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Dehydration और uric acid में क्या connection हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हम अक्सर सोचते हैं कि यूरिक एसिड का मतलब सिर्फ दालें या मांस खाना है, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि कम पानी पीने पर पैरों के अंगूठे या एड़ियों में अचानक से तेज दर्द क्यों शुरू हो जाता है?सच्चाई ये है कि हमारा शरीर एक मशीन जैसा है, जिसे अंदर से साफ रखने के लिए भरपूर पानी की जरूरत होती है। जब हम पानी कम पीते हैं, तो खून गाढ़ा होने लगता है और हमारी किडनी शरीर की गंदगी को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती।

यही गंदगी, यानी यूरिक एसिड, खून में जमा होकर छोटे-छोटे कांच जैसे क्रिस्टल बन जाती है। जब ये क्रिस्टल जोड़ों में जाकर अटकते हैं, तो भयंकर दर्द और सूजन पैदा करते हैं।याद रखिए, सिर्फ दर्द की गोलियां खाने से काम नहीं चलेगा। जब तक आप अपने शरीर को अंदर से 'हाइड्रेट' नहीं करेंगे, यह दर्द बार-बार परेशान करेगा। जोड़ों का ये दर्द सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि आपके शरीर की वो पुकार है जो आपसे कह रही है—"मुझे अंदर से नमी (पानी) की बहुत जरूरत है।"

कम पानी पीने से यूरिक एसिड का स्तर क्यों बढ़ जाता है?

किडनी का काम) हमारे शरीर में किडनी का काम एक फिल्टर (छलनी) की तरह होता है। शरीर में प्यूरिन नाम के तत्व के टूटने से यूरिक एसिड बनता है। जब आप भरपूर पानी पीते हैं, तो यह एसिड पेशाब के रास्ते आसानी से बाहर निकल जाता है। लेकिन जब आप पानी पीने में कंजूसी करते हैं, तो किडनी को इस ज़हरीले तत्व को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त लिक्विड नहीं मिल पाता। इस स्थिति में यूरिक एसिड खून में ही जमने लगता है और धीरे-धीरे ठोस क्रिस्टल्स का रूप ले लेता है। यही क्रिस्टल्स जब आपके जोड़ों में जाकर फँसते हैं, तो भयंकर चुभन, लाली और सूजन पैदा करते हैं।

क्या सिर्फ प्रोटीन वाली डाइट से ही यह समस्या पनपती है? 

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। लोग अक्सर यूरिक एसिड बढ़ते ही दालें, पनीर और हरी सब्ज़ियाँ खाना एकदम बंद कर देते हैं। लेकिन कई बार आप बहुत सादा खाना खाते हैं, फिर भी आपके जोड़ों का दर्द कम नहीं होता। इसकी असली वजह आपकी डाइट में प्रोटीन नहीं, बल्कि शरीर में पानी की भारी कमी है। अगर आप दिन भर में चाय-कॉफी ज़्यादा पी रहे हैं और सादा पानी कम पी रहे हैं, तो आपका शरीर अंदर से सूखने लगता है। इसके अलावा मीठे जूस या कोल्ड ड्रिंक पीने से भी खून में फ्रक्टोज़ बढ़ता है, जो पानी की जगह नहीं ले सकता बल्कि यूरिक एसिड को और ज़्यादा भड़का देता है।

डिहाइड्रेशन का आपके जोड़ों और खून पर क्या प्रभाव पड़ता है? 

जब शरीर में पानी का लेवल गिरता है, तो अंदर ही अंदर कई खतरनाक बदलाव शुरू हो जाते हैं:

  • खून का गाढ़ा होना: पानी की कमी से खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे उसमें मौजूद यूरिक एसिड आसानी से जकड़ने लगता है।
  • जोड़ों की चिकनाहट खत्म होना: हमारे जोड़ों के बीच जो फ्लूइड होता है, वह ज़्यादातर पानी से बना होता है। पानी कम होने से रगड़ बढ़ जाती है।
  • किडनी पर भारी दबाव: पानी की कमी से गुर्दों को खून साफ करने में एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे उनकी काम करने की क्षमता घटने लगती है।
  • टॉक्सिन्स (गंदगी) का जमना: पसीना और पेशाब कम आने की वजह से शरीर के ज़हरीले तत्व अंदर ही सड़ने लगते हैं।

क्या लंबे समय तक यूरिक एसिड बढ़ा रहना किसी गंभीर खतरे की घंटी है? 

