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- Home / Therapy / पिचु / बस्ती थेरपी – दर्द, सूजन और नसों की शांति के लिए उपचार / विरेचन उपचार – शरीर शोधन और पाचन सुधार के लिए पंचकर्म थेरपी
अगर पेट साफ न रहे, तो उसका असर सिर्फ पेट तक सीमित नहीं रहता। धीरे-धीरे एसिडिटी, कब्ज, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, त्वचा की समस्या और शरीर में भारीपन महसूस होने लगता है। आयुर्वेद मानता है कि जब शरीर के दोष बढ़ जाते हैं और संतुलन बिगड़ जाता है, तो सबसे पहले पाचन तंत्र प्रभावित होता है। बाहर का तला-भुना खाना, मसालेदार भोजन और अनियमित दिनचर्या पेट में गंदगी और दोष जमा कर देती है। ऐसे समय में विरेचन उपचार शरीर को अंदर से साफ करने और संतुलन में लाने में मदद करता है। यह जमा हुई गंदगी और दोषों को मल के रास्ते बाहर निकालने का काम करता है। इस उपचार में कई जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है, जो मरीज की प्रकृति और समस्या के अनुसार चुनी जाती हैं, ताकि वह औषधि मरीज को सूट करे। ये जड़ी-बूटी वाली औषधियां पेट में जाकर अंदर जमी सारी गंदगी को बाहर निकाल देती हैं, जिससे मरीज को पेट से जुड़ी सभी समस्याओं में राहत मिलती है, वह रिलैक्स महसूस करता है और दोष संतुलन में आ जाते हैं।
आज के समय में लोगों का खान-पान ठीक नहीं रहता। सही समय पर खाना न खाना, ज्यादा खाना या गलत खाना खाने की वजह से पेट में कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं और शरीर में टॉक्सिक पदार्थ जमा हो जाते हैं। विरेचन उपचार इन सभी टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकालने में बहुत मददगार होता है। यह उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी है, जिन्हें पेट से जुड़ी परेशानियां होती हैं और जिनके दोष बिगड़े हुए होते हैं।
यह उपचार लाभकारी तब भी होता है, जब आपको कोई बड़ी समस्या न हो। जरूरी नहीं कि अगर कोई समस्या नहीं है, तो शरीर में दोष या टॉक्सिक पदार्थ जमा नहीं हैं। आज के खान-पान के कारण थोड़ी मात्रा में ये अंदर जमा होते ही हैं। विरेचन उपचार उन सभी टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकालकर आपको अंदर से भी स्वस्थ रखती है और बाहर से भी बेहतर महसूस कराती है। इससे पाचन तंत्र भी मजबूत होता है।
विरेचन उपचार कैसे किया जाता है?
सबसे पहले डॉक्टर मरीज के दोषों को स्टडी करते हैं और उसकी समस्याएं सुनते हैं कि पेट से जुड़ी दिक्कतें किस तरह की हैं और कब से हैं, क्योंकि आयुर्वेद रूट कॉज तक जाकर बीमारी को ठीक करने का काम करता है। डॉक्टर पहले मरीज की प्रकृति और दोषों को समझते हैं, फिर उसके अनुसार जड़ी-बूटी और हर्बल औषधियां तय करते हैं, जो उसकी त्वचा और पाचन तंत्र को सूट करें। इसके बाद कुछ दिनों तक मरीज को तेल और घी निर्धारित मात्रा में दिया जाता है, जितना उसकी पाचन शक्ति पचा सके। भूख लगने पर हल्का खाना जैसे खिचड़ी या मूंग दाल दी जाती है। इस दौरान ज्यादा धूप में चलना, दौड़ना या बाहर ज्यादा घूमना मना किया जाता है। तेल और घी देने से शरीर अंदर और बाहर से चिकना हो जाता है, जिससे अंदर जमा दोष बाहर निकलने के लिए तैयार हो जाते हैं। यह प्रक्रिया एक-दो दिन तक फॉलो की जाती है। इसके बाद मरीज को हल्के गर्म पानी से भाप दी जाती है और तेल से पूरे शरीर की मालिश की जाती है। इससे जमे हुए दोष और टॉक्सिक पदार्थ हल्के हो जाते हैं और फिर मल के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।
