हर चीज़ का health data track करना कब useful से obsessive बन सकता है

Information By Dr. Mukesh Sharma     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आज के डिजिटल युग में health का ध्यान रखना काफी आसान हो गया है। चाहे वो smartwatch हो, fitness band हो, या फिर mobile app हो, इन सबकी मदद से हम अपने footsteps, heart rate, stress level, और कैलोरी की खपत तक का भी पता लगा सकते हैं। इसके अनुसार हम अपनी जीवनशैली को सुधार सकते हैं। 

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सेहत पर नज़र रखना कब तक उपयोगी रहता है और कब यह चिंता का कारण बन जाता है?

Data के अनुसार अपनी जीवनशैली को सुधारना अच्छी बात है, पर इसकी वजह से खुद को तनाव देना उचित नहीं है। 

Health Data Track करना उपयोगी कैसे है ?

आज के डिजिटल युग में सेहत का ध्यान रखने के लिए बनाए गए devices बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। smartwatches, fitness bands, और mobile apps से हम अपना हार्ट रेट, रोज़ाना के कदम, कैलोरी, नींद, ब्लड प्रेशर आदि का पता लगा सकते हैं और इसके अनुसार अपने लिए एक सटीक दिनचर्या बना सकते हैं। 

यह हमारे लिए उपयोगी तो साबित हो सकता है, पर एक सीमा तक। इसका ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल हमारी मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। 

जानिए कैसे:

  • शारीरिक गतिविधियों पर नज़र रखना: Health data tracker की सहायता से हम पता लगा सकते हैं कि हम दिन में कितना चले, कितने सक्रिय रहे। ये हमे शारीरिक गतिविधियां  बढ़ाने के लिए और प्रोत्साहित करता है। 
  • बिमारियों का जल्दी पता चलना: हार्ट रेट और ऑक्सीजन लेवल का ट्रैक रखने से हम सचेत हो जाते है। कुछ गड़बड़ होने पर हम जल्दी इसका इलाज करा सकते हैं और पहली ही बीमारी का पता लगा सकते हैं। 
  • सही lifestyle बनाने के लिए: Data की मदद से आप अपने अनुकूल एक सटीक दिनचर्या बना सकते हैं जो आपको healthy lifestyle जीने में मदद करेगी। 

जब तक हम इन devices का सीमित उपयोग करते हैं, तब तक यह हमारे लिए उपयोगी साबित हो सकता है।  

Health Data Track करना कब Obsessive बन सकता है?

Health data tracking हमारे health के लिए बेहद उपयोगी है, पर एक सीमा तक। जब health data हमारे मूड और दिनचर्या पर हावी होने लगे, तब हमें समझ जाना चाहिए कि यह एक चेतावनी है। smartwatch, fitness band आदि devices health data track करने के लिए बने हैं, हमारे मन को अशांत करने के लिए  नहीं। हमें हमारी मानसिक शांति पर इसको हावी नहीं होने देना चाहिए। जब ये data guide करने के बजाय आपके मूड को प्रभावित करने लगे तब आपको इसका उपयोग करना कम या बंद कर देना चाहिए। 

जाने कब इसका उपयोग बंद कर देना चाहिए: 

  • दिन भर बार बार data चेक करते रहना, उम्मीद के अनुसार न होने की वजह से तनाव, उदासी या चिड़चिड़ापन महसूस होना। 
  • गोल (Goal) पूरा करने के लिए अपने शरीर के signals को नज़रअंदाज़ करना। जैसे शरीर थक चुका है फिर भी भागना। 
  • Data न मिलने पर परेशान होना, यदि कभी घड़ी पहनना भूल जाये या बैटरी खत्म हो जाये तो परेशान होना या ये सोचना की मेहनत व्यर्थ चली गयी। 
  • Data के ऊपर-नीचे होने की वजह से बड़ी बीमारी होने का वहम। जैसे exercise की वजह से बढ़े हार्ट रेट को देखकर बड़ी बीमारी का खतरा मान कर डॉक्टर को दिखने चले जाना।

Health data tracker आपको guide करने के लिए बना है, न कि आपकी रोजमर्रा की ज़िन्दगी पर हावी होने के लिए। 

Health Data को Track करने के सही तरीके

Health data track करना आपके लिए उपयोगी साबित हो सकता है, पर तब तक ही जब तक आप इसका उपयोग एक सीमा तक करते हैं। Smartwatch, fitness band आदि का सीमित इस्तेमाल करना चाहिए। Health data tracker को guiding purpose के लिए इस्तेमाल करना चाहिए, न कि इसके उपयोग को अपने मानसिक स्वास्थ्य पर हावी होने देना चाहिए।  इसके इस्तेमाल के सही तरीके निम्नलिखित हैं :