अगर आपको अक्सर शरीर में पानी की कमी महसूस होती है और इसके साथ ही जोड़ों में दर्द रहता है, तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें। यह भविष्य में होने वाली कई बड़ी परेशानियों का संकेत हो सकता है:

  • गाउट : यह गठिया का एक बहुत ही दर्दनाक रूप है जिसमें अचानक से किसी भी जोड़, खासकर पैर के अंगूठे में भयंकर सूजन आ जाती है।
  • किडनी की पथरी: जो यूरिक एसिड पेशाब के ज़रिए बाहर नहीं निकल पाता, वह किडनी के अंदर जमकर पथरी का रूप ले लेता है।
  • गुर्दों का डैमेज होना: लगातार हाई यूरिक एसिड और डिहाइड्रेशन आपकी किडनी की छलनी को हमेशा के लिए खराब कर सकता है।
  • दिल की बीमारियाँ: खून गाढ़ा रहने और गंदगी जमा होने से आगे चलकर हार्ट अटैक या ब्लड प्रेशर की समस्या भी बढ़ सकती है।

आयुर्वेद पानी की कमी और गाउट को कैसे देखता है? 

आयुर्वेद में यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या को 'वातरक्त'  या 'गठिया वात' कहा गया है। आयुर्वेद के अनुसार, जब आपके शरीर में 'वात' दोनों दूषित हो जाते हैं, तब यह बीमारी पैदा होती है। जब आप कम पानी पीते हैं या रूखा-सूखा खाते हैं, तो शरीर में वात दोष बहुत तेज़ी से बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ वात दूषित खून के साथ मिलकर शरीर की छोटी नसों और जोड़ों में जाकर ब्लॉक हो जाता है। इसी ब्लॉकेज की वजह से जोड़ों में जलन, लाली और सुई चुभने जैसा दर्द होता है। आयुर्वेद साफ़ कहता है कि बिना शरीर की अंदरूनी गर्मी को शांत किए और उसे भरपूर नमी दिए, आप इस बीमारी से छुटकारा नहीं पा सकते।

https://youtu.be/i-wIjsidApg?si=IVeY4DRxvrP7_pxy

यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को गलाने वाली असरदार आयुर्वेदिक औषधियाँ 

प्रकृति ने हमें ऐसी कई शानदार चीज़ें दी हैं जो शरीर को हाइड्रेट भी रखती हैं और खून में जमे एसिड को भी काटती हैं:

  • गोखरू: यह आयुर्वेद में किडनी की सफाई के लिए सबसे बेहतरीन माना गया है। यह पेशाब की मात्रा बढ़ाकर यूरिक एसिड को बाहर धकेलता है।
  • गिलोय: यह बढ़े हुए वात और रक्त दोनों को एक साथ संतुलित करती है और जोड़ों की भयंकर सूजन को एकदम से सोख लेती है।
  • पुनर्नवा: जैसा कि नाम से पता चलता है, यह शरीर के अंगों को नया जीवन देती है। यह किडनी की सूजन कम करके उसके फिल्टर करने की ताकत बढ़ाती है।
  • आंवला: विटामिन सी और पानी से भरपूर आंवला यूरिक एसिड को पिघलाने में किसी जादू की तरह काम करता है।

क्या मौसम बदलने या पसीना ज़्यादा निकलने से भी जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है? 

बिलकुल! गर्मियों के मौसम में या बहुत ज़्यादा पसीना बहाने वाली कसरत करने के बाद कई लोगों का यूरिक एसिड अचानक बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पसीने के ज़रिए आपके शरीर का बहुत सारा पानी बाहर निकल जाता है। अगर आप उस अनुपात में वापस पानी नहीं पीते हैं, तो शरीर भयंकर डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है। खून का वॉल्यूम (मात्रा) कम हो जाता है और उसमें यूरिक एसिड का लेवल तेज़ी से बढ़ जाता है। यही कारण है कि गर्मी और उमस वाले मौसम में या भारी काम करने के बाद लोग अचानक जोड़ों में अकड़न और तेज़ दर्द की शिकायत करने लगते हैं।

