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पाचन कमज़ोर है तो Supplement खाने से पहले Agni ठीक करो — ये Therapy सीखें

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आजकल हर कोई अपनी थकान, कमज़ोरी या बालों के झड़ने का इलाज विटामिन और मिनरल के रंग-बिरंगे डिब्बों में तलाश रहा है। बाज़ार से महंगे मल्टीविटामिन, प्रोटीन पाउडर या कैल्शियम के सप्लीमेंट्स खरीदकर खाना एक आम फैशन बन चुका है। लोग सोचते हैं कि अगर वे रोज़ाना इन गोलियों का सेवन कर लेंगे, तो उनका शरीर अचानक से मशीन की तरह दौड़ने लगेगा।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस शरीर में साधारण घर का रोटी-सब्ज़ी ठीक से नहीं पच रहा, वह इन भारी और सिंथेटिक (Synthetic) सप्लीमेंट्स को कैसे पचाएगा? यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी खराब और जंग लगे इंजन वाली गाड़ी में दुनिया का सबसे महंगा पेट्रोल डाल दिया जाए। जब तक आपकी 'अग्नि' या मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह से सक्रिय नहीं होता, तब तक ये सप्लीमेंट्स शरीर में ताकत नहीं, बल्कि भयंकर टॉक्सिन्स (Toxins) पैदा करते हैं।

कमज़ोर पाचन के बावजूद सप्लीमेंट्स खाने पर शरीर में क्या होता है?

जब आप अपनी जठराग्नि (Metabolism) की स्थिति जाने बिना भारी सप्लीमेंट्स सीधे पेट में डालते हैं, तो शरीर उन्हें सोखने के बजाय उनसे संघर्ष करने लगता है। इसके कारण अंदर ही अंदर ये स्थितियाँ पैदा होती हैं:

  • आम (Toxins) का निर्माण: कमज़ोर पाचन तंत्र इन भारी सप्लीमेंट्स को तोड़ नहीं पाता। यह अधपचा सप्लीमेंट आंतों में जाकर सड़ने लगता है और एक विषैला व चिपचिपा पदार्थ (आम) बनाता है, जो लगभग हर बीमारी की जड़ है।
  • किडनी और लिवर पर भारी दबाव: जो सिंथेटिक विटामिन्स शरीर सोख नहीं पाता, उन्हें फिल्टर करके बाहर निकालने का सारा काम लिवर और किडनी को करना पड़ता है। लगातार ये गोलियाँ खाने से इन अंगों पर ओवरलोड (Overload) पड़ता है।
  • गट-माइक्रोबायोम (Gut Microbiome) का क्रैश होना: आर्टिफिशियल विटामिन्स और उनके प्रिजर्वेटिव्स पेट के गुड बैक्टीरिया (Good Bacteria) को मार देते हैं, जिससे गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी की समस्या भड़क जाती है।

सप्लीमेंट्स और कमज़ोर पाचन की यह समस्या किन प्रकारों में दिखती है?

सप्लीमेंट्स का न पचना हर इंसान में एक जैसा नहीं दिखता। आपके शरीर के अंदरूनी दोषों के आधार पर यह कुपोषण (Malabsorption) इन अलग-अलग और भयंकर रूपों में सामने आ सकता है:

  • गैस्ट्रिक डिस्ट्रेस (Gastric Distress): इसमें सप्लीमेंट खाने के तुरंत बाद पेट फूल जाता है, खट्टी डकारें आती हैं और पेट में भारीपन बना रहता है। यह मुख्य रूप से आयरन और कैल्शियम की गोलियों के साथ ज़्यादा होता है।
  • स्किन ब्रेकआउट्स (Skin Breakouts): शरीर जब सप्लीमेंट्स के टॉक्सिन्स को मल-मूत्र से सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाता, तो वह उन्हें त्वचा के ज़रिए फेंकता है। इससे चेहरे और पीठ पर मुंहासे (Acne) और रैशेज़ उभर आते हैं।
  • पैराडॉक्सिकल फटीग (Paradoxical Fatigue): इसमें आप ताकत के लिए सप्लीमेंट खाते हैं, लेकिन उन्हें पचाने में शरीर की इतनी ज़्यादा ऊर्जा खर्च हो जाती है कि आपको दिन भर क्रोनिक फटीग और सुस्ती महसूस होती है।

किन खामोश संकेतों से पहचानें कि सप्लीमेंट्स पच नहीं रहे हैं?

