अभ्यंग मसाज करते वक्त थेरेपिस्ट पूरी नसों को दबाता है और मसाज करता है। इससे सारी नर्व्स खुल जाती हैं और पूरी बॉडी में पेन गायब हो जाता है। पूरी बॉडी रिलैक्स हो जाती है, जिससे नींद अच्छे से आती है और नींद न आने की समस्या दूर हो जाती है।

शरीर की थकान और कमजोरी 

इस मसाज से शरीर की थकान और कमजोरी  दूर हो जाती है। पूरी बॉडी का तेल से मसाज किया जाता है, जिससे बॉडी पूरी तरह रिलैक्स हो जाती है। पेन मुक्त हो जाती है और कई हर्बल औषधियों से मिश्रित तेल जब शरीर में अब्ज़ॉर्ब होता है तो नई ऊर्जा मिलती है। शरीर को नई एनर्जी मिलती है, जिससे कमजोरी नहीं लगती और वीकनेस की समस्या दूर हो जाती है।

मांसपेशियों में जकड़न और दर्द

इस मसाज में पूरे मांसपेशियों को भी दबाया जाता है और तेल लगाया जाता है। जो हार्डनेस और जकड़न होती है, वह कम हो जाती है। पूरी बॉडी की मसाज करने के कारण बॉडी में पेन भी खत्म हो जाता है और बॉडी को बहुत आराम और रिलैक्स फील होता है।

गर्दन, कंधे, कमर और पीठ दर्द

औषधियों के तेल से गर्दन, कमर और पीठ में मसाज की जाती है। औषधियां वहां अपना असर दिखाती हैं और दर्द गायब कर देती हैं। मसाज के दौरान बॉडी को दबाया जाता है, जिससे बॉडी रिलैक्स फील करती है और दर्द गायब हो जाता है।

जोड़ो का दर्द और जॉइंट स्टिफनेस

अभ्यंग मसाज से जोड़ो का दर्द  भी कम होता है और जोइंट्स फ्लेक्सिबल हो जाते हैं। मसाज जो की जाती है, उसके कारण जोड़ो का दर्द गायब हो जाता है। हर्बल औषधियों के कारण जोइंट्स फ्लेक्सिबल हो जाते हैं, और मजबूत बन जाते हैं। इससे पेन से राहत मिलती है।

आधुनिक जीवनशैली में अभ्यंग मसाज क्यों जरूरी है?

आज की जीवनशैली में यह मसाज बहुत ज़रूरी है। आज के समय में ज़्यादातर लोग मोबाइल के सामने या लैपटॉप के सामने समय बिताते हैं, चाहे वर्क फ्रॉम होम हो या वर्क फ्रॉम ऑफिस हो। इससे दिमाग में स्ट्रेस बढ़ता है। स्ट्रेस के कारण दिमाग कहीं भी एक जगह फोकस नहीं कर पाता, कुछ सोच नहीं पाता। पूरा दिन थकान महसूस होती है। थकान के कारण नींद नहीं होती। नींद न होने के कारण बॉडी लो एनर्जी फील करती है। कई लोगों को एंग्ज़ायटी होती है, घबराहट होती है, हार्ट की बीमारी होती है, जॉइंट्स पेन करते हैं, पूरी बॉडी में दर्द रहता है। तो इन सब से राहत पाने के लिए अभ्यंग मसाज बहुत ही ज़रूरी है। आज के समय में अगर आप इसे अपनी डेली लाइफस्टाइल में ऐड करते हैं, तो यह सारी समस्याओं से आपको छुटकारा मिल जाता है। मसाज एक थैरेपी प्रोसेस है, एक ट्रीटमेंट है, जो आपको रिलैक्स फील कराता है। इसमें कई औषधियाँ यूज़ होती हैं। इसमें जो तेल होता है, वह कई औषधियों का मिश्रण होता है, जिससे आपके दोष बैलेंस रहते हैं। आपके जॉइंट्स को यह औषधि के पदार्थ फ्लेक्सिबल बनाते हैं। पूरी बॉडी को रिलैक्स फील देते हैं।

