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सर्दियों में बार-बार खाँसी-ज़ुकाम से परेशान हैं? अपनाएँ ये असरदार आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

Information By Dr. Keshav Chauhan

सर्दियों की शुरुआत होते ही आप महसूस करते होंगे कि गला थोड़ी देर बाहर रहने पर ही सूखने लगता है, नाक बार-बार बंद हो जाती है और खाँसी कभी जाती ही नहीं। यह सिर्फ आपका अनुभव नहीं है — हमारे देश में ये समस्या बहुत आम है। ठंडी और सूखी हवा नाक और गले की नमी खींच लेती है, जिससे वायरस को अंदर घुसना आसान हो जाता है। अगर आपकी प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी भी कमज़ोर है, तो आप महसूस करेंगे कि खाँसी, ज़ुकाम और गले की खराश सर्दियों में बार-बार वापिस लौट आते हैं।

अगर आप भी हर साल इसी चक्र में फँस जाते हैं, तो यह लेख आपके काम का है। यहाँ आप समझेंगे कि आयुर्वेद इन समस्याओं को कैसे देखता है और कौन-सी जड़ी-बूटियाँ व दिनचर्या आपको इस मौसम में मज़बूत बनाए रख सकती हैं।

इस बार की सर्दी को थोड़ी अलग बनाते हैं—ऐसी कि खाँसी-ज़ुकाम आपको बार-बार परेशान करने का मौका ही न पाए।

सर्दियों में बार-बार खाँसी-ज़ुकाम क्यों होता है और आयुर्वेद इसे कैसे समझता है?

सर्दियों में तापमान कम होने से हवा ज़्यादा ठंडी और शुष्क हो जाती है। जब आप इस ठंडी हवा में साँस लेते हैं, तो गले और नाक की परत सूखने लगती है। यही सूखापन वायरस और बैक्टीरिया को शरीर में प्रवेश करने का आसान मौका देता है। इसी वजह से आपको बार-बार खाँसी, नाक बहना, गले में जलन या सिर भारी लगना जैसी समस्याएँ परेशान कर सकती हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में वात और कफ़ दोष जल्दी असंतुलित होते हैं।

  • ठंड, शुष्क हवा और जीवनशैली की गलत आदतें वात बढ़ाती हैं, जिससे गला सूखता है और सूखी खाँसी होती है।

  • ठंडे मौसम में शरीर खुद को गर्म रखने के लिए भीतर कफ़ बढ़ाने लगता है। यही जमा हुआ कफ़ नाक बंद होने, गले में रुकावट और लगातार खाँसी का कारण बनता है।

अगर आपका पाचन भी कमज़ोर है, तो यह समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि आयुर्वेद में प्रतिरक्षा शक्ति का सीधा संबंध अच्छे पाचन से माना गया है।

यानी सर्दियों में बार-बार होने वाला खाँसी-ज़ुकाम सिर्फ मौसम की वजह से नहीं होता, बल्कि आपकी आदतों और आपकी प्रतिरोधक क्षमता को भी प्रभावित करता है।

क्या आपके लक्षण साधारण खाँसी-ज़ुकाम के हैं या कुछ और?

सर्दियों में हर बार बहती नाक या गले का दर्द साधारण सर्दी नहीं होता। यह जानना बहुत ज़रूरी है कि आप सामान्य सर्दी-वायरल से जूझ रहे हैं या लक्षण कुछ गंभीर रोग की तरफ इशारा कर रहे हैं। इसे समझने से आप सही समय पर सही आयुर्वेदिक देखभाल कर सकते हैं।

नीचे कुछ सामान्य और कुछ चेतावनी वाले लक्षणों का फर्क दिया गया है:

साधारण खाँसी-ज़ुकाम के लक्षण:

ये लक्षण आमतौर पर 3–5 दिन में हल्के होने लगते हैं।

कब आपको सतर्क होना चाहिए:

  • बुखार लगातार 101°F से ऊपर रहे

  • साँस लेने में तकलीफ़ हो

  • सीने में दर्द हो

  • 10–12 दिन तक खाँसी बिल्कुल कम न हो

  • कफ़ बहुत ज़्यादा पीला, हरा या बदबूदार हो

  • गले में सूजन या आवाज़ बिल्कुल चली जाए

  • बार-बार शरीर में तेज़ कमज़ोरी महसूस हो

  • बच्चे या बुज़ुर्ग बहुत सुस्त हो जाएँ

ऐसे लक्षणों में घर पर सिर्फ घरेलू नुस्ख़ों पर निर्भर रहना सही नहीं होता। आपको डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी होता है। लेकिन हल्के से मध्यम लक्षणों में आयुर्वेदिक देखभाल बहुत असरदार साबित होती है और आप बार-बार होने वाली समस्या से बच सकते हैं।

बार-बार होने वाले खाँसी-ज़ुकाम में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ कैसे मदद करती हैं?

आयुर्वेद में सर्दियों की खाँसी-ज़ुकाम को सिर्फ “इंफ़ेक्शन” नहीं माना जाता। यह श्रोत्रों (राहों), दोषों और प्रतिरोधक क्षमता के असंतुलन का परिणाम माना जाता है। यही कारण है कि आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ सिर्फ लक्षण नहीं दबातीं, बल्कि समस्या की जड़ को ठीक करने का प्रयास करती हैं।

यहाँ यह समझना ज़रूरी है कि ये जड़ी-बूटियाँ कैसे काम करती हैं:

1. कफ़ को पतला करके बाहर निकालने में मदद

तुलसी, पिपली, सौंठ और काली मिर्च जैसी जड़ी-बूटियाँ कफ़ को ढीला करती हैं। इससे आपको साँस लेने में आसानी होती है और खाँसी कम होती है। अगर आप बार-बार जकड़न से परेशान रहते हैं, तो ये जड़ी-बूटियाँ आपके लिए बेहद प्रभावी होती हैं।

2. गले की जलन और सूजन कम करना

मुलेठी, हल्दी और अदरक जैसी औषधियाँ शरीर में सूजन कम करती हैं।

  • गले में जलन

  • बोलने में दर्द

  • सूखी या जलन वाली खाँसी

इन सभी में यह तुरंत राहत देती हैं।

3. संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाना

तुलसी, गिलोय और आँवला आपकी प्रतिरक्षा शक्ति को मज़बूत करते हैं। अगर आपकी प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर है, तो खाँसी-ज़ुकाम अक्सर बार-बार लौट आता है। इन जड़ी-बूटियों के नियमित सेवन से आपका शरीर वायरस और मौसम बदलाव से जल्दी नहीं हारता।

4. गले और श्वसन तंत्र (Respiratory system) को शांत करना

मुलेठी, शहद और दालचीनी जैसे तत्व गले पर सुरक्षात्मक परत बनाते हैं। इससे

  • जलन कम होती है

  • खाँसी के दौरे घटते हैं

  • सूखा और खुरदरा गला शांत होता है

अगर आपको रात में खाँसी ज़्यादा सताती है, तो यह औषधियाँ काफी मदद करती हैं।

5. शरीर की गर्माहट बढ़ाना

सौंठ, पिपली, काली मिर्च, अदरक और दालचीनी शरीर को भीतर से गर्म रखते हैं। यह खासकर सर्दी के मौसम में कफ़ जमने से रोकता है और वायरल के लक्षण हल्के करता है।

6. पाचन और अग्नि को मज़बूत करना

आयुर्वेद के अनुसार, कमज़ोर अग्नि (digestion) बार-बार होने वाले संक्रमण के लिए ज़िम्मेदार हो सकती है। सौंठ, दालचीनी और आँवला अग्नि को संतुलित रखते हैं, जिससे आपके शरीर की उपचार करने की क्षमता बढ़ जाती है

खाँसी-ज़ुकाम में आपके लिए सबसे असरदार आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी कौनसी हैं?