विरेचन उपचार मुख्य रूप से दोषों को संतुलित करने के लिए किया जाता है, खासकर पित्त दोष को बैलेंस करने के लिए यह बहुत फायदेमंद होता है। पित्त दोष के बढ़ने से गैस, एसिडिटी, कब्ज, त्वचा रोग, सिरदर्द और ज्यादा गुस्सा आने जैसी समस्याएं होती हैं। यह उपचार पित्त दोष को संतुलन में लाकर पेट और त्वचा से जुड़ी समस्याओं को ठीक करता है। उपचार के बाद मरीज को कुछ दिनों तक बाहर का खाना न खाने, ज्यादा तला-भुना न खाने, सही समय पर भोजन करने, योग करने और रात में हल्का खाना खाने की सलाह दी जाती है। इस उपचार के बाद मरीज खुद को रिलैक्स महसूस करता है, गैस और एसिडिटी की समस्या कम हो जाती है, त्वचा से जुड़ी दिक्कतें ठीक होती हैं, गुस्सा कम आता है और शरीर के दोष संतुलन में आ जाते हैं
पाचन सुधार में विरेचन थेरेपी की भूमिका
आजकल बहुत से लोग पाचन से जुड़ी समस्याओं से परेशान रहते हैं, जैसे गैस बनना, पेट भारी रहना, कब्ज, एसिडिटी या खाना ठीक से न पचना। इसकी सबसे बड़ी वजह गलत खान-पान, ज्यादा तला-भुना खाना, समय पर भोजन न करना और तनाव है। आयुर्वेद में ऐसी समस्याओं को जड़ से ठीक करने के लिए विरेचन थेरेपी को बहुत असरदार माना गया है। विरेचन थेरेपी का काम सिर्फ पेट साफ करना नहीं होता, बल्कि यह पूरे पाचन तंत्र को अंदर से साफ और मजबूत बनाती है। जब हमारे शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है, तो पाचन बिगड़ने लगता है। इससे एसिड ज्यादा बनने लगता है, जलन होती है और खाना ठीक से नहीं पचता। विरेचन थेरेपी इस बढ़े हुए पित्त को शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे पाचन धीरे-धीरे सामान्य होने लगता है।
इस थेरेपी से पहले स्नेहन और स्वेदन किया जाता है, जिससे पेट और आंतों में जमी गंदगी नरम हो जाती है। जब विरेचन किया जाता है, तो यही गंदगी मल के रास्ते बाहर निकल जाती है। इसके बाद पेट हल्का महसूस होता है और भूख भी सही समय पर लगने लगती है। जिन लोगों को हमेशा पेट भरा-भरा लगता है, उन्हें विरेचन के बाद काफी राहत मिलती है। विरेचन थेरेपी लीवर के काम को भी बेहतर बनाती है। लीवर पाचन में बहुत अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि वही पित्त रस बनाता है। जब लीवर सही से काम करता है, तो खाना अच्छे से पचता है और शरीर को पूरा पोषण मिलता है। विरेचन से लीवर पर जमा अतिरिक्त गर्मी और गंदगी निकल जाती है, जिससे उसका काम सुधरता है।
इस थेरेपी का एक और फायदा यह है कि यह कब्ज की समस्या को जड़ से ठीक करने में मदद करती है। जब पेट साफ रहता है, तो गैस, अफारा और बदहजमी जैसी परेशानियाँ अपने-आप कम हो जाती हैं। इसके साथ ही आंतों की सफाई होने से डाइजेस्टिव सिस्टम बढ़िया रहता है विरेचन के बाद जब सही आहार और दिनचर्या अपनाई जाती है, तो पाचन शक्ति लंबे समय तक अच्छी बनी रहती है। यही वजह है कि आयुर्वेद में विरेचन को सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि पाचन को दोबारा सही दिशा में लाने का तरीका माना जाता है। सरल शब्दों में कहा जाए तो विरेचन थेरेपी पाचन तंत्र को अंदर से साफ करती है, पित्त दोष को संतुलित करती है और पेट को फिर से ठीक तरह से काम करने में मदद करती है। सही तरीके और डॉक्टर की देखरेख में किया गया विरेचन उपचार पाचन सुधार के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है।
विरेचन थेरेपी किन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद होती है
