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वमन उपचार – कफ संतुलन और श्वसन रोगों के लिए पंचकर्म थेरपी

वमन उपचार आयुर्वेद की पंचकर्म थेरेपी है। इस थेरेपी का उद्देश्य शरीर में जमा हुआ कफ दोष बाहर निकालना होता है। जब शरीर में कफ दोष अत्यधिक मात्रा में जमा हो जाता है, तो इंसान को सिर दर्द, सिर भारी लगना, सांस लेने में दिक्कत, एलर्जी, अस्थमा जैसी परेशानियां होने लगती हैं। वमन उपचार इन सभी समस्याओं को कम करने में सहायक होता है। शरीर में जमा विषैले पदार्थ, जो गलत खान-पान की वजह से भी जमा हो जाते हैं, इस थेरेपी के जरिए बाहर निकाले जाते हैं। यह प्रक्रिया नेचुरल उल्टी की तरह होती है, जिसमें शरीर में जमा कफ और विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं।

इस थेरेपी से पहले मरीज को उसकी अग्नि के अनुसार तेल,घी पान कराया जाता है, जितनी मात्रा उसकी पाचन शक्ति सह सके। इसके बाद पूरे शरीर में मालिश की जाती है, ताकि कफ हल्का पड़ जाए और बाहर निकलने के लिए तैयार हो जाए। इस प्रक्रिया के बाद कफ दोष पूरी तरह से हल्का हो जाता है। जो भी दोष जमा होते हैं, वे ढीले पड़ जाते हैं और फिर उल्टी के जरिए शरीर से बाहर निकल जाते हैं। इससे सांस लेने में जो भी तकलीफ होती है, वह ठीक हो जाती है। फेफड़ों या छाती में जमा बलगम भी बाहर निकल जाता है और छाती हल्की महसूस होती है। उल्टी कराने के लिए खास आयुर्वेदिक दवाइयों और जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया हमेशा स्पेशलिस्ट डॉक्टर की निगरानी में ही की जाती है, या वही डॉक्टर करते हैं जिन्हें इसका पूरा अनुभव और सही नॉलेज होता है। वमन प्रक्रिया के बाद कुछ दिनों तक मरीज डॉक्टर की निगरानी में रहता है। यह एक नेचुरल प्रोसेस है, इसलिए इससे कोई खतरा या नुकसान नहीं होता। अगर किसी मरीज को प्रक्रिया के दौरान कोई तकलीफ या समस्या होने लगती है, तो यह प्रक्रिया वहीं रोक दी जाती है। कुल मिलाकर यह उपचार बहुत फायदेमंद होता है, 

वमन उपचार की प्रक्रिया कैसे की जाती है

यह प्रक्रिया बहुत ही सावधानी से की जाती है, इसलिए इसे एक अनुभवी डॉक्टर ही करता है। यह प्रक्रिया तब की जाती है जब मरीज के शरीर में अत्यधिक मात्रा में दोष जमा हो जाएं या कफ ज्यादा जमा हो जाए, जिससे उसे सांस लेने में तकलीफ, मोटापा बढ़ना या त्वचा से संबंधित कोई समस्या हो जाए। तभी यह प्रक्रिया की जाती है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले मरीज को तेल का पान कराया जाता है, जिससे कफ पिघल जाए। यह इतना कराया जाता है जितना उसका पाचन तंत्र सह सके। इसके बाद पूरे शरीर की आयुर्वेदिक तेल से मालिश की जाती है। तेल हल्का गरम होता है, जिससे कफ और ज्यादा पिघलने लगता है। इस प्रक्रिया के बाद सुबह खाली पेट दूध, यवागू या कफ उत्पन्न करने वाले द्रव पदार्थ मरीज को दिए जाते हैं। इससे कफ खुद-ब-खुद बाहर आने के लिए तैयार हो जाता है। इसके बाद आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां दी जाती हैं, जिससे मरीज को उल्टी आती है और शरीर अपने आप कफ को बाहर निकाल देता है। यह उल्टी नेचुरल तरीके से कराई जाती है, जिससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता।

