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Skin Dull + Digestion खराब + Joint Pain — Ama Toxin का एक साथ हमला

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

कभी-कभी ऐसा होता है कि अचानक से चेहरा बुझा-बुझा सा (dull) लगने लगता है, पेट हर वक्त भारी रहता है और सुबह उठते ही जोड़ों में अजीब सी जकड़न या दर्द महसूस होता है।

हम अक्सर क्या करते हैं? चेहरे के लिए कोई क्रीम ले आते हैं, पेट के लिए कोई चूर्ण खा लेते हैं और जोड़ों के दर्द के लिए पेनकिलर। यानी हम इन सबको अलग-अलग बीमारियाँ समझकर ठीक करने की कोशिश करते हैं। लेकिन सच तो ये है कि ये सब अलग-अलग नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही किसी एक ही गड़बड़ी का इशारा हैं।

आयुर्वेद बहुत साफ कहता है कि जब शरीर का पाचन (पाचन) और सफाई का सिस्टम सुस्त पड़ जाता है, तो उसका असर धीरे-धीरे पूरे शरीर पर दिखने लगता है। यानी आपका शरीर आपको बता रहा है कि अंदर कुछ कचरा (गंदगी) जमा हो रहा है और अब उसे साफ करने का वक्त आ गया है।

ये 'Ama' (आम) क्या है और यह कैसे बनता है?

आयुर्वेद की भाषा में 'Ama' (आम) का मतलब है अधपचा खाना या शरीर का वो भारी कचरा जो ठीक से पच नहीं पाया। यह तब बनता है जब आपके पेट की आग (पाचन अग्नि) कमज़ोर पड़ जाती है या आप कुछ ऐसा खाते हैं जिसे आपका शरीर पचा नहीं पाता।

धीरे-धीरे यह अधपचा और चिपचिपा कचरा (Ama) शरीर में इकट्ठा होने लगता है और खून, टिश्यूज और नसों में रुकावट (ब्लॉकेज) पैदा कर देता है। यही वजह है कि आप हल्का और एक्टिव महसूस करने की बजाय, हर वक्त थका हुआ, सुस्त और भारी महसूस करते हैं।

जैसे-जैसे यह Ama बढ़ता है, शरीर का पूरा बैलेंस बिगड़ जाता है। और फिर शुरू होती हैं दिक्कतें जैसे खराब पाचन, हर वक्त की थकान, बेजान स्किन या फिर जोड़ों का दर्द।

शरीर में 'Ama' जमा होने के असली कारण

यह 'Ama' रातों-रात नहीं बनता। जब हमारे पेट का सिस्टम और शरीर की अंदरूनी सफाई ठीक से काम नहीं कर पाती, तब यह कचरा जमा होता है। इसके पीछे हमारी रोज़मर्रा की कुछ गलत आदतें ही जिम्मेदार होती हैं:

  • कमज़ोर पाचन: जब खाना ठीक से पचेगा नहीं, तो वो पेट में ही सड़ेगा और इसी अधपचे खाने से Ama बनता है।
  • गलत खानपान: हद से ज़्यादा भारी, तला-भुना, कई दिनों का बासी या बेमेल खाना पाचन का कबाड़ा कर देता है।
  • बेवक्त खाने की आदत: कभी रात के 11 बजे खाना, कभी सुबह का नाश्ता छोड़ देना या बिना भूख के हर वक्त कुछ न कुछ चबाते रहना (snacking), ये सब पाचन को बिगाड़ते हैं।
  • टेंशन और स्ट्रेस: लगातार तनाव में रहने से पेट की आग (पाचन अग्नि) बुझने लगती है, जिससे खाना ठीक से नहीं पच पाता।
  • हिलना-डुलना कम होना: अगर आप सारा दिन बस बैठे रहते हैं (कम फिजिकल एक्टिविटी), तो पाचन सुस्त पड़ जाता है और Ama जमा होने लगता है।
  • नींद पूरी न होना: नींद की कमी से शरीर खुद की अंदरूनी सफाई (detox) नहीं कर पाता।
  • ठंडा और भारी खाना: फ्रिज का एकदम ठंडा पानी या पचने में बहुत भारी चीजें पाचन को और ज़्यादा धीमा कर देती हैं।

'Ama' कैसे एक साथ आपके पाचन, स्किन और जोड़ों को बिगाड़ता है?