मसाज करने से बॉडी में एक नई एनर्जी डेवलप होती है। आपकी बॉडी पूरी रिलैक्स हो जाती है, जिसके कारण आपको प्रॉपर नींद आती है। बॉडी में थकान महसूस नहीं होती। यह मसाज सिर से शुरू होती है और पैरों के तलवों तक की जाती है। इससे आपकी बॉडी के हर पार्ट की मालिश की जाती है और बॉडी का हर पार्ट रिलैक्स हो जाता है। सिर पर मालिश करने के कारण आपको काफ़ी रिलैक्स फील होता है, स्ट्रेस कम हो जाता है। गर्दन के दर्द, कंधे के दर्द, शोल्डर दर्द — इन सब में भी आपको आराम मिलता है। इसमें कई जो हर्बल औषधियाँ यूज़ होती हैं, वे आपकी बॉडी में एब्ज़ॉर्ब होती हैं और आपकी इनर बॉडी नर्वस सिस्टम को भी फायदा पहुँचाती हैं। यह आपकी इम्युनिटी बूस्ट करती है, जिससे आपको नई बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। आपका ब्लड प्रेशर मेंटेन रहता है। कई बार कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण ब्लड नसों में ढंग से पास नहीं हो पाता, तो यह मसाज करते समय डॉक्टर नसों में प्रेशर देता है, नसों को रिलैक्स करता है, जिससे ब्लड बॉडी में ठीक तरह से फ्लो होता है और हार्ट की समस्या नहीं होती। इस मालिश से शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य ठीक होते हैं। दोनों पर प्रभाव पड़ता है। यह मसाज लेने की कोई साइड इफेक्ट या कोई नुकसान नहीं है। मसाज लेने से आपका शरीर फ्लेक्सिबल होता है, आपका फोकस बढ़ता है, शरीर रिलैक्स हो जाता है, माइंड ठीक तरह से काम करता है और ओवरऑल आपकी हेल्थ बढ़िया रहती है। यह कोई स्पा मसाज नहीं है कि एक बार करें तो आपको आराम मिल जाए। यह ट्रीटमेंट की तरह होती है। कई बार डॉक्टर आपको एक बार से ज़्यादा मसाज लेने के लिए कह सकता है, आपकी प्रॉब्लम के अकॉर्डिंग। और अगर आप डॉक्टर के अकॉर्डिंग मसाज लेते हो, तो आपको पूरी तरह से फायदा होता है। आपके जीवन में यह मसाज एक अहम भूमिका निभाती है।

FAQs

1. क्या अभ्यंग मसाज रोज़ करवाई जा सकती है या हफ्ते में एक बार ही सही है?

अभ्यंग मसाज रोज़ भी की जा सकती है, लेकिन रोग, आयु और दोष-प्रकृति के अनुसार इसकी फ़्रीक्वेंसी डॉक्टर तय करते हैं।

2. अभ्यंग मसाज में कौन-सा आयुर्वेदिक तेल सबसे ज़्यादा उपयोग किया जाता है?

तेल का चुनाव व्यक्ति के वात-पित्त-कफ दोष के अनुसार किया जाता है, जैसे तिल तेल, बला तेल या दशमूल तेल।

3. क्या अभ्यंग मसाज से वजन घटाने में मदद मिलती है?

अभ्यंग मसाज मेटाबॉलिज़्म और ब्लड सर्कुलेशन सुधारती है, जिससे वजन संतुलन और बॉडी डिटॉक्स में सपोर्ट मिलता है।

4. सर्वाइकल, स्लिप डिस्क या कमर दर्द में अभ्यंग मसाज सुरक्षित है?

हाँ, लेकिन ऐसे मामलों में मसाज केवल अनुभवी आयुर्वेदिक थेरेपिस्ट द्वारा डॉक्टर की सलाह से करानी चाहिए।

5. अभ्यंग मसाज के बाद तुरंत नहाना चाहिए या कुछ समय रुकना ज़रूरी है?

मसाज के बाद कम से कम 30–45 मिनट रुकना चाहिए ताकि औषधीय तेल त्वचा में पूरी तरह अवशोषित हो सके।

6. क्या डायबिटीज़ या बीपी के मरीज अभ्यंग मसाज करवा सकते हैं?

डायबिटीज़ और हाई बीपी के मरीज अभ्यंग मसाज करवा सकते हैं, लेकिन तेल और प्रेशर डॉक्टर द्वारा नियंत्रित होना चाहिए।

7. अभ्यंग मसाज से नींद की समस्या कितने समय में सुधरती है?

अक्सर 3–5 सिटिंग्स में नींद की गुणवत्ता बेहतर होने लगती है, खासकर वात दोष से जुड़ी अनिद्रा में।

8. क्या अभ्यंग मसाज मानस‍िक तनाव और एंग्ज़ायटी में सच में असरदार है?

अभ्यंग मसाज नर्वस सिस्टम को शांत करती है, जिससे स्ट्रेस हार्मोन कम होते हैं और मानसिक स्थिरता बढ़ती है।

9. क्या गर्भावस्था में अभ्यंग मसाज कराई जा सकती है?

गर्भावस्था में केवल प्रेग्नेंसी-सेफ आयुर्वेदिक तेलों से और विशेषज्ञ की निगरानी में ही मसाज करानी चाहिए।

10. अभ्यंग मसाज और स्पा ऑयल मसाज में मुख्य अंतर क्या है?

अभ्यंग मसाज एक चिकित्सीय आयुर्वेदिक उपचार है, जबकि स्पा मसाज केवल रिलैक्सेशन के लिए होती है।

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