शरीर का सारा कफ निकल जाने के बाद यह प्रक्रिया रोक दी जाती है। अगर इस प्रक्रिया के दौरान मरीज को कोई तकलीफ होती है, तो भी यह प्रक्रिया वहीं रोक दी जाती है। इस प्रक्रिया के बाद मरीज डॉक्टर की देखरेख में रहता है और उसे हल्का खाना दिया जाता है, ताकि शरीर फिर से संतुलन में आ सके। यह उपचार बहुत ही प्रभावशाली है। इस उपचार से शरीर में जमा हुआ सारा दोष और विषैला पदार्थ उल्टी के जरिए बाहर निकल जाता है। शरीर हल्का हो जाता है, जिससे सिर हल्का, मन हल्का महसूस होता है। मोटापा कम होता है और त्वचा से संबंधित किसी भी समस्या में आराम मिलता है। इसलिए यह उपचार बहुत ही फायदेमंद उपचार है।

आयुर्वेद में कफ दोष और उसका असर शरीर पर 

आयुर्वेद के अनुसार शरीर में तीन दोष होते हैं और अगर तीनों दोष बैलेंस रहते हैं तो शरीर स्वस्थ रहता है, अंदर से भी और बाहर से भी। लेकिन अगर इन तीनों में से एक भी दोष इम्बैलेंस हो जाता है, बढ़ जाता है या कम हो जाता है, तो नई-नई बीमारियां उत्पन्न होने लगती हैं। ये बीमारियां शरीर के अंदर भी हो सकती हैं और शरीर के बाहर भी।

तीन दोषों में से एक दोष है कफ। कफ दोष शरीर की मजबूती और स्थिरता को बताता है। कफ का स्वभाव जोड़ों को चिकना रखना, अंगों को जोड़कर रखना और शरीर को मजबूत बनाना होता है। यह त्वचा को नमी भी देता है। अगर कफ दोष सही रहता है तो पाचन शक्ति भी सही रहती है। खाना सही से पचता है, उससे मिलने वाले न्यूट्रिशन शरीर को मिलते हैं, शरीर मजबूत रहता है और व्यक्ति अंदर से मोटिवेट महसूस करता है।

लेकिन अगर कफ दोष ठीक नहीं रहता और इम्बैलेंस हो जाता है, तो व्यक्ति को कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। इम्युनिटी कम हो सकती है, बार-बार बीमारियों का शिकार होना पड़ सकता है। जोड़ों में तकलीफ, सिर दर्द, सिर भारी रहना, आंखों में जलन जैसी समस्याएं भी कफ दोष के बिगड़ने से होती हैं। शरीर में बलगम और म्यूकस बढ़ने लगते हैं, जोड़ों की चिकनाई कम हो जाती है और त्वचा की नमी खत्म हो जाती है।

इसके कारण कई तरह के रोग हो जाते हैं। पाचन क्रिया बिगड़ जाती है, जिससे भूख नहीं लगती। शरीर को सही मात्रा में न्यूट्रिशन नहीं मिल पाता। न्यूट्रिशन न मिलने के कारण शरीर कमजोर पड़ जाता है और व्यक्ति को कमजोरी  महसूस होती है। इसके कारण मन भी अस्वस्थ रहने लगता है और व्यक्ति मोटिवेट नहीं रहता।

कफ दोष के बिगड़ने से कब्ज, नाक बंद रहना, सांस लेने में तकलीफ, मन का चिड़चिड़ा रहना, नींद न आना, सुस्ती और उदासी जैसी समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। इसलिए कफ दोष का हमारे शरीर में बहुत ही महत्वपूर्ण रोल है।

वमन उपचार कफ को कैसे संतुलित करता है

शरीर में कफ दोष का मुख्य स्थान छाती, पेट और फेफड़ों को माना गया है। जब कफ दोष अत्यधिक मात्रा में बढ़ जाता है, तो यह इन्हीं स्थानों पर जमा होने लगता है। छाती और फेफड़ों में कफ जमा होने से सांस लेने में तकलीफ होती है, सिर भारी रहता है, छाती में भारीपन महसूस होता है और नाक बंद रहती है।