जब शरीर में Ama जमा होता है, तो यह किसी एक जगह नहीं टिकता। यह चिपचिपा कचरा शरीर के बहाव (flow) को रोक देता है, जिससे एक साथ कई दिक्कतें सामने आती हैं:

  • पाचन (Digestion) का बिगड़ना: Ama पेट की आग को और कमज़ोर कर देता है। इससे खाना ठीक से पचता नहीं, पेट फूलता है और गैस, एसिडिटी व अपच की शिकायतें शुरू हो जाती हैं।
  • स्किन का डल (Dull) होना: जब शरीर अंदर से साफ नहीं होगा, तो उसका असर चेहरे पर तो दिखेगा ही। Ama खून और पोषण को स्किन तक पहुंचने से रोक देता है। इसी वजह से चेहरा बुझा हुआ, थका-थका और बेजान लगने लगता है।
  • जोड़ों का दर्द (Joint Pain) और जकड़न: यह Ama धीरे-धीरे जाकर जोड़ों (joints) और छोटी-छोटी नसों में फंस जाता है। इससे जोड़ों में भारीपन, जकड़न और दर्द महसूस होता है (खासकर सुबह सोकर उठने पर)।

कुल मिलाकर, Ama शरीर में एक 'ब्लॉकेज' की तरह काम करता है, जो एक ही वक्त में आपके पेट, चेहरे और जोड़ों तीनों को नुकसान पहुंचाता है।

जब 'Ama' बढ़ता है, तो शरीर क्या इशारे देता है?

जब शरीर में यह कचरा (Ama) बढ़ने लगता है, तो शरीर धीरे-धीरे कई अलार्म बजाता है। शुरू में ये इशारे बहुत हल्के होते हैं, इसलिए हम अक्सर इन्हें नज़रअंदाज़कमज़ोरी कर देते हैं:

  • भारी और सुस्त महसूस करना: शरीर में बिल्कुल फुर्ती नहीं रहती, हर वक्त एक अजीब सी थकान और भारीपन रहता है।
  • पेट की परेशानियाँ: गैस बनना, खट्टी डकारें, अपच या पेट का हमेशा फूला हुआ (bloated) लगना।
  • जीभ पर सफेद परत: सुबह उठने पर अगर आपको अपनी जीभ पर एक मोटी सफेद या गाढ़ी परत दिखे, तो यह Ama का सबसे बड़ा और साफ इशारा है।
  • भूख का बिगड़ना: कभी तो बिल्कुल भूख नहीं लगती और कभी बहुत ज़्यादा खाने का मन करता है।
  • बेजान स्किन: चेहरा थका हुआ और बिना ग्लो के डल (dull) दिखने लगता है।
  • जोड़ों में जकड़न: शरीर में अकड़न आ जाती है, खासकर सुबह उठने पर जोड़ों को हिलाने में दर्द और भारीपन लगता है।
  • मन भारी रहना: काम में ध्यान नहीं लगता, बेवजह का चिड़चिड़ापन और सुस्ती छाई रहती है।

यह 'Ama' शरीर में जाकर छुपता कहाँ है?

यह Ama सिर्फ पेट में नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैलने लगता है। और जहां यह जाता है, वहीं काम बिगाड़ता है:

  • आंतें (Intestines): शुरुआत यहीं से होती है। आंतों में Ama जमा होने से पाचन बिगड़ता है, पेट भारी रहता है और गैस की दिक्कत शुरू होती है।
  • जोड़ (Joints): यहां पहुंचकर यह Ama जकड़न और दर्द पैदा करता है। सुबह-सुबह जो शरीर में भारीपन लगता है, वो इसी का नतीजा है।
  • खून की नसें (Blood Vessels): नसों में जमा होकर यह खून और एनर्जी के बहाव को धीमा कर देता है, जिससे आपको हर वक्त थकान महसूस होती है।
  • त्वचा (Skin): स्किन तक पहुंचकर यह चेहरे की रंगत छीन लेता है। चेहरा डल हो जाता है और कभी-कभी पिंपल्स या दाने भी निकल आते हैं।