  • सब कुछ ट्रैक करना बंद करें, केवल उपयोगी चीजों का ट्रैक करें, जैसे फुटस्टेप्स और नींद आदि। बस 1 या 2 उपयोगी फीचर्स का उपयोग करें , बाकी फीचर्स को बंद कर दें। 
  • Data केवल एक निश्चित समय पर ही चेक करे नियम बना ले की बस एक बार देखना है (जैसे शाम को) बार-बार चेक न करे। 
  • ध्यान दें कि आप data नियंत्रित करें न कि data आपको नियंत्रित कर रहा हो। गोल (Goal) पूरा करने के लिए अपने शरीर के signals को नज़रअंदाज़ न करे। 
  • Digital detox करें, हफ्ते में एक दिन बिना किसी ट्रैकर के बिताएं। 
  • अपना दिन बिना किसी app को देख कर शुरू करे रोज़ाना एक मिनट खुद के साथ शांति में बिताएं इससे आपका शरीर खुद को प्रकृति के साथ जोड़ेगा। 

इन आदतों को अपनाकर भी आप अपने data को track कर सकते हैं, उससे obsessed हुए बिना। 

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण 

आयुर्वेद में शरीर को केवल शारीरिक गतिविधियों या संख्याओं तक सीमित नहीं किया गया हैं। इसमें शरीर, मन, पाचन, जीवनशैली, दिनचर्या और नींद के बीच में संतुलन का महत्व दिया गया है। 

आयुर्वेदिक जीवनशैली में नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार,पर्याप्त आराम और शारीरिक आवश्यकताओं पर ध्यान देने का महत्त्व है। जैसे नियमित दिनचर्या रखना , पर्याप्त नींद लेना और शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना आदि। 

Health data track करना तब obsessive बन जाता है, जब यह आपकी मन की शांति छीनने लगे और आप अपने बॉडी सिग्नल्स को सुनने के बजाय सिर्फ संख्याओं पर निर्भर हो जाएं।

जब बार बार tracker देखने से आप हर छोटी-छोटी चीज़ के लिए लगातार चिंता करने लगते है तो इससे आपका वात दोष बढ़ने लगता है जिस  वजह से आपको सोने में परेशानी और anxiety जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है । 

Data को एक गाइड की तरह इस्तेमाल करें, अपने जीवन का मालिक न बनने दें। अगर आपको लगे कि data आपके ऊपर हावी हो रहा है या आपके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहा है, तो कुछ दिनों के लिए digital detox करें। 

निष्कर्ष

Health Data Track करना एक अच्छी आदत है, जो हमारी दिनचर्या को बेहतर बनाने में मदद करती है। लेकिन, अगर ये संख्याएं आपके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालने लगें या तनाव का कारण बन जाएं, तो इनका उपयोग सीमित कर देना चाहिए। यह data बेशक उपयोगी है, पर केवल एक हद तक। इसे सिर्फ एक गाइड (Guide) मानें, डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट नहीं।

बार-बार health डेटा देखने से मानसिक तनाव बढ़ता है, जो आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात दोष के असंतुलन का कारण बन सकता है। इसलिए, data को सिर्फ एक संदर्भ की तरह इस्तेमाल करें; इसे अपने मानसिक सुकून और जीवन को नियंत्रित न करने दें।

References

Health data sharing attitudes towards primary and secondary use of data: a systematic review - PMC

Ayurveda and medicalisation today: The loss of important knowledge and practice in health? - PMC

The use of Big Data Analytics in healthcare - PMC

Health Habits and Wearable Activity Tracker Devices: Analytical Cross-Sectional Study - PMC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

शरीर को एक्टिव बनाने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधियां, संतुलित आहार और उचित जीवनशैली अपनानी चाहिए। 

Health data track करना हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को समझने और उसे बेहतर बनाने के लिए बहुत उपयोगी है। 

Health data track करना तब obsessive बन जाता है जब यह आपकी सेहत सुधारने की बजाय आपके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालने लगे और आपकी चिंता बढ़ाने लगे।

दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए आपको अपनी जीवनशैली और खान-पान को सुधारना होगा।

आयुर्वेद के अनुसार, मानसिक तनाव वात दोष के असंतुलन के कारण होता है। 

मानसिक तनाव जड़ से ठीक नहीं किया जा सकता है पर सही जीवनशैली और सही आदतों से इसे बहुत हद तक कम और नियंत्रित किया जा सकता है। 

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