
Successful Treatments
Clinics
Doctors
- Home / Therapy / पिचु / बस्ती थेरपी – दर्द, सूजन और नसों की शांति के लिए उपचार / आयुर्वेदिक फेशियल – त्वचा ग्लो और नेचुरल स्किन केयर थेरपी
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में चेहरा सबसे पहले थकान दिखाता है। नींद पूरी न हो, पानी कम पिएँ, ज़रा सा तनाव बढ़ जाए और उसका असर सीधे त्वचा पर दिखने लगता है। कभी रंग फीका लगने लगता है, कभी रूखापन आ जाता है और कभी दाने या दाग परेशान करने लगते हैं। ऐसे में लोग अक्सर तुरंत असर दिखाने वाले प्रोडक्ट्स या केमिकल ट्रीटमेंट की तरफ़ भागते हैं।
शुरुआत में इससे थोड़ी चमक दिख भी जाती है, लेकिन कुछ समय बाद त्वचा और ज़्यादा नाज़ुक हो जाती है। बार-बार कुछ नया लगाने से स्किन का नेचुरल बैलेंस बिगड़ने लगता है। यहीं से सवाल उठता है कि क्या ऐसा कोई तरीका है जो त्वचा को ऊपर से नहीं, बल्कि भीतर से बेहतर बनाए। आयुर्वेदिक फेशियल इसी सोच से जुड़ा हुआ एक इलाज है। आयुर्वेदिक फेशियल केवल चेहरा चमकाने की प्रक्रिया नहीं है। यह त्वचा को समझने, उसे आराम देने और उसके नेचुरल ग्लो को वापस लाने की एक थेरपी है। इसमें तेज़ केमिकल या मशीनों की जगह जड़ी-बूटियों, तेलों और मालिश का सहारा लिया जाता है।
आयुर्वेदिक फेशियल क्या है और यह साधारण फेशियल से कैसे अलग है?
जब आप सामान्य फेशियल के बारे में सोचते हैं, तो दिमाग़ में तुरंत क्लींजर, स्क्रब, मसाज और फेस पैक की तस्वीर आ जाती है। ज़्यादातर मामलों में यह प्रक्रिया हर किसी के लिए एक जैसी होती है। स्किन टाइप को थोड़ा-बहुत देखा जाता है, लेकिन असली फोकस ऊपर की सफ़ाई और इंस्टेंट ग्लो पर होता है।
आयुर्वेदिक फेशियल इस सोच से अलग है। यहाँ त्वचा को सिर्फ़ ऊपर से नहीं देखा जाता, बल्कि यह समझने की कोशिश की जाती है कि आपकी स्किन ऐसी क्यों हो रही है। आयुर्वेद मानता है कि त्वचा की हालत शरीर के भीतर चल रही प्रक्रियाओं का आईना होती है। अगर पाचन कमज़ोर है, नींद पूरी नहीं है या मन हमेशा तनाव में रहता है, तो उसका असर चेहरे पर ज़रूर दिखेगा। इसलिए आयुर्वेदिक फेशियल में स्किन टाइप के साथ-साथ आपकी प्रकृति, दिनचर्या और मौजूदा समस्याओं को भी ध्यान में रखा जाता है। इस्तेमाल होने वाले तेल, लेप और जड़ी-बूटियाँ व्यक्ति के अनुसार चुनी जाती हैं। यही वजह है कि इसका असर धीरे-धीरे लेकिन टिकाऊ होता है।
त्वचा का ग्लो अचानक क्यों चला जाता है?
कई लोग कहते हैं कि पहले चेहरे पर अपने आप चमक रहती थी, अब पता नहीं कहाँ चली गई। यह बदलाव अक्सर एक दिन में नहीं होता। धीरे-धीरे कुछ आदतें ऐसी बन जाती हैं जो त्वचा से उसकी ताज़गी छीन लेती हैं। अनियमित खान-पान, बाहर का ज़्यादा खाना, पानी कम पीना और देर रात तक जागना पाचन को प्रभावित करता है। जब पाचन ठीक नहीं रहता, तो शरीर ठीक से पोषण नहीं ले पाता। इसका असर सबसे पहले त्वचा पर दिखता है। रंग फीका पड़ने लगता है और त्वचा बेजान सी लगने लगती है। इसके अलावा तनाव भी एक बड़ा कारण है। जब मन लगातार दबाव में रहता है, तो शरीर के भीतर संतुलन बिगड़ने लगता है। हार्मोनल बदलाव, नींद की कमी और थकान मिलकर त्वचा को कमज़ोर बना देते हैं। ऐसे में केवल क्रीम या सीरम लगाने से अंदरूनी कारण नहीं सुधरते।
आयुर्वेद त्वचा को कैसे देखता है?
आयुर्वेद के अनुसार त्वचा केवल बाहरी परत नहीं है। यह शरीर के भीतर चल रही स्थिति को साफ़-साफ़ दिखाती है। अगर शरीर संतुलन में है, तो त्वचा अपने आप साफ़ और चमकदार रहती है। अगर भीतर कुछ गड़बड़ है, तो त्वचा उस गड़बड़ी का संकेत देने लगती है।
आयुर्वेद में त्वचा को मुख्य रूप से तीन दोषों से जोड़ा जाता है। जब इनमें से कोई भी दोष असंतुलित होता है, तो त्वचा पर उसका असर दिखने लगता है। कहीं ज़्यादा रूखापन आ जाता है, कहीं ज़्यादा तेलीयपन और कहीं जलन या दाने। आयुर्वेदिक फेशियल का मक़सद त्वचा को ज़ोर से बदलना नहीं होता। इसका उद्देश्य धीरे-धीरे उस असंतुलन को शांत करना होता है, ताकि त्वचा अपनी प्राकृतिक स्थिति में लौट सके।
आयुर्वेदिक फेशियल में कौन-कौन से स्टेप होते हैं?
आयुर्वेदिक फेशियल की प्रक्रिया हर जगह एक जैसी नहीं होती, क्योंकि इसे व्यक्ति की ज़रूरत के अनुसार बदला जाता है। फिर भी इसमें कुछ मुख्य चरण होते हैं, जो त्वचा को साफ़ करने, पोषण देने और आराम पहुँचाने का काम करते हैं। सबसे पहले चेहरे की हल्की सफ़ाई की जाती है। इसमें ऐसे क्लींजर या जड़ी-बूटी मिश्रण इस्तेमाल किए जाते हैं जो त्वचा की नमी को छीने बिना गंदगी हटाते हैं। इससे स्किन तैयार होती है अगली प्रक्रिया के लिए।
इसके बाद चेहरे की मालिश की जाती है। यह मालिश केवल रिलैक्सेशन के लिए नहीं होती। सही तरीके से की गई मालिश रक्त संचार को बेहतर बनाती है और त्वचा तक पोषण पहुँचाने में मदद करती है। तेल का चुनाव भी स्किन की स्थिति देखकर किया जाता है। अगले चरण में जड़ी-बूटियों से बना लेप या फेस पैक लगाया जाता है। यह लेप त्वचा को ठंडक देता है, सूजन को शांत करता है और धीरे-धीरे रंगत सुधारने में मदद करता है। इसके बाद हल्का टोनिंग और मॉइस्चराइज़िंग की जाती है ताकि त्वचा संतुलित महसूस करे।
आयुर्वेदिक फेशियल के क्या फायदे होते हैं?
आयुर्वेदिक फेशियल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह त्वचा को नुकसान पहुँचाए बिना सुधार की दिशा में ले जाता है। इसमें तेज़ केमिकल नहीं होते, इसलिए साइड इफेक्ट का डर भी कम रहता है। नियमित रूप से सही तरीके से किया गया आयुर्वेदिक फेशियल त्वचा को गहराई से साफ़ करता है। त्वचा खुलकर साँस ले पाती है। इससे धीरे-धीरे मुंहासे और दाने कम होने लगते हैं।
इसके अलावा त्वचा की नमी संतुलित होने लगती है। बहुत रूखी त्वचा में नरमी आती है और बहुत ऑयली त्वचा में संतुलन महसूस होता है। समय के साथ त्वचा का टेक्सचर बेहतर होता है और चेहरा ज़्यादा फ्रेश दिखने लगता है।
क्या आयुर्वेदिक फेशियल हर स्किन टाइप के लिए सही है?
कई लोग यह सोचते हैं कि आयुर्वेदिक फेशियल शायद केवल ड्राई या सेंसिटिव स्किन के लिए होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। आयुर्वेदिक फेशियल की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसे हर स्किन टाइप के अनुसार बदला जा सकता है।
अगर आपकी त्वचा बहुत ऑयली है, तो ऐसे तत्व चुने जाते हैं जो अतिरिक्त तेल को संतुलित करें। अगर त्वचा रूखी है, तो पोषण देने वाले तेल और लेप इस्तेमाल किए जाते हैं। सेंसिटिव स्किन के लिए बहुत हल्के और शांत करने वाले पदार्थ चुने जाते हैं। यही वजह है कि आयुर्वेदिक फेशियल एक तय फार्मूले पर नहीं चलता। यह आपकी त्वचा की मौजूदा हालत को देखकर तय किया जाता है, जिससे परिणाम ज़्यादा सुरक्षित और प्रभावी होते हैं।
केमिकल फेशियल और आयुर्वेदिक फेशियल में क्या अंतर है?
आजकल बाज़ार में ऐसे कई फेशियल ट्रीटमेंट उपलब्ध हैं जो तुरंत चमक देने का दावा करते हैं। इनमें अक्सर तेज़ एक्टिव इंग्रीडिएंट होते हैं, जो ऊपर की परत को एक्सफोलिएट करके त्वचा को चमकदार दिखाते हैं। लेकिन इस तरह की चमक ज़्यादातर अस्थायी होती है। कुछ समय बाद त्वचा और ज़्यादा रूखी या सेंसिटिव हो सकती है। बार-बार ऐसे ट्रीटमेंट लेने से स्किन की नेचुरल प्रोटेक्शन कमज़ोर पड़ सकती है। आयुर्वेदिक फेशियल इस तरीके से काम नहीं करता। यह त्वचा को छीलने या ज़बरदस्ती बदलने की कोशिश नहीं करता। यहाँ फोकस धीरे-धीरे सुधार पर होता है, ताकि त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ बनी रहे।
आयुर्वेदिक फेशियल में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियाँ
आयुर्वेदिक फेशियल में अलग-अलग जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनका चयन त्वचा की ज़रूरत के अनुसार होता है। ये जड़ी-बूटियाँ त्वचा को पोषण देने और शांत करने में मदद करती हैं। हल्दी त्वचा को साफ़ रखने और दाग-धब्बों को हल्का करने में सहायक मानी जाती है। चंदन ठंडक देता है और जलन को कम करता है। नीम त्वचा को साफ़ रखने में मदद करता है, खासकर मुंहासों की समस्या में। इनके अलावा गुलाब, एलोवेरा और मंजिष्ठा जैसी जड़ी-बूटियाँ भी इस्तेमाल की जाती हैं। इनका असर धीरे होता है, लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल करने पर त्वचा की हालत में साफ़ बदलाव दिखने लगता है।
आयुर्वेदिक फेशियल में कितना समय लगता है और इसका खर्च कितना होता है?
आयुर्वेदिक फेशियल की अवधि और खर्च हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी त्वचा की स्थिति कैसी है, समस्या कितनी पुरानी है और फेशियल किस तरह की जड़ी-बूटियों व तेलों से किया जा रहा है। आमतौर पर एक आयुर्वेदिक फेशियल में 45 मिनट से 60 मिनट तक का समय लगता है। इसमें त्वचा की सफ़ाई, मालिश, जड़ी-बूटी वाला लेप और आराम देने वाला फिनिशिंग स्टेप शामिल होता है। कुछ मामलों में, अगर त्वचा को ज़्यादा देखभाल की ज़रूरत हो, तो समय थोड़ा बढ़ भी सकता है।
खर्च की बात करें, तो आयुर्वेदिक फेशियल का खर्च क्लिनिक और इस्तेमाल की जाने वाली औषधियों पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर इसका खर्च ₹625 से ₹1000 के बीच हो सकता है। इसमें त्वचा की जाँच, आयुर्वेदिक तेल, जड़ी-बूटियाँ और पूरी प्रक्रिया शामिल होती है। क्योंकि यह फेशियल हर व्यक्ति की त्वचा के अनुसार किया जाता है, इसलिए इसका असर भी ज़्यादा सुरक्षित और लंबे समय तक रहने वाला होता है।
घर पर की जाने वाली देखभाल का क्या रोल है?
केवल क्लिनिक में किया गया फेशियल ही सब कुछ नहीं होता। घर पर आप कैसे रहते हैं, क्या खाते हैं और त्वचा की रोज़ देखभाल कैसे करते हैं, इसका असर भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
रोज़ पर्याप्त पानी पीना, हल्का और संतुलित भोजन करना और नींद पूरी लेना त्वचा के लिए बुनियादी ज़रूरतें हैं। इसके अलावा बहुत ज़्यादा प्रोडक्ट्स लगाने से बचना भी ज़रूरी है। अगर आप घर पर भी हल्के नेचुरल उपाय अपनाते हैं, तो आयुर्वेदिक फेशियल का असर लंबे समय तक बना रह सकता है।
कब आयुर्वेदिक डॉक्टर या थेरपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए?
अगर आपकी त्वचा पर लंबे समय से दाने, दाग या रंगत की समस्या बनी हुई है और घरेलू उपाय काम नहीं कर रहे, तो विशेषज्ञ से बात करना सही रहता है। कई बार समस्या केवल त्वचा तक सीमित नहीं होती, बल्कि भीतर के असंतुलन से जुड़ी होती है। आयुर्वेदिक डॉक्टर आपकी त्वचा के साथ-साथ आपकी दिनचर्या और पाचन को भी देखते हैं। इसी आधार पर फेशियल और अन्य उपाय सुझाए जाते हैं। इससे इलाज ज़्यादा प्रभावी और सुरक्षित बनता है।
निष्कर्ष
आयुर्वेदिक फेशियल त्वचा को तुरंत बदलने का वादा नहीं करता, बल्कि उसे सही दिशा में लौटाने की कोशिश करता है। यह एक नेचुरल और सुरक्षित तरीका है, जो त्वचा को भीतर से मज़बूत बनाने पर ध्यान देता है। अगर आप अपनी त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ और चमकदार देखना चाहते हैं, तो जल्दबाज़ी के उपायों की जगह संतुलित और समझदारी भरा रास्ता चुनना ज़्यादा बेहतर है। आयुर्वेदिक फेशियल उसी रास्ते की एक कड़ी है, जो त्वचा और शरीर दोनों का ख्याल रखता है।
अगर आप नेचुरल स्किन केयर और आयुर्वेदिक फेशियल के बारे में व्यक्तिगत सलाह लेना चाहते हैं, तो हमारे प्रमाणित जीवा आयुर्वेदिक डॉक्टरों से संपर्क करें। कॉल करें: 0129-4264323
FAQS
- आयुर्वेदिक फेशियल किस तरह का फेशियल होता है?
यह जड़ी-बूटियों और नेचुरल चीज़ों से किया जाने वाला फेशियल होता है, जिसमें केमिकल नहीं होते। - क्या आयुर्वेदिक फेशियल से सच में ग्लो आता है?
हाँ, नियमित रूप से करवाने पर त्वचा साफ और नेचुरल ग्लो वाली दिखने लगती है। - क्या यह फेशियल हर स्किन टाइप के लिए सही है?
हाँ, लेकिन स्किन टाइप के हिसाब से सामग्री बदली जाती है। - पिंपल या एक्ने वाली स्किन में यह फेशियल सुरक्षित है?
हाँ, सही जड़ी-बूटियों से किया जाए तो पिंपल में भी मदद मिलती है। - आयुर्वेदिक फेशियल कितने समय में किया जाता है?
आमतौर पर 45 से 60 मिनट का समय लगता है। - क्या फेशियल के बाद कोई साइड इफेक्ट होता है?
नहीं, क्योंकि इसमें नेचुरल चीज़ें इस्तेमाल होती हैं। - कितने दिन तक इसका असर रहता है?
असर कुछ दिनों तक रहता है, लेकिन नियमित फेशियल से रिज़ल्ट बेहतर होते हैं। - क्या पुरुष भी आयुर्वेदिक फेशियल करवा सकते हैं?
हाँ, यह पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए होता है। - फेशियल के बाद चेहरे पर क्या लगाना चाहिए?
हल्का मॉइस्चराइज़र या डॉक्टर द्वारा बताया गया प्रोडक्ट लगाना ठीक रहता है। - कितने अंतराल पर आयुर्वेदिक फेशियल करवाना चाहिए?
आमतौर पर 15–30 दिन में एक बार करवाना सही माना जाता है।
Similar Therapies
Our Happy Patients
Social Timeline
Related Disease
- Ayurvedic Treatment for Obesity
- Ayurvedic Treatment for Migraine
- Ayurvedic Treatment for Heat Stroke
- Get Ayurvedic Treatment for Paralysis
- Ayurvedic Treatment for Mastitis
- Ayurvedic Treatment for Gangrene Foot
- Ayurvedic Treatment for Granuloma
- Ayurvedic Treatment for Amyloidosis
- Ayurvedic Treatment for Thrombocytopenia
- Ayurvedic Treatment for Dengue
- Ayurvedic Treatment for Measles
- Ayurvedic Treatment for Fistula in Ano
- Ayurvedic Treatment for Malaria
- Ayurvedic Treatment for Plantar Fasciitis
- Ayurvedic Treatment for Chikungunya
- Ayurvedic Treatment for Sepsis
- Ayurvedic Treatment for Addison's Disease
- Get Ayurvedic Treatment for Eye Floaters
- Ayurvedic Treatment for Eye Flu
- Ayurvedic Treatment for Herpes
- Get Ayurvedic Treatment For Teeth Cavities
- Get Ayurvedic Treatment for Tooth Pain
Latest Blogs
- Get An Effective Ayurvedic Treatment For Gastritis
- The Complete Guide to Ayurvedic Detox: Tips, Techniques, and Benefits
- Ayurvedic Hair Growth Secrets Revealed
- Tired of Dull Skin? Try These 5 Ayurvedic Hacks
- Can Ayurveda Reverse Your Diabetes?
- Accelerate Your Dengue Recovery with Ayurveda
- 5 Little Known Facts About Ayurvedic Therapies
- 5 Ayurvedic Secrets for Healthy & Shiny Hair
- Get Ayurvedic Treatment for Fatty Liver
- Get Ayurvedic Treatment for Eyes
- Get Ayurvedic Treatment for Kidney Stones
- How to get rid of a sinus headache with Ayurveda?
- How To Cure Scalp Psoriasis With Ayurveda?
- Migraine Treatment In Ayurveda
- Get Ayurvedic Treatment for Obesity
- When To Worry About Varicose Veins?
- 10 Effective Ways To Get Rid of Piles
- How To Cure PCOS and PCOD Naturally?
- Get Ayurvedic Treatment For PCOS
- Get Relief From Back Pain With Ayurvedic Treatment
Ayurvedic Doctor In Top Cities
- Ayurvedic Doctors in Bangalore
- Ayurvedic Doctors in Pune
- Ayurvedic Doctors in Delhi
- Ayurvedic Doctors in Hyderabad
- Ayurvedic Doctors in Indore
- Ayurvedic Doctors in Mumbai
- Ayurvedic Doctors in Lucknow
- Ayurvedic Doctors in Kolkata
- Ayurvedic Doctors in Patna
- Ayurvedic Doctors in Vadodara
- Ayurvedic Doctors in Ahmedabad
- Ayurvedic Doctors in Chandigarh
- Ayurvedic Doctors in Gurugaon
- Ayurvedic Doctors in Jaipur
- Ayurvedic Doctors in Kanpur
- Ayurvedic Doctors in Noida
- Ayurvedic Doctors in Ranchi
- Ayurvedic Doctors in Bhopal
- Ayurvedic Doctors in Ludhiana
- Ayurvedic Doctors in Dehradun