जब आप सर्दियों में बार-बार खाँसी-ज़ुकाम से परेशान होते हैं, तो सबसे पहले आपको ऐसे प्राकृतिक उपाय चाहिए होते हैं, जो आपके शरीर को आराम भी दें और आपको जल्दी ठीक भी करें। आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियाँ हैं जिनका असर सदियों से माना गया है। ये जड़ी-बूटियाँ न सिर्फ गले, नाक और छाती के लक्षणों को शांत करती हैं, बल्कि आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती हैं ताकि आप दोबारा जल्दी बीमार न पड़ें।

नीचे दी गई जड़ी-बूटियाँ खाँसी-ज़ुकाम में सबसे ज़्यादा कारगर मानी जाती हैं। हर जड़ी-बूटी का अपना अनोखा तरीका होता है, जिससे वह आपको राहत पहुँचाती है।

अदरक और शहद

अदरक और शहद दोनों ही सर्दियों के लिए किसी प्राकृतिक दवा से कम नहीं हैं। अगर आप खाँसी, गले में जलन या नाक बंद होने से जूझ रहे हैं, तो इन दोनों का संयोजन बहुत तेज़ी से असर दिखाता है।

अदरक में ऐसे गुण होते हैं जो आपके गले की सूजन को कम करते हैं और कफ़ को ढीला करके बाहर निकालने में मदद करते हैं। जब आप अदरक की चाय पीते हैं या उसका रस लेते हैं, तो गले की गर्माहट आपको तुरंत राहत देती है।

शहद गले पर एक चिकनी परत बनाता है जिससे खुरदरा गला शांत होता है और खाँसी के दौरे कम हो जाते हैं। अगर आपको रात में खाँसी ज़्यादा परेशान करती है, तो शहद लेने से आपको नींद में भी आराम मिलता है।

आप यह सरल तरीका अपना सकते हैं:

  • 1 चम्मच शहद में आधा चम्मच अदरक का रस और एक चुटकी काली मिर्च मिलाकर दिन में दो बार लें।
    यह गले को शांत करता है और छाती की जकड़न कम करता है।

मुलेठी

अगर आपकी खाँसी सूखी है और आपको गले में जलन बार-बार महसूस होती है, तो मुलेठी आपके लिए बहुत असरदार है। इसे आयुर्वेद में “कंठनलिकाम् शीतलम्” यानी गले को ठंडक और आराम देने वाली जड़ी-बूटी कहा गया है।

मुलेठी गले की सूजन को कम करती है और कफ़ को पतला बनाती है। जब आप इसे चाय या काढ़े की तरह लेते हैं, तो गले में बनने वाली खुरदरी भावना कुछ ही मिनटों में कम होने लगती है।

आप इसे इस तरह आसानी से ले सकते हैं:

  • 1 छोटा टुकड़ा मुलेठी उबलते पानी में डालकर 5–7 मिनट पकाएँ और दिन में दो बार पिएँ।

  • या 1 चुटकी मुलेठी पाउडर को गर्म पानी में घोलकर लें।

मुलेठी खासतौर पर तब फायदेमंद है जब आपकी आवाज़ बैठ गई हो, गला खुरदुरा लगे या खाँसी लगातार आ रही हो।

पिपली, सौंठ और काली मिर्च

इस तीनों का मिश्रण आयुर्वेद में ट्रिकटु कहलाता है। ये खाँसी-ज़ुकाम में बहुत तेज़ी से असर दिखाते हैं क्योंकि यह तीनों कफ़ को ढीला करने और शरीर को भीतर से गर्म रखने में खास भूमिका निभाते हैं।

पिपली

  • साँस की नली में जमा चिकना कफ़ जल्दी ढीला हो जाता है।

  • अगर आपको कफ़ वाली खाँसी है, तो यह बहुत प्रभावी है।

सौंठ (सूखी अदरक)

