सर्दियों में सुबह रजाई से निकलना ही मुश्किल लगता है। ऊपर से अगर बवासीर की परेशानी हो, तो बाथरूम जाना भी किसी चुनौती से कम नहीं लगता।
शौच के दौरान दर्द, गुदा के पास सूजन या मस्सों में जलन-कुछ लोगों को ये लक्षण ठंड के दिनों में ज्यादा परेशान करते हैं।
ऐसे में मन में सवाल उठता है कि क्या सर्दी बढ़ने से बवासीर के मस्से भी बढ़ने लगते हैं?
इसका जवाब थोड़ा अलग है। ठंड सीधे बवासीर की सूजन बढ़ाती है, इसका पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। लेकिन सर्दियों में हमारी कुछ आदतें बदल जाती हैं, जिनका असर कब्ज और बवासीर के लक्षणों पर पड़ सकता है।
क्या ठंड लगने से बवासीर के मस्से बढ़ सकते हैं?
बवासीर यानी पाइल्स में गुदा या मलाशय के निचले हिस्से में मौजूद रक्त वाहिकाओं और आसपास के ऊतकों में सूजन हो सकती है।
अंदरूनी बवासीर में मल त्याग के दौरान रक्तस्राव या मस्से बाहर आने की परेशानी हो सकती है। बाहरी बवासीर में गुदा के आसपास दर्दनाक गांठ, खुजली या बैठने पर असुविधा महसूस हो सकती है।
लेकिन मौसम बदलने और बवासीर के मस्सों का आकार बढ़ने के बीच कोई स्पष्ट, स्थापित वैज्ञानिक संबंध नहीं है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि दिसंबर या जनवरी आते ही बवासीर अपने आप गंभीर होने लगती है।
हां, अगर ठंड की वजह से आपकी दिनचर्या बदलती है, पानी कम पीते हैं या शारीरिक गतिविधि घट जाती है, तो कब्ज जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
और कब्ज के साथ शौच के दौरान बार-बार जोर लगाना बवासीर की परेशानी बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है।
यानी मौसम को दोष देने से पहले यह देखना ज्यादा उपयोगी है कि आपकी आदतों में क्या बदलाव आया है।
सर्दियों में पानी पीना कम हो जाता है? यह गलती भारी पड़ सकती है
गर्मी में प्यास लगते ही पानी पीने का ध्यान रहता है, लेकिन सर्दियों में कई लोग घंटों पानी नहीं पीते।
सुबह चाय, दोपहर में खाना और शाम को फिर चाय—इस बीच सादा पानी पीना कम हो सकता है।
अगर पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं मिलते, तो कुछ लोगों में मल सख्त होने और कब्ज की परेशानी बढ़ने की संभावना रहती है।
अमेरिका के National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) के अनुसार, शरीर में पानी की कमी और पर्याप्त फाइबर न लेना कब्ज से जुड़े कारणों में शामिल हैं।
बवासीर में सख्त मल निकालने के लिए जोर लगाना दर्द और असुविधा बढ़ा सकता है।
इसलिए सर्दियों में केवल प्यास लगने का इंतजार न करें।
दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पिएं। आप सादा या हल्का गुनगुना पानी चुन सकते हैं, लेकिन बहुत गर्म पानी पीने की जरूरत नहीं है।
घर में बनी दाल, सूप और अन्य तरल पदार्थ भी दैनिक तरल सेवन में योगदान देते हैं।
अगर किडनी, हार्ट या किसी दूसरी बीमारी के कारण डॉक्टर ने पानी सीमित करने को कहा है, तो उसी सलाह का पालन करें।
रजाई में ज्यादा समय और कम चलना भी एक वजह हो सकती है
दिल्ली-NCR, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में ठंड या कोहरे के दिनों में सुबह टहलने निकलना हर किसी को अच्छा नहीं लगता।
कुछ लोग अपनी रोज की वॉक बंद कर देते हैं। ऑफिस में भी ज्यादातर समय कुर्सी पर बैठकर निकल जाता है।
NIDDK के अनुसार, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि न होना कब्ज के संभावित कारणों में शामिल है।
अगर आपकी गतिविधि पहले से कम हो गई है और साथ में कब्ज भी होने लगी है, तो इस बदलाव पर ध्यान देना जरूरी है।
Reddit के constipation forum में एक व्यक्ति ने सवाल किया था कि क्या बहुत ठंड पड़ने पर कब्ज बढ़ सकती है। चर्चा में एक दूसरे उपयोगकर्ता ने बताया कि वह गर्मियों में ज्यादा पैदल चलता और साइकिल चलाता था, लेकिन सर्दियों में गतिविधि कम हो जाती थी और उसे कब्ज ज्यादा परेशान करती थी।
यह एक व्यक्तिगत अनुभव है, वैज्ञानिक प्रमाण नहीं। फिर भी इससे रोजमर्रा की एक वास्तविक समस्या सामने आती है।
सर्दियों में बाहर टहलना मुश्किल हो, तो घर के अंदर थोड़ी देर चलें। ऑफिस में काम के बीच उठें या दोपहर की धूप में अपनी सुविधा के अनुसार वॉक करें।
हल्की शारीरिक गतिविधि कब्ज को संभालने में मदद कर सकती है।
सर्दियों के खाने में क्या बदलें ताकि कब्ज न बढ़े?