यह Ama शरीर में एक 'साइलेंट किलर' की तरह चुपचाप फैलता है, इसलिए इसके लक्षण एक साथ कई जगह महसूस होते हैं।

'Ama' और इससे जुड़ी बीमारियों का आयुर्वेदिक इलाज

आयुर्वेद में  Ama को सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि शरीर के अंदरूनी बैलेंस के बिगड़ने का सबसे बड़ा अलार्म मानते हैं। इसलिए हमारा मकसद सिर्फ आपके दर्द या एसिडिटी को दबाना नहीं है, बल्कि इस कचरे (Ama) को जड़ से खत्म करना और आपके पाचन को फौलादी बनाना है।

  • पेट की आग (पाचन अग्नि) को तेज़ करना: सबसे पहला और जरूरी काम है आपके पाचन को ठीक करना। जब पाचन मजबूत होगा, तो नया Ama बनना बंद हो जाएगा और पुराना Ama धीरे-धीरे कटने लगेगा।
  • शरीर की डीप क्लीनिंग (Detox): शरीर में जमे हुए इस चिपचिपे कचरे को बाहर निकालने के लिए खास आयुर्वेदिक तरीके (जैसे पंचकर्म) अपनाए जाते हैं ताकि शरीर अंदर से एकदम साफ हो जाए।
  • जड़ी-बूटियों का सहारा: त्रिफला, गिलोय और कुछ खास कुदरती औषधियां दी जाती हैं जो पाचन सुधारती हैं और शरीर को एकदम हल्का बना देती हैं।
  • डाइट में बदलाव: आपको ऐसा हल्का और सादा खाना खाने की सलाह दी जाती है जो आसानी से पच जाए और शरीर पर कोई फालतू बोझ न डाले।
  • जीने का तरीका सुधारना: सही टाइम पर खाना, चैन की नींद लेना, थोड़ी बहुत एक्सरसाइज करना और स्ट्रेस कम करना ये सब मिलकर शरीर को नेचुरली हील करते हैं।
  • वात, पित्त और कफ का बैलेंस: इन तीनों दोषों को बैलेंस करके शरीर की पूरी मशीनरी को दोबारा से सेट किया जाता है।

इस पूरे तरीके से शरीर अंदर से धीरे-धीरे साफ और मजबूत होता है। इससे न सिर्फ Ama बनना बंद होता है, बल्कि आप खुद को पहले से कहीं ज़्यादा हल्का, एनर्जेटिक और फ्रेश महसूस करने लगते हैं।

'Ama' (आम) को खत्म करने वाली जादुई आयुर्वेदिक औषधियां

आयुर्वेद में हमारा मकसद आपको सिर्फ दवाइयां खिलाना नहीं है। हम ऐसी खास जड़ी-बूटियां देते हैं जो आपके शरीर में जमे इस जिद्दी कचरे (Ama) को बाहर निकालें, आपके पाचन को फौलादी बनाएं और आपको फिर से एकदम हल्का और तरोताजा महसूस कराएं।

कुछ बेहद असरदार औषधियां:

  • त्रिफला: यह तो समझ लीजिए शरीर की अंदरूनी झाड़ू है! यह आपके पाचन को दुरुस्त करके धीरे-धीरे सारा चिपचिपा 'Ama' बाहर निकाल फेंकता है।
  • गिलोय: गिलोय सिर्फ बुखार उतारने के लिए नहीं है, बल्कि शरीर की शानदार डीप-क्लीनिंग (Detox) करने और इम्युनिटी को गजब का मजबूत बनाने में भी मास्टर है।
  • अजवाइन: यह आपके पेट की बुझती हुई आग (पाचन अग्नि) को फिर से सुलगाती है, जिससे गैस और पेट का वो अजीब सा भारीपन छूमंतर हो जाता है।
  • पिप्पली: यह आपके मेटाबॉलिज्म (खाना पचाने की स्पीड) को इतनी अच्छी तरह सुधारती है कि शरीर में आगे से नया Ama बन ही नहीं पाता।