विरेचन थेरेपी हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग तरह से लाभकारी हो सकती है, लेकिन कुछ खास समस्याओं में इसका असर ज्यादा अच्छा देखा जाता है। जिन लोगों को बार-बार पेट खराब रहने, एसिडिटी, जलन, कब्ज या खट्टी डकार की समस्या रहती है, उनके लिए विरेचन काफी मददगार माना जाता है। यह अंदर जमे दोषों को बाहर निकालकर पाचन तंत्र को संतुलन में लाने का काम करता है। त्वचा से जुड़ी समस्याओं में भी विरेचन का महत्वपूर्ण रोल होता है। आयुर्वेद के अनुसार कई बार मुंहासे, फोड़े-फुंसी, खुजली या दाने पेट और पित्त दोष के बिगड़ने की वजह से होते हैं। ऐसे मामलों में विरेचन शरीर को अंदर से साफ करके त्वचा की समस्याओं में सुधार लाने में मदद करता है।
जिन लोगों को ज्यादा गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन, बेचैनी या मानसिक असंतुलन महसूस होता है, उनके लिए भी विरेचन उपयोगी माना जाता है। पित्त दोष बढ़ने से मन पर भी असर पड़ता है। विरेचन से पित्त संतुलित होने पर व्यक्ति खुद को ज्यादा शांत और हल्का महसूस करता है। यह थेरेपी उन लोगों के लिए भी फायदेमंद होती है, जिनकी जीवनशैली बहुत अनियमित है या जो लगातार बाहर का तला-भुना और मसालेदार खाना खाते हैं। ऐसे खान-पान से शरीर में धीरे-धीरे टॉक्सिक पदार्थ जमा हो जाते हैं। विरेचन इन्हें बाहर निकालकर शरीर को दोबारा संतुलन में लाने में मदद करता है। इसके अलावा मौसम बदलने के समय या साल में एक बार शरीर की अंदरूनी सफाई के लिए भी विरेचन कराया जाता है। इससे शरीर हल्का महसूस करता है, ऊर्जा बढ़ती है और आगे होने वाली कई समस्याओं से बचाव में भी मदद मिलती है।
विरेचन के बाद क्या खाना चाहिए और क्या नहीं
विरेचन थेरेपी के बाद शरीर अंदर से साफ हो जाता है, लेकिन उस समय पाचन थोड़ा कमजोर रहता है। इसलिए इस दौरान क्या खाना है और क्या नहीं, इसका ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। अगर इस समय भारी या गलत खाना खा लिया जाए, तो पाचन फिर से बिगड़ सकता है।
विरेचन के बाद सबसे ज़रूरी है हल्का, सादा और जल्दी पचने वाला खाना।
शुरुआत में:
- पतली मूंग दाल की खिचड़ी सबसे अच्छी मानी जाती है
- चावल या पतली दाल ली जा सकती है
- गुनगुना पानी थोड़ी-थोड़ी देर में पिएँ
2–3 दिन बाद:
- सादी रोटी या सादा चावल
- उबली हुई सब्जियाँ जैसे लौकी, तोरई, कद्दू, गाजर
- थोड़ा सा घी खाना फायदेमंद होता है, क्योंकि यह पाचन को मजबूत करता है
धीरे-धीरे:
- घर का बना सादा खाना
- भूख लगने पर ही खाना, जबरदस्ती नहीं
- खाना आराम से और चबा कर खाना
विरेचन के बाद क्या नहीं खाना चाहिए
इस समय पेट बहुत संवेदनशील होता है, इसलिए कुछ चीज़ों से पूरी तरह बचना चाहिए:
- तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाना
- बाहर का खाना, फास्ट फूड, पैकेट वाला भोजन
- बहुत ज्यादा तेल, मिर्च और गरम मसाले
- खट्टा खाना जैसे अचार, ज्यादा नींबू
- दही, पनीर और भारी दूध से बनी चीजें
- ठंडी चीजें जैसे फ्रिज का पानी, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम
- शराब और धूम्रपान
खाने के साथ कुछ जरूरी बातें
- खाना हमेशा गुनगुना लें
- बहुत ज्यादा या बहुत कम न खाएँ
- दिन में हल्की सैर करें, लेकिन ज्यादा थकाने वाला काम न करें
- देर रात तक जागना और मोबाइल ज्यादा देखना भी ठीक नहीं
क्यों जरूरी है ये परहेज़
विरेचन के बाद शरीर खुद को ठीक करता है। अगर इस समय सही खाना लिया जाए, तो पाचन लंबे समय तक अच्छा बना रहता है। गलत खान-पान से फिर से गैस, कब्ज और एसिडिटी शुरू हो सकती है।
विरेचन उपचार में कितना खर्च आता है और इसमें कितना समय लगता है?