आपका शरीर हमेशा आपको यह बताने की कोशिश करता है कि जो आप खा रहे हैं, वह काम नहीं कर रहा है। जब सप्लीमेंट्स शरीर में ज़हर बन रहे हों, तो शरीर ये खामोश अलार्म बजाने लगता है:

  • पेशाब का रंग पीला होना: अगर मल्टीविटामिन खाने के बाद आपका यूरिन नियॉन पीले (Neon Yellow) रंग का और बदबूदार आ रहा है, तो इसका मतलब है कि शरीर उन विटामिन्स को सोखने के बजाय सीधा फ्लश आउट (Flush out) कर रहा है।
  • पेट में लगातार ब्लोटिंग और गैस: गोलियाँ खाने के कुछ देर बाद ही पेट का गुब्बारे की तरह फूल जाना और पेट के निचले हिस्से में दर्द होना, जो पाचन की विफलता को दर्शाता है।
  • कब्ज़ या डायरिया की अचानक शुरुआत: कैल्शियम या आयरन सप्लीमेंट्स के कारण अचानक से कब्ज़ हो जाना या मैग्नीशियम खाने पर बार-बार टॉयलेट भागना।
  • दिमागी सुस्ती: सही पोषण न मिलने और टॉक्सिन्स के खून में मिलने के कारण हमेशा दिमाग पर एक ब्रेन फॉग जैसी धुंध छाई रहना और काम पर फोकस न कर पाना।

सप्लीमेंट्स पचाने के चक्कर में लोग क्या गलतियाँ करते हैं?

तुरंत रिज़ल्ट पाने और अपनी कमज़ोरी को रातों-रात मिटाने की बेताबी में लोग अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो शरीर की रही-सही ताकत भी छीन लेते हैं:

  • डोज़ (Dose) को दोगुना कर देना: जब एक गोली से फायदा नहीं दिखता, तो लोग सोचते हैं कि शायद डोज़ कम है और वे दो-दो गोलियाँ खाने लगते हैं, जिससे लिवर पर टॉक्सिक शॉक (Toxic Shock) पड़ता है।
  • खाली पेट भारी गोलियाँ खाना: कई लोग सुबह उठते ही खाली पेट एसिडिक विटामिन्स (जैसे विटामिन सी) खा लेते हैं, जो पेट की अंदरूनी परत को छीलकर अल्सर (Ulcers) और एसिडिटी पैदा कर देते हैं।
  • घरेलू खाने को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करना: केवल गोलियों के भरोसे रहना और अपनी खराब जीवनशैली को न सुधारना। जंक फूड खाते हुए सप्लीमेंट्स लेना शरीर में केमिकल रिएक्शन पैदा करता है।

आयुर्वेद 'कमज़ोर पाचन' और 'अग्नि' के इस विज्ञान को कैसे समझता है?

आधुनिक चिकित्सा जिसे केवल विटामिन्स की कमी और एब्जॉर्प्शन इश्यू (Absorption issue) मानती है, आयुर्वेद उसे शरीर में 'अग्निमांद्य', 'आम' के भारी जमाव और 'स्रोतस' के अवरोध के रूप में समझता है:

  • अग्निमांद्य (Weak Metabolism): आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में 13 प्रकार की अग्नियाँ होती हैं, जिनमें जठराग्नि सबसे प्रमुख है। जब लगातार कुर्सी पर बैठे रहने से यह अग्नि सुस्त पड़ जाती है, तो कोई भी भारी चीज़ पच ही नहीं सकती।
  • आम (Toxins) का आवरण: कमज़ोर अग्नि के कारण भोजन पेट में सड़कर एक चिपचिपा ज़हर 'आम' बनाता है। यह आम आंतों की अंदरूनी परत (Villi) को पूरी तरह कोट (Coat) कर लेता है, जिससे सप्लीमेंट्स खून में मिल ही नहीं पाते।
  • वात का प्रकोप: जब शरीर को सही पोषण (रस धातु) नहीं मिलता, तो वात दोष भड़क जाता है। यह बढ़ा हुआ वात नसों को सुखाता है और शरीर में नसों की कमज़ोरी पैदा कर देता है।

