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Walking sugar control में कैसे मदद कर सकती है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

दोपहर के भारी भोजन के बाद जब हम सीधे सोफे पर जाकर लेट जाते हैं या टीवी के सामने बैठ जाते हैं, तो शरीर के अंदर एक अलग ही खेल शुरू हो जाता है। उस समय भले ही हमें बहुत आराम मिल रहा हो, लेकिन हमारे शरीर का पूरा सिस्टम उस भोजन से मिलने वाली ऊर्जा को संभालने में परेशान हो रहा होता है। हम अक्सर सोचते हैं कि सेहत बनाने के लिए जिम जाना, महंगे सप्लीमेंट लेना या बहुत कठिन कसरत करना ही एकमात्र रास्ता है। लेकिन सच तो यह है कि हमारे पूर्वज बिना किसी जिम के सिर्फ सुबह-शाम टहलकर ही अपनी सेहत को एकदम दुरुस्त रखते थे।

आज के समय में शुगर या मधुमेह की समस्या घर-घर की कहानी बन चुकी है। हर दूसरे परिवार में कोई न कोई इस बात से परेशान है कि खून में शक्कर का स्तर कैसे काबू में रखा जाए। मीठा छोड़ना, दवाइयाँ खाना और बार-बार डॉक्टर के चक्कर लगाना एक आम दिनचर्या बन गई है। लेकिन इस पूरी उलझन के बीच हम एक बेहद आसान और मुफ्त के इलाज को भूल जाते हैं, जिसे हम पैदल चलना कहते हैं।  

भोजन के बाद का आलस और शरीर का गणित

जब हम कुछ भी खाते हैं, तो हमारा पाचन तंत्र उसे तोड़कर ग्लूकोज यानी शक्कर में बदल देता है। यह शक्कर हमारे खून में मिल जाती है ताकि शरीर को ऊर्जा मिल सके। अब अगर हम खाना खाते ही बैठ जाएं या सो जाएं, तो इस शक्कर का इस्तेमाल नहीं हो पाता और यह खून में ही जमा होने लगती है। यही वह समय होता है जब अचानक शुगर का स्तर बहुत तेजी से ऊपर भागता है, जिसे हम शुगर स्पाइक कहते हैं।

शरीर में जब यह शक्कर बढ़ती है, तो इसे ठिकाने लगाने के लिए हमारे पैनक्रियाज को बहुत ज़्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है। लगातार कई दिनों तक ऐसा होने से पैनक्रियाज थक जाता है और शरीर इंसुलिन के प्रति बेअसर होने लगता है। यहीं से शुगर की बीमारी की शुरुआत होती है। लेकिन अगर आप खाना खाने के बाद सिर्फ दस से पंद्रह मिनट के लिए हल्के कदमों से टहलने निकल जाएं, तो यह पूरी कहानी बदल जाती है।

पैदल चलने से शरीर में क्या बदलता है?

रोजाना कुछ कदम पैदल चलने से हमारे शरीर के भीतर शक्कर को संभालने का तरीका पूरी तरह बदल जाता है और सभी अंग बेहतर काम करने लगते हैं:

  • मांसपेशियां: पैदल चलते समय पैरों की मांसपेशियां खून से अतिरिक्त शक्कर को खुद ही सोखकर ऊर्जा में बदलने लगती हैं।
  • इंसुलिन: शरीर में इंसुलिन का असर बहुत बेहतर होता है जिससे पैनक्रियाज पर बेवजह का दबाव नहीं पड़ता।
  • खून का दौरा: पूरे शरीर में खून का बहाव तेज होता है जिससे हर हिस्से की नसों को सही पोषण मिलता है।
  • फैट बर्निंग: शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे पिघलती है जो शुगर बढ़ने का एक सबसे बड़ा कारण मानी जाती है।
  • दिल की सेहत: लगातार टहलने से दिल की धड़कन सही रहती है और ब्लड प्रेशर का खतरा भी काफी कम हो जाता है।

