आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर खाना खाते समय भी किसी न किसी काम में लगे रहते हैं। कभी मोबाइल देखते हुए खाना खाते हैं तो कभी ऑफिस या पढ़ाई के काम के बीच जल्दी-जल्दी खाना खत्म कर लेते हैं। ऐसे में हमें पता नहीं चलता कि हमने कितना खाना खाया है और हमारा पेट कब भर गया लेकिन अगर हम परिवार के साथ बैठ कर खाना खायें तो हमारी खाने की आदतों में कई अच्छे बदलाव आ सकते है। परिवार के साथ बैठकर खाना खाने से खाने के portion और speed पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे पाचन और वजन को नियंत्रित किया जा सकता है।
परिवार के साथ खाना खाने से खाने के Portion पर क्या असर पड़ता है?
जब हम परिवार के साथ बैठकर खाना खाते हैं, तो हमारा ध्यान खाने के साथ-साथ बातचीत और एक-दूसरे के साथ समय बिताने पर भी रहता है। इस दौरान हम आराम से खाते हैं और अपने शरीर के संकेतों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
अक्सर ऐसा होता है कि हम स्वाद के चक्कर में या बिना सोचे समझे जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं लेकिन जब हम आराम से खाना खाते हैं और बीच-बीच में अपने पेट भरने का एहसास करते हैं, तो हमें समझ आने लगता है कि अब और खाने की जरूरत है या नहीं।
जब हम परिवार के साथ बैठकर खाना खाते है तो हम बिना किसी distraction के खाना खाते हैं, जिससे हमारी खाने की मात्रा और स्पीड हमारे नियंत्रण में होती है जिस वजह से हम संतुलित भोजन ग्रहण कर पाते है। संतुलित भोजन करने से मोटापा आदि जैसी कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
हालांकि परिवार के साथ खाना खाने का.मतलब हमेशा कम खाना नहीं होता। कभी-कभी परिवार के साथ बैठकर हम अपनी पसंद की चीज़ें ज़्यादा खा लेते हैं। ये इस बात पर निर्भर करता है कि हम क्या खा रहे हैं, कितनी भूख लगी है, खाने के दौरान हमारी आदतें कैसी है।
खाने की Speed पर क्या असर पड़ता है?
अकेले खाना खाते समय कई लोग बहुत जल्दी खाना खत्म कर लेते हैं। खासकर जब मोबाइल देखते हुए या किसी काम में व्यस्त होकर खाना खाया जाता है तो खाने की गति पर ध्यान ही नहीं जाता।
वही परिवार के साथ बैठकर खाना खाने पर बातचीत के कारण हम अक्सर निवाला लेने के बीच में थोड़ा रुकते हैं। इससे खाने की गति धीमी हो सकती है।
बातचीत और परिवार के साथ होने से ध्यान खाने पर रहता है जिस वजह से हम बिना सोचे समझे खाने से बच जाते है, और जल्दी खाने की आदत छूट जाती है। परिवार के साथ बैठकर खाने से हम mindful eating कर पाते है।
धीरे-धीरे खाने का एक फायदा ये भी है कि हमारे शरीर को पेट भरने का एहसास होने के लिए पर्याप्त समय मिल सकता है। हमारा दिमाग पेट से मिलने वाले संकेतो को समझने में कुछ समय लेता है। इसलिए जब हम बहुत तेजी से खाते हैं तो कभी-कभी पेट भरने का एहसास होने से पहले ही ज़रूरत से ज़्यादा खा लेते हैं।
इसके विपरीत, आराम से खाना खाने पर हम अपनी भूख और पेट भरने के संकेतों को बेहतर तरीके से पहचान सकते हैं।
परिवार के साथ खाना खाने की आदत कैसे बनाएं?
परिवार के साथ बैठकर खाने से परिवार के सदस्यों पर कई सकारात्मक प्रभाव पड़ते है। साथ मिलकर खाने से आप बिना किसी distraction के खाते हैं, जिस वजह से आपका पूरा ध्यान आपके खाने और परिवार के साथ वक़्त बिताने पर होता है, जिस वजह से आप अपने खाने की speed और portion को नियंत्रित कर सकते हैं। इसके लिए बहुत बड़े बदलाव करने की ज़रूरत नहीं है। छोटी-छोटी आदतों से शुरुआत की जा सकती है। जैसे:
- दिन में कम से कम एक बार परिवार के सभी सदस्य साथ बैठकर खाना खाएं।
- कोशिश करें कि खाने खाते वक़्त सभी तरह की distractions से दूर रहें। जैसे, मोबाइल या टीवी आदि।
- खाना आराम से खाएं और हर निवाले का स्वाद लें।
- अपनी भूख और पेट भरने के संकेतों पर ध्यान दें।
- खाने के वक़्त अपने परिवार में अच्छी बातें करें और दिन भर की बातें एक-दूसरे से शेयर करें।
याद रखें, हर दिन परिवार के सभी सदस्यों का एक साथ खाना मुमकिन नहीं होता। ऐसे में, जब भी मौका मिले, साथ बैठकर भोजन करने की कोशिश करना एक अच्छी शुरुआत हो सकती है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद में भोजन करने के तरीके, उसकी मात्रा और मन की स्थिति पर विशेष महत्व दिया गया है। आयुर्वेद के अनुसार भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को पोषण देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए भोजन हमेशा अपनी भूख और पाचन क्षमता के अनुसार करना चाहिए।
परिवार के साथ बैठकर खाना खाने से हम जल्दबाज़ी से बच सकते हैं और भोजन का आनंद लेते हुए आराम से खा सकते हैं। आयुर्वेद में भोजन को अच्छी तरह चबाकर और शांत मन से खाने की सलाह दी जाती है। जब हम धीरे-धीरे खाने खाते हैं तो हमे पेट भरने के संकेतों को समझने का बेहतर मौका मिलता है। इससे ज़रूरत से ज़्यादा खाने में मदद मिल सकती है।
आयुर्वेद के अनुसार परिवार के साथ बैठकर भोजन करने से आप बिना किसी distraction के भोजन कर पाते है, और परिवार के साथ बैठकर भोजन करने से सकारात्मक वातावरण बनता है जिससे शरीर में आम (toxins) नहीं बनता और शरीर को ताकत मिलती है।
इसके अलावा परिवार के साथ भोजन करने से मन को सुकून मिलता है और दिन भर की थकान के बीच अपनों के साथ समय बिताने का अवसर मिलता है।
निष्कर्ष
परिवार के साथ बैठकर खाना खाने की आदत हमारे खाने की speed, portion और खान-पान के प्रति हमारे नज़रिए को बदल सकती है। साथ बैठ कर भोजन करने से हम अक्सर धीरे खाते हैं, अपनी भूख पर ध्यान देते हैं, और पेट भरने की संकेतो को बेहतर तरीके से समझते पाते हैं। हालाँकि इसका असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है।
आखिरकार जरूरी सिर्फ यह नहीं है कि हम क्या खा रहे हैं, बल्की यह भी है कि हम किस तरह से खा रहे हैं और कितने आराम से खा रहे हैं। अगली बार खाना खाते समय मोबाइल को एक तरफ रखकर परिवार के साथ बैठिए, आराम से भोजन कीजिए और अपनों के साथ बिताइए इन छोटे-छोटे पलों का आनंद लीजिए, क्योंकि अच्छा खाना शरीर को पोषण देता है और अपनों का साथ मन को सुकून देता है।













