बुजुर्गों का dinner बहुत जल्दी और breakfast बहुत देर से हो तो energy पर क्या असर पड़ सकता है?

Information By Dr. VD Aggarwal     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

 घर में अक्सर बुज़ुर्ग का रूटीन कुछ ऐसा होता है कि डिनर शाम को छह सात बजे तक हो जाता है लेकिन  ब्रेकफास्ट अगले दिन सुबह नौ दस बजे के आसपास होता है। कभी भूख नहीं लगती, कभी नींद देर से खुलती है तो  कभी सुबह चाय पी के काम चल जाता है। फैमिली को लग सकता है कि ये लोग एज के साथ नार्मल हैं, लेकिन क्या  मील्स के बीच में इतना लंबा एनर्जी गैप लेने से असर पड़ सकता है? हाँ, कुछ बुजुर्गों में इसका असर पड़ सकता है, लेकिन हर बुजुर्ग व्यक्ति के लिए डिनर या लेट ब्रेकफास्ट कोई समस्या नहीं होती। इसका असर उनकी कुल डाइट, हेल्थ कंडीशन, दवाइयाँ, नींद और रोज़ाना की गतिविधियों पर निर्भर करता है।

डिनर और नाश्ते के बीच लंबा अंतराल क्या करता है?

अगर कोई पर्सन शाम छह बजे डिनर करता है और अगले दिन दस बजे ब्रेकफास्ट करता है तो मील्स के बीच लगभग सोलह घंटे का गैप हो जाता है |

स्वस्थ वयस्क आमतौर पर रातभर की परीक्षण को सामान्य रूप से संभाल लेते हैं, लेकिन बुजुर्गों में भूख कम होना, मांसपेशियों का मास घट जाना और पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना कभी-कभी चुनौतीपूर्ण हो सकता है

अगर डिनर भी लाइट था और सुबह ब्रेकफास्ट भी लेट हो रहा है तो कुछ लोगों को सुबह कमजोरी, कम ऊर्जा, चक्कर जैसा महसूस हो सकता है। रोज़ाना की एक्टिविटीज़ करने में सुस्ती महसूस हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार इसका कारण सिर्फ भूख ही है।

  • सुबह एनर्जी कम महसूस हो सकती है

वो जो एक बुजुर्ग व्यक्ति को रात को सात बजे डिनर करता है और अगले दिन दस बजे तक कुछ नहीं खाता, अगर डिनर में पर्याप्त खाना नहीं था तो सुबह तक उन्हें भूख और थकान महसूस हो सकती है। बॉडी रात के दौरान स्टोर की गई एनर्जी को इस्तेमाल करती है, लेकिन अगर व्यक्ति पहले से कम खा रहा है, वजन कम है या उसकी पोषण की जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं, तो लोगों को इस अंतराल में थकान ज्यादा महसूस हो सकती है।

इस स्थिति में सिर चाय और बिस्कुट पर निर्भर रहने के बजाय एक संतुलित नाश्ता लेना मददगार हो सकता है 

  • मांसपेशियों की कमजोरी या शारीरिक गतिविधि पर असर

उम्र बढ़ने के साथ मसल मास और ताकत स्वाभाविक रूप से कम हो सकती है, इसलिए बुज़ुर्गों के लिए पूरे दिन पर्याप्त कैलोरी और प्रोटीन लेना जरूरी है। अगर जल्दी डिनर और देर से नाश्ता करने के कारण मील लगातार स्किप हो रहे हैं, तो उनकी पोषण संबंधी खुराक कम हो सकती है। लंबे समय में पर्याप्त पोषण ना मिलने से मसल कमजोर हो सकते हैं, स्टैमिना कम हो सकती है और दैनिक कामकाज में मुश्किलें आ सकती हैं।

