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रूमेंटॉइड आर्थराइटिस के लिए सरल घरेलू उपचार

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 16 Dec, 2024
  • category-iconUpdated on 25 Feb, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon28907

रूमेंटॉइड आर्थराइटिस (आर.ए.) एक ऑटोइम्यून रोग है, जो शरीर के विभिन्न अंगों के जोड़ों और उनके आसपास के ऊतकों (टिश्यूज़) को नुकसान पहुंचाता है। यदि यह स्थिति बहुत लम्बे समय तक रहती है, तो जोड़ों में विकार और जोड़ों या उनसे जुड़े अंगों में टेढ़ापन भी आ सकता है। जोड़ों पर सूजन होना, अकड़न हो जाना और दर्द रहना, इसके सामान्य लक्षण हैं। आयुर्वेद में इसे आमवात के नाम से जाना जाता हैं।

डॉ. दादी कहती हैं, ‘‘पुराने समय में लोग भले ही घी-दूध खूब खाते-पीते हों, लेकिन वो उतनी ही मेहनत भी करते थे। उनकी जठराग्नि (भोजन को पचाने वाली ऊर्जा) बहुत बढ़िया होती थी और शरीर में आम को बढ़ने ही नहीं देती थी।’’ खराब पाचन तंत्र, शरीर में आम (विषैले तत्वों) बनने का कारण होता है और वात की अधिकता इन विषैल पदार्थों को शरीर के विभिन्न भागों में पहुंचाती है, जिसके परिणामस्वरूप जोड़ों पर जमा होकर यह आमवात बनाता है।

यहां पर डॉ. दादी आपको कुछ आसान से घरेलू नुस्खे बता रही हैं, जो इस रोग से पीड़ित लोगों के लिए बेहद फायदेमंद हैं।

रूमेंटॉइड आर्थराइटिस के सामान्य लक्षण

  • जोड़ों में लगातार सूजन
  • सुबह के समय अकड़न (30 मिनट से अधिक)
  • हाथ, कलाई, घुटने या पैरों के छोटे जोड़ों में दर्द
  • थकान और कमजोरी
  • लंबे समय में जोड़ों का टेढ़ापन

यदि समय पर उपचार न मिले, तो यह रोग स्थायी क्षति पहुँचा सकता है।

घरेलू नुस्खे 

पिप्पली, काली मिर्च और सौंठ चूर्ण

तीनों को समान मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ लें। यह पाचन सुधारने और सूजन कम करने में सहायक माना जाता है।

पिप्पली मिश्रित काढ़ा

पिप्पली, पिप्पलीमूल, चव्य और सौंठ को उबालकर तैयार काढ़ा पिया जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार यह आम को कम करने में सहायक होता है।

रेत से सूखी सिकाई

गर्म रेत की पोटली से प्रभावित जोड़ों की हल्की सिकाई करने से अकड़न और दर्द में अस्थायी राहत मिल सकती है।

लहसुन का सेवन

सुबह 1–2 लहसुन की कलियाँ लेने से सूजन कम करने में मदद मिल सकती है, क्योंकि लहसुन में प्राकृतिक एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं।

अरण्डी का तेल

सप्ताह में 1–2 बार सीमित मात्रा में (विशेषज्ञ की सलाह से) सेवन किया जाता है। यह पाचन सुधार और वात संतुलन के लिए उपयोगी माना जाता है।

मेथी, हल्दी और अदरक

इनका मिश्रण सूजन कम करने में सहायक हो सकता है। हल्दी में मौजूद क्यूमिन सूजनरोधी गुणों के लिए जाना जाता है।

जीवनशैली में सुधार

  • हल्का और सुपाच्य भोजन लें
  • तला-भुना और अत्यधिक भारी भोजन कम करें
  • नियमित हल्का व्यायाम (जैसे योग, स्ट्रेचिंग)
  • पर्याप्त नींद लें
  • तनाव कम रखें

रूमेंटॉइड आर्थराइटिस की जांच कैसे की जाती है?