  • यह शरीर की गर्माहट बढ़ाती है और गले की सूजन कम करती है।

  • गले में जलन और दर्द में राहत देती है।

काली मिर्च

  • यह कफ़ को पिघला कर बाहर निकालने में मदद करती है।

  • आपकी साइनस की जकड़न में भी राहत देती है।

अगर आपको लगता है कि आपकी खाँसी लंबे समय तक ठीक नहीं हो रही, या लगातार कफ़ जमा हो रहा है, तो यह संयोजन बहुत कारगर साबित होता है।

आप इसे इस तरह ले सकते हैं:

  • एक चुटकी पिपली चूर्ण, एक चुटकी सौंठ और थोड़ा सा काली मिर्च पाउडर शहद में मिलाकर दिन में एक बार लें।

यह संयोजन शरीर को भीतर से गर्म रखता है और जकड़न जल्दी खोलता है।

दालचीनी, लौंग और अजवाइन

ये तीनों मसाले सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं हैं। सर्दियों में ये आपकी साँस की नलियों को साफ करने, गर्माहट देने और संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं।

दालचीनी

  • इसमें प्रतिविषाणु (एंटीवायरल) गुण पाए जाते हैं।

  • यह सर्दी-वायरस से लड़ने में मदद करती है।

  • गले की सूजन कम कर देती है।

लौंग

  • लौंग गले की सूजन और दर्द को कम करती है।

  • अगर आपको लगातार गले में जलन महसूस होती है, तो यह जल्दी राहत देती है।

अजवाइन

  • अजवाइन के भाप लेने से नाक के मार्ग खुल जाते हैं।

  • यह आपकी छाती की जकड़न को भी ढीला करती है।

  • ठंडी हवा से सूखे गले को भी राहत देती है।

अजवाइन की भाप के लिए आप बस एक बर्तन में पानी उबालें, उसमें 1 चम्मच अजवाइन डालें और सिर पर तौलिया रखकर भाप लें। यह तरीका सर्दियों की बंद नाक और भारी सिर में बेहद राहत देता है।

गिलोय, आँवला और हल्दी

अगर आप बार-बार बीमार हो जाते हैं, या सर्दी का मौसम शुरू होते ही गला खराब होना आपका सामान्य अनुभव है, तो इसका मतलब है कि आपकी प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो सकती है। ऐसे में गिलोय, आँवला और हल्दी तीनों आपको अंदर से मज़बूती देते हैं।

गिलोय

  • इसे आयुर्वेद में अमृता कहा जाता है क्योंकि यह प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाती है।

  • यह लगातार होने वाली खाँसी और गले की खराश को शांत करती है।

आँवला

  • विटामिन C से भरपूर होने के कारण यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को तेज़ करता है।

  • रोज़ आँवला या उसका रस लेने से सर्दी जल्दी नहीं पकड़ती।

हल्दी

  • हल्दी में मौजूद गुण संक्रमण से लड़ते हैं।

  • हल्दी वाला दूध गले की खराश और खाँसी दोनों में राहत देता है।

अगर आप इन तीनों का नियमित सेवन करते हैं, तो आप महसूस करेंगे कि सर्दियों में आपका शरीर पहले से ज़्यादा मज़बूत महसूस होता है और खाँसी-ज़ुकाम बार-बार नहीं लौटता।

इन सभी जड़ी-बूटियों की खासियत यह है कि ये एक-दूसरे के साथ मिलकर और भी अच्छा असर दिखाती हैं। ये सिर्फ लक्षण नहीं दबातीं, बल्कि आपके शरीर को स्वाभाविक रूप से ठीक करने और मज़बूत बनाने में मदद करती हैं।

क्या ये आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए भी सुरक्षित हैं?

