आज के समय में हम लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित रहते हैं, और खुद को स्वस्थ रखने के लिए किए जाने वाले उपचार और गतिविधियों पर ज़्यादा ही विश्वास करने लगते हैं और किसी भी तत्व का अत्यधिक सेवन करने लगते हैं। हम यह सोचते ही नहीं हैं कि बीमारी का इलाज करने वाला कोई तत्व हमें नुकसान भी पहुँचा सकता है। लेकिन आप यह जान लें कि ज़रूरत से ज़्यादा कोई भी खान-पान की सामग्री हमारे स्वास्थ्य के लिए असंतुलन का कारण बन सकती है।
आजकल के बदलते मौसम में अपनी इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए कई घरों में काढ़े का सेवन करना शुरू हो गया है। अदरक, तुलसी, काली मिर्च और दालचीनी आदि से बना काढ़ा इम्युनिटी को मजबूत करने में सहायक होता है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि इसके ज़्यादा सेवन से आपकी सेहत को नुकसान भी हो सकता है?
अगर आपको बार-बार पेट में जलन या छाले होते हैं, तो आपको काढ़ा पीने की आदत पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
कही ज़्यादा काढ़ा पीना सेहत के लिए नुकसानदायक तो नहीं?
हां, ज़्यादा काढ़ा पीने से सेहत को कई नुकसान हो सकते हैं।
काढ़ा पीना अपने आप में कोई नुकसानदायक चीज़ नहीं है, पर इसका अधिक सेवन हमें कई नुकसान पहुँचा सकता है। काढ़ा स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है इसे बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्री जैसे अदरक, तुलसी, काली मिर्च, और दालचीनी आदि, हमारे शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करता है और रोगो से लड़ने की क्षमता को बढ़ता है। पर इसका अधिक सेवन स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुंचाता है। इसमें उपयोग की जाने वाली सामग्री कुछ लोगों में पेट में जलन और एसिडिटी का कारण भी बन सकती है। जिन लोगों को पेट संबंधी समस्या है, उन्हें इसका नियमित सेवन करना चाहिए।
ज़्यादा काढ़ा पीने से शरीर को कैसे नुकसान हो सकता है?
ज़रूरत से ज़्यादा काढ़ा पीने से शरीर को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। इसमें उपयोग की जाने वाली सामग्री जैसे, अदरक, तुलसी, काली मिर्च, गिलोय, दालचीनी आदि जैसे सामग्रियाँ बहुत गर्म होती है जिससे सेहत पर कई नुकसान पहुंच सकते है, जैसे:
- काढ़े में मौजूद सामग्रियाँ जैसे अदरक, काली मिर्च आदि की अधिकता से पेट में गर्मी बढ़ जाती है जिस वजह से पेट और सीने में जलन और एसिडिटी या अपच जैसी समस्या हो जाती है।
- अत्यधिक गर्मी के कारण मुँह में छाले हो सकते हैं; कई लोगों की नाक से खून भी आ सकता है।
- कब्ज़ और पाचन तंत्र में परेशानी, काढ़े में उपयोग की जाने वाली सामग्री का अधिक सेवन पाचन पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।
- बहुत अधिक काढ़े के सेवन से मुँह और गले में रूखापन महसूस हो सकता है।
- अधिक काढ़े के सेवन से महिलाओं में पीरियड्स संबंधी परेशानी देखी जा सकती है जैसे पीरियड्स जल्दी आ जाना या फिर लम्बे समय तक चलना।
- काढ़े के अधिक सेवन से लिवर और किडनी पर अधिक दबाव पड़ता है।
अधिक काढ़े के सेवन से ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ध्यान रहे की ऐसा ज़रूरी नहीं है कि यह लक्षण सिर्फ काढ़े की वजह से ही हो, बार-बार ऐसी परेशानी होने की वजह कुछ और भी हो सकती है।
काढ़ा पीते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
