सर्दियाँ शुरू होते ही कई लोगों की साँसें जैसे भारी होने लगती हैं। सुबह की ठंडी हवा, धुएँ से भरी गलियाँ और अचानक बढ़ता प्रदूषण—सब मिलकर आपकी साँसों पर दबाव डालने लगते हैं। और यह चिंता तब और बढ़ जाती है जब आप जानते हैं कि भारत में करीब 3.5 करोड़ लोग अस्थमा से प्रभावित हैं।
अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें ठंड लगते ही साँस फूलने लगती है या हल्की सर्दी भी छाती में जमाव कर देती है, तो सर्द मौसम आपके लिए वाकई चुनौती बन सकता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर आप कारण सही समझ लें और छोटे-छोटे बदलाव अपनाएँ, तो यह मौसम उतना भारी नहीं पड़ेगा।
इस लेख में आप जानेंगे कि सर्दियों में अस्थमा अचानक क्यों बढ़ जाता है, कौन-सी सावधानियाँ रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आपकी मदद कर सकती हैं और आयुर्वेद किन उपायों को राहत देने वाला मानता है।
सर्द मौसम में अस्थमा के मरीज़ों की तकलीफ़ क्यों बढ़ जाती है?
सर्दियों का मौसम आते ही आपको साँस लेने में दिक्कत, खाँसी और सीने में जकड़न ज़्यादा महसूस हो सकती है। इसका कारण सिर्फ ठंड नहीं होता, बल्कि कई ऐसे बदलाव होते हैं जो आपके फेफड़ों पर सीधा असर डालते हैं।
ठंडी और सूखी हवा का असर
सर्दियों में हवा ठंडी और बहुत सूखी हो जाती है। जब आप ऐसी हवा साँस के साथ अंदर लेते हैं, तो आपकी साँस की नलियाँ सिकुड़ने लगती हैं। इससे घरघराहट और साँस फूलने की समस्या बढ़ जाती है। अगर आप पहले से अस्थमा के रोगी हैं, तो यह ठंड आपके लिए और मुश्किल कर सकती है।
वायु प्रदूषण और धूल के कण
सर्दियों में हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। धूल, धुआँ और छोटे-छोटे कण हवा में ज़्यादा देर तक जमकर रहते हैं। जब आप इन्हें साँस के साथ अंदर लेते हैं, तो आपकी नलियों में सूजन और जलन बढ़ जाती है। इससे अस्थमा के लक्षण तेज़ी से उभर आते हैं। आपको लगेगा कि साँस ठीक से नहीं आ रहा, सीने में भारीपन है, या खाँसी रुक नहीं रही।
संक्रमण का बढ़ना
ठंड के मौसम में सर्दी-ज़ुकाम और वायरल संक्रमण बेहद आम होते हैं। अगर आप अस्थमा के मरीज़ हैं, तो एक साधारण सर्दी भी आपकी साँस की समस्या को कई गुना बढ़ा सकती है। संक्रमण होने पर बलगम बढ़ जाता है और वायु मार्ग संकीर्ण हो जाते हैं, जिससे आपको साँस लेने में और भी संघर्ष करना पड़ता है।
इनडोर एलर्जेन का प्रभाव
सर्दियों में हम ज़्यादातर समय घर के अंदर रहते हैं। इस दौरान घर में धूल, फफूँद, पालतू जानवरों की रूसी और कमरे में जमा नमी जैसे एलर्जेन बढ़ जाते हैं। अगर आप इन चीज़ों से संवेदनशील हैं, तो यह एलर्जी अस्थमा को बार-बार ट्रिगर कर सकती है। आपको अक्सर छींकें आना, खाँसी बढ़ना या सीने में भरा-भरा महसूस होना जैसी समस्याएँ दिख सकती हैं।
आयुर्वेद के अनुसार वात और कफ बढ़ने से समस्या
आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में वात और कफ दोनों का स्तर बढ़ जाता है।
- बढ़ा हुआ कफ फेफड़ों और नलियों में जमने लगता है।
- बढ़ा हुआ वात नलियों को संकुचित कर देता है।
जब ये दोनों असंतुलित होते हैं, तो आपकी साँस की नलियाँ संकरी होकर अधिक बलगम बनाती हैं, जिससे अस्थमा के लक्षण तेज़ हो जाते हैं। यही कारण है कि सर्दी का मौसम आपके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ठंड में अस्थमा के कौन-कौन से लक्षण बढ़ जाते हैं?