यदि कफ पेट में जमा हो जाए, तो पाचन तंत्र पूरी तरह से खराब हो जाता है। इससे आपका पूरा डाइजेस्टिव प्रोसेस बिगड़ जाता है, जिसके कारण भोजन सही मात्रा में पच नहीं पाता और उससे मिलने वाले पोषक तत्व शरीर को नहीं मिलते। परिणामस्वरूप शरीर में कमजोरी बनी रहती है और शरीर सुस्त हो जाता है।

नाक बंद रहने के कारण बेचैनी और घबराहट भी हो सकती है। ऐसे में वमन उपचार कफ दोष को बाहर निकालने में अत्यंत सहायक होता है। वमन उपचार के माध्यम से शरीर से अन्य विषैले पदार्थ भी बाहर निकाले जाते हैं, जिससे व्यक्ति को हल्कापन और राहत महसूस होती है।

इस उपचार में छाती, पेट और फेफड़ों में जमा हुआ सारा कफ दोष बाहर निकाल दिया जाता है। उपचार से पहले रोगी को तैलीय पदार्थ या घी का सेवन कराया जाता है, जिससे कफ दोष पिघल सके। इसके बाद तेल से मालिश की जाती है। फिर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ या औषधियाँ दी जाती हैं, जिनसे उल्टी आती है और शरीर स्वाभाविक रूप से जमा हुआ कफ दोष बाहर निकाल देता है।

यह उल्टी एक प्राकृतिक प्रक्रिया होती है, जिसके माध्यम से छाती, फेफड़ों और पेट में जमा कफ दोष पूरी तरह बाहर निकल जाता है और कफ दोष संतुलित हो जाता है। इस प्रकार वमन उपचार अत्यधिक कफ को बाहर निकालकर शरीर को स्वस्थ बनाता है।

उपचार के बाद यदि खान-पान सही रखा जाए, तो ये समस्याएँ लंबे समय तक दोबारा नहीं होतीं। कई लोग कफ की समस्या के लिए एलोपैथिक दवाइयाँ लेते हैं, जो कफ को दबाने या रोकने का काम करती हैं। जबकि वमन उपचार में कफ दोष को जड़ से शरीर के बाहर निकाल दिया जाता है। इसलिए यह उपचार अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

वमन उपचार के बाद क्या सावधानियाँ रखें

वमन उपचार के बाद शरीर थोड़ा संवेदनशील हो जाता है, क्योंकि अंदर से जमा हुआ कफ बाहर निकाला गया होता है। इस समय सही देखभाल बहुत जरूरी होती है, ताकि उपचार का पूरा फायदा मिले और शरीर जल्दी संतुलन में आ जाए। सबसे पहले खान-पान का ध्यान रखना जरूरी है। वमन के बाद तुरंत भारी या तला-भुना खाना नहीं खाना चाहिए। शुरुआत में हल्का और गर्म खाना जैसे पतली खिचड़ी, सूप या दलिया लेना बेहतर रहता है। ठंडी चीजें, दही, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक और ज्यादा मीठा कुछ दिनों तक बिल्कुल नहीं लेना चाहिए, क्योंकि ये कफ को फिर से बढ़ा सकते हैं। आराम भी बहुत जरूरी होता है। वमन के दिन और उसके अगले एक-दो दिन ज्यादा भागदौड़, भारी काम या एक्सरसाइज से बचना चाहिए। शरीर को रिकवर होने का समय देना जरूरी है। पूरी नींद लें, लेकिन दिन में ज्यादा देर तक सोना नहीं चाहिए।

