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वर्किंग महिलाओं में lunch delay होना energy और mood को कैसे बदलता है?

Information By Dr Bindu Bansal     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 27 Aug, 2026
  • category-iconUpdated on 27 Aug, 2026
  • category-iconWomen's Health
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सुबह की भागदौड़ , घर की जिम्मेदारियां , ऑफिस की मीटिंग्स और लगातार आने वाले कामो के बीच लंच का समय अक्सर सबसे पहले नज़रअंदाज़ होता है ,कई बार वर्किंग वीमेन सुबह नाश्ता करने के बाद दोपहर 2,3 बजे तक खाना नहीं खा पाती , कुछ महिलाये तो काम पूरा करने के चक्कर में लंच छोड़ देती है

शुरुआत में यह आदत सामान्य लग सकती है,लेकिन बार बार लंच डिले करने से दिमाग और शरीर इसकी प्रतिकिर्या दे सकते है ,एनर्जी का काम लगना ,चिड़चिड़ापन ,ध्यान लगाने में दिक्कत होना , बाद और भी ज्यादा भूख का एहसास होना आदि | 

लंच में देरी होने पर एनर्जी क्यों गिरती है? 

हमारा शरीर लगातार एनर्जी का इस्तेमाल करता रहता है ,सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर के खाने तक बहुत लम्बा गैप हो जाता है जिससे शरीर को कमजोरी या लौ एनर्जी महसूस हो सकती है , और सुबह के नाश्ते में अगर पोषक तत्त्व कम हो और सही नहीं नहीं किआ गया हो तोह आपकी भूख समय से साथ ज्यादा लगने लगती है |

इस दौरान कुछ महिलाओं को ऐसा लग सकता है कि उनका काम करने का मन नहीं कर रहा है ,शरीर भारी है या बार-बार चाय कॉफी लेने की जरूरत पड़ रही है यह जरूरी नहीं है कि हर बार इसका कारण केवल ब्लड शुगर गिरना हो नींद की कमी ,डिहाइड्रेशन ,तनाव और लंबे समय तक बैठकर काम करना भी थकान में योगदान दे सकता है |

मूड पर भी पड़ सकता है असर

भूख केवल पेट से जुड़ी चीज नहीं है , लंबे समय तक खाना नहीं मिलने पर कुछ लोगों में मूड भी बदल सकता है,जब भूख बहुत बढ़ जाती है तो छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है ऑफिस में इसका असर बातचीत और फैसला लेने की क्षमता पर दिखाई दे सकता है, इस वजह से कभी-कभी महिला को लगता है कि वह बिना किसी खास कारण के परेशान हो रही है जबकि उसका दिन में एक बड़ा कारण सिर्फ लेट खाना हो सकता है |

लंच में देरी के बाद ज्यादा भूख क्यों लगती है?

जब हम लंच टाइम से नहीं करते और लंच करने में बहुत घंटे का टाइम हम बिता चुके हैं ,इस सब के बाद लंच बहुत जल्दी और ज्यादा मात्रा में खाया जा सकता है शाम तक फिर क्रेविंग्स बढ़ सकती है जैसे की बिस्कुट, नमकीन ,मीठा या फास्ट फूड जैसे snacks लेने की इच्छा तीव्र हो सकती है , अगर यह पैटर्न रोज चलता है तो पूरे दिन का ईटिंग पैटर्न असंतुलित हो सकता है|

क्या हर दिन लंच एक टाइम पे करना जरूरी है?

हर व्यक्ति को बिल्कुल एक फिक्स टाइम पर खाना जरूरी नहीं है लेकिन रोजाना बहुत बड़े गैप रखना भी अच्छा रूटिंग नहीं माना जाता है अगर किसी महिला का काम 9 से 6 बजे का है तोह उसके लिए ऐसा लंच का टाइम बेहतर है जो सामन्यत 12 से 1 बजे क बीच में हो , उससे रोज टालने की वजाये पहले ही प्लान करना चाइये | जिसका पता हमे अपने नाश्ते के टाइम के हिसाब से चल सकता है नाश्ते के 4,5 घंटे बाद खाना उत्तम है | 

वर्किंग वीमेन के लिए लंच टाइम को कैसे प्रैक्टिकल बनाएं ?

ध्यान दे यह सब टिप्स आपके लंच में थोड़ा सा पोषण भी बढ़ा सकते है और आपको लेट खाने की आदत में थोड़ा मददगार भी साबित हो सकते है

  • लंच पहले से तैयार रखे
  • खाने में प्रोटीन शामिल करे ( जैसे की चना ,दाल , सोयाबीन , मूंगफली ,दही )
  • फाइबर को न भूले (फल , सब्जी और फाइबर से भरपूर चीज़ें डाइट में रखे )
  • इमरजेंसी snacks रखे (जिससे आपका लंच में देर हो तोह बिना कुछ खाये न रहे आप )
  • लंच के साथ पानी भी जरूरी है ( इसका मतलब यह है की आप अपनी बॉडी को हाइड्रेटेड रखे , खाने क साथ पानी ना पिए isse हमारी पाचन शक्ति कमजोर होती है )

इस आदत को सही न करें तो क्या लक्षण हो सकते हैं ? 