भोजन के तुरंत बाद की सैर का महत्व

हमारे यहां पुराने जमाने से दोपहर और रात के भोजन के बाद कुछ कदम चलने की परंपरा रही है। आयुर्वेद में इसे 'शतपावली' कहा गया है, जिसका सीधा मतलब है खाना खाने के बाद कम से कम सौ कदम चलना। जब आप भोजन करने के तुरंत बाद टहलते हैं, तो खून में घुल रही शक्कर तुरंत काम में आने लगती है। इससे वह अचानक से इतनी नहीं बढ़ पाती कि आपके शरीर को नुकसान पहुँचाए।

कई लोग सोचते हैं कि शाम को एक ही बार लंबी वॉक कर लेना काफी है। बेशक वह भी फायदेमंद है, लेकिन खाने के तुरंत बाद की छोटी वॉक शुगर कंट्रोल करने में ज़्यादा जादुई असर दिखाती है। यह आपके पाचन को इतना मज़बूत कर देती है कि पेट में गैस, एसिडिटी या भारीपन जैसी दिक्कतें अपने आप गायब हो जाती हैं। इसलिए भारी कसरत के बजाय भोजन के बाद की नियमित सैर को अपनी सबसे पहली आदत बनाएं।

आयुर्वेद के नज़रिए से चंक्रमण या पैदल चलना

आयुर्वेद में पैदल चलने को 'चंक्रमण' कहा गया है और इसे एक बेहतरीन दैनिक व्यायाम माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में तीन मुख्य दोष होते हैं वात, पित्त और कफ। जब शरीर में कफ दोष बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है और हमारी अग्नि यानी पाचन की आग ठंडी पड़ने लगती है, तो मधुमेह जैसी बीमारियां शरीर पर हावी होने लगती हैं। कफ का स्वभाव भारी और स्थिर होना है, जो शरीर में आलस बढ़ाता है।

जब आप सुबह या शाम को खुली हवा में टहलते हैं, तो शरीर में बढ़ा हुआ कफ शांत होने लगता है। पैदल चलने से शरीर की अग्नि तेज होती है, जिससे जो भी खाना हम खाते हैं, वह पूरी तरह पच जाता है और टॉक्सिंस यानी 'आम रस' में नहीं बदलता। आयुर्वेद कहता है कि जो इंसान रोज नियम से टहलता है, उसके जोड़ों के बीच का वात संतुलित रहता है और शरीर की नसें कभी जाम नहीं होतीं।

अपनी दिनचर्या में वॉक को शामिल करने के आसान तरीके

व्यस्त जीवन में भी बिना किसी अतिरिक्त समय या बिना किसी खर्च के पैदल चलने की आदत को बहुत आसानी से अपनाया जा सकता है:

  • सुबह की सैर: सुबह खाली पेट ताजी हवा में कम से कम आधा घंटा टहलने से दिनभर शुगर का स्तर सामान्य बना रहता है।
  • शतपावली नियम: दोपहर और रात के खाने के बाद घर के अंदर या बालकनी में ही सौ से पांच सौ कदम चलने का नियम बनाएं।
  • सीढ़ियों का इस्तेमाल: दफ्तर या बाजार में लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का चुनाव करने से पैरों की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं।
  • फोन वॉक: जब भी किसी से फोन पर लंबी बात करनी हो, तो एक जगह बैठने के बजाय कमरे या छत पर टहलें।
  • चाय ब्रेक: दफ्तर में काम के बीच जब भी चाय का ब्रेक लें, तो अपनी सीट पर बैठे रहने के बजाय थोड़ा घूम लें।

तनाव कम होना और शुगर का सीधा कनेक्शन

शायद आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आपका मानसिक तनाव भी आपके खून में शक्कर के स्तर को सीधे बढ़ा सकता है। जब हम बहुत ज़्यादा चिंता या ऑफिस के काम का प्रेशर लेते हैं, तो हमारा शरीर कॉर्टिसोल नाम का एक स्ट्रेस हार्मोन रिलीज करता है। इस हार्मोन का मुख्य काम शरीर में शक्कर की मात्रा को बढ़ाना होता है ताकि संकट के समय शरीर को तुरंत ऊर्जा मिल सके। लेकिन लगातार तनाव में रहने से यह शक्कर हमेशा खून में घुली रहती है।