ठंड से बचाव करें। वमन के बाद शरीर ठंड जल्दी पकड़ सकता है, इसलिए ठंडी हवा, एसी, ठंडा पानी और सुबह-शाम की ठंड से बचें। गुनगुना पानी पीना सबसे अच्छा रहता है। आवाज़ और गले का ध्यान रखें। ज्यादा जोर से बोलना, चिल्लाना या लंबे समय तक फोन पर बात करने से बचें, क्योंकि वमन के बाद गला और छाती थोड़े संवेदनशील रहते हैं। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयाँ और परहेज़ को ठीक से फॉलो करें। खुद से कोई दवा या घरेलू नुस्खा शुरू न करें। अगर कमजोरी, चक्कर या ज्यादा परेशानी लगे, तो तुरंत डॉक्टर को बताएं। सीधे शब्दों में कहें तो वमन उपचार के बाद हल्का खाना, पर्याप्त आराम, ठंड से बचाव और सही परहेज़ रखने से ही इस थेरेपी का पूरा फायदा मिलता है और कफ लंबे समय तक संतुलन में रहता है।

उपचार में कितना समय और खर्च आता है

वमन उपचार एक दिन में होने वाली प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि इसे पूरे प्लान के साथ किया जाता है। इसमें शरीर को पहले तैयार किया जाता है, फिर वमन कराया जाता है और उसके बाद कुछ दिन रिकवरी का समय दिया जाता है। समय की बात करें तो वमन उपचार में आमतौर पर 7 से 10 दिन लग सकते हैं। इसमें पहले 3–5 दिन स्नेहन और स्वेदन किया जाता है, ताकि शरीर में जमा कफ ढीला हो जाए। इसके बाद एक दिन वमन की मुख्य प्रक्रिया होती है। वमन के बाद 2–3 दिन शरीर को संभलने और संतुलन में आने के लिए दिए जाते हैं, जिसमें हल्का खाना और आराम जरूरी होता है।

खर्च की बात करें तो वमन उपचार का खर्च जगह, डॉक्टर के अनुभव और इस्तेमाल होने वाली दवाइयों पर निर्भर करता है। आमतौर पर इसका खर्च ₹7,500  से ₹12,000 तक हो सकता है। अगर यह किसी अच्छे पंचकर्म सेंटर या अस्पताल में किया जाए, तो खर्च थोड़ा ज्यादा भी हो सकता है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि वमन उपचार कोई सामान्य इलाज नहीं है, बल्कि एक गहरी पंचकर्म थेरेपी है। इसलिए सस्ता देखकर कहीं भी करवाने के बजाय अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर से ही करवाना चाहिए।

FAQs

  1. क्या वमन उपचार करवाना सुरक्षित होता है?
    हाँ, अगर यह अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में किया जाए तो सुरक्षित होता है।
  2. वमन के दौरान बहुत ज्यादा उल्टी होती है क्या?
    नहीं, उल्टी नियंत्रित मात्रा में करवाई जाती है और डॉक्टर समय पर रोक देते हैं।
  3. क्या वमन के बाद कमजोरी महसूस होती है?
    थोड़ी हल्की कमजोरी हो सकती है, जो सही खाने और आराम से जल्दी ठीक हो जाती है।
  4. क्या अस्थमा के मरीज वमन करवा सकते हैं?
    हाँ, कई अस्थमा के मामलों में वमन फायदेमंद होता है, लेकिन डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
  5. क्या वमन के बाद तुरंत बाहर जा सकते हैं?
    बेहतर है कि वमन वाले दिन और अगले दिन आराम किया जाए।
  6. कितने समय तक परहेज़ रखना पड़ता है?
    आमतौर पर 5–7 दिन तक हल्का और गरम खाना लेने की सलाह दी जाती है।
  7. क्या वमन हर साल कराया जा सकता है?
    हाँ, जरूरत और डॉक्टर की सलाह के अनुसार साल में एक बार कराया जा सकता है।
  8. क्या वजन कम करने के लिए वमन कराया जाता है?
    नहीं, इसका मुख्य उद्देश्य कफ संतुलन है, वजन कम करना साइड बेनिफिट हो सकता है।
  9. क्या वमन के बाद सर्दी लगने का खतरा रहता है?
    अगर ठंड से बचाव न किया जाए तो हो सकता है, इसलिए सावधानियाँ जरूरी हैं।
  1. क्या महिलाएँ वमन उपचार करवा सकती हैं?
    हाँ, लेकिन प्रेग्नेंसी या पीरियड्स के दौरान वमन नहीं किया जाता।

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