बहुत लंबे समय तक भूखे रहने के बाद अचानक बहुत भारी भोजन करना

Digestive Discomfort 

भारीपन 

ब्लोटिंग

जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है ,हालांकि किसी भी Digestive लक्षण को अग्नि कमजोर कहकर समझना सही नहीं होगा , लगातार एसिडिटी ,severe ब्लोटिंग ,unexplanied weakness और अन्य सिम्टम्स को दिखाना जरूरी है |

आखिर में

वर्किंग वुमन के लिए लंच केवल भूख मिटाने का समय नहीं है बल्कि यह एक लंबे काम वाले दिन के बीच ऊर्जा और मानसिक आराम और एक आरामदायक क्षण का तरीका है ,बड़ी समस्या नहीं है ,लेकिन जब हम सारा दिन अपनी मीटिंग, काम का दवाब ,  में और घर की ज़िम्मेदारियाँ के कारण ऐसा करते है तो हमें स्वास्थ्य से इसकी कीमत चुकानी पड़ती है , ऐसी आदतों को थोड़ा दूर करना चाहिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने शरीर के सिग्नल को लगातार इग्नोर ना करें अगर ऊर्जा गिरती है मूड खराब होता है या कमजोरी महसूस होती है तो केवल के चाय - कॉफी पर निर्भर रहने की बजाय हाइड्रेशन के या खाने की
गुणवत्ता और टाइमिंग सभी के एक साथ देखना बहुत जरूरी है |

References

Association of Employees’ Meal Skipping Patterns with Workplace Food Purchases, Dietary Quality, and Cardiometabolic Risk: A Secondary Analysis from the ChooseWell 365 Trial - PMC

80 Healthy Lunch Ideas For Weight Loss That Are Under 500 Calories And Still Taste Delicious

8 tips for healthy eating - NHS

The effects of skipping a meal on daily energy intake and diet quality - PMC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जब लंच देर से होता है तो शरीर को लंबे समय तक जरुरी पोषण नहीं मिलता, जिससे ऊर्जा की कमी महसूस होती है। सुबह नाश्ते के बाद अगर 4-5 घंटे तक खाना न खाया जाए तो ब्लड शुगर कम हो सकता है, जिससे शरीर कमजोर और थका हुआ लगता है।

भूख बढ़ने और लंबे समय तक बिना खाने के रहने से चिड़चिड़ापन, ध्यान न लगना और मानसिक थकावट हो सकते हैं। यह मूड की कमजोरी ऑफिस में बातचीत और फैसले लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

जब लंच काफी देर से किया जाता है, तो भूख बहुत बढ़ जाती है और लोग जल्दी-जल्दी और ज्यादा मात्रा में खाना खाते हैं। इससे शाम को स्नैक्स, जैसे बिस्कुट, नमकीन या मिठाई खाने की इच्छा बढ़ जाती है, जिससे दिनभर का डाइट पैटर्न असंतुलित हो सकता है।

हर किसी का शरीर अलग होता है, इसलिए एकदम एक ही वक्त पर खाना जरूरी नहीं। लेकिन बहुत लंबे गैप रखना सही नहीं है। अगर आपका काम 9 से 6 बजे तक है तो बेहतर होगा कि आप 12 से 1 बजे के बीच लंच करें। यह आपके नाश्ते के 4-5 घंटे बाद का समय होता है, जो शरीर के लिए उपयुक्त रहता है।

लंच पहले से तैयार रखें ताकि समय पर खा सकें,लंच में प्रोटीन शामिल करें जैसे चना, दाल, सोयाबीन, मूंगफली या दही,फाइबर युक्त फल और सब्जियां जरूर लें,इमरजेंसी स्नैक्स साथ रखें ताकि लंच में देरी होने पर भूख न बढ़े,लंच के साथ पानी पिएं, इससे शरीर हाइड्रेटेड रहेगा और पाचन बेहतर होगा।

लंबे समय भूखे रहने के बाद अचानक भारी भोजन करने से डाइजेस्टिव डिस्कॉमफर्ट, भारीपन या ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लगातार खट्टी या जलन जैसी परेशानी हो तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

लंच केवल भूख मिटाने का वक्त नहीं, बल्कि दिनभर की ऊर्जा और मानसिक ताजगी के लिए जरूरी है। दिनभर की भागदौड़ में इसे टालना सेहत पर असर डाल सकता है। अपनी बॉडी के सिग्नल सुनें, ऊर्जा कम हो या मूड खराब लगे तो सिर्फ चाय-कोफी से काम चलाने की जगह सही समय और पोषण पर ध्यान दें। ऐसा करने से आप काम और घर की जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से निभा पाएंगी।

आपको मौसमी, ताज़ा और हल्का पचने वाला भोजन खाना चाहिए। दलिया, खिचड़ी, दाल, सब्ज़ियाँ और मौसमी फल आयुर्वेद में संतुलित आहार माने जाते हैं।

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