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गुर्दों को मजबूत रखने में उपयोगी 10 रहस्यमय जड़ी-बूटियाँ

पेशाब में जलन व दर्द सबसे अधिक कष्टदायक होता है। ऐसा होने का एक कारण पेशाब के रास्ते में संक्रमण, गुर्दे में विकार और गुर्दे में पथरी भी हो सकते हैं।

गुर्दे मूत्रवाहन के स्त्रोत, यानि शरीर से पेशाब को बाहर निकालने वाली नली की भूमिका निभा कर एक बहुत ही खास कार्य करते हैं। गुर्दे शरीर से अमा और विषैले पदार्थ को बाहर करते हैं। गुर्दे ठीक से कार्य न करें, तो अनेकों परेशानियाँ, जैसे कि पैरों में सूजन, जी मचलाना, थकान, कमजोरी और अनिद्रा आदि हो सकती हैं। ऐसे में यह दस जड़ी-बूटियाँ आपके गुर्दों को स्वस्थ रख सकती हैं:

पुनर्नवा:

पुनर्नवा एक प्राकृतिक मूत्र-वर्द्धक है। आयुर्वेद इसको तब इस्तेमाल करने की सलाह देता है, जब व्यक्ति में बार-बार पेशाब करने की इच्छा और अन्य मूत्र-सम्बन्धी समस्याएँ देखने को मिलें। इसमें जलन-प्रतिरोधी और पुनर्निर्माण के गुण होते हैं। पुनर्नवा गुर्दों को सही से काम करने में सहायता करता है।

पलाश:

पलाश एक प्रकार का पेड़ है, जिस पर सुन्दर लाल संतरी फूल लगे होते हैं। इन फूलों की तासीर ठंडी होती हैं और इसी वजह से यह मूत्र प्रवाह को नियमित करने में सफल है। यह जलन और दर्द को कम करने में भी मदद करता है।

गोक्षुर:

गोक्षुर (गोखरू) पेड़ की छाल मूत्रमार्ग में होने वाले संक्रमण को ठीक करने में अद्भुत कार्य करती है और साथ ही, पेशाब करने के दौरान होने वाली जलन को भी कम करती है। पेशाब के बार-बार आने की स्थिति में गोक्षुरा का छाल उसके प्रवाह को नियंत्रित करता है। और यह गुर्दे की पथरी को ठीक करने के लिए वर्षों से इस्तेमाल किया जा रही है।

गुडूची (गिलोय):

चरक ने गुडूची के गुणों का विस्तार करते समय इसके कड़वे गुणों पर ज्यादा जोर दिया और बताया है कि यह मूत्र-सम्बन्धी समस्याओं के उपचार में बेहद लाभदायक है। अगर आपको पेशाब से जुड़ी समस्याएँ हैं, तो किसी भी डॉक्टर से परामर्श लेकर आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

वरुण:

वरुण एक प्राकृतिक मूत्र-वर्द्धक बूटी है, जो पेशाब को नियमित करती है। ऐसा पाया गया है कि यह गुर्दे की पथरी और अन्य समस्याओं को ठीक करने में बहुत असरदार है। यह औषधि खून को तो साफ करती ही है, साथ ही इसके मूत्रवाहन स्त्रोत को भी मजबूत करती है।

चन्दन:

चन्दन में दो बहुत जरूरी गुण होते हैं, जिसके कारण चन्दन के शरबत को मूत्र-मार्ग में संक्रमण, यू. टी. आई. और पेशाब के समय दर्द होने पर पीने की सलाह दी जाती है। चन्दन में एंटी-माइक्रोबियल यानी सूक्ष्मजीवाणुओं की वृद्धि रोकने के प्राकृतिक गुण होते हैं जो गुर्दे के संक्रमण में आराम देते हैं।

अदरक:

अमा और विषैले तत्वों को साफ़ करने में सक्षम अदरक सालों से पेशाब की समस्याओं में लाभकारी मानी गई है। यह गुर्दों और यकृत से अमा को हटाती है। इसके सूजन-विरोधी गुण जलन को कम करते हैं और संक्रमण के कारण हुए दर्द को भी ठीक करते हैं।

त्रिफला:

तीन गुणकारी जड़ी-बूटियों के मेल से बना त्रिफला गुर्दों के सभी प्राकृतिक कार्यों को नियमित करने में मदद करता है। यह उत्सर्जन तंत्रिका के दो अहम् अंगों, गुर्दे और यकृत को मजबूत करता है।

धनिया :

धनिया शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। यह पेशाब के समय जलन को कम करता है। यह मूत्राशय और मूत्रमार्ग में संक्रमण को भी कम करता है। धनिया गुर्दे को प्राकृतिक रूप से ठीक रखता है, क्योंकि यह प्राकृतिक मूत्रवर्द्धक है।

हल्दी:

हल्दी, कम पेशाब आने, गुर्दे की विफलता और सामान्य मूत्र संक्रमणों आदि से परेशान लोगों से लिए बहुत अच्छी है। कई गुणों से युक्त यह बूटी संक्रमण का खतरा, सूजन आदि कम करती है और गुर्दे में पथरी होने की सम्भावना घटाती है। यह गुर्दे में हुई गांठों को भी ठीक करती है।

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