ठंडा मौसम आते ही आपके लक्षण सामान्य दिनों की तुलना में तेज़ महसूस हो सकते हैं। अगर आप इन संकेतों को जल्दी पहचान लेते हैं, तो आप समय रहते सावधानी भी रख सकते हैं।
साँस फूलना और घरघराहट
सर्दियों में ठंडी हवा आपके वायु मार्ग को सिकोड़ देती है, जिससे आपका साँस फूलने लगता है। कई बार साँस लेते समय सीटी जैसी आवाज़ भी आने लगती है, जिसे घरघराहट कहते हैं।
सीने में जकड़न
ठंड और प्रदूषण की वजह से आपकी साँस की नलियों में सूजन बढ़ जाती है। यह सूजन सीने में जकड़न पैदा करती है। आपको लगेगा कि छाती पर कोई भारी चीज़ रखी हो।
रात में खाँसी बढ़ना
रात के समय तापमान और भी गिर जाता है, जिससे खाँसी बढ़ना बहुत आम है। अगर आपको रात में लगातार खाँसी आती है और नींद भी टूट जाती है, तो यह सर्दियों में अस्थमा बिगड़ने का संकेत है।
बलगम जमना
ठंड में शरीर की नलियाँ बलगम को जल्दी बाहर नहीं निकाल पातीं। इसके कारण बलगम जमा होने लगता है और आपकी साँस और भी भारी हो जाती है। आपको बार-बार खाँसने का मन होता है, लेकिन बलगम आसानी से बाहर नहीं आता।
आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में अस्थमा क्यों बिगड़ता है?
आयुर्वेद शरीर को बदलावों के अनुसार समझने पर ज़ोर देता है। सर्दी का मौसम अस्थमा के लिए इसलिए कठिन होता है क्योंकि इस समय शरीर के भीतर कई प्रक्रियाएँ धीमी या असंतुलित हो जाती हैं।
वात और कफ का असंतुलन
सर्दियों में वात बढ़ने से नलियाँ संकुचित हो जाती हैं, जबकि कफ बढ़ने से बलगम ज्यादा बनने लगता है। जब दोनों एक साथ असंतुलित हों, तो अस्थमा की समस्या तुरंत बढ़ जाती है। आपको साँस लेने में परेशानी, बलगम और सीने में भारीपन जैसे लक्षण ज़्यादा दिखते हैं।
अग्नि और प्रतिरोधक क्षमता पर असर
आयुर्वेद में कहा गया है कि अगर पाचन अग्नि कमज़ोर हो जाए, तो शरीर रोगों से जल्दी लड़ नहीं पाता। सर्दियों में कई लोगों का पाचन धीमा हो जाता है, जिससे प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। कमज़ोर इम्यूनिटी संक्रमण को बढ़ाती है, और संक्रमण अस्थमा को ट्रिगर करता है।
शरीर के ठंडा होने से नलियों का संकुचन
ठंडी हवा शरीर को ठंडा कर देती है। इससे फेफड़ों की नलियाँ सिकुड़ती हैं और उनमें बलगम जम जाता है। यह दोनों बातें अस्थमा को तुरंत खराब कर देती हैं। आयुर्वेद इसी कारण सर्दियों में शरीर को गर्म और संतुलित रखने पर ज़ोर देता है।
ठंडी हवा और एयर पॉल्यूशन अस्थमा को कैसे ट्रिगर करते हैं?
सर्दियों में हवा की गुणवत्ता सबसे ज़्यादा खराब हो जाती है। तापमान कम होने पर प्रदूषण ऊपर नहीं उठ पाता और ज़मीन के पास ही जमा हो जाता है। अगर आपको अस्थमा है, तो यह मौसम आपकी साँस के लिए और कठिन हो सकता है।
दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों में प्रदूषण का प्रभाव
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों में एयर क्वॉलिटी कई बार बेहद खराब हो जाती है। हवा में धूल, धुआँ, स्मॉग और सूक्ष्म कण मौजूद रहते हैं। जब आप ऐसी हवा में साँस लेते हैं, तो ये कण सीधा आपकी साँस की नलियों में पहुँचकर सूजन और जलन बढ़ा देते हैं।
अगर आपको पहले से अस्थमा है, तो यह प्रदूषण आपकी नलियों को और संकीर्ण कर देता है, जिससे आपको तुरंत सीने में जकड़न, खाँसी या साँस फूलने जैसी परेशानी हो सकती है।
पार्टिकुलेट मैटर और स्मॉग
स्मॉग में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) इतने छोटे होते हैं कि वे आप साँस लेते ही फेफड़ों की गहराई तक पहुँच जाते हैं। ये कण न सिर्फ नलियों को सूजन देते हैं, बल्कि बलगम भी बढ़ाते हैं।
स्मॉग की वजह से हवा में नमी और प्रदूषण का मिश्रण बन जाता है, जो अस्थमा को बार-बार ट्रिगर कर सकता है। आप महसूस कर सकते हैं कि थोड़ी सी चाल चलते ही आपकी साँस फूलने लगती है।
ठंडे तापमान में ब्रोंकियल स्पैज़्म
सर्द हवा आपके वायु मार्ग को अचानक सिकुड़ने पर मजबूर कर देती है। इसे ब्रोंकियल स्पैज़्म कहा जाता है। जब यह स्पैज़्म होता है, तो आपको तुरंत साँस लेने में कठिनाई महसूस होती है और घरघराहट बढ़ जाती है।
कई बार ये लक्षण कुछ ही मिनटों में तेज़ हो जाते हैं, इसलिए ठंड में बिना चेहरे को ढके बाहर निकलना आपके लिए जोखिम भरा हो सकता है।
सर्दियों में अस्थमा को कंट्रोल करने के लिए आप क्या-क्या सावधानियाँ रखें?
