सर्दियों की एक सुबह… आप बाहर निकलते हैं और पहली ठंडी साँस लेते ही सीने में हल्की जकड़न महसूस होती है। कुछ ही पलों में खाँसी आने लगती है और साँस पूरी तरह अंदर नहीं जा पाती। अगर आपको अस्थमा है, तो यह अनुभव आपके लिए नया नहीं होगा। बहुत-से लोग यही सोचते हैं कि ठंड बस मौसम का हिस्सा है, लेकिन अस्थमा के मरीज़ों के लिए यह मौसम शरीर के अंदर कई बदलाव लेकर आता है।
सर्दियों में हवा ठंडी और सूखी हो जाती है। यही हवा जब आपकी साँस की नलियों तक पहुँचती है, तो उनमें जलन और सूजन पैदा करती है और अंदर जमा कफ को और गाढ़ा कर देती है। नतीजा यह होता है कि साँस लेना पहले से ज़्यादा मुश्किल लगने लगता है। कई बार बिना किसी बड़ी वजह के भी अस्थमा के लक्षण बढ़ जाते हैं, जिससे डर और बेचैनी दोनों बढ़ सकती हैं।
इस लेख में आप जानेंगे कि सर्दियों में अस्थमा क्यों ज़्यादा बिगड़ता है, ठंडी हवा और कफ-वृद्धि का इसके पीछे क्या संबंध है, और आयुर्वेद इसे किस तरह समझता है। अगर आप अपने अस्थमा को बेहतर ढंग से संभालना चाहते हैं, तो इन कारणों को समझना आपके लिए बहुत ज़रूरी है।
ठंडी हवा से शरीर में कफ क्यों बढ़ जाता है?
सर्दियों में ठंडी हवा केवल बाहर का तापमान नहीं बदलती, बल्कि आपके शरीर के अंदर की प्रक्रियाओं को भी प्रभावित करती है। जब मौसम ठंडा होता है, तो आपका शरीर खुद को सुरक्षित रखने के लिए कुछ स्वाभाविक बदलाव करता है। इन्हीं बदलावों में से एक है कफ का बढ़ना।
ठंडी हवा के संपर्क में आने पर शरीर में बलगम बनने की मात्रा बढ़ जाती है। यह बलगम दरअसल शरीर की एक सुरक्षा व्यवस्था है, जो धूल, गंदगी और कीटाणुओं को फेफड़ों में जाने से रोकती है। लेकिन सर्दियों में यह बलगम सामान्य से ज़्यादा गाढ़ा और चिपचिपा हो जाता है।
इसका नतीजा यह होता है कि—
- बलगम आसानी से बाहर नहीं निकल पाता
- साँस की नलियों में जमा होने लगता है
- हवा के रास्ते में रुकावट पैदा करता है
अगर आपको दमा (Asthma) है, तो यह स्थिति और भी कठिन हो जाती है। क्योंकि आपकी साँस की नलियाँ पहले से ही सूजी रहती हैं, ऊपर से बढ़ा हुआ कफ उन्हें और संकरा कर देता है। यही कारण है कि सर्दियों में आपको बार-बार खाँसी आती है और साँस लेने में ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
सर्दियों में कम पसीना आना और कम पानी पीना भी कफ बढ़ने का एक कारण है। जब शरीर को पर्याप्त नमी नहीं मिलती, तो बलगम गाढ़ा हो जाता है और बाहर निकलना और मुश्किल हो जाता है। यह पूरा चक्र मिलकर दमा के लक्षणों को और बिगाड़ देता है।
आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में कफ दोष क्यों बढ़ता है?