अनजाने में की जाने वाली वो गलतियाँ जो शरीर का पानी सुखाकर यूरिक एसिड बढ़ाती हैं 

हम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ ऐसी चीज़ें खा या पी लेते हैं जो शरीर की नमी को खत्म कर देती हैं:

  • बहुत ज़्यादा चाय-कॉफी पीना: इनमें मौजूद कैफीन शरीर का पानी तेज़ी से सुखाता है और यूरिक एसिड बढ़ाता है।
  • शराब या बीयर का सेवन: शराब पीने से किडनी यूरिक एसिड की बजाय अल्कोहल को बाहर निकालने में लग जाती है, जिससे डिहाइड्रेशन भयंकर रूप ले लेता है।
  • डिब्बाबंद मीठे जूस पीना: इनमें मौजूद फ्रक्टोज़ (आर्टिफिशियल शुगर) यूरिक एसिड के उत्पादन को एकदम से बढ़ा देती है।
  • पानी गटक कर पीना: एक ही बार में बहुत सारा पानी पीने से वह तुरंत बाहर निकल जाता है और कोशिकाओं को नमी नहीं मिल पाती।
  • एसी (AC) में दिनभर बैठे रहना: ठंडी हवा शरीर की नमी को सोख लेती है और प्यास भी नहीं लगती, जिससे हम डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं।
  • बहुत ज़्यादा नमक खाना: ज़्यादा नमक खाने से शरीर का संतुलन बिगड़ता है और किडनी पर फिल्टर करने का भार बढ़ जाता है।

पेनकिलर या यूरिक एसिड की दवाओं पर पूरी तरह निर्भर हो जाना कब घातक बन जाता है?

 जब भी पैरों के अंगूठे या एड़ी में तेज़ दर्द होता है, तो हम तुरंत दर्द निवारक (Painkiller) गोली खा लेते हैं। ये गोलियां कुछ घंटों के लिए तो दर्द गायब कर देती हैं, लेकिन अंदर ही अंदर ये आपकी किडनी को बहुत भारी नुकसान पहुँचाती हैं। रोज़ाना दर्द की दवा खाने से किडनी के फिल्टर कमज़ोर हो जाते हैं। शरीर का जो यूरिक एसिड किडनी को बाहर निकालना चाहिए था, वह उल्टा शरीर में ही जमा होने लगता है। इसके अलावा यूरिक एसिड कम करने वाली दवाइयों का बिना डॉक्टर की सलाह के रोज़ाना सेवन करने से लिवर पर ज़ोर पड़ता है और शरीर का प्राकृतिक सिस्टम एकदम से ठप पड़ सकता है।

बिना किसी दवाई के जोड़ों की सूजन और दर्द से कैसे राहत पाएँ? 

आप अपने घर पर ही कुछ बेहद आसान और प्राकृतिक तरीके अपनाकर इस भयानक चुभन से आराम पा सकते हैं:

  • दिन की शुरुआत गुनगुने पानी और नींबू से करें, नींबू का साइट्रिक एसिड यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को प्राकृतिक रूप से पिघलाकर पेशाब के रास्ते निकाल देता है।
  • जब भी जोड़ों में तेज़ दर्द हो, तो वहाँ बर्फ की सिकाई (Ice pack) करें। ठंडी सिकाई से सूजन और दर्द दोनों में तुरंत आराम मिलता है।
  • एप्पल साइडर विनेगर (सेब का सिरका) को एक गिलास पानी में मिलाकर पिएँ, यह खून की एसिडिटी को कम करके उसे क्षारीय (Alkaline) बनाता है।
  • अजवाइन का पानी उबालकर पिएँ, यह शरीर की अंदरूनी सूजन को कम करता है और किडनी की रुकी हुई काम करने की क्षमता को तेज़ कर देता है।

यूरिक एसिड को कंट्रोल में रखने के लिए जीवनशैली के छोटे मगर पक्के बदलाव 

अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी की आदतों को थोड़ा सा सुधारकर आप बहुत बेहतरीन नतीजे पा सकते हैं:

  • घूँट-घूँट कर पानी पिएँ: पूरे दिन में कम से कम 10-12 गिलास पानी आराम से बैठकर पिएँ, ताकि किडनी लगातार साफ होती रहे।
  • रात का खाना हल्का रखें: रात के समय भारी दालें या नॉन-वेज खाने से बचें, क्योंकि सोते समय शरीर का मेटाबॉलिज़्म बहुत धीमा होता है।
  • फाइबर वाली चीज़ें बढ़ाएँ: अपने खाने में ओट्स, दलिया और ताज़े फल शामिल करें। फाइबर खून में मौजूद एक्सट्रा यूरिक एसिड को सोख लेता है।
  • हल्का व्यायाम ज़रूर करें: रोज़ सुबह पसीना निकालने वाली थोड़ी स्ट्रेचिंग या योग करें, इससे जोड़ों की अकड़न खुलती है और खून का दौरा सही रहता है।

यह तकलीफ हद से बाहर कब हो जाती है, जब डॉक्टर से मिलना बेहद ज़रूरी हो जाए? 

घरेलू नुस्खे आज़माने के बाद भी अगर आपकी स्थिति नहीं सुधर रही है, तो बिना देर किए डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए:

  • जब दर्द इतना भयंकर हो जाए कि पैर ज़मीन पर रखना या चादर का छूना भी बर्दाश्त से बाहर हो जाए।
  • प्रभावित जोड़ के पास बहुत तेज़ गर्माहट महसूस हो, लालिमा आ जाए और आपको साथ में तेज़ बुखार भी आने लगे (यह इन्फेक्शन का लक्षण हो सकता है)।
  • जब यूरिक एसिड की वजह से आपकी पेशाब में खून आने लगे या पेशाब करते समय भयंकर जलन हो।
  • जोड़ों में पक्के हुए गांठ (Tophi) बन जाएँ जो बाहर से दिखने लगें और आपकी उँगलियाँ या पैर टेढ़े होने लगें।

गाउट के इलाज में एलोपैथी और आयुर्वेद की सोच कैसे अलग है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य यूरिक एसिड का स्तर नियंत्रित करना, दर्द कम करना और जटिलताओं से बचाव। शरीर के संतुलन, आहार-विहार और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान।
उपचार का तरीका यूरिक एसिड कम करने वाली दवाइयाँ, दर्द निवारक दवाएँ और आवश्यकतानुसार अन्य उपचार। जड़ी-बूटियाँ, आहार-विहार, पंचकर्म और पारंपरिक उपचार पद्धतियाँ।
किडनी और शरीर का दृष्टिकोण किडनी की कार्यक्षमता, यूरिक एसिड स्तर और अन्य चिकित्सीय कारणों का वैज्ञानिक मूल्यांकन। शरीर के संतुलन, पाचन और उचित जल सेवन को महत्व दिया जाता है।
असर होने की गति तीव्र दर्द और सूजन में अपेक्षाकृत जल्दी राहत मिल सकती है। प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है और नियमित पालन पर आधारित होता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण यूरिक एसिड नियंत्रण, जीवनशैली में सुधार और नियमित फॉलो-अप पर जोर। संतुलित आहार, दिनचर्या और समग्र स्वास्थ्य बनाए रखने पर विशेष ध्यान।

निष्कर्ष: 

हमेशा याद रखें कि आपका शरीर लगभग 70% पानी से बना है। पानी आपके शरीर का सबसे बड़ा 'हीलर' (इलाज करने वाला) है। इसलिए पानी की कमी और यूरिक एसिड को दो अलग-अलग चीज़ें मानकर अनदेखा करने की भूल न करें। जब आप भरपूर पानी पीते हैं, तो आधी बीमारियाँ वैसे ही आपके शरीर से धुलकर बाहर हो जाती हैं। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में खुद को हाइड्रेटेड रखने का पक्का नियम बना लें। चाय-कॉफी की जगह ताज़े फलों का रस, नारियल पानी या सादा पानी पिएँ। तनाव से दूर रहें और रोज़ थोड़ा पैदल चलें। जब आपका शरीर अंदर से साफ और नमी से भरपूर रहेगा, तो यकीनन आपके सारे जोड़ भी दर्द मुक्त और सेहतमंद रहेंगे।

References:

https://www.healthline.