कब्ज़ में इंडियन-स्टाइल टॉयलेट बेहतर है? टॉयलेट पोस्चर के बारे में क्या पता है

Information By Dr. VD Aggarwal     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह पेट साफ नहीं हो रहा। वेस्टर्न कमोड पर दस मिनट बैठने के बाद भी जोर लगाना पड़ता है और उठने के बाद लगता है कि पेट अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ।

ऐसी परेशानी में अक्सर घर के बड़े सलाह देते हैं-इंडियन टॉयलेट इस्तेमाल करो, पेट आसानी से साफ होगा।

लेकिन क्या इंडियन-स्टाइल टॉयलेट सचमुच कब्ज में बेहतर है? क्या वेस्टर्न कमोड पर बैठने से कब्ज बढ़ सकती है? और अगर घर में सिर्फ कमोड है, तो क्या पैरों के नीचे छोटा स्टूल रखने से मदद मिलेगी?

इन सवालों पर वैज्ञानिक अध्ययन हुए हैं। कुछ में Squatting Position के फायदे दिखाई दिए, लेकिन सभी अध्ययनों के परिणाम एक जैसे नहीं हैं।

इंडियन और वेस्टर्न टॉयलेट में असली फर्क क्या है?

इंडियन-स्टाइल टॉयलेट में हम घुटने मोड़कर नीचे बैठते हैं। इस स्थिति को Squatting Position कहते हैं।

वेस्टर्न कमोड पर आमतौर पर कुर्सी की तरह बैठते हैं। इस स्थिति में जांघों और धड़ के बीच का कोण अलग होता है।

हमारे शरीर में मलाशय और गुदा नली के आसपास कई मांसपेशियां होती हैं। इनमें एक महत्वपूर्ण मांसपेशी Puborectalis भी है।

यह मांसपेशी मल को नियंत्रित रखने वाली व्यवस्था का हिस्सा है।

जब हम शौच करते हैं, तो इन मांसपेशियों को सही तरीके से ढीला होना पड़ता है, ताकि मल आसानी से बाहर निकल सके।

घुटने मोड़कर बैठने पर मलाशय और गुदा नली के बीच का कोण बदल सकता है। कुछ अध्ययनों में यह स्थिति मल त्याग के लिए अधिक अनुकूल पाई गई है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वेस्टर्न कमोड इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति को कब्ज हो जाएगी।

कब्ज सिर्फ बैठने की स्थिति पर निर्भर नहीं करती। भोजन, दवाएं, आंतों की गतिविधि और मल त्याग से जुड़ी मांसपेशियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।

क्या रिसर्च में इंडियन टॉयलेट बेहतर पाया गया है?

2003 में Digestive Diseases and Sciences जर्नल में एक छोटा अध्ययन प्रकाशित हुआ था।

इसमें सामान्य bowel function वाले 28 स्वस्थ स्वयंसेवकों को तीन अलग-अलग स्थितियों में मल त्याग करने के अनुभव दर्ज करने के लिए कहा गया।

इन स्थितियों में सामान्य ऊंचाई वाला वेस्टर्न टॉयलेट, कम ऊंचाई वाला टॉयलेट और Squatting Position शामिल थे।

अध्ययन में लोगों ने Squatting Position में मल त्याग के दौरान कम जोर लगाने और अपेक्षाकृत कम समय लगने की जानकारी दी।

यह परिणाम दिलचस्प है, लेकिन इसकी एक सीमा है।

अध्ययन केवल 28 लोगों पर था और उनमें सामान्य bowel function था, गंभीर या लंबे समय से कब्ज वाले मरीज जरूरी नहीं थे।

इसलिए इसे यह साबित करने वाला प्रमाण नहीं माना जा सकता कि इंडियन टॉयलेट हर प्रकार की कब्ज का इलाज है।

2018 में प्रकाशित Indian Society of Gastroenterology और Indian Motility and Functional Diseases Association के विशेषज्ञों की सहमति-आधारित guidelines में भी Squatting Posture को मल त्याग के लिए अधिक physiological माना गया।

हालांकि, विशेषज्ञों ने स्वीकार किया कि इस विषय पर प्रकाशित वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।

वेस्टर्न कमोड पर Footstool रखने से क्या फायदा होता है?