जब आप घर पर खाँसी-ज़ुकाम का इलाज करते हैं, तो सबसे पहला सवाल यही होता है कि क्या ये जड़ी-बूटियाँ बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए सुरक्षित हैं। आयुर्वेद में अधिकतर जड़ी-बूटियाँ प्राकृतिक और कोमल मानी जाती हैं, लेकिन कुछ सावधानियों का ध्यान रखना ज़रूरी है ताकि आप इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल कर सकें।

बच्चों के लिए 

बच्चों का शरीर संवेदनशील होता है। इसलिए हल्के और आसान उपाय ही अपनाने चाहिए।

  • हल्की अदरक वाली चाय (बहुत कम अदरक)

  • अजवाइन की भाप (बच्चे से थोड़ी दूरी रखकर)

  • तुलसी का बहुत हल्का काढ़ा

  • शहद (लेकिन केवल 1 साल से ऊपर के बच्चों को ही)

आपको बच्चों को बहुत तीखी या तेज़ गर्माहट देने वाली चीज़ें नहीं देनी चाहिए, जैसे — ज़्यादा पिपली, ज़्यादा सौंठ या ज़्यादा काली मिर्च। बच्चों के लिए हमेशा मात्रा कम रखनी चाहिए।

बुज़ुर्गों के लिए 

बुज़ुर्गों को अक्सर सर्दी जल्दी लगती है और खाँसी लंबे समय तक रहती है, इसलिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ उनके लिए काफी प्रभावी होती हैं।

  • हल्दी वाला दूध

  • मुलेठी की चाय

  • गिलोय का हल्का रस

  • आँवला का रस

  • सौंठ और शहद

बस ध्यान रखें कि जिन बुज़ुर्गों को ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ या दिल की समस्या है, उन्हें मात्रा जीवा के डॉक्टर के सुझाव से ही लेनी चाहिए।

टिप्पणी: ये जड़ी-बूटियाँ सुरक्षित हैं, लेकिन बच्चों और बुज़ुर्गों में मात्रा और गर्माहट का संतुलन बहुत ज़रूरी है। अगर आप यह ध्यान रखते हैं, तो ये औषधियाँ जल्दी राहत भी देती हैं और शरीर को मज़बूत भी बनाती हैं।

सर्दियों में खाँसी-ज़ुकाम से बचने के लिए आप कौन-सी आयुर्वेदिक दिनचर्या अपना सकते हैं?

अगर आप चाहते हैं कि सर्दियों में खाँसी-ज़ुकाम आपको बार-बार परेशान न करे, तो सिर्फ दवाइयों या जड़ी-बूटियों पर निर्भर रहना काफी नहीं होता। आपको अपनी रोज़मर्रा की दिनचर्या में कुछ आसान आयुर्वेदिक आदतें जोड़नी चाहिए, जो आपकी प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाएँगी और आपको मौसम के बदलाव से बचाएँगी।

  1. सुबह गुनगुने पानी से दिन की शुरुआत करें: यह पाचन को ठीक रखता है और शरीर में गर्माहट बनाए रखता है।
  2. 4–5 तुलसी के पत्ते चबाएँ: तुलसी आपके शरीर को वायरस से बचाती है और प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाती है।
  3. नाक में प्रतिदिन घी या नस्य तेल डालें: यह नासिका मार्ग को ठंड से बचाता है और गले की सूखापन कम करता है। अक्सर ठंडी हवा से होने वाली खाँसी इसी से कम हो जाती है।
  4. हल्का व्यायाम या योग करें: सर्दियों में आप कम चलते-फिरते हैं, जिससे कफ़ बढ़ता है। योग करने से शरीर गर्म रहता है और फेफड़े मज़बूत होते हैं।
  5. खाने में गर्म और पचने वाले पदार्थ लें
  • मूंग दाल

  • सूप

  • गरम खिचड़ी

  • हल्दी वाला दूध

  • अदरक वाली चाय

ये आपके शरीर को भीतर से गर्म रखते हैं।

  1. दिन में 2–3 बार गुनगुना पानी पीते रहें: इससे कफ़ जमा नहीं होता और गला भी सूखता नहीं।
  2. सोने से पहले भाप लेना: अजवाइन या थोड़ी सी पुदीना की भाप लेने से नाक खुली रहती है और रात में खाँसी कम होती है।