विरेचन उपचार का खर्च और समय हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति की समस्या कितनी पुरानी है, शरीर की प्रकृति कैसी है और इलाज कहाँ से कराया जा रहा है। फिर भी एक सामान्य अंदाज़ा समझा जा सकता है। समय की बात करें, तो पूरा विरेचन उपचार आमतौर पर 7 से 10 दिनों में पूरा हो जाता है। इसमें पहले कुछ दिन स्नेहन और स्वेदन किए जाते हैं, ताकि शरीर इलाज के लिए तैयार हो सके। इसके बाद एक दिन मुख्य विरेचन की प्रक्रिया होती है। इसके बाद 2–3 दिन आराम और खास आहार का ध्यान रखना होता है। कुछ लोगों में यह समय थोड़ा कम या ज्यादा भी हो सकता है। खर्च की बात करें, तो विरेचन उपचार का खर्च भी जगह और सुविधाओं के अनुसार बदलता रहता है। छोटे आयुर्वेदिक क्लिनिक में यह कम खर्च में हो सकता है, जबकि बड़े पंचकर्म सेंटर या रिसॉर्ट टाइप सेटअप में खर्च ज्यादा आता है। आम तौर पर विरेचन उपचार का खर्च 8300 से 12000 तक जा सकता है। इसमें डॉक्टर की सलाह, दवाइयाँ, स्नेहन-स्वेदन और देखभाल सब शामिल होते हैं।
FAQs
- विरेचन करवाने के बाद कमजोरी क्यों लगती है?
क्योंकि शरीर से गंदगी निकलती है और पाचन थोड़े समय के लिए धीमा हो जाता है, सही आहार से यह ठीक हो जाती है। - विरेचन के बाद कितने दिन तक हल्का खाना जरूरी है?
आमतौर पर 5 से 7 दिन तक हल्का और सादा खाना खाना चाहिए। - क्या विरेचन करवाने से वजन कम हो जाता है?
शुरुआत में हल्कापन महसूस होता है, लेकिन इसका मकसद वजन घटाना नहीं बल्कि शरीर की सफाई है। - विरेचन के दौरान कितनी बार पेट साफ होता है?
यह व्यक्ति की प्रकृति पर निर्भर करता है, आमतौर पर 6 से 15 बार तक हो सकता है। - क्या विरेचन के बाद गैस और एसिडिटी दोबारा हो सकती है?
अगर गलत खान-पान किया जाए तो हो सकती है, सही डाइट से इसका असर लंबे समय तक रहता है। - क्या विरेचन के बाद ऑफिस का काम कर सकते हैं?
उसी दिन नहीं, लेकिन 1–2 दिन बाद हल्का काम किया जा सकता है। - विरेचन के बाद चाय या कॉफी कब पी सकते हैं?
कम से कम 5–7 दिन बाद ही पीना बेहतर होता है। - क्या विरेचन हर साल कराना चाहिए?
जरूरी नहीं, डॉक्टर की सलाह और शरीर की जरूरत देखकर ही करवाना चाहिए। - विरेचन के बाद भूख कम क्यों लगती है?
क्योंकि पाचन सिस्टम नया बैलेंस बना रहा होता है, कुछ दिनों में भूख सामान्य हो जाती है। - क्या घर पर खुद से विरेचन करना सुरक्षित है?
नहीं, विरेचन हमेशा आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में ही करना चाहिए।
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