शरीर को अंदर से साफ करने वाली सुकून भरी आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब शरीर में बहुत ज़्यादा कचरा जम जाता है, तो सिर्फ गोलियों से काम नहीं चलता। ऐसे में आयुर्वेद की कुछ खास पंचकर्म थेरेपीज़ शरीर की गहराई में जाकर सारी रुकावटें खोल देती हैं और बिगड़े हुए बैलेंस को वापस लाती हैं।

मुख्य आयुर्वेदिक थेरेपीज़:

  • स्वेदन (हर्बल भाप): पूरे शरीर को जड़ी-बूटियों वाली हल्की भाप दी जाती है। इससे पसीना आता है और शरीर की सारी जकड़न, भारीपन और ब्लॉकेज पिघलकर बाहर निकल जाते हैं।
  • वमन (ऊपरी सफाई): यह छाती और पेट के ऊपरी हिस्से में जमे हुए कफ और Ama को उल्टी के जरिए बाहर निकालने का एक बहुत ही खास और असरदार तरीका है।
  • विरेचन (आंतों की सफाई): आंतों में जो महीनों पुराना टॉक्सिन्स (जहर) चिपका है, उसे इस थेरेपी के जरिए बाहर निकालकर पेट को एकदम हल्का कर दिया जाता है।
  • बस्ती थेरेपी: वात दोष को जड़ से खत्म करने और पूरे सिस्टम की अंदरूनी सर्विसिंग करने में बस्ती का कोई मुकाबला नहीं है।
  • अभ्यंग (ऑयल मसाज): कुछ खास औषधीय तेलों से शरीर की मालिश की जाती है। इससे खून का दौरा तेज़ी से दौड़ने लगता है और गजब का रिलैक्सेशन मिलता है।

डाइट का असली रोल: 'Ama' को काटने के लिए क्या खाएं और क्या नहीं?

देखिए, अगर शरीर में Ama बना है, तो वो आपके गलत खान-पान की वजह से ही बना है। इसलिए जब तक आप अपनी थाली नहीं बदलेंगे, यह कचरा साफ नहीं होगा। सही खाना ही आपकी सबसे बड़ी दवा है।

क्या खाएं:

  • हल्का और ताजा खाना: हमेशा वो खाना खाएं जो आपकी रसोई में ताजा बना हो और पचने में एकदम आसान हो। इससे आपके पेट पर फालतू बोझ नहीं पड़ता।
  • गर्म और पका हुआ भोजन: कच्चा या ठंडा खाना पचाना बहुत मुश्किल होता है। हमेशा हल्का गर्म और अच्छे से पका हुआ खाना ही खाएं ताकि Ama न बने।
  • हरी सब्जियां: ये शरीर को ताकत देती हैं और पेट को भारी किए बिना आपको पूरा पोषण पहुंचाती हैं।
  • रसोई के मसालों का जादू: खाने में थोड़ी सी सोंठ, अजवाइन, जीरा और काली मिर्च जरूर डालें। ये मसाले आपके पाचन की आग को हमेशा जलाए रखते हैं।
  • गुनगुना पानी: दिन भर हल्का गुनगुना पानी पीने की आदत डाल लें। यह शरीर की सारी गंदगी को धोकर बाहर निकालने का सबसे सस्ता और बेहतरीन तरीका है।

किन चीजों से सख्त परहेज करें:

  • फ्रिज का एकदम ठंडा, बासी और पैकेटबंद (Processed) खाना आज ही छोड़ दें।
  • बहुत ज़्यादा तला-भुना और पचने में भारी खाना खाने से बचें।
  • हद से ज़्यादा मीठा और आइसक्रीम जैसी ठंडी चीजें बिल्कुल न खाएं।
  • बिना भूख के हर थोड़ी देर में कुछ न कुछ चबाते रहने (Snacking) या बेवक्त खाने की आदत को तुरंत बदल दें।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम दक्ष मलिक है, मैं 23 वर्ष का हूँ और नोएडा का रहने वाला हूँ। कुछ समय पहले मुझे पेट से जुड़ी समस्या शुरू हुई, इंडाइजेशन, पेट में जलन और लंबे समय तक ठीक से मल न आना जैसी परेशानी होने लगी। मेरे कुछ टेस्ट भी हुए, जिनमें पता चला कि मेरे पेट में कुछ घाव (ulcers) हैं। मैंने एलोपैथिक दवाइयाँ लीं, लेकिन मुझे कोई खास फर्क नहीं पड़ा। इसके बाद मैंने टीवी पर डॉ. प्रताप चौहान का कार्यक्रम देखा और उनसे प्रेरित होकर जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया। मैंने डॉक्टर से फोन पर भी बात की और फिर वहाँ से दवाइयाँ व उपचार शुरू किया। धीरे-धीरे मेरी हालत में सुधार आने लगा और अब मैं पहले से काफी बेहतर महसूस करता हूँ।

डॉक्टर के पास जाने में देरी कब न करें?

Ama को कोई मामूली थकान या गैस समझकर इग्नोर करना भारी पड़ सकता है। अगर शरीर ये इशारे दे, तो तुरंत किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर से मिलें:

  • लगातार बदहजमी: अगर कई दिनों से पेट भारी है और खाना बिल्कुल नहीं पच रहा है।
  • जीभ की सफेदी: अगर रोज़ सुबह उठने पर आपको अपनी जीभ पर एक मोटी, चिपचिपी सफेद या पीली परत नजर आ रही हो।
  • हर वक्त की थकान: रात भर अच्छी नींद लेने के बाद भी सुबह शरीर टूटा-टूटा और भारी लगे।
  • जोड़ों का दर्द: बिना ज़्यादा मेहनत किए शरीर में जकड़न (stiffness) और जोड़ों में दर्द रहने लगे।
  • स्किन की दिक्कतें: चेहरे का ग्लो एकदम चला जाए, लगातार दाने निकलें या भयंकर रैशेज होने लगें।

निष्कर्ष

Ama (आम) सिर्फ पेट की कोई छोटी-मोटी गैस या अपच की दिक्कत नहीं है। यह एक बड़ा अलार्म है कि आपके शरीर का पाचन और अंदरूनी सफाई का सिस्टम बुरी तरह डगमगा गया है। आज की मॉडर्न साइंस जिसे 'टॉक्सिन बिल्ड-अप' (गंदगी का जमा होना) कहती है, आयुर्वेद ने उसे हजारों साल पहले 'Ama' का नाम दे दिया था। यह कचरा धीरे-धीरे आपके पेट से निकलकर स्किन, जोड़ों और आपकी पूरी एनर्जी पर कब्जा कर लेता है।

इसलिए, सिर्फ दर्द या गैस की गोलियां खाकर कुछ देर के लिए लक्षणों को दबाने से कुछ नहीं होगा। असली इलाज जड़ पर वार करना है। जिस दिन आपने अपना पाचन फौलादी बना लिया, सही खाना शुरू कर दिया और अपनी लाइफस्टाइल को सुधार लिया समझ लीजिए उस दिन से Ama बनना खुद-ब-खुद बंद हो जाएगा। आपका शरीर अंदर से एकदम साफ हो जाएगा और आप खुद को हवा की तरह हल्का और एनर्जेटिक महसूस करेंगे।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

Ama को रोकने के लिए सबसे जरूरी है कि पाचन शक्ति मजबूत रखी जाए और शरीर पर अनावश्यक बोझ न डाला जाए। इसके लिए नियमित समय पर हल्का और ताजा भोजन करना चाहिए और बहुत भारी या प्रोसेस्ड फूड से बचना चाहिए। दिनचर्या में हल्की शारीरिक गतिविधि शामिल करने से पाचन बेहतर रहता है। पर्याप्त नींद भी शरीर की सफाई प्रक्रिया को सही तरीके से चलाने में मदद करती है। जब जीवनशैली संतुलित होती है तो Ama बनने की संभावना काफी कम हो जाती है।

