दूध, दही और लस्सी से IBS के लक्षण कब बढ़ सकते हैं?

Information By Dr. VD Aggarwal     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह दूध वाली चाय पीने के बाद पेट फूलने लगता है, लेकिन दोपहर में खाने के साथ दही खाने से कोई परेशानी नहीं होती। कभी एक गिलास मीठी लस्सी पीते ही पेट में गुड़गुड़ाहट शुरू हो जाती है और अचानक टॉयलेट जाना पड़ता है।

अगर आपको IBS है, तो शायद आपके मन में भी यह सवाल आया होगा-दूध, दही और लस्सी एक ही चीज से बनते हैं, फिर इनका असर अलग-अलग क्यों होता है?

कई लोग पेट की परेशानी शुरू होते ही दूध से बनी हर चीज खाना बंद कर देते हैं। लेकिन ऐसा करना हर IBS मरीज के लिए जरूरी नहीं है।

असल सवाल यह है कि आपका शरीर दूध में मौजूद लैक्टोज को कितनी अच्छी तरह पचा पाता है और किस मात्रा में खाने से परेशानी महसूस होती है।

दूध पीने के बाद पेट फूलता है तो क्या IBS बढ़ रहा है?

दूध में एक प्राकृतिक शुगर होती है, जिसे Lactose कहते हैं।

इसे पचाने के लिए हमारी छोटी आंत में Lactase नाम का एंजाइम बनता है। जब यह एंजाइम पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता, तो लैक्टोज पूरी तरह पच नहीं पाता।

बिना पचा लैक्टोज बड़ी आंत में पहुंचने पर वहां मौजूद बैक्टीरिया द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे गैस, पेट फूलना, मरोड़ और दस्त जैसे लक्षण हो सकते हैं।

इस स्थिति को Lactose Intolerance कहा जाता है।

अमेरिका के National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) के अनुसार, लैक्टोज इनटॉलरेंस में दूध या दूध से बने पदार्थ लेने के कुछ घंटों के भीतर पेट दर्द, गैस, दस्त और मतली जैसी शिकायतें हो सकती हैं।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है।

IBS और Lactose Intolerance दो अलग स्थितियां हैं।

IBS आंत और मस्तिष्क के बीच होने वाले संकेतों से जुड़ी लंबे समय की समस्या है। वहीं Lactose Intolerance मुख्य रूप से लैक्टोज को पचाने में होने वाली कठिनाई से संबंधित है।

कुछ लोगों को दोनों समस्याएं एक साथ भी हो सकती हैं।

इसलिए दूध पीने के बाद पेट फूलना अपने आप IBS का flare-up साबित नहीं करता।

दही खाने से आराम, लेकिन दूध से परेशानी क्यों होती है?

भारतीय घरों में अक्सर कहा जाता है कि दूध नहीं पचता तो दही खा लो।

इस सलाह में कुछ वैज्ञानिक आधार है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए सही नहीं है।

दही बनाने की प्रक्रिया में बैक्टीरिया दूध की कुछ लैक्टोज शुगर को इस्तेमाल करते हैं। इस वजह से कुछ प्रकार के दही में दूध की तुलना में लैक्टोज कम हो सकता है।

दही के जीवित बैक्टीरियल कल्चर भी कुछ लोगों में लैक्टोज के पाचन में मदद कर सकते हैं।

NIDDK के अनुसार, Lactose Intolerance वाले कुछ लोग दूध की तुलना में दही और कुछ प्रकार के चीज़ को बेहतर तरीके से सहन कर पाते हैं।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दही पूरी तरह lactose-free होता है।

Monash University की FODMAP research में भी सामान्य दूध और कुछ प्रकार के दही को लैक्टोज के महत्वपूर्ण स्रोतों में शामिल किया गया है।

इसलिए अगर आपको दही खाने के बाद भी पेट फूलने या दस्त की समस्या होती है, तो उसे जबरदस्ती खाना जरूरी नहीं है।

यह भी देखें कि आप सादा दही खा रहे हैं या उसमें चीनी, फल, शहद या दूसरे ingredients मिले हैं।

कई बार परेशानी केवल दही से नहीं, बल्कि उसके साथ खाए गए दूसरे खाद्य पदार्थों से भी जुड़ी हो सकती है।

लस्सी से पेट क्यों खराब हो सकता है?