अगर आप रोज़मर्रा की कुछ छोटी आदतों का ध्यान रखें, तो सर्दियों में अस्थमा को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। ये सावधानियाँ आसान हैं और आप इन्हें अपनी दिन-चरीया में आसानी से शामिल कर सकते हैं।
मास्क पहनने की ज़रूरत
सर्दियों में मास्क न सिर्फ प्रदूषण से बचाता है, बल्कि ठंडी हवा को भी फिल्टर करता है। अगर आप बाहर निकलते हैं, खासकर प्रदूषित जगहों पर, तो मास्क पहनना आपके फेफड़ों को काफी सुरक्षा देता है।
शरीर को गर्म रखने के उपाय
जब शरीर ठंडा हो जाता है, तो नलियाँ सिकुड़ने लगती हैं और अस्थमा बढ़ जाता है। आपको चाहिए कि:
- सिर, कान और नाक ढककर रखें
- गुनगुने पानी से स्नान करें
- बाहर जाते समय गर्म कपड़े पहनें
- भोजन में गरम और आसानी से पचने वाली चीज़ें शामिल करें
सुबह-सुबह बाहर जाने से बचना
सुबह का समय सर्दियों में सबसे ज्यादा ठंडा होता है। इस समय हवा में प्रदूषण भी ज़्यादा रहता है। अगर संभव हो, तो सुबह की सैर या बाहर के कामों को थोड़े देर बाद के लिए रखें। इससे आपकी साँसें ठंडी हवा के सीधे संपर्क में कम आएँगी।
घर की सफाई और एलर्जेन से दूरी
सर्दियों में घर के अंदर एलर्जेन बढ़ जाते हैं, इसलिए आपको:
- रोज़ बिस्तर की चादरें बदलनी चाहिए
- कमरे से धूल साफ करनी चाहिए
- नमी वाली जगहों की नियमित सफाई करनी चाहिए
- पालतू जानवरों की रूसी से बचना चाहिए
ये छोटे-छोटे कदम आपकी साँस को हल्का कर सकते हैं।
पानी पीने और भाप लेने की आदत
सर्दियों में ज़्यादातर लोग कम पानी पीते हैं, लेकिन अस्थमा मरीज़ होने पर यह गलती आपके लिए और भारी होती है। पर्याप्त पानी पीने से बलगम पतला रहता है। दिन में एक-दो बार भाप लेने से नलियाँ खुलती हैं और साँस लेना आसान हो जाता है।
सर्द मौसम में अस्थमा मरीज़ों के लिए कौन-सी चीजें सबसे ज्यादा ट्रिगर बनती हैं?