मान लीजिए, आपके घर में इंडियन टॉयलेट नहीं है।

ऐसी स्थिति में कुछ लोग कमोड पर बैठते समय पैरों के नीचे एक छोटा स्टूल रखते हैं।

इसका उद्देश्य घुटनों को कूल्हों से थोड़ा ऊपर लाना और बैठने की स्थिति को Squatting Posture के करीब करना होता है।

अमेरिका के National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) ने भी कब्ज की सामान्य देखभाल में पैरों के नीचे Footstool रखने को आरामदायक स्थिति पाने का एक विकल्प बताया है।

लेकिन क्या Footstool से हर मरीज का पेट जल्दी साफ होता है?

2023 में प्रकाशित एक randomized trial में कब्ज से परेशान 41 मरीजों पर Footstool के प्रभाव की जांच की गई।

इसमें बिना स्टूल, लगभग 7 इंच और 9 इंच ऊंचे स्टूल की तुलना की गई।

शोधकर्ताओं ने पाया कि स्टूल रखने से बैठने की स्थिति बदली, लेकिन मल बाहर निकालने की प्रक्रिया को जांचने वाले Balloon Expulsion Test में स्पष्ट सुधार नहीं मिला।

मरीजों को भी मल त्याग आसान लगने में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला।

यह वास्तविक शोध के बजाय परीक्षण-आधारित अध्ययन था, इसलिए इसकी भी सीमाएं हैं।

इससे एक बात स्पष्ट होती है-Footstool कुछ लोगों को आरामदायक लग सकता है, लेकिन इसे हर प्रकार की कब्ज का प्रमाणित समाधान नहीं माना जा सकता।

घुटनों में दर्द है तो क्या इंडियन टॉयलेट इस्तेमाल करना चाहिए?

भारत में बहुत से लोग घुटनों के दर्द, गठिया या उम्र बढ़ने के कारण इंडियन टॉयलेट इस्तेमाल नहीं कर पाते।

किसी को नीचे बैठने में परेशानी होती है, तो किसी को बैठने के बाद उठना मुश्किल लगता है।

ऐसे में केवल पेट साफ करने के लिए जबरदस्ती Squatting Position अपनाना सही नहीं होगा।

घुटनों या कूल्हों में गंभीर दर्द, संतुलन की समस्या, हाल की सर्जरी या उठने-बैठने में कठिनाई होने पर गिरने या चोट लगने का जोखिम हो सकता है।

विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए सुरक्षित और आरामदायक टॉयलेट का चुनाव ज्यादा महत्वपूर्ण है।

अगर वेस्टर्न कमोड इस्तेमाल करते हैं, तो पैर स्थिर रखें, शरीर को आरामदायक स्थिति में रखें और आगे की ओर हल्का झुकना मददगार लग सकता है।

Footstool इस्तेमाल करना चाहें तो मजबूत, फिसलने से सुरक्षित और अपनी सुविधा के अनुसार ऊंचाई वाला स्टूल चुनें।

कमोड के ऊपर चढ़कर पैर रखकर बैठने की कोशिश न करें। इससे फिसलने और गंभीर चोट का खतरा हो सकता है।

अगर चक्कर आते हैं, कमजोरी है या संतुलन खराब रहता है, तो किसी नई बैठने की स्थिति को अपनाने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।

टॉयलेट की पोजिशन ठीक है, फिर भी पेट साफ क्यों नहीं होता?

Reddit के constipation forums में कई लोगों ने बताया कि वे Footstool इस्तेमाल करते हैं, लेकिन फिर भी मल त्याग के बाद पेट पूरी तरह साफ होने का एहसास नहीं होता।

एक व्यक्ति ने बताया कि वह फाइबर, पानी और कब्ज की दवाओं का इस्तेमाल कर रहा था, फिर भी उसे मल पूरी तरह बाहर निकालने में कठिनाई होती थी।

एक अन्य चर्चा में लोगों ने बताया कि Footstool से उन्हें व्यक्तिगत रूप से आराम महसूस हुआ।

इन अनुभवों से एक व्यावहारिक सवाल सामने आता है-अगर बैठने की स्थिति बदलने के बाद भी कब्ज बनी हुई है, तो क्या समस्या किसी और वजह से हो सकती है?

हां।

कुछ लोगों में कब्ज का संबंध मल के बहुत सख्त होने से होता है। दूसरों में आंतों की गति धीमी हो सकती है।

कुछ मरीजों में मल त्याग करते समय पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां सही तरीके से ढीली नहीं होतीं। इसे Dyssynergic Defecation जैसी स्थितियों के संदर्भ में जांचा जा सकता है।

ऐसे मामलों में सिर्फ टॉयलेट बदलने से पर्याप्त राहत नहीं मिल सकती।

डॉक्टर जरूरत के अनुसार विशेष जांच या Pelvic Floor Biofeedback Therapy जैसे उपचार सुझा सकते हैं।

कब्ज में शौच का सही तरीका क्या होना चाहिए?