जब आप टहलने के लिए बाहर निकलते हैं, तो खुली हवा और हरियाली आपके दिमाग को शांत करती है। पैदल चलने से हमारे मस्तिष्क में एंडोर्फिन नाम के हैप्पी हार्मोन बनते हैं, जो तनाव को तुरंत कम कर देते हैं। जैसे ही आपका दिमाग रिलैक्स होता है, स्ट्रेस हार्मोन का स्तर गिर जाता है और इसके साथ ही आपकी शुगर भी अपने आप नीचे आने लगती है। यानी एक छोटी सी वॉक आपके तन और मन दोनों का इलाज एक साथ कर देती है।

निष्कर्ष

पूरी बात का सीधा सा निचोड़ यह है कि शुगर जैसी बीमारी से लड़ने के लिए आपको हमेशा बहुत महंगे या मुश्किल रास्ते चुनने की ज़रूरत नहीं है। कुदरत ने हमारे पैरों के रूप में हमें एक ऐसी दवा दी है जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है और जो हर उम्र के इंसान के लिए बिल्कुल मुफ्त है।

रोजाना सिर्फ कुछ कदम चलना आपके पूरे जीवन को बदल सकता है। यह न सिर्फ आपकी बढ़ी हुई शक्कर को ठिकाने लगाता है, बल्कि आपके दिल, दिमाग और जोड़ों को भी सालों-साल जवान बनाए रखता है। इसलिए आज ही से आलस को थोड़ा दूर भगाइए, खाने के बाद सोफे पर चिपकने की आदत छोड़िए और अपनी सेहत की तरफ पहला कदम बढ़ाइए। याद रखिए, आपकी सेहत की चाबी किसी डॉक्टर के पर्चे में नहीं, बल्कि आपके अपने पैरों की रफ्तार में है!

References

Ministry of Ayush, Government of India

National Health Portal of India

Ministry of Health and Family Welfare, Government of India

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, सामान्य गति से लगातार सीधे कदमों से पैदल चलना भी खून में शक्कर के स्तर को कम करने के लिए पूरी तरह काफी है।

खाना खाने के तुरंत बाद पांच से दस मिनट के भीतर ही बहुत हल्की गति से टहलना सबसे ज़्यादा फायदेमंद माना जाता है।

अगर आपकी शुगर बहुत ज़्यादा घटती-बढ़ती है, तो सुबह वॉक पर जाने से पहले एक सेब या थोड़े से भीगे हुए बादाम खा लेना बेहतर होगा।

हाँ, रात को खाने के बाद टहलने से भोजन आसानी से पच जाता है जिससे पेट भारी नहीं रहता और बहुत गहरी और अच्छी नींद आती है।

एक स्वस्थ जीवन के लिए दिनभर में कम से कम तीस से पैंतालीस मिनट या लगभग पांच हजार से सात हजार कदम चलना बहुत अच्छा माना जाता है।

बिलकुल, मुख्य बात शरीर की मूवमेंट और मांसपेशियों का इस्तेमाल होना है, इसलिए आप घर के भीतर भी आराम से टहल सकते हैं।

पैदल चलना बहुत मददगार है, लेकिन इसके साथ ही सही खान-पान, कम मीठा खाना और तनाव मुक्त रहना भी उतना ही ज़रूरी है।

मौसम बहुत ज़्यादा खराब होने पर आप बाहर जाने के बजाय घर के अंदर ही हल्के कदमों से इंडोर वॉक कर सकते हैं।

समतल जमीन पर लगातार चलना जोड़ों के लिए सुरक्षित है, हालांकि रीढ़ और घुटने ठीक होने पर सीढ़ियां चढ़ना भी एक बेहतरीन कसरत है।

नहीं, वॉक से लौटने के बाद शरीर को थोड़ा सामान्य होने दें और कम से कम पंद्रह मिनट बाद ही गुनगुना पानी या कुछ हल्का खाएं।

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