सर्दियों में गरमागरम पराठे, पूरी, पकौड़े, गाजर का हलवा और चाय का अपना मजा है।
इन चीजों को केवल बवासीर के डर से पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है। लेकिन अगर पूरे दिन के भोजन में फल, दाल, सब्जियां और साबुत अनाज कम हो जाते हैं, तो फाइबर की मात्रा घट सकती है।
फाइबर मल को नरम रखने और आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है।
NIDDK द्वारा दिए गए सामान्य अमेरिकी dietary guidance के अनुसार, 2,000 कैलोरी वाले दैनिक आहार के लिए लगभग 28 ग्राम फाइबर की सिफारिश की जाती है। हर व्यक्ति की वास्तविक जरूरत उम्र, कैलोरी सेवन और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
भारतीय सर्दियों के भोजन में भी कई अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं।
जैसे सुबह दलिया या ओट्स, दोपहर में दाल और सब्जी, खाने के साथ अमरूद या संतरा और भोजन में पर्याप्त साबुत अनाज।
मटर, गाजर और मौसमी हरी सब्जियां भी संतुलित भोजन का हिस्सा बन सकती हैं।
फाइबर की मात्रा अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है, ताकि गैस या पेट फूलने की परेशानी न हो।
सुबह ठंड में शौच करते समय दर्द होता है तो क्या करें?
मान लीजिए, आप सुबह बाथरूम जाते हैं। मल सख्त है और उसे निकालने के लिए जोर लगाना पड़ता है।
अगर पहले से बवासीर है, तो इससे दर्द या रक्तस्राव की परेशानी हो सकती है।
लेकिन इस दर्द का कारण केवल ठंडा मौसम मानना सही नहीं होगा।
सबसे पहले कब्ज और मल त्याग की आदतों पर ध्यान दें।
टॉयलेट में ज्यादा देर तक न बैठें। मोबाइल देखते हुए अनावश्यक समय बिताने से बचें। मल त्याग की इच्छा नहीं हो रही है, तो जोर लगाकर मल निकालने की कोशिश न करें।
अगर मल बार-बार सख्त रहता है, तो डॉक्टर की सलाह से फाइबर सप्लीमेंट या मल को नरम करने वाली दवा की जरूरत हो सकती है।
दर्द या खुजली से अस्थायी राहत के लिए कुछ लोगों को गुनगुने पानी में 10–15 मिनट बैठने यानी Sitz Bath से मदद मिलती है।
पानी बहुत गर्म न रखें और डॉक्टर की सलाह के बिना उसमें फिटकरी, तेज एंटीसेप्टिक या अन्य पदार्थ न मिलाएं।
ध्यान रखें कि Sitz Bath से कुछ समय आराम मिल सकता है, लेकिन इससे बाहर निकले मस्से हमेशा के लिए ठीक होने की गारंटी नहीं होती।
सर्दियों में बवासीर की तकलीफ बढ़े तो कब डॉक्टर को दिखाएं?
अगर बवासीर की समस्या पहले से है, तो हर बार होने वाले दर्द को मौसम का सामान्य असर समझकर टालना ठीक नहीं है।
खासतौर पर अगर गुदा के पास अचानक सख्त और बहुत दर्दनाक गांठ बनती है, तो यह बाहरी बवासीर में खून का थक्का जमने जैसी स्थिति का संकेत हो सकता है।
वहीं शौच के दौरान कटने जैसा तेज दर्द एनल फिशर से भी जुड़ा हो सकता है।
NHS के अनुसार, गुदा में दर्द की अलग-अलग वजहें हो सकती हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद बीमारी तय नहीं करनी चाहिए।
इन स्थितियों में जांच जरूरी है:
- शौच के दौरान या बाद में बार-बार खून दिखाई देना।
- गुदा के पास अचानक तेज दर्द या सूजन होना।
- मस्से का बाहर रहना और वापस अंदर न जाना।
- लगभग एक सप्ताह की घरेलू देखभाल के बाद भी राहत न मिलना।
- बुखार, पस या लगातार बढ़ता दर्द होना।
बहुत ज्यादा रक्तस्राव, चक्कर, बेहोशी या तेज दर्द के साथ बुखार होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
मलद्वार से खून आने को अपने आप बवासीर मान लेना सही नहीं है। इसके पीछे दूसरी बीमारियां भी हो सकती हैं।
सर्दियों में बवासीर बार-बार परेशान करती है? Jiva Ayurveda से सलाह लें
अगर ठंड के मौसम में आपको कब्ज, शौच के दौरान दर्द, गुदा के आसपास सूजन या बवासीर के मस्से बाहर आने की परेशानी होती है, तो केवल मौसम बदलने का इंतजार करने के बजाय उसकी सही वजह समझना जरूरी है।
आयुर्वेद में बवासीर को अर्श कहा जाता है। Jiva Ayurveda में आप योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से अपनी परेशानी, पाचन, कब्ज, खानपान और सर्दियों की दिनचर्या को लेकर परामर्श ले सकते हैं। डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत आहार, जीवनशैली में बदलाव और उपयुक्त आयुर्वेदिक देखभाल के विकल्पों पर मार्गदर्शन दे सकते हैं। गंभीर लक्षणों में अन्य चिकित्सकीय जांच या उपचार की भी आवश्यकता हो सकती है।