कब्ज में केवल इंडियन या वेस्टर्न टॉयलेट चुनना ही महत्वपूर्ण नहीं है।

आप शौच के दौरान कितना जोर लगाते हैं और कितनी देर बैठे रहते हैं, इस पर भी ध्यान देना जरूरी है।

कुछ व्यावहारिक आदतें अपनाएं।

  • मल त्याग की इच्छा को बार-बार न रोकें। जरूरत महसूस होने पर बाथरूम जाएं।
  • जबरदस्ती जोर न लगाएं। अगर मल नहीं निकल रहा, तो लंबे समय तक दबाव बनाने की कोशिश न करें।
  • टॉयलेट में मोबाइल लेकर न बैठें। फोन देखने में जरूरत से ज्यादा समय निकल सकता है।
  • शरीर को आरामदायक स्थिति में रखें। पैरों को स्थिर रखें, सांस सामान्य रखें और मांसपेशियों को जबरदस्ती कसकर न बांधें।
  • भोजन और पानी पर ध्यान दें। पर्याप्त फाइबर, तरल पदार्थ और नियमित शारीरिक गतिविधि कब्ज की देखभाल के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

NIDDK के अनुसार, नाश्ते के लगभग 15–45 मिनट बाद मल त्याग की कोशिश कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, क्योंकि भोजन के बाद बड़ी आंत की गतिविधि बढ़ती है।

लेकिन उस समय मल त्याग की इच्छा न हो, तो जोर लगाकर बैठे रहना जरूरी नहीं है।

कब्ज कब केवल टॉयलेट पोस्चर की समस्या नहीं होती?

अगर कई सप्ताह से कब्ज बनी हुई है, मल त्याग के दौरान काफी जोर लगाना पड़ता है या बार-बार पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास होता है, तो डॉक्टर से जांच कराना उचित है।

खासतौर पर मल में खून आने, बिना वजह वजन घटने, लगातार पेट दर्द या मल त्याग की आदतों में नया बदलाव होने पर जांच जरूरी है।

अगर पेट में तेज दर्द के साथ उल्टी हो रही है और गैस या मल बिल्कुल नहीं निकल रहा, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

कब्ज की वजह दवाओं, दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं या मल त्याग से संबंधित मांसपेशियों की गड़बड़ी से भी हो सकती है।

इसलिए केवल इंडियन टॉयलेट अपनाकर हर प्रकार की कब्ज ठीक करने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

कब्ज और पेट साफ न होने की परेशानी है? Jiva Ayurveda से सलाह लें

अगर आपको रोज सुबह मल त्याग के दौरान जोर लगाना पड़ता है, पेट पूरी तरह साफ नहीं होता या कब्ज बार-बार आपकी दिनचर्या प्रभावित करती है, तो केवल टॉयलेट की पोजिशन बदलने के बजाय अपनी परेशानी के कारणों को समझना जरूरी है।

Jiva Ayurveda में आप योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से कब्ज, पाचन, खानपान और रोजमर्रा की आदतों को लेकर परामर्श ले सकते हैं। डॉक्टर आपकी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार आहार, जीवनशैली और उपयुक्त आयुर्वेदिक देखभाल के विकल्पों पर मार्गदर्शन दे सकते हैं। यदि लंबे समय से कब्ज है या मल त्याग की मांसपेशियों से जुड़ी समस्या की आशंका है, तो Gastroenterologist की जांच और विशेष उपचार भी जरूरी हो सकते हैं।

अगर आपको भी टॉयलेट में लंबे समय तक बैठने के बाद पेट साफ नहीं होने या बार-बार कब्ज की परेशानी होती है, तो Jiva Ayurveda के डॉक्टर से परामर्श के लिए फॉर्म भरें और अपनी समस्या विस्तार से बताएं और अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे हमारे नंबर +919266714040 पर।

इंडियन-स्टाइल टॉयलेट कुछ लोगों के लिए मल त्याग आसान बना सकता है। लेकिन बेहतर टॉयलेट पोस्चर वही है जो आपके लिए सुरक्षित, स्थिर और आरामदायक हो। लंबे समय की कब्ज का समाधान खोजने के लिए सिर्फ बैठने की स्थिति नहीं, पूरी स्वास्थ्य स्थिति समझना जरूरी है।

