आज कल जब कोई आयुर्वेदिक दवा या हर्बल सप्लीमेंट लेने की बात करता है तो अक्सर एक सवाल जरूर आता है कहीं इसका लिवर या किडनी खराब तो नहीं हो जाएगी? कुछ लोग आयुर्वेद को पूरी तरह से सुरक्षित मानते हैं क्योंकि उनका मानना है कि प्राकृतिक चीजों का शरीर पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।वहीं कुछ लोग आयुर्वेदिक दवा से तू रहना बेहतर समझते हैं |
लेकिन ऐसा क्या है क्या आयुर्वेद ऐसे में लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है या ये सिर्फ एक मिथक है।
ईमानदारी से कहूँ तो इसका जवाब न पूरी तरह से हाँ है और न ही पूरी तरह से नहीं। किसी भी दवा की तरह आयुर्वेदिक दवाओं का प्रभाव भी निर्भर करता है कि उसमें क्या सामग्री का उपयोग हुआ है, उनकी मात्रा कितनी है और उन्हें किस तरह से उपभोग किया जा रहा है।
आयुर्वेदिक दवाओं को लेकर डर आया कहां से?
पहले के समय में आयुर्वेद को ज्यादातर प्राकृतिक उपचार और घर के पारंपरिक उपचारों से जोड़कर देखा जाता था। लोगों को लगता था कि जो चीज पौधे, जड़ी-बूटियां या प्राकृतिक सामग्री से बनी है वो शरीर को हम नहीं कर सकते।
लेकिन समय के साथ कुछ ऐसे मामले सामने आए जहां हर्बल सप्लीमेंट और आयुर्वेदिक तैयारी के उपयोग के बाद लोगों को लीवर या फ़िर किडनी से संबंधित समस्याएं हुई।
कुछ मामलों में उत्पादों के अंदर भारी धातुओं का संदूषण या अघोषित सामग्री भी पाई गई। इस वजह से लोगों के मन में डर पैदा हो गया है कि आयुर्वेदिक दवाएं भी शरीर के लिए हानिकारक हो सकती हैं।
वास्तव में प्राकृतिक होने का मतलब स्वचालित रूप से सुरक्षित होना नहीं होता है। जड़ी-बूटियों में सक्रिय यौगिक होते हैं जो शरीर पर मजबूत प्रभाव डालते हैं। इसलिए उनका उपयोग भी उचित मार्गदर्शन और सही खुराक के साथ होना चाहिए।
क्या आयुर्वेदिक औषधियां लीवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं
कुछ हर्बल और आयुर्वेदिक तैयारी से लीवर खराब होने का खतरा हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान में इस हर्बल और आहार अनुपूरक से लीवर खराब होने का खतरा होता है।
लीवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। ये दवाएँ हानिकारक पदार्थों को पचाने की प्रक्रिया करती हैं और शरीर के विभिन्न कार्यों को बनाए रखने में मदद करती हैं।
अतिरिक्त तनाव के लिए कुछ हर्बल सामग्रियां या उनके संयोजन लीवर, विशेष रूप से टैब जब कोई व्यक्ति बिना उचित सलाह के दीर्घकालिक दवाएं या कई पूरक एक साथ उपभोग करना पड़ता है।
कभी-कभी प्रॉब्लम वाली दवा या उसकी क्वालिटी, गलत डोज़ या उसमें मौजूद कंटैमिनेंट्स की वजह से भी हो सकती है।
लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि हर आयुर्वेदिक दवा लीवर के लिए हानिकारक है बस जरूरी है कि दवा की सुरक्षा और गुणवत्ता की ठीक से जांच की जाए।
किडनी पर क्या असर पड़ सकता है
किडनी का मुख्य काम रक्त को फिल्टर करना और शरीर से अपशिष्ट उत्पादों और अतिरिक्त तरल पदार्थ को मूत्र के माध्यम से बाहर निकालना है।
अच्छे हर्बल उत्पादों में सीसा, पारा और आर्सेनिक जैसे भारी धातु मौजूद हैं। अगर शरीर इनके संपर्क में लंबे समय तक रहता है, तो किडनी को नुकसान होने का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा कुछ हर्बल सामग्री शरीर में ऐसे बदलाव ला सकते हैं जो पहले से ही किडनी की समस्याओं का सामना कर रहे हैं लोगों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