काढ़ा स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक होता है, पर इसका अधिक सेवन हमारे शरीर पर कई दुष्प्रभाव डालता है। तो क्या हमें काढ़ा पीना छोड़ देना चाहिए? इसका जवाब है, नहीं। सेहत का ध्यान रखने के लिए काढ़े का सेवन ज़रूर करना चाहिए, बस कुछ छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करना चाहिए।
- दिन में एक से दो बार तक ही काढ़ा का सेवन करें, अधिक मात्रा में सेवन फायदे से ज़्यादा नुकसान पहुचंता है।
- उचित मात्रा में सामग्री का उपयोग करें, अधिक सामग्री के प्रयोग से काढ़ा ज़्यादा प्रभावी नहीं बनता।
- यदि अधिक काढ़े के सेवन से पेट में जलन आदि जैसी समस्या हो रही है तो काढ़े का सेवन कुछ समय के लिए बंद कर दे।
- पर्याप्त पानी पिएं शरीर को हाइड्रेट रखे जिससे काढ़े में प्रयोग कि गयी सामग्री का शरीर पर कोई दुष्प्रभाव न पड़े, कोशिश करें की काढ़ा पीने के तुरंत बाद पानी न पिएं, पानी थोड़े अंतराल के बाद पिएं।
- यदि आप गर्भावस्था में हैं या कोई अन्य दवाइयां खाते है तो आपको काढ़े का सेवन विशेषज्ञ के सुझाव के अनुसार करना चाहिए।
इन छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आप काढ़े के दुष्प्रभाव को नियंत्रित कर सकते है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
रोज़ काढ़ा पीने से पेट में जलन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होना स्वाभाविक है। आयुर्वेद के अनुसार व्यक्ति को अपने शरीर की प्रकृति के अनुसार आहार और औषधि का सेवन करना चाहिए। काढ़े में उपयोग की जाने वाली सामग्रियां जैसे: अदरक, काली मिर्च, दालचीनी, और तुलसी आदि स्वाभाव से गर्म होती है जिसके कारण व्यक्ति के शरीर में पित्त दोष बढ़ने लगता है जिस वजह से व्यक्ति को पेट और सीने में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बढ़ा हुआ पित्त मुँह में छाले, पेट में जलन और अमलता बढ़ाने का कारण बन सकता है। अधिक काढ़े के सेवन से आँतों को नुकसान हो सकता है। पर इसमें घबराने की बात नहीं है, अच्छी बात यह है कि इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है आपको काढ़े का सेवन बंद करने की कोई आवश्कयता नहीं है। छोटी-छोटी आदतें जैसे, कम मात्रा में काढ़े का सेवन करना, या कुछ समय के लिए काढ़े का सेवन रोक देना, विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार काढ़े का सेवन करना आदि जैसे छोटी-छोटी आदत अपनाकर भी काढ़े के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता हैं।
निष्कर्ष
काढ़ा एक पेय पदार्थ नहीं बल्कि एक पारम्परिक औषधि है, जो शरीर में इम्युनिटी बढ़ाता है और रोगों के प्रति लड़ने की क्षमता प्रदान करता है, पर इसका अनुचित सेवन शरीर को फायदे से ज़्यादा नुकसान पंहुचा सकता है। इसके अधिक सेवन से मुँह में छाले, पेट में जलन, महिलाओं में पीरियड्स जैसी परेशानियाँ और कई अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ा सकता है। यदि आपको काढ़े की वजह से पेट में जलन, मुँह में छाले और अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां हो रही है तो इसके उपयोग को कुछ समय के लिए रोके और डॉक्टर्स से सलाह ले।
ज़रूरी नहीं की आयुर्वेदिक औषधि शरीर के लिए उपयोगी ही साबित हो, स्वास्थ्य को संतुलित रखने के लिए शरीर के संकेतो का भी ध्यान रखना चाहिए।
References
The Treatment of Chronic Recurrent Oral Aphthous Ulcers - PMC