अगर सर्दियों में बवासीर का दर्द, सूजन या कब्ज आपकी दिनचर्या प्रभावित कर रहा है, तो Jiva Ayurveda के डॉक्टर से परामर्श के लिए फॉर्म भरें और अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे हमारे नंबर +919266714040 पर।
सर्दियों में बवासीर की तकलीफ महसूस होने पर सिर्फ ठंड को जिम्मेदार मानना पर्याप्त नहीं है। पानी, फाइबर, शारीरिक गतिविधि और शौच की आदतों पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है।
चिकित्सकीय सूचना: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है और व्यक्तिगत जांच, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। ठंडे मौसम और बवासीर के बिगड़ने के बीच सीधा वैज्ञानिक संबंध स्थापित नहीं है। दर्द, रक्तस्राव या लगातार लक्षण होने पर योग्य चिकित्सक से सलाह लें।
Medical Sources & Research References
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Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/hemorrhoids/symptoms-causes
Content Reference: बवासीर के लक्षण, कब्ज, शौच के दौरान जोर लगाना, कम फाइबर वाला भोजन और टॉयलेट में लंबे समय तक बैठने से जुड़े जोखिम कारक।
- NIDDK - Symptoms & Causes of Constipation
Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/constipation/symptoms-causes
Content Reference: शरीर में पानी की कमी, फाइबर की कमी, शारीरिक गतिविधि कम होना और दैनिक दिनचर्या में बदलाव जैसे कब्ज के संभावित कारण।
- NIDDK - Eating, Diet & Nutrition for Hemorrhoids
Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/hemorrhoids/eating-diet-nutrition
Content Reference: फाइबर वाले खाद्य पदार्थ, मल को नरम रखने में फाइबर की भूमिका, पर्याप्त तरल पदार्थ और 2,000 कैलोरी वाले आहार के लिए लगभग 28 ग्राम फाइबर की सामान्य सिफारिश।
- Guy's and St Thomas' NHS Foundation Trust - Piles: Lifestyle Changes
Source: https://www.guysandstthomas.nhs.uk/health-information/piles-haemorrhoids/lifestyle-changes
Content Reference: बवासीर में फाइबर, फल-सब्जियां, पानी और दैनिक आदतों में बदलाव। फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाने की सलाह।
- NIDDK - Treatment of Hemorrhoids
Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/hemorrhoids/treatment
Content Reference: कब्ज को संभालना, मल त्याग के दौरान जोर लगाने से बचना, Sitz Bath और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय उपचार के विकल्प।
- NHS - Anal Pain
Source: https://www.nhs.uk/symptoms/anal-pain/
Content Reference: गुदा में दर्द की अलग-अलग वजहें, बवासीर और एनल फिशर के लक्षणों में अंतर तथा गंभीर लक्षणों में डॉक्टर की सहायता।
Patient Forum Research
- Reddit - r/Constipation
Discussion: Cold Weather
Source: https://www.reddit.com/r/Constipation/comments/zvcydm/
Content Reference: सर्दियों में कब्ज बढ़ने का अनुभव और ठंड के मौसम में चलना-फिरना कम होने से जुड़ी उपयोगकर्ताओं की चिंता।
- Reddit - r/hemorrhoid
Discussion: Winter Nights are difficult
Source: https://www.reddit.com/r/hemorrhoid/comments/184gm0u/
Content Reference: बवासीर और फिशर के साथ खुजली, दर्द और भारीपन से जुड़े व्यक्तिगत अनुभव। चर्चा से यह साबित नहीं होता कि सर्दियों के कारण बवासीर बढ़ती है।
- Reddit - r/Constipation
Discussion: Tips to cure constipation while having a hemorrhoid flare
Source: https://www.reddit.com/r/Constipation/comments/1wmtkdj/tips_to_cure_constipation_while_having_a/
Content Reference: बवासीर के लक्षण बढ़ने के दौरान कब्ज को संभालने, फाइबर और दैनिक खानपान को लेकर मरीजों के सवाल।
Research Note: Reddit के अनुभवों का इस्तेमाल केवल मरीजों के वास्तविक सवाल और जीवनशैली संबंधी परेशानियां समझने के लिए किया गया है। इन्हें वैज्ञानिक प्रमाण या उपचार की सफलता का आधार नहीं माना गया है।