Ama केवल गलत खानपान का परिणाम नहीं है, बल्कि यह कई कारणों से बनता है। अनियमित भोजन समय, तनाव और कमजोर पाचन शक्ति भी इसकी बड़ी वजह होती है। जब शरीर का पाचन सिस्टम सही से काम नहीं करता तो भोजन पूरी तरह नहीं पच पाता। यह अधपचा हिस्सा धीरे-धीरे Ama का रूप ले लेता है। इसलिए इसे केवल डाइट की नहीं बल्कि पूरी जीवनशैली की समस्या माना जाता है।

अगर Ama को समय पर ठीक न किया जाए तो यह लंबे समय तक शरीर में रह सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के होते हैं, इसलिए अक्सर लोग इसे नज़रअंदाज कर देते हैं। धीरे-धीरे यह शरीर के अलग-अलग हिस्सों में असर डालने लगता है और भारीपन बढ़ जाता है। समय के साथ यह शरीर के संतुलन को और बिगाड़ सकता है। इसलिए शुरुआती स्तर पर ही ध्यान देना जरूरी होता है।

Ama केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता, यह मानसिक स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है। शरीर में भारीपन और सुस्ती महसूस होने से मन भी अस्थिर लगने लगता है। ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और चिड़चिड़ापन भी महसूस हो सकता है। जब शरीर साफ और हल्का नहीं होता तो मानसिक ऊर्जा भी प्रभावित होती है। इसलिए इसका असर शरीर और मन दोनों पर देखा जाता है।

हाँ, Ama शरीर की ऊर्जा को प्रभावित करता है क्योंकि यह पाचन और पोषण की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। इससे शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती और व्यक्ति जल्दी थक जाता है। शरीर हल्का और सक्रिय महसूस होने के बजाय भारी लगने लगता है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो कमजोरी भी महसूस हो सकती है। इसलिए शरीर को साफ रखना ऊर्जा के लिए जरूरी है।

जब शरीर में Ama जमा होता है तो यह अंदरूनी संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे शरीर की प्राकृतिक रक्षा क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे शरीर बाहरी बदलावों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। छोटी समस्याएँ भी लंबे समय तक परेशान कर सकती हैं। शरीर की सफाई प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है। इसलिए Ama को नियंत्रित रखना जरूरी माना जाता है।

Ama का बढ़ना सीधे उम्र पर निर्भर नहीं करता बल्कि जीवनशैली पर निर्भर करता है। गलत खानपान, तनाव और अनियमित दिनचर्या किसी भी उम्र में इसे बढ़ा सकते हैं। अगर आदतें सही हों तो इसे नियंत्रित रखा जा सकता है। कई लोग उम्र बढ़ने के बावजूद संतुलित जीवनशैली से इससे बचते हैं। इसलिए यह उम्र से ज्यादा आदतों का परिणाम है।

 Ama शरीर के पाचन और मेटाबॉलिज्म को धीमा कर सकता है जिससे शरीर भारी महसूस होता है। जब भोजन सही से नहीं पचता तो शरीर ऊर्जा का सही उपयोग नहीं कर पाता। इससे सुस्ती और वजन बढ़ने जैसी स्थिति बन सकती है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है इसलिए शुरुआत में ध्यान नहीं जाता। इसलिए पाचन का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

 Ama पूरी तरह जीवनशैली से जुड़ी स्थिति है क्योंकि यह खाने, सोने और दिनचर्या की आदतों से प्रभावित होता है। अनियमित भोजन और तनाव इसका मुख्य कारण बन सकते हैं। गलत आदतें धीरे-धीरे शरीर में Ama बढ़ा देती हैं। यह केवल शारीरिक नहीं बल्कि व्यवहारिक असंतुलन का परिणाम है। इसलिए इसे सुधारने के लिए जीवनशैली बदलना जरूरी होता है।

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