चिकित्सकीय सूचना: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है और व्यक्तिगत निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। गंभीर कब्ज, मल में रक्तस्राव या लगातार पेट दर्द होने पर योग्य चिकित्सक से जांच कराएं। घुटनों, कूल्हों या संतुलन की समस्या होने पर जबरदस्ती Squatting Position न अपनाएं।

Medical Sources & Research References

  1. Indian Consensus on Chronic Constipation in Adults (2018)

Journal: Indian Journal of Gastroenterology

Research: A joint position statement of the Indian Motility and Functional Diseases Association and the Indian Society of Gastroenterology

Source: https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC6339668/

Content Reference: Statement 12 में Indian-style Squatting Posture को मल त्याग के लिए अधिक physiological माना गया है। इसमें Puborectalis muscle, Anorectal Angle और मल त्याग के दौरान जोर लगाने से संबंधित प्रमाणों की चर्चा है। विशेषज्ञों ने उपलब्ध शोध की सीमाएं भी स्वीकार की हैं।

  1. Comparison of Straining During Defecation in Three Positions (2003)

Journal: Digestive Diseases and Sciences

Author: Dov Sikirov

Source: https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/12870773/

Content Reference: 28 स्वस्थ स्वयंसेवकों में तीन टॉयलेट पोजिशन की तुलना। Squatting Position में मल त्याग के लिए कम समय लगने और कम जोर लगाने की व्यक्तिपरक रिपोर्ट मिली। छोटा अध्ययन होने के कारण परिणाम सभी कब्ज के मरीजों पर लागू नहीं किए जा सकते।

  1. Using a Footstool Does Not Aid Simulated Defecation in Undifferentiated Constipation (2023)

Journal: Neurogastroenterology & Motility

Source: https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/36989181/

Content Reference: कब्ज के 41 मरीजों में Footstool इस्तेमाल करने से बैठने की स्थिति बदली, लेकिन Balloon Expulsion Test के समय और मल त्याग आसान महसूस होने में महत्वपूर्ण सुधार नहीं मिला। यह simulated defecation पर आधारित अध्ययन था।

  1. Sitting vs. Squatting: A Scoping Review of Toilet Postures and Associated Health Outcomes (2025)

Source: https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC12219158/

Content Reference: विभिन्न अध्ययनों में Squatting और Sitting Postures, मल त्याग के प्रयास, शारीरिक सुविधा और अन्य स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों की समीक्षा। अलग-अलग अध्ययन पद्धतियों और सीमित प्रमाणों के कारण सभी लोगों के लिए एक ही निष्कर्ष लागू नहीं होता।

  1. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) - Treatment for Constipation

Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/constipation/treatment

Content Reference: पर्याप्त फाइबर, तरल पदार्थ, शारीरिक गतिविधि, नाश्ते के बाद टॉयलेट रूटीन और पैरों के नीचे Footstool रखकर आरामदायक स्थिति बनाने की सामान्य सलाह।

  1. NIDDK - Symptoms & Causes of Constipation

Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/constipation/symptoms-causes

Content Reference: कब्ज के लक्षण, पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास, कम फाइबर, पानी की कमी, दवाओं और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की भूमिका।

Patient Forum Research

  1. Reddit - r/indiasocial

Discussion: Do you use these in your toilet?

Source: https://www.reddit.com/r/indiasocial/comments/1w1j1t0/do_you_use_these_in_your_toilet/

Content Reference: भारतीय उपयोगकर्ताओं द्वारा Western Toilet के साथ Footstool इस्तेमाल करने, कुछ लोगों को व्यक्तिगत रूप से आराम मिलने और Indian-style Toilet को प्राथमिकता देने के अनुभव।

  1. Reddit - r/Constipation

Discussion: 12 hours and counting

Source: https://www.reddit.com/r/Constipation/comments/1djqhjj/

Content Reference: लंबे समय तक टॉयलेट में बैठने के बावजूद मल त्याग न होने की परेशानी और Footstool इस्तेमाल करने को लेकर उपयोगकर्ताओं के सुझाव।

  1. Reddit - r/Constipation

Discussion: Need Help!!! Any advice

Source: https://www.reddit.com/r/Constipation/comments/oirk28/

Content Reference: मल पूरी तरह बाहर न निकलने के एहसास, Footstool के बावजूद परेशानी बने रहने और Pelvic Floor Dysfunction की जांच को लेकर उपयोगकर्ताओं की चर्चा।

Research Note: Reddit पर साझा अनुभव केवल वास्तविक मरीजों के सवाल और चिंताएं समझने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं। इन्हें किसी टॉयलेट पोजिशन या उपकरण की प्रभावशीलता का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना गया है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

Top Ayurveda Doctors

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us