रूमेंटॉइड आर्थराइटिस (RA) की पुष्टि केवल एक टेस्ट से नहीं होती। डॉक्टर लक्षण, शारीरिक जांच और लैब टेस्ट के संयोजन से निदान करते हैं।

 1. शारीरिक जांच

  • जोड़ों में सूजन, गर्माहट और दर्द
  • सुबह 30 मिनट से अधिक अकड़न
  • दोनों तरफ (जैसे दोनों हाथ) समान लक्षण

2. रक्त परीक्षण (Blood Tests)

  • Rheumatoid Factor (RF)
  • Anti-CCP Antibody Test (अधिक विशिष्ट माना जाता है)
  • ESR और CRP (सूजन की मात्रा जानने के लिए)

3. इमेजिंग टेस्ट

  • एक्स-रे
  • MRI
    अल्ट्रासाउंड

इनसे जोड़ों की सूजन और संभावित क्षति का पता चलता है।

शुरुआती चरण में सही जांच बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि जल्दी इलाज शुरू करने से जोड़ों की स्थायी क्षति रोकी जा सकती है।

क्या तनाव (Stress) से रूमेंटॉइड आर्थराइटिस बढ़ सकता है?

हाँ, तनाव RA के लक्षणों को बढ़ा सकता है।

रूमेंटॉइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून रोग है और तनाव इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है। लगातार मानसिक तनाव:

  • सूजन (inflammation) को बढ़ा सकता है
  • दर्द की संवेदनशीलता बढ़ा सकता है
  • थकान और नींद की समस्या पैदा कर सकता है
  • flare-ups (लक्षणों का अचानक बढ़ना) का कारण बन सकता है

 तनाव कम करने के उपाय

  • ध्यान (Meditation)
  • गहरी साँस लेने की तकनीक
  • हल्का योग
  • पर्याप्त नींद
  • परिवार और मित्रों से भावनात्मक सहयोग

मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल RA प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आर.ए. मैं कौन-कौन से योगासन फायदेमंद हैं?

हल्का और नियंत्रित योग जोड़ों का लचीलापन (flexibility) और मांसपेशियों की मजबूती बढ़ाने में सहायक हो सकता है। लेकिन तीव्र दर्द या सूजन के समय भारी व्यायाम नहीं करना चाहिए।

लाभकारी योगासन:

  • ताड़ासन (Tadasana) – शरीर का संतुलन और मुद्रा सुधारता है
  • वृक्षासन (Vrikshasana) – जोड़ों की स्थिरता बढ़ाता है
  • भुजंगासन (Bhujangasana) – रीढ़ की लचीलापन बढ़ाता है
  • पवनमुक्तासन (Pawanmuktasana) – जोड़ों की गतिशीलता सुधारने में मदद
  • हल्के हाथ और पैर के स्ट्रेचिंग अभ्यास

ध्यान रखें:

  • योग प्रशिक्षक या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लें
  • दर्द होने पर अभ्यास रोक दें
  • नियमितता रखें, लेकिन अति न करें

घरेलू नुस्खे

  • पिसी हुई पिप्पली, काली मिर्च और सौंठ को बराबर मात्रा में मिला लें। इस तरह तैयार चूर्ण को दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ लें।

  • पिप्पली, पिप्पली की जड़ या पिप्पलीमूल, चव्य और सौंठ सबके दो बड़े चम्मच (टेबल स्पून) लें। इसे 4 लीटर पानी या दूध में आधा रह जाने तक उबालें। छानकर कर रख लें, जब भी प्यास लगे इसे पिएं।

  • रेत से सूखी सिकाई करना इस रोग के लिए बहुत फायदेमंद है। कपड़े की चार तह बना लें, इसके बीच में रेत रखें और इसकी एक पोटली-सी बना लें। इस पोटली से दर्द वाले जोड़ पर दबाव के साथ सिकाई करें, ताकि जोड़ों पर जमा हुआ अतिरिक्त आम पिघल जाए। पोटली को गर्म करके सिकाई करें, पोटली को तवे पर रखकर गर्म करें।

  • रोज सुबह लहसुन की 2 छिली हुई कलियां पानी के साथ लें।

  • सप्ताह में एक या दो बार सोने से पहले अरण्डी के तेल का सेवन करें। यह आम (विषैल तत्वों) को हटाने और वात को संतुलित करने में मददगार है।

  • मेथी, हल्दी और अदरक को बराबर मात्रा में पीस लें। एक छोटी चम्मच सुबह-शाम सेवन करें।

नोट :

इन नुस्खों को आजमाने से पहले किसी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य ले लें। कृपया याद रखें, घरेलू उपचार को दवाओं के स्थान पर प्रयुक्त नही किया जा सकता। अगर इससे आपकी हालत में सुधार नही आता है, तो किसी चिकित्सक की मदद अवश्य लें।

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