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आयुर्वेद की सहायता से कैसे करें तनाव और अवसाद को दूर?

  • category-iconPublished on 21 Jan, 2020
  • category-iconUpdated on 25 May, 2026
  • category-iconMental Health
  • blog-view-icon6550

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में तीन प्रकार के दोष (वात, पित्त, कफ) पाए जाते हैं और इन्हीं के असंतुलन के कारण तनाव या अवसाद होता है। अगर इसका समय से निवारण नहीं होता तो आप विश्व से सामंजस्य बनाने में असमर्थ हो जाते हैं और एक असंतोष भरा जीवन जीने लगते हैं।

आयुर्वेद नकारात्मक सोच को अवसाद का कारण मानता है। जब कोई व्यक्ति किसी बात या कार्य को लेकर बहुत सारी चिंताओं में घिर जाता है और कार्य को टालता रहता है, तो वह उदास रहने लगता है। उसका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी खराब रहने लगता है। और इस प्रकार, वह अवसाद का शिकार हो जाता है। इस तनाव के कारण कई बार सरदर्द और कमरदर्द, गर्दन में बल, अपच, मधुमेह और कब्ज जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं।

अवसाद और तनाव से बचने के लिए आयुर्वेद में कुछ कमाल के नुस्खे हैं, जो कि आपको लम्बे समय तक इससे दूर रखेंगे -

जंक फ़ूड के बजाय सात्विक भोजन खायें:

सात्विक या आयुर्वेदिक रूप से लाभदायक खाद्य पदार्थ खायें। इस श्रेणी में ताजे फल और सब्जियाँ आते हैं। वात दोष वाले लोग गरम खाना और मिठाई, जबकि पित्त दोष वाले लोग मीठा, ठंडा और कड़वा खाना खा सकते हैं। कफ वाले लोगों को हल्का, सूखा और गरम खाना खाना चाहिए।

सात्विक जीवनशैली अपनायें:

नकारात्मक ऊर्जा से बचे रहकर और सकारात्मक रवैया को अपनाकर आप सुखपूर्वक एक आदर्श जीवन का निर्वाह कर सकते हैं। साथ ही, व्यक्ति को अपने धातु और दोषों पर पूरा नियंत्रण होना चाहिए। जब आपका ध्यान एक ही जगह केंद्रित रहने लगे और आप अपने कार्य के प्रति समर्पित और आत्म-प्रेरित महसूस करें, तब समझ लीजिये कि आप सात्विक होते जा रहे हैं। रोज योग और व्यायाम करने से भी शरीर स्वस्थ रहता है।

आध्यात्म की शिक्षा ग्रहण करें:

सारी व्यक्तिगत और निजी समस्याओं से बचने के लिए यह बहुत जरूरी है कि व्यक्ति अपने जीवन के लक्ष्यों का सही निर्धारण करे और अपनी उपलब्धियों से संतुष्ट रहे। हर किसी को अपने अंदर उपस्थित ईश्वर-प्रदत्त प्रतिभा को पहचानना चाहिए। इन सबके लिए योग अत्यावश्यक है, क्योंकि योग ही हमें आत्मनिरीक्षण सिखाता है। इसकी मदद से ही हम अपनी कमजोरियों या ताकतों का पता लगा सकते हैं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

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