गर्मियों में एक बड़ा गिलास मीठी लस्सी पीना बहुत से लोगों को पसंद है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर भारत के दूसरे हिस्सों में यह रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा भी है।

लेकिन IBS वाले कुछ लोगों को लस्सी पीने के बाद पेट भारी लग सकता है।

इसकी एक वजह लस्सी में मौजूद लैक्टोज हो सकती है।

हालांकि लस्सी दही से बनती है, लेकिन उसमें लैक्टोज की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि कितना दही इस्तेमाल हुआ, कितना पानी या दूध मिलाया गया और एक बार में कितनी मात्रा पी गई।

अगर लस्सी में अलग से दूध मिलाया गया है, तो लैक्टोज की मात्रा भी बढ़ सकती है।

बाजार में मिलने वाली मीठी लस्सी में चीनी की मात्रा ज्यादा हो सकती है। कुछ पैक्ड या फ्लेवर्ड उत्पादों में दूसरे ingredients भी होते हैं, जिनसे संवेदनशील लोगों को परेशानी हो सकती है।

एक छोटा कटोरा दही और एक बड़ा गिलास लस्सी आपके शरीर पर बिल्कुल एक जैसा असर डालें, यह जरूरी नहीं है।

लस्सी में मौजूद लैक्टोज का असर उसकी मात्रा और आपकी व्यक्तिगत सहनशीलता पर निर्भर करेगा।

अगर लस्सी पीने के बाद बार-बार दस्त या पेट में मरोड़ होती है, तो अपनी प्रतिक्रिया को नोट करें और डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लें।

क्या IBS वाले लोगों को दूध पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?

यह एक आम गलतफहमी है।

Monash University की विशेषज्ञ guidance के अनुसार, Low-FODMAP diet अपनाने वाले हर IBS मरीज को दूध से बनी सभी चीजें बंद करने की जरूरत नहीं होती।

अगर व्यक्ति लैक्टोज को अच्छी तरह पचा सकता है, तो सामान्य डेयरी उत्पाद भी उसके भोजन का हिस्सा हो सकते हैं।

लैक्टोज इनटॉलरेंस होने पर भी कुछ लोग सीमित मात्रा में दूध या दूसरे डेयरी उत्पाद सहन कर सकते हैं।

NIDDK के अनुसार, शोध बताते हैं कि लैक्टोज इनटॉलरेंस वाले कई लोग लगभग 12 ग्राम लैक्टोज, यानी करीब एक कप दूध में मौजूद मात्रा, बिना लक्षण या केवल हल्के लक्षणों के साथ सहन कर सकते हैं।

यह हर व्यक्ति की सुरक्षित मात्रा नहीं है।

किसी को इससे काफी कम मात्रा में भी परेशानी हो सकती है।

अगर दूध से समस्या होती है, तो डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह से Lactose-free Milk जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

लेकिन दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद लंबे समय के लिए पूरी तरह बंद करने पर कैल्शियम और विटामिन D जैसे पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करना जरूरी है।

Reddit पर भी मरीजों का सवाल-दूध नहीं पचता, लेकिन दही कैसे पच जाता है?

Reddit के IBS community में एक व्यक्ति ने बताया कि उसे सामान्य दूध पीने के बाद परेशानी होती थी, लेकिन Greek Yogurt और कुछ प्रकार के चीज़ खाने पर समस्या नहीं होती थी।

वह समझना चाहता था कि एक ही खाद्य समूह की चीजों का असर इतना अलग क्यों है।

एक दूसरे discussion में व्यक्ति ने बताया कि पहले वह दूध और डेयरी उत्पाद आसानी से ले पाता था, लेकिन बाद में इन्हें खाने से गैस, पेट फूलना और दस्त जैसी शिकायतें शुरू हो गईं।