इसलिए अगर किसी व्यक्ति को पहले से किडनी की बीमारी है तो बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी आयुर्वेदिक दवा काढ़ा या हर्बल सप्लीमेंट लेना शुरू नहीं करना चाहिए।
किन स्थितियों में आयुर्वेदिक दवाएं जोखिम भरी हो सकती हैं
हर व्यक्ति की बॉडी अलग-अलग तरह से रिएक्ट करती है। जो मेडिसिन एक व्यक्ति को सूट कर रही है, जरूरी नहीं, किसी और को वो भी उतना ही सुरक्षित लगे।
कुछ स्थितियों में अतिरिक्त सावधान रहना जरूरी है-
- बिना परामर्श की दवा लेना सिर्फ किसी मित्र या सोशल मीडिया अनुशंसा के आधार पर दवा शुरू करना टालें।
- मल्टीपल सप्लीमेंट्स एक साथ लेना विभिन्न सामग्रियों को मिलाकर अप्रत्याशित दुष्प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
- दीर्घकालिक उपयोग करना किसी दवा को कितने समय तक लेना सुरक्षित है ये उसकी फॉर्मूलेशन और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
- निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों का चयन करें बिना उचित गुणवत्ता परीक्षण वाले उत्पादों में हानिकारक पदार्थ या संदूषण हो सकता है।
- मौजूदा लिवर या किडनी की समस्या अगर पहले से कोई स्वास्थ्य स्थिति है तो नई दवा शुरू करने से पहले चिकित्सीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
कैसे पता चलेगा कि दवा शरीर को नुकसान पहुंचा रही है
कभी-कभी शरीर में कुछ चेतावनी के संकेत देते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना नहीं चाहिए अगर दवा लगातार शुरू करनी है मतली, उल्टी, भूख कम लगना पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द असामान्य थकान या त्वचा और आंखों में पीलापन नोटिस हो तो ये लीवर संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है बिल्कुल।ये लक्षण किसी एक स्थिति की पुष्टि नहीं करते, लेकिन अगर ऐसे बदलाव नोटिस हों तो मेडिकल। चेकअप में देरी नहीं करनी चाहिए।
आयुर्वेद क्या कहता है?
आयुर्वेद में किसी भी उपचार को आंख मूंदकर फॉलो करना चाहिए व्यक्ति की प्रकृति, स्वास्थ्य की स्थिति, उम्र और पाचन क्षमता को समझना महत्वपूर्ण है। व्यक्ति को सूट करना जरूरी नहीं है आयुर्वेद में भी दवाओं की मात्रा संयोजन और अवधि को महत्व दी जाती है पारंपरिक उपचारों को भी उचित समझ और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के साथ फॉलो करना चाहिए।
निष्कर्ष
तो क्या आयुर्वेदिक दवा से लीवर या किडनी खराब हो सकती है। उत्तर है कुछ मामलों में, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर आयुर्वेदिक दवा हानिकारक होती है। समस्या तब होती है जब हमें उचित ज्ञान नहीं होता, गलत खुराक या खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों का उपयोग करना पड़ता है आयुर्वेद हो या आधुनिक चिकित्सा डोनो को जिम्मेदारियों का पालन करना जरूरी है केवल प्राकृतिक लेबल देखना किसी को भी बचाना सही नहीं है।
संदर्भ
Review on Kidney-Liver Crosstalk: Pathophysiology of Their Disorders - PMC
Ayurvedic research and methodology: Present status and future strategies - PMC