सप्लीमेंट्स पचाने और 'अग्नि' बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अगर आपकी अग्नि कमज़ोर है, तो आपको भारी भोजन या सप्लीमेंट्स से दूर रहकर पहले अपनी जठराग्नि को सही ईंधन देना होगा। इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनाएं ताकि आपका पाचन तंत्र दोबारा ज़िंदा हो सके:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - अग्नि को तेज़ करने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - अग्नि को बुझाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, मूंग दाल की खिचड़ी, ओट्स, दलिया, जौ। भारी राजमा, छोले, उड़द की दाल, मैदा, वाइट ब्रेड।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (अग्नि को बढ़ाने का सबसे बड़ा साधन)। रिफाइंड ऑयल, बाज़ार के ट्रांस फैट्स, भारी क्रीम।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, परवल (अदरक और जीरे के तड़के के साथ)। भारी कटहल, बैंगन, बहुत ज़्यादा कच्चा सलाद।
पेय पदार्थ (Beverages) गुनगुना पानी, छाछ (भुना जीरा और हींग डालकर), सोंठ का पानी। बर्फ का ठंडा पानी, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, डार्क कॉफी।
फल (Fruits) पपीता, उबला हुआ सेब, मीठे अनार। बिना मौसम के कोल्ड स्टोरेज वाले ठंडे फल, भारी केले।

जठराग्नि के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य 'दीपन-पाचन' रसायन दिए हैं, जो कमज़ोर हो चुके पाचन तंत्र को तुरंत रीबूट करते हैं और शरीर को भारी सप्लीमेंट्स पचाने के लायक बनाते हैं:

  • त्रिफला: यह केवल कब्ज़ की दवा नहीं है। त्रिफला आंतों की डीप-क्लीनिंग करता है और वहां जमे हुए 'आम' को खुरच कर बाहर निकाल देता है, जिससे शरीर की एब्जॉर्प्शन (Absorption) पॉवर कई गुना बढ़ जाती है।
  • सोंठ (Dry Ginger): आयुर्वेद में सोंठ को 'विश्वभेषज' (यूनिवर्सल मेडिसिन) कहा गया है। यह जठराग्नि को तुरंत जलाती है और पेट में होने वाली ब्लोटिंग (Bloating) व गैस को जड़ से खत्म करती है।
  • गिलोय: जब सिंथेटिक सप्लीमेंट्स खाने से लिवर पर भारी टॉक्सिसिटी आ जाती है, तो गिलोय लिवर को डिटॉक्स करती है और खून को साफ करके इम्यूनिटी को फौलादी बनाती है।
  • अश्वगंधा: जब अग्नि ठीक हो जाए, तो शरीर को प्राकृतिक ताकत देने के लिए अश्वगंधा सबसे उत्तम है। यह मानसिक तनाव और अकारण एंग्जायटी को शांत करके शरीर को अंदर से ऊर्जावान बनाता है।

कमज़ोर पाचन को ठीक करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब 'आम' और टॉक्सिन्स आंतों में बहुत गहराई तक जम चुके हों और केवल चूरन या डाइट से अग्नि न बढ़ रही हो, तो पंचकर्म की ये क्लासिकल थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • विरेचन थेरेपी: शरीर से दूषित पित्त और भारी टॉक्सिन्स को मल के रास्ते बाहर निकालने के लिए लिवर और आंतों की यह डीप-क्लीनिंग की जाती है। यह मेटाबॉलिज़्म को सुधारने का सबसे अचूक तरीका है।
  • अभ्यंग मालिश: वात दोष को शांत करने और शरीर की जकड़न को दूर करने के लिए औषधीय तेलों (विशेषकर पेट के आस-पास) से डीप-टिशू मालिश की जाती है, जो पाचन को सक्रिय करती है।
  • बस्ती कर्म (Enema): जब आंतें पूरी तरह से रूखी हो चुकी हों और पोषण सोख न पा रही हों, तो औषधीय तेल का एनीमा दिया जाता है। यह आंतों की दीवार (Villi) को रिपेयर करके नर्वस सिस्टम को ताकत देता है।
  • शिरोधारा थेरेपी: कई लोगों का पाचन भारी स्ट्रेस के कारण खराब होता है। सिर पर औषधीय तेल की धार गिराने से दिमाग तुरंत शांत होता है और 'गट-ब्रेन एक्सिस' (Gut-brain axis) ठीक हो जाता है।

पाचन तंत्र के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

सालों से गलत खानपान और भारी सिंथेटिक गोलियों से डैमेज हुए पाचन तंत्र को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और 'आम-पाचक' डाइट से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। पेट का भारीपन, गैस और ब्लोटिंग (Bloating) काफी हद तक कम हो जाएगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म (विरेचन) और रसायनों के प्रभाव से आंतों की 'एब्जॉर्प्शन' (Absorption) क्षमता बेहतरीन हो जाएगी। आपका शरीर साधारण भोजन से ही प्राकृतिक विटामिन्स सोखने लगेगा।
  • 5-6 महीने: आपका मेटाबॉलिज़्म और हॉर्मोनल सिस्टम पूरी तरह से पोषित हो जाएगा। आप बिना किसी बाहरी सप्लीमेंट के, एक प्राकृतिक, ऊर्जावान और कॉन्फिडेंट जीवन जीना शुरू कर देंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