इन छोटी-छोटी आदतों को अपनाने से आपका शरीर मौसम के बदलाव को आसानी से संभाल लेता है और खाँसी-ज़ुकाम बार-बार नहीं आता।

निष्कर्ष

सर्दियों में बार-बार होने वाला खाँसी-ज़ुकाम किसी के भी दिनचर्या को बिगाड़ सकता है। लेकिन जब आप अपने शरीर को समझकर सही जड़ी-बूटियाँ और आसान आयुर्वेदिक आदतें अपनाते हैं, तो आप महसूस करेंगे कि राहत पाना उतना मुश्किल नहीं है। तुलसी, अदरक, मुलेठी, गिलोय और आँवला जैसे सरल उपाय आपके गले, नाक और प्रतिरक्षा—तीनों पर एक साथ काम करते हैं।

अगर आप अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव जोड़ लें—गुनगुना पानी, हल्का व्यायाम, नस्य, भाप और गर्म भोजन—तो सर्दी आपको बार-बार परेशान करने का मौका ही नहीं पाती। आपका शरीर धीरे-धीरे इतना मज़बूत हो जाता है कि मौसम बदलने पर भी आप बीमार नहीं पड़ते।

अगर आप सर्दी-ज़ुकाम या किसी भी श्वसन समस्या से जूझ रहे हैं, हमारे प्रमाणित जीवा डॉक्टरों से आज ही अपने लिए व्यक्तिगत परामर्श लें। कॉल करें: 0129-4264323

FAQs

  1. क्या बढ़ता प्रदूषण और दिल्ली का खराब AQI सर्दी-खाँसी बढ़ा देता है?

हाँ। ज़्यादा प्रदूषण और खराब AQI आपकी साँस की नलियों को कमज़ोर कर देता है। इससे आप आसानी से खाँसी, ज़ुकाम और गले की तकलीफ़ पकड़ सकते हैं।

  1. सर्दी, ज़ुकाम और खाँसी का आयुर्वेदिक इलाज क्या है?

आयुर्वेद में तुलसी, अदरक, मुलेठी, गिलोय, साँवली भाप और हल्का गर्म भोजन सबसे असरदार माने जाते हैं। ये कफ़ कम करके गले और नाक को राहत देते हैं।

  1. बढ़ते प्रदूषण में आप अपनी साँस-प्रणाली को कैसे बचा सकते हैं?

आप मास्क पहनें, घर में हवा शुद्ध रखें, भाप लें, गुनगुना पानी पिएँ और तुलसी, आँवला व गिलोय जैसी जड़ी-बूटियाँ लें। इससे फेफड़ों को सुरक्षा मिलती है।

  1. बार-बार गला खराब होने का क्या कारण हो सकता है?

ठंडा पानी, धूल, प्रदूषण, कमज़ोर पाचन और कफ़ बढ़ना कारण हो सकते हैं। गुनगुना पानी, भाप और हल्की आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ इससे राहत देती हैं।

  1. सर्दी में कौन-सी चीज़ें बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए?

ठंडी चीज़ें, बर्फ वाला पानी, दही, तली चीज़ें और देर रात का खाना आपकी सर्दी बढ़ा सकते हैं। गर्म ताज़ा भोजन बेहतर रहता है।

  1. क्या मैं सर्दी-खाँसी के साथ व्यायाम कर सकता हूँ?

अगर बुखार नहीं है और ऊर्जा बनी हुई है, तो हल्का स्ट्रेचिंग या योग ठीक है। बहुत थकान हो तो आराम लेना बेहतर है।

  1. क्या भाप लेना रोज़ किया जा सकता है?

हाँ, हल्की अजवाइन या सादा भाप दिन में 1–2 बार ले सकते हैं। यह नाक खोलती है और गले की जलन कम करती है।

  1. सर्दी के दौरान रात में खाँसी क्यों बढ़ जाती है?

लेटने पर कफ़ गले में जमा होता है। गुनगुना पानी, शहद और भाप लेने से रात की खाँसी काफी कम होती है।

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