सर्दियों में कुछ चीज़ें अस्थमा को तुरंत भड़का देती हैं। अगर आप इन्हें पहचान लेंगे, तो आप अपने लक्षणों को पहले ही काबू में रख पाएँगे।
धूल, धुआँ, परफ्यूम और रूम फ्रेशनर
इनमें मौजूद कण और तेज़ खुशबुएँ सीधा आपकी नलियों को प्रभावित करती हैं। अगर आपको इनमें से किसी से भी जलन या खाँसी बढ़ती महसूस हो, तो तुरंत दूरी बना लें।
ठंडे पेय और जमी हुई चीज़ें
ठंडा पानी, आइसक्रीम या फ्रिज से निकली वस्तुएँ आपकी नलियों को और संकुचित करती हैं। सर्दियों में इन चीज़ों से दूरी रखना आपके लिए बेहद ज़रूरी है।
धूम्रपान और सिगरेट का धुआँ
सिगरेट का धुआँ अस्थमा मरीज़ों के लिए सबसे खतरनाक ट्रिगर माना जाता है। अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो उसे तुरंत छोड़ना चाहिए। अगर कोई आपके आसपास धूम्रपान कर रहा है, तो वहाँ से दूर चले जाएँ।
फफूँद और नमी
सर्दियों में कम धूप होने से कई घरों में नमी बढ़ जाती है, जिससे फफूँद बनती है। यह फफूँद अस्थमा को तुरंत ट्रिगर कर सकती है। कमरे को रोज़ हवा लगवाना, धूप देना और नमी कम रखना आपके लिए बहुत ज़रूरी है।
सर्दियों में अस्थमा के लिए कौन-कौन से आयुर्वेदिक नुस्खे मदद कर सकते हैं?
सर्दियों के मौसम में अस्थमा के लक्षण बढ़ने पर आयुर्वेद के कुछ सरल और पारंपरिक नुस्खे आपकी साँस को हल्का कर सकते हैं। ये नुस्खे शरीर को गर्म रखने, बलगम कम करने और नलियों को खोलने में मदद करते हैं। लेकिन इनका प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग-अलग होता है, इसलिए आपको इन्हें अपने शरीर की प्रकृति और पाचन के अनुसार अपनाना चाहिए।
हल्दी वाला दूध (अगर पचता हो)
हल्दी में प्राकृतिक सूजनरोधी गुण होते हैं। अगर आपको दूध पचता है, तो रात में हल्दी वाला गरम दूध आपकी साँस की नलियों की सूजन कम कर सकता है। अगर दूध से कफ बढ़ता है या पेट में भारीपन होता है, तो यह नुस्खा आप पर ठीक नहीं बैठ सकता। ऐसे में हल्दी को गरम पानी में मिलाकर भी लिया जा सकता है।
तुलसी-काली मिर्च-लौंग का काढ़ा
यह काढ़ा बलगम को पतला करने और गले की सूजन को कम करने में मदद करता है। तुलसी आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है, काली मिर्च कफ को तोड़ती है और लौंग गरम तासीर रखती है। दिन में एक बार इस काढ़े का सेवन आपको साँस की तकलीफ़ में राहत दे सकता है।
लहसुन और दूध का मिश्रण
लहसुन शरीर की नलियों को साफ करता है और संक्रमण से बचाने में मदद करता है। पाँच लहसुन की कलियों को थोड़े से दूध में उबालकर लिया जाए, तो यह बलगम को कम कर सकता है। अगर आपको दूध ठीक नहीं लगता, तो आप लहसुन को गुनगुने पानी के साथ भी ले सकते हैं।
अडूसा की पत्तियाँ
अडूसा (वासा) फेफड़ों को साफ करने और बलगम निकालने के लिए जाना जाता है। अडूसा की पत्तियों का रस या इसका काढ़ा सर्दियों में अस्थमा को शांत करने में मदद कर सकता है। यह नुस्खा लंबे समय से आयुर्वेद में श्वास रोगों के लिए उपयोग होता आया है।
त्रिकटु, पिप्पली और गिलोय रस
- त्रिकटु (सोंठ, काली मिर्च और पिप्पली) कफ कम करने में बहुत असरदार माना जाता है।
- पिप्पली नलियों को खोलने और पाचन सुधारने में मदद करती है।
- गिलोय रस प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और संक्रमण से बचाता है।
इनका सेवन आपको डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए, क्योंकि इनकी तासीर तेज़ होती है और मात्रा शरीर की प्रकृति के अनुसार बदलती है।
अजवाइन की भाप
अजवाइन की भाप लेने से बंद नलियाँ खुलती हैं और बलगम ढीला होता है। गर्म पानी में अजवाइन डालकर भाप लेने से आपको तुरंत राहत महसूस हो सकती है, खासकर तब जब साँस भारी लग रही हो।
कौन-से खाद्य पदार्थ सर्दियों में अस्थमा को बढ़ा देते हैं?
सर्दियों में कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जो आपकी नलियों को संकुचित कर सकते हैं या कफ बढ़ा सकते हैं। इन चीज़ों से दूरी रखकर आप अपने लक्षणों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
डेयरी, तली-भुनी और प्रोसेस्ड चीजें
डेयरी उत्पाद कई लोगों में कफ बढ़ा देते हैं। तली-भुनी चीज़ें और प्रोसेस्ड फूड शरीर में सूजन बढ़ाते हैं। ये चीज़ें आपकी साँस की नलियों को और संवेदनशील कर देती हैं।
ज्यादा ठंडी चीजें
ठंडा पानी, आइसक्रीम, सोडा या फ्रिज से निकला हुआ भोजन आपकी नलियों को तुरंत सिकुड़ने पर मजबूर कर सकता है। सर्दियों में ऐसी चीज़ें बिल्कुल कम कर देनी चाहिए।
एलर्जी पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ
कुछ लोगों को मूंगफली, समुद्री भोजन या किसी खास मसाले से एलर्जी होती है। अगर ऐसा भोजन गलती से भी खा लिया जाए, तो अस्थमा के लक्षण तुरंत बढ़ सकते हैं। इसलिए आपको अपनी एलर्जी को समझकर ही भोजन चुनना चाहिए।
निष्कर्ष
सर्दियों में अस्थमा का बढ़ना कई बार आपको बेहद असहज कर देता है, लेकिन सही जानकारी और रोज़मर्रा की कुछ सावधानियाँ आपकी साँस को काफी हल्का कर सकती हैं। ठंडी हवा, प्रदूषण, धूल और संक्रमण जब मिलकर असर डालते हैं, तो आपके फेफड़ों को अतिरिक्त सुरक्षा की ज़रूरत होती है। अगर आप अपने शरीर के संकेतों को समझेंगे, ट्रिगर चीज़ों से बचेंगे और आयुर्वेदिक उपायों को सोच-समझकर अपनाएँगे, तो सर्दी का मौसम भी आपके लिए संभालना मुश्किल नहीं रहेगा।
अगर आपको लगता है कि हाल ही में लक्षण बढ़ रहे हैं या बार-बार दिक्कत हो रही है, तो देर न करें। सही उपचार और सही सलाह आपको फिर से सहज और आरामदायक साँस लेने में मदद कर सकती है।
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FAQs
- दमा के लिए कौन-सी आयुर्वेदिक दवा अच्छी है?
आपके शरीर की प्रकृति के अनुसार त्रिकटु, पिप्पली, गिलोय रस या अडूसा उपयोगी हो सकते हैं। इन्हें शुरू करने से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह ज़रूरी है।
- ठंड के मौसम में मेरा अस्थमा खराब क्यों होता है?
ठंडी और सूखी हवा नलियों को सिकोड़ देती है, और प्रदूषण बढ़ने से सूजन भी बढ़ जाती है। इसलिए सर्दियों में आपको लक्षण ज़्यादा महसूस होते हैं।
- सर्दियों में साँस क्यों फूलती है?
ठंडे तापमान में नलियाँ संकीर्ण हो जाती हैं और बलगम बढ़ जाता है। इसी वजह से आपको थोड़ी देर चलने पर भी साँस भारी लग सकती है।
- क्या स्मॉग वाले दिनों में घर के अंदर रहना मदद करता है?
हाँ, स्मॉग के दिनों में घर के अंदर रहना आपको प्रदूषण से बचाता है। लेकिन कमरे में हवा का साफ रहना भी उतना ही ज़रूरी है।
- दिल्ली-एनसीआर के बढ़ते AQI का अस्थमा पर क्या असर पड़ता है?
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने पर हवा में धूल और धुआँ जम जाता है। ये कण आपकी नलियों में सूजन बढ़ाते हैं और अस्थमा को तुरंत ट्रिगर कर सकते हैं।
- क्या गुनगुना पानी पीने से अस्थमा में राहत मिलती है?
गुनगुना पानी बलगम को पतला करता है और नलियाँ साफ रखने में मदद करता है। सर्दियों में यह आपकी साँस को हल्का महसूस करा सकता है।
- बढ़ते प्रदूषण में आयुर्वेद आपकी कैसे मदद कर सकता है?
आयुर्वेद कफ कम करने वाले नुस्खों, गर्म तासीर वाले पेय, भाप और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली जड़ी-बूटियों के ज़रिए आपके श्वसन तंत्र को मज़बूत बनाने में मदद करता है।
- क्या कमरे की नमी भी अस्थमा बढ़ाती है?
हाँ, नमी से फफूँद बनती है, जो अस्थमा को तुरंत ट्रिगर कर सकती है। कमरे को सूखा और हवादार रखना आपके लिए बहुत ज़रूरी है।










