ये व्यक्तिगत अनुभव हैं, वैज्ञानिक अध्ययन नहीं।

लेकिन इनसे मरीजों की एक वास्तविक उलझन सामने आती है।

कभी-कभी लोग सोचते हैं कि अगर उन्हें पहले दूध से कोई परेशानी नहीं थी, तो अब होने वाले लक्षण दूध के कारण नहीं हो सकते।

जबकि लैक्टोज को पचाने की क्षमता समय के साथ बदल सकती है। कुछ आंतों से संबंधित स्थितियां भी लैक्टोज के अवशोषण को प्रभावित कर सकती हैं।

फिर भी केवल लक्षण देखकर Lactose Intolerance की पुष्टि नहीं की जा सकती।

कैसे पहचानें कि परेशानी लैक्टोज से है या किसी और चीज से?

अगर आपको दूध या दही के बाद बार-बार पेट दर्द, गैस या दस्त होते हैं, तो सबसे पहले अपनी खाने की आदतों पर ध्यान दें।

कुछ दिनों तक एक छोटी food diary रख सकते हैं।

उसमें लिखें कि आपने क्या खाया, कितनी मात्रा में लिया और कितनी देर बाद परेशानी शुरू हुई।

उदाहरण के लिए, सोमवार को दूध वाली चाय पीने के बाद पेट फूला, लेकिन मंगलवार को बिना दूध वाली चाय से ऐसा नहीं हुआ।

इससे एक संभावित trigger का संकेत मिल सकता है, लेकिन यह अपने आप में diagnosis नहीं है।

डॉक्टर जरूरत पड़ने पर सीमित समय के लिए लैक्टोज कम करने का परीक्षण या Hydrogen Breath Test सुझा सकते हैं।

इस टेस्ट में लैक्टोज लेने के बाद सांस में हाइड्रोजन की मात्रा और साथ में होने वाले लक्षणों को देखा जाता है।

ध्यान रखें कि अगर Lactose-free Milk लेने के बाद भी परेशानी होती है, तो उसके पीछे दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। हर समस्या को लैक्टोज से जोड़ना सही नहीं होगा।

यदि मल में खून आए, बिना कारण वजन घटे, लगातार बुखार हो या गंभीर पेट दर्द हो, तो इसे सिर्फ IBS या Lactose Intolerance मानकर नजरअंदाज न करें।

दूध, दही या लस्सी से पेट परेशान होता है? Jiva Ayurveda से सलाह लें

अगर दूध वाली चाय, दही या लस्सी लेने के बाद आपको बार-बार गैस, पेट फूलने, दर्द या दस्त की शिकायत होती है, तो बिना वजह सभी डेयरी उत्पाद बंद करने के बजाय अपनी परेशानी की सही वजह समझना जरूरी है।

Jiva Ayurveda में आप योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से अपनी पाचन संबंधी परेशानी, खानपान, मल त्याग की आदतों और दैनिक दिनचर्या के बारे में परामर्श ले सकते हैं। डॉक्टर आपकी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार आहार और जीवनशैली संबंधी मार्गदर्शन तथा उपयुक्त आयुर्वेदिक देखभाल के विकल्प समझा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर Lactose Intolerance, IBS या किसी दूसरी बीमारी की जांच के लिए Gastroenterologist की सलाह भी आवश्यक हो सकती है।

अगर आपको भी दूध, दही या लस्सी के बाद बार-बार पेट की परेशानी होती है, तो Jiva Ayurveda के डॉक्टर से परामर्श के लिए फॉर्म भरें और अपनी समस्या विस्तार से बताएं और अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे हमारे नंबर +919266714040 पर।

हर डेयरी उत्पाद से एक जैसा असर होना जरूरी नहीं है। सही तरीका यह है कि अपने लक्षणों को समझें, खाने की मात्रा पर ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर जांच करवाएं-ताकि बिना वजह जरूरी पोषक खाद्य पदार्थ छोड़ने की नौबत न आए।