आयुर्वेद के अनुसार शरीर तीन दोषों (वात, पित्त और कफ) से मिलकर बना होता है। हर मौसम में इनमें से कोई एक दोष स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। सर्दियों का मौसम कफ दोष को बढ़ाने वाला माना जाता है।
कफ दोष के गुण होते हैं—
- ठंडा
- भारी
- गाढ़ा
- चिपचिपा
अब ज़रा सोचिए, सर्दियों का मौसम भी कैसा होता है? ठंडा, भारी और नमी से भरा हुआ। यानी मौसम के गुण और कफ दोष के गुण आपस में मिल जाते हैं। इसी कारण सर्दियों में कफ दोष अपने आप बढ़ने लगता है।
जब कफ दोष बढ़ता है, तो इसका असर सीधे आपके श्वसन तंत्र पर पड़ता है। फेफड़ों और साँस की नलियों में बलगम जमा होने लगता है। यह जमा हुआ कफ हवा के रास्ते को रोकता है और दमा के लक्षण उभरने लगते हैं।
आयुर्वेद यह भी मानता है कि सर्दियों में लोग भारी, तली हुई और ठंडी तासीर वाले भोजन ज़्यादा लेने लगते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थ कफ को और बढ़ा देते हैं। ऊपर से कम शारीरिक गतिविधि और ज़्यादा समय घर के अंदर बिताना कफ के जमाव को और बढ़ाता है।
क्या सर्दियों का व्यायाम अस्थमा के मरीज़ों के लिए ख़तरनाक हो सकता है?
व्यायाम सेहत के लिए ज़रूरी है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन अगर आपको अस्थमा है, तो सर्दियों में किया गया व्यायाम कभी-कभी परेशानी बढ़ा सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि आपको व्यायाम छोड़ देना चाहिए, बल्कि यह समझना ज़रूरी है कि सर्दियों में व्यायाम करते समय अस्थमा क्यों भड़क सकता है।
जब आप सर्दियों में टहलते हैं, दौड़ते हैं या कोई शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो आपकी साँस तेज़ हो जाती है। इस दौरान आप ज़्यादा मात्रा में ठंडी हवा अंदर लेते हैं। यह ठंडी हवा सीधे आपकी साँस की नलियों तक पहुँचती है और उन्हें सिकोड़ सकती है।
अस्थमा में आपकी साँस की नलियाँ पहले से ही संवेदनशील रहती हैं। ठंडी हवा और तेज़ साँस लेने से—
- साँस की नलियाँ अचानक सिकुड़ सकती हैं
- सीने में जकड़न बढ़ सकती है
- खाँसी या घरघराहट शुरू हो सकती है
- व्यायाम बीच में रोकना पड़ सकता है
अक्सर लोग सर्दियों में व्यायाम करते समय मुँह से साँस लेने लगते हैं। इससे ठंडी हवा बिना गर्म हुए सीधे फेफड़ों तक पहुँच जाती है और परेशानी और बढ़ जाती है। इसलिए यह कहना सही होगा कि गलत तरीके से किया गया सर्दियों का व्यायाम अस्थमा के मरीज़ों के लिए ख़तरनाक हो सकता है।
अगर आप अस्थमा के मरीज़ हैं, तो सर्दियों में व्यायाम करते समय आपको अपने शरीर के संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। हल्का, नियंत्रित और सुरक्षित व्यायाम ही आपके लिए फायदेमंद होता है।
आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में अस्थमा किन लोगों को ज़्यादा परेशान करता है?
आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति की शरीर रचना अलग होती है, जिसे प्रकृति कहा जाता है। सर्दियों में अस्थमा सभी को समान रूप से परेशान नहीं करता। कुछ लोगों में इसके लक्षण ज़्यादा गंभीर हो जाते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में अस्थमा ज़्यादा उन लोगों को परेशान करता है—
- जिनकी कफ प्रधान प्रकृति होती है
- जिन्हें पहले से बार-बार सर्दी, खाँसी या बलगम की शिकायत रहती है
- जो ठंडे मौसम को सहन नहीं कर पाते
- जिनका पाचन कमज़ोर रहता है
कफ प्रकृति वाले लोगों के शरीर में स्वाभाविक रूप से कफ ज़्यादा होता है। सर्दियों का मौसम भी कफ बढ़ाने वाला होता है। ऐसे में मौसम और शरीर, दोनों मिलकर कफ को और बढ़ा देते हैं। इसका सीधा असर फेफड़ों और साँस की नलियों पर पड़ता है।
ठंडी हवा से होने वाले अस्थमा अटैक से कैसे बचा जा सकता है?