कमज़ोरी और पोषण की कमी के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य ब्लड रिपोर्ट में विटामिन्स की कमी देखकर सीधे सिंथेटिक सप्लीमेंट्स की भारी डोज़ (Dose) देना। जठराग्नि को मज़बूत करना, आंतों का 'आम' साफ़ करना और प्राकृतिक रसायनों द्वारा शरीर को खुद पोषण सोखने लायक बनाना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल विटामिन्स या मिनरल्स की एक मैकेनिकल कमी (Deficiency) और सप्लीमेंटेशन का मामला मानना। इसे कमज़ोर पाचन (अग्निमांद्य), दूषित रस धातु और 'आम' के भारी जमाव का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल गोलियों का कोर्स पूरा करने की आम सलाह दी जाती है। डाइट में 'आम-पाचक' भोजन, शुद्ध गाय का घी, और अग्नि को सुधारने के लिए सही समय पर खाने पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर सप्लीमेंट्स छोड़ने पर शरीर फिर से कमज़ोर हो जाता है और गोलियों से लिवर व किडनी पर टॉक्सिक असर पड़ता है। शरीर का मेटाबॉलिज़्म और आंतें अंदर से इतनी मज़बूत हो जाती हैं कि वे घर के साधारण खाने से भी प्राकृतिक रूप से पूरा पोषण सोखना सीख जाती हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद आपकी जठराग्नि को मज़बूत करके आपको पूरी तरह रिपेयर कर सकता है, लेकिन अगर आपको सप्लीमेंट्स खाने के बाद या शरीर में ये बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • उल्टी में खून आना या काला मल: अगर आपको सप्लीमेंट्स (विशेषकर आयरन) खाने के बाद पेट दर्द हो और मल का रंग बिल्कुल डामर (Tar) जैसा काला या उल्टी में खून आए (यह पेप्टिक अल्सर का संकेत हो सकता है)।
  • आँखों और त्वचा का पीला पड़ना (Severe Jaundice): अगर विटामिन्स की भारी टॉक्सिसिटी के कारण लिवर पर असर आ जाए और आपको अचानक पीलिया (Jaundice) हो जाए।
  • अचानक और तेज़ी से वज़न गिरना: अगर आप ताकत के लिए सप्लीमेंट्स खा रहे हैं लेकिन आपका वज़न बिना किसी कोशिश के बहुत तेज़ी से गिर रहा है और कमज़ोरी आ रही है।
  • छाती में दर्द और सांस फूलना: अगर भारी थकावट के साथ-साथ आपको थोड़ा सा चलने पर भी सीने में जकड़न हो और सांस लेने में भारी तकलीफ महसूस हो।

निष्कर्ष

अपने शरीर को एक ऐसी मशीन की तरह समझें जिसका जनरेटर (जठराग्नि) बंद पड़ा है। जब आप इस बंद जनरेटर में भारी सिंथेटिक सप्लीमेंट्स और हाई-प्रोटीन पाउडर डालते हैं, तो यह उसे ऊर्जा में बदलने के बजाय शरीर में भारी टॉक्सिन्स (आम) के रूप में जमा कर देता है। थोड़ा सा काम करते ही सांस फूलना, गोली खाते ही खट्टी डकारें आना और मासिक धर्म की समस्याएं शुरू हो जाना, ये कोई साधारण विटामिन्स की कमी नहीं है; यह एक अलार्म है कि आपका 'पाचन तंत्र' पूरी तरह क्रैश हो चुका है और आपका लिवर भारी दबाव में है। केवल विज्ञापन देखकर मल्टीविटामिन्स के डिब्बे खरीदकर इस धातु-क्षय को टालने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपके शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता को हमेशा के लिए अपाहिज कर रहा है।