चिकित्सकीय सूचना: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। IBS और Lactose Intolerance के लक्षण मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन दोनों अलग स्थितियां हैं। किसी खाद्य समूह को लंबे समय के लिए बंद करने या दवा शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक या डाइटिशियन से सलाह लें।

Medical Sources & Research References

  1. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) - Symptoms & Causes of Lactose Intolerance

Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/lactose-intolerance/symptoms-causes

Content Reference: लैक्टोज, Lactase enzyme, पेट फूलना, दस्त, गैस और दूध से बनी चीजें खाने के बाद होने वाले लक्षण।

  1. NIDDK - Eating, Diet & Nutrition for Lactose Intolerance

Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/lactose-intolerance/eating-diet-nutrition

Content Reference: कई व्यक्तियों में लगभग 12 ग्राम लैक्टोज सहन करने की क्षमता, दही और अन्य कम लैक्टोज वाले खाद्य विकल्प, Lactose-free Milk, कैल्शियम तथा विटामिन D का महत्व।

  1. Monash University - Lactose and Dairy Products on a Low-FODMAP Diet

Source: https://www.monashfodmap.com/blog/lactose-and-dairy-products-on-low/

Content Reference: IBS में सभी डेयरी उत्पाद बंद करना जरूरी नहीं है। लैक्टोज की व्यक्तिगत सहनशीलता, भोजन के साथ छोटी मात्रा और Lactose-free विकल्पों की भूमिका।

  1. Monash University - Fermented Foods and FODMAPs

Source: https://www.monashfodmap.com/blog/fermented-foods-and-fodmaps/

Content Reference: Fermentation के बाद भी हर दही या fermented dairy product low-FODMAP नहीं होता। लैक्टोज की मात्रा और serving size महत्वपूर्ण हैं।

  1. NIDDK - Diagnosis of Lactose Intolerance

Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/lactose-intolerance/diagnosis

Content Reference: लैक्टोज इनटॉलरेंस के निदान में खाने की आदतों, लक्षणों, सीमित dietary trial और Hydrogen Breath Test की भूमिका।

  1. NIDDK - Eating, Diet & Nutrition for IBS

Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/irritable-bowel-syndrome/eating-diet-nutrition

Content Reference: IBS में लैक्टोज सहित FODMAP carbohydrates, व्यक्तिगत food triggers और आहार विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में diet modification।

Patient Forum Research

  1. Reddit - r/ibs

Discussion: On dairy products

Source: https://www.reddit.com/r/ibs/comments/1tmrqi3/on_dairy_products/

Content Reference: दूध, Greek Yogurt, सामान्य दही और चीज़ से अलग-अलग तरह की परेशानी होने पर मरीज के सवाल।

  1. Reddit - r/ibs

Discussion: Can you suddenly become lactose intolerant?

Source: https://www.reddit.com/r/ibs/comments/1kxwza3/can_you_suddenly_become_lactose_intolerant/

Content Reference: पहले दूध आसानी से पचने और बाद में गैस, पेट फूलने तथा दस्त के लक्षण शुरू होने से जुड़ी वास्तविक चिंता।

  1. Reddit - r/ibs

Discussion: Can yogurt cause diarrhea?

Source: https://www.reddit.com/r/ibs/comments/xa3xjv

Content Reference: दही या Greek Yogurt से कुछ लोगों में दस्त और पेट दर्द होने, जबकि दूसरों में कोई परेशानी न होने के व्यक्तिगत अनुभव।

  1. Reddit - r/ibs

Discussion: Indian here with IBS (mixed but now mostly dealing with infrequent constipation)

Source: https://www.reddit.com/r/ibs/comments/1ijmoxx

Content Reference: एक भारतीय IBS मरीज द्वारा दूध, लस्सी, Lactose-free Milk और दूसरे खाद्य पदार्थों से जुड़े अनुभव। यह व्यक्तिगत अनुभव है, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं।

Research Note: Reddit पर साझा किए गए अनुभव केवल मरीजों के सवालों और चिंताओं को समझने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं। इन्हें किसी बीमारी के कारण, निदान या उपचार की प्रभावशीलता का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना गया है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

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