अगर आपको अस्थमा है, तो सर्दियों में बचाव सबसे ज़रूरी उपाय है। थोड़ी-सी सावधानी आपको बड़े अटैक से बचा सकती है। अच्छी बात यह है कि रोज़मर्रा की कुछ आदतों में बदलाव करके आप ठंडी हवा से होने वाली परेशानी को काफी हद तक रोक सकते हैं।
सर्दियों में अस्थमा से बचाव के लिए आप ये बातें ध्यान में रखें—
- बाहर निकलते समय पूरे शरीर को ढककर रखें, खासकर गर्दन और छाती को
- ठंडी हवा में नाक से साँस लेने की कोशिश करें, इससे हवा थोड़ी गर्म होकर अंदर जाती है
- सुबह बहुत ठंड में बाहर जाने से बचें
- घर के अंदर की हवा बहुत सूखी न होने दें
- पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएँ
सर्दियों में शरीर में नमी बनाए रखना बहुत ज़रूरी है। जब शरीर हाइड्रेटेड रहता है, तो कफ गाढ़ा नहीं होता और साँस की नलियों में आसानी से निकल जाता है।
निष्कर्ष
सर्दियों का मौसम अपने साथ ठंड तो लाता ही है, लेकिन अगर आपको अस्थमा है, तो यह मौसम कई तरह की परेशानियाँ भी बढ़ा सकता है। ठंडी हवा साँस की नलियों को सिकोड़ देती है, शरीर में कफ बढ़ जाता है और छोटी-सी लापरवाही भी बड़े अटैक का कारण बन सकती है। यही वजह है कि सर्दियों में अपने शरीर को समझना और उसके संकेतों पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी हो जाता है।
अगर आप समय रहते यह पहचान लें कि ठंडी हवा, बढ़ा हुआ कफ और गलत दिनचर्या आपके अस्थमा को बिगाड़ रहे हैं, तो आधी समस्या वहीं खत्म हो जाती है। आयुर्वेद यही सिखाता है कि शरीर को मौसम के अनुसार ढालना ही स्वास्थ्य की कुंजी है।
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FAQs
- क्या सर्दियों में अस्थमा के मरीज़ों को सुबह जल्दी टहलना चाहिए?
सर्दियों में सुबह की ठंडी हवा अस्थमा को बढ़ा सकती है। अगर टहलना हो, तो सूरज निकलने के बाद और हल्की ठंड में जाना बेहतर रहता है।
- क्या एसी या रूम हीटर अस्थमा के मरीज़ों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं?
हाँ, बहुत ठंडी या बहुत सूखी हवा साँस की नलियों को चिढ़ा सकती है। एसी और हीटर का सीमित और सही तरीके से उपयोग ज़रूरी है।
- क्या सर्दियों में बार-बार खाँसी होना अस्थमा का संकेत होता है?
ज़रूरी नहीं। सर्दियों में कफ बढ़ने से भी खाँसी हो सकती है। लेकिन अगर खाँसी लंबी चले या साँस फूलने लगे, तो जाँच ज़रूरी है।
- क्या बच्चों में सर्दियों का अस्थमा ज़्यादा गंभीर हो सकता है?
हाँ, बच्चों की साँस की नलियाँ नाज़ुक होती हैं। ठंडी हवा और संक्रमण बच्चों में अस्थमा के लक्षण जल्दी बढ़ा सकते हैं।
- क्या सर्दियों में अस्थमा के मरीज़ों को ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए?
सर्दियों में ठंडा पानी कफ बढ़ा सकता है। गुनगुना पानी पीना बेहतर रहता है, जिससे गला साफ रहता है और साँस लेना आसान होता है।
- क्या धूप में बैठने से सर्दियों में अस्थमा में राहत मिल सकती है?
हाँ, हल्की धूप शरीर को गर्म रखती है और कफ को संतुलित करने में मदद कर सकती है। लेकिन ठंडी हवा से बचाव ज़रूरी है।






