महंगी गोलियों और टॉक्सिसिटी के इस ज़हरीले चक्रव्यूह से बाहर निकलें। बाहर के रूखे जंक फूड और सिंथेटिक पिल्स को छोड़कर हमेशा हल्का, सुपाच्य और 'अग्नि' को बढ़ाने वाला भोजन खाएं। अपनी डाइट में सोंठ का पानी, मूंग दाल और छाछ शामिल करें। गिलोय, अश्वगंधा और त्रिफला जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की विरेचन व अभ्यंग मालिश से अपने सुस्त पाचन को प्राकृतिक सफाई देकर नया जीवन दें। कमज़ोर पाचन को अपनी कमज़ोरी न बनने दें, आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल नहीं। विटामिन सी प्रकृति में अत्यधिक अम्लीय (Acidic) होता है। अगर आपकी जठराग्नि कमज़ोर है और आप खाली पेट इसे खाते हैं, तो यह पेट की म्यूकोसा (अंदरूनी परत) को जलाकर सीवियर एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस पैदा कर सकता है।

सिंथेटिक आयरन सप्लीमेंट्स पचने में बहुत भारी (गुरु) होते हैं। कमज़ोर अग्नि इन्हें पचा नहीं पाती, जिसके कारण ये आंतों में खुश्की (वात) और आम पैदा करते हैं, जिससे भयंकर कब्ज़ और काले रंग का मल (Black stool) आने लगता है।

आमतौर पर कैल्शियम सप्लीमेंट्स दूध के साथ लेने की सलाह दी जाती है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार अगर आपका पाचन धीमा है, तो दोनों भारी चीज़ें एक साथ खाने से शरीर उन्हें एब्जॉर्ब नहीं कर पाता। शरीर में बिना पचा हुआ अतिरिक्त कैल्शियम किडनी में पथरी (Stones) बना सकता है।

हाँ। बाज़ार में मिलने वाले प्रोटीन पाउडर्स में आर्टिफिशियल स्वीटनर्स और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। अगर आपकी अग्नि उन्हें पचाने लायक नहीं है, तो सारा भार लिवर और किडनी पर आ जाता है, जिससे लिवर एंजाइम्स (SGOT/SGPT) खतरनाक रूप से बढ़ सकते हैं।

हाँ, आयुर्वेद के अनुसार तांबे के बर्तन में रात भर रखा हुआ पानी सुबह खाली पेट पीने से जठराग्नि (Metabolism) उत्तेजित होती है और लिवर का प्राकृतिक डिटॉक्सिफिकेशन तेज़ होता है, जिससे शरीर की एब्जॉर्प्शन पावर (Absorption power) बढ़ती है।

ब्लोटिंग होने पर तुरंत भारी सप्लीमेंट्स का सेवन रोक दें। एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ा सा भुना जीरा, हींग और काला नमक मिलाकर पिएं। यह वात को तुरंत शांत करेगा और फंसी हुई गैस को बाहर निकालकर अग्नि को तुरंत राहत देगा।

अगर आप बी-कॉम्प्लेक्स (B-Complex) या मल्टीविटामिन खा रहे हैं, तो यूरिन का रंग हल्का पीला होना आम है। लेकिन अगर यूरिन भयंकर बदबूदार और नियॉन (Neon) पीला आ रहा है, तो इसका मतलब है कि शरीर उन विटामिन्स को यूज़ (Use) करने के बजाय सीधा बाहर फेंक रहा है (Malabsorption)।

शत-प्रतिशत। पंचकर्म (विशेषकर विरेचन) शरीर की सर्विसिंग (Servicing) की तरह है। जब आंतों से टॉक्सिन्स (आम) की परत हट जाती है, तो विलाई (Villi) पूरी तरह से साफ़ हो जाती हैं, जिससे आप साधारण घर का खाना या आयुर्वेदिक रसायन भी 100% सोख (Absorb) पाते हैं।

कृत्रिम प्रोबायोटिक्स कैप्सूल कभी-कभी स्मॉल इंटेस्टाइनल बैक्टीरियल ओवरग्रोथ (SIBO) का कारण बन सकते हैं। इसकी बजाय आयुर्वेद ताज़ा छाछ (Buttermilk) या घर का जमा हुआ दही (दोपहर के समय) पीने की सलाह देता है, जो एक प्राकृतिक प्रोबायोटिक है और अग्नि को नहीं बुझाता।

हाँ। अगर आपकी अग्नि सही है, तो आंवला (विटामिन सी का भंडार), मोरिंगा (कैल्शियम का स्रोत), और मुनक्का (आयरन) जैसे प्राकृतिक आयुर्वेदिक रसायन आपके शरीर को वे सभी विटामिन्स दे सकते हैं, जो आपको किसी भी सिंथेटिक सप्लीमेंट से मिलते हैं, वह भी बिना किसी लिवर डैमेज या साइड-इफेक्ट के।

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