  • ब्लड शुगर लेवल भी मायने रखता है

अगर किसी बुजुर्ग व्यक्ति को डायबिटीज़ है और वो किसी खास डायबिटीज़ की दवाइयाँ लेते हैं तो मर्दों में लंबे समय का गैप ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकता है। लो ब्लड शुगर के लक्षणों में सूजन, कांपना, कन्फ्यूजन, कमजोरी या चक्कर शामिल हो सकते हैं। हर डायबिटीज़ दवा का असर एक जैसा नहीं होता, इसलिए बुजुर्गों का अपना एक निर्धारित और सही टाइम का शेड्यूल फॉलो करना सही नहीं होगा।

  • भूख के सिग्नल्स और ऐपेटाइट का कनेक्शन

कुछ बुजुर्ग कहते हैं सुबह भूख ही नहीं लगती, इसके पीछे उम्र से जुड़े बदलाव के अलावा दवाइयाँ, कब्ज़, नींद की कमी, कम एक्टिविटी या कोई मूल स्वास्थ्य समस्या भी हो सकती है। अगर डिनर जल्दी हो जाता है और ब्रेकफास्ट बहुत देर से होता है, तो मॉर्निंग ऐपेटाइट और खाने की रूटीन को समझना useful है, लेकिन सिर्फ टाइमिंग बदलने से हर किसी की भूख बढ़े ये जरूरी नहीं।

आयुर्वेद क्या कहता है

आयुर्वेद में रेगुलर रूटीन और अग्नि यानी पाचन से जुड़ी ट्रेडिशनल कॉन्सेप्ट को इम्पॉर्टेंस दी जाती है। दिनचर्या और भोजन के प्रिंसिपल्स में ऐसे हैबिट्स पर फोकस किया जाता है जो व्यक्ति की डाइजेशन कैपसिटी और रूटीन के साथ सूट करते हैं। इस पर्सपेक्टिव से बुजुर्गों के लिए ऐसा मेन्यू शेड्यूल रखना पॉसिबल और प्रैक्टिकल हो सकता है जो उनकी भूख, पाचन और डेली एक्टिविटी के अनुसार हो। लेकिन आयुर्वेद में भी मील टाइमिंग को हर पर्सन के लिए एक ही रूल में फिट करना सही एप्रोच नहीं होगा।

निष्कर्ष

दिन का डिनर जल्दी और ब्रेकफास्ट देर से होना अपने आप में अस्वास्थ्यकर नहीं है, अगर वे पूरे दिन पर्याप्त पोषण ले रहे हैं, अच्छी नींद ले रहे हैं और कमजोरी के अलावा कोई और समस्या नहीं है, तो उनका रूटीन ठीक हो सकता है। लेकिन अगर खाने के बीच में लंबे अंतराल हैं और इससे सुबह ऊर्जा कम होना, कमजोरी या भूख कम लगना जैसी समस्या हो रही है, तो उनके रूटीन को बदलना समझदारी होगी।

संदर्भ

AYUSHCHARYA 2018 – ‘A National Conference on Dinacharya and Ritucharya for public health promotion’ - PMC

An overview of appetite decline in older people - PMC

Gastrointestinal Tract Disorders in Older Age - PMC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

यह व्यक्ति के न्यूट्रिशन, दवाइयों और मेडिकल कंडीशन पर निर्भर करता है। बुजुर्ग व्यक्ति के लिए इतना लंबा अंतराल उपयुक्त नहीं होता, खासकर डायबिटीज या कम बॉडी वेट जैसी बढ़ती स्थिति में।

हाँ, कुछ मामलों में, लेकिन डिहाइड्रेशन, कम ब्लड प्रेशर की दवाइयाँ और स्वास्थ्य की स्थितियाँ भी कमजोरी पैदा कर सकती हैं।

छोटे और आसानी से खाने वाले नाश्ते के विकल्प पेश करें और उनकी भूख का ध्यान रखें। अगर भूख लगातार कम है या वजन कम हो रहा है तो मेडिकल जांच कराएँ।

नहीं, और ये डिनर अपने आप में हानिकारक नहीं है। मेरी चिंता ये है कि उन्हें पूरी तरह से पोषण की जरूरतें पूरी हो रही हैं या नहीं, और मील गैप भी असहज या कमजोर नहीं कर रहा।

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