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रक्तमोक्षण उपचार – रक्त शुद्धिकरण और त्वचा रोगों के लिए आयुर्वेदिक थेरपी

अगर बार-बार एलर्जी हो जाती है, त्वचा पर फोड़े-फुंसी निकल आते हैं या बिना वजह खुजली और जलन बनी रहती है, तो यह सिर्फ बाहर की समस्या नहीं होती। कई बार शरीर के अंदर खून ही सही तरह से साफ़ नहीं हो पा रहा होता। ऐसे में क्रीम या दवाइयाँ थोड़ी देर का आराम तो देती हैं, लेकिन समस्या फिर लौट आती है। जब शरीर खुद बार-बार संकेत देने लगे कि अंदर कुछ गड़बड़ है, तब केवल ऊपर से इलाज काफी नहीं होता। आयुर्वेद में ऐसी स्थितियों में शरीर के अंदर जमा दूषित रक्त और बढ़ी हुई गर्मी को बाहर निकालने पर ज़ोर दिया जाता है। इसी सिद्धांत पर आधारित एक विशेष उपचार है, जिसे रक्तमोक्षण कहा जाता है।

रक्तमोक्षण उपचार में कई तरीके उपयोग किए जाते हैं। यह मरीज और उसकी कंडीशन पर निर्भर करता है कि डॉक्टर किस तरीके से यह उपचार करेगा। जैसे जोंक या सूक्ष्म सुई मेथड का उपयोग किया जाता है। जोंक मेथड में एक साफ जोंक को आयुर्वेदिक औषधियों के जरिए प्रभावित जगह पर लगाया जाता है, जैसे फोड़े पर, फुंसी पर या एलर्जी वाली जगह पर। सूक्ष्म सुई मेथड में सुई की मदद से हल्का सा चीरा लगाया जाता है, जिससे अशुद्ध रक्त बाहर आ जाता है। इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता। चीरा लगाने के बाद उस जगह पर औषधीय लेप या पट्टी लगाई जाती है, ताकि घाव भर जाए और बाहर की हवा या बैक्टीरिया उस जगह को प्रभावित न कर सके। रक्तमोक्षण थेरेपी से जो भी दूषित रक्त होता है, वह साफ हो जाता है। एलर्जी खत्म हो जाती है, फोड़े-फुंसी या कोई भी त्वचा रोग धीरे-धीरे ठीक हो जाता है। यह थेरेपी हमेशा नॉलेजेबल डॉक्टर की निगरानी में ही की जाती है। इस थेरेपी के बाद मरीज को तुरंत राहत महसूस होती है।

रक्त शुद्धि और स्किन रोगों में रक्तमोक्षण के फायदे

रक्तमोक्षण थेरेपी के बहुत फायदे हैं। आज के समय में स्किन से रिलेटेड समस्याएं बहुत आम हो गई हैं। किसी न किसी को खुजली, फोड़े-फुंसी, मुंहासे, एक्ज़िमा जैसी समस्याएं होती हैं। ये समस्याएं सिर्फ बाहर की वजह से नहीं, बल्कि शरीर के अंदर के कारणों से भी होती हैं। जब रक्त में दूषित पदार्थ मिल जाते हैं और रक्त दूषित हो जाता है, तब ये सारी बीमारियां होती हैं। आज के खान-पान को लेकर रक्त बहुत दूषित हो जाता है, जिसकी वजह से ये सारी समस्याएं पैदा होती हैं। ऐसे में यह थेरेपी बहुत उपयोगी है। यह उपचार के जरिए डॉक्टर आपके रक्त को साफ करता है। जो भी दूषित पदार्थ आपके रक्त में मिल गए होते हैं, उन्हें बाहर निकालता है। जो भी रक्त दूषित हो गया होता है, उसे बाहर निकाला जाता है। इस तरह से शरीर में मौजूद गंदगी निकल जाती है और आपको त्वचा से संबंधित समस्याओं में आराम मिलता है। यह थेरेपी सिर्फ दर्द से ही राहत नहीं देती, बल्कि समस्या को जड़ से खत्म करती है। फिर यह समस्या आपको लंबे समय तक दोबारा देखने को नहीं मिलती।

यह प्रक्रिया विषैले तत्वों को कम करती है। हमारे खून में जो विषैले तत्व जमा हो जाते हैं, जैसे धूम्रपान करने से, अल्कोहल पीने से, गलत खान-पान से, मसालेदार खाने से — जो भी विषैले पदार्थ हमारे रक्त में जमा हो जाते हैं, यह थेरेपी उन सभी को बाहर निकाल देती है। इससे हमारी इम्युनिटी भी बढ़ती है और ब्लड सर्कुलेशन भी बैलेंस रहता है। इससे शरीर को राहत मिलती है और ठंडक महसूस होती है। रक्तमोक्षण थेरेपी सीधे प्रभावित जगह पर काम करती है, इसलिए इंस्टेंट राहत मिलती है। समस्याओं से आराम मिलता है और त्वचा में एक नई चमक देखने को मिलती है, क्योंकि रक्त साफ हो जाता है। अगर शरीर पर घाव होते हैं, तो वे जल्दी भर जाते हैं। पिंपल्स आदि की समस्या भी कम हो जाती है।

कई मामलों में मरीज इन समस्याओं से बचने के लिए दवाइयां खाते हैं, जो हर किसी के लिए उतनी फायदेमंद नहीं होतीं। लेकिन अगर आप यह थेरेपी लेते हैं, तो आपको इंस्टेंट रिजल्ट देखने को मिलता है और समस्या जड़ से खत्म होती है। जब किसी को खुजली या त्वचा की समस्या लंबे समय तक रहती है, तो वह चिड़चिड़ा हो जाता है, डिमोटिवेट हो जाता है। ऐसे में यह थेरेपी उसे मानसिक रूप से भी मदद करती है।

त्वचा में नई चमक देखकर व्यक्ति का माइंड खुश रहता है। जब शरीर अंदर से साफ होता है, तो बाहर से भी एक नई एनर्जी महसूस होती है। व्यक्ति मोटिवेट रहता है, तनाव से दूर रहता है और उसका मन खुश रहता है। इस तरह यह थेरेपी शरीर के अंदर भी फायदेमंद है और शरीर के बाहर भी फायदेमंद है।

रक्त की गंदगी से कौन-कौन सी समस्याएँ होती हैं

जब हमारे शरीर का खून साफ नहीं रहता, तो उसका असर धीरे-धीरे पूरे शरीर पर दिखने लगता है। हम जो गलत खाना खाते हैं, ज्यादा तला-भुना, मसालेदार चीजें, बाहर का खाना, साथ ही तनाव, कम नींद और प्रदूषण ये सब मिलकर खून में गंदगी बढ़ा देते हैं। शुरुआत में हमें इसका पता नहीं चलता, लेकिन समय के साथ कई परेशानियाँ सामने आने लगती हैं। सबसे पहले असर त्वचा पर दिखता है। बार-बार मुंहासे निकलना, फोड़े-फुंसी होना, खुजली, रैशेज, एलर्जी, या त्वचा पर लाल-लाल दाग होना अक्सर खून की गंदगी का संकेत होता है। कई लोगों को दवाइयाँ लगाने से आराम तो मिलता है, लेकिन समस्या बार-बार लौट आती है, क्योंकि अंदर की वजह ठीक नहीं होती। खून की गंदगी से शरीर में ज्यादा गर्मी भी महसूस होने लगती है। हाथ-पैरों में जलन, आंखों में जलन, ज्यादा पसीना आना या बिना वजह चिड़चिड़ापन होना इसी का नतीजा हो सकता है। कुछ लोगों को बार-बार मुंह में छाले भी इसी कारण होते हैं।

इसका असर पाचन पर भी पड़ता है। पेट ठीक से साफ नहीं होता, कब्ज रहती है, गैस और एसिडिटी बढ़ जाती है। जब खून साफ नहीं होता, तो शरीर खाने से पूरा पोषण नहीं ले पाता और अंदरूनी कमजोरी आने लगती है। कई बार घाव या चोट भी देर से भरते हैं। छोटी-सी चोट को ठीक होने में ज्यादा समय लगना इस बात का संकेत हो सकता है कि खून साफ नहीं है और शरीर ठीक से रिपीयर नहीं कर पा रहा। खून की गंदगी का असर जोड़ों और सूजन पर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों को बिना ज्यादा मेहनत के भी शरीर में सूजन या दर्द महसूस होने लगता है। इसके अलावा लगातार थकान, मन भारी रहना, नींद ठीक न आना और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना भी खून की गंदगी से जुड़ा हो सकता है। 

सीधे शब्दों में कहें तो जब खून साफ नहीं रहता, तो शरीर अंदर से परेशान रहने लगता है और वही परेशानी अलग-अलग रूप में बाहर दिखती है। इसलिए सिर्फ ऊपर से इलाज करने के बजाय अंदर की सफाई भी जरूरी मानी जाती है।

किसे रक्तमोक्षण उपचार कराना चाहिए

रक्तमोक्षण उपचार उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, जिनकी समस्याओं की जड़ खून की गंदगी या शरीर की ज्यादा गर्मी से जुड़ी होती है। यह थेरेपी हर किसी के लिए नहीं होती, लेकिन कुछ खास स्थितियों में बहुत अच्छा लाभ देती है। जिन लोगों को बार-बार त्वचा से जुड़ी समस्याएँ होती हैं, जैसे मुंहासे, फोड़े-फुंसी, खुजली, एलर्जी, एक्ज़िमा या सोरायसिस, उनके लिए रक्तमोक्षण उपयोगी हो सकता है। अगर दवाइयाँ लगाने से आराम तो मिलता है लेकिन समस्या फिर लौट आती है, तो ऐसे में यह उपचार मदद कर सकता है। जिन्हें शरीर में ज्यादा गर्मी महसूस होती है, जैसे हाथ-पैर जलना, आंखों में जलन, बार-बार मुंह में छाले  होना या ज्यादा पसीना आना, उन्हें भी रक्तमोक्षण से राहत मिल सकती है।

कुछ लोगों को पुरानी सूजन या दर्द रहता है, खासकर किसी एक जगह पर बार-बार सूजन आ जाना या घाव देर से भरना। ऐसे मामलों में भी डॉक्टर रक्तमोक्षण की सलाह दे सकते हैं। जिन लोगों को खून से जुड़ी परेशानियाँ होती हैं, जैसे खून में गंदगी के कारण बार-बार संक्रमण या त्वचा खराब होना, उनके लिए भी यह उपचार फायदेमंद हो सकता है।

इसके अलावा, जिन लोगों को एलर्जी या बार-बार होने वाली रैशेज की समस्या रहती है, और जिनका पाचन ठीक होने के बावजूद त्वचा बार-बार खराब होती है, उनके लिए भी रक्तमोक्षण एक विकल्प हो सकता है। हालाँकि यह बहुत जरूरी है कि रक्तमोक्षण उपचार खुद से या बिना सलाह के न कराया जाए। गर्भवती महिलाएँ, बहुत कमजोर लोग, खून की कमी (एनीमिया) वाले मरीज या गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग यह उपचार डॉक्टर की सलाह के बिना न कराएँ। सही व्यक्ति, सही समय और अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में किया गया रक्तमोक्षण ही सुरक्षित और असरदार होता है।

उपचार में कितना समय और खर्च आता है

रक्तमोक्षण उपचार में लगने वाला समय और खर्च हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी पुरानी है, शरीर की हालत कैसी है और उपचार किस जगह से कराया जा रहा है। समय की बात करें, तो एक बार की रक्तमोक्षण प्रक्रिया आमतौर पर 20 से 40 मिनट में पूरी हो जाती है। कुछ लोगों को एक ही सिटिंग में फायदा दिखने लगता है, जबकि पुरानी या ज्यादा गंभीर समस्या में 2–3 सिटिंग की जरूरत पड़ सकती है। ये सिटिंग आमतौर पर कुछ दिनों के अंतर से की जाती हैं।

खर्च की बात करें, तो यह इस्तेमाल की जाने वाली विधि (जोंक थेरेपी या सुई विधि), क्लिनिक और डॉक्टर के अनुभव पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर इसका खर्च 14 सौ रुपये से शुरू होकर 2 हज़ार रुपये तक जा सकता है। जोंक थेरेपी में खर्च थोड़ा ज्यादा होता है क्योंकि इसमें खास देखभाल और प्रक्रिया शामिल होती है। यह समझना जरूरी है कि रक्तमोक्षण कोई कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट नहीं है, बल्कि एक मेडिकल आयुर्वेदिक उपचार है। इसलिए केवल कम खर्च देखने के बजाय अनुभवी डॉक्टर और साफ-सुथरे सेंटर से ही यह उपचार कराना चाहिए, ताकि सही और सुरक्षित परिणाम मिल सकें।

FAQs

  1. क्या रक्तमोक्षण करवाने में दर्द होता है?
    थोड़ा-सा चुभन महसूस हो सकता है, लेकिन यह ज्यादा दर्दनाक नहीं होता।
  2. क्या एक बार कराने से ही फायदा दिखने लगता है?
    कुछ लोगों को पहली बार में आराम मिल जाता है, पुरानी समस्या में 2–3 बार लग सकता है।
  3. जोंक थेरेपी सुरक्षित होती है या नहीं?
    हाँ, अगर अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर द्वारा की जाए तो यह सुरक्षित मानी जाती है।
  4. रक्तमोक्षण के बाद कमजोरी तो नहीं आती?
    आमतौर पर नहीं, क्योंकि बहुत थोड़ी मात्रा में ही रक्त निकाला जाता है।
  5. क्या रक्तमोक्षण के बाद कोई निशान रह जाता है?
    नहीं, सही तरीके से करने पर कोई बड़ा निशान नहीं रहता।
  6. क्या यह थेरेपी हर उम्र के लोग करवा सकते हैं?
    नहीं, बहुत कमजोर लोग, गर्भवती महिलाएँ और खून की कमी वाले मरीज इसे बिना सलाह न कराएँ।
  7. रक्तमोक्षण के बाद क्या नहाना मना होता है?
    उसी दिन नहाने से बचना बेहतर होता है, अगले दिन से सामान्य रूप से नहा सकते हैं।
  8. क्या दवाइयों के साथ रक्तमोक्षण कराया जा सकता है?
    हाँ, डॉक्टर की सलाह से इसे दवाइयों के साथ किया जा सकता है।
  9. कितने समय में स्किन में फर्क दिखने लगता है?
    अक्सर कुछ दिनों में खुजली और जलन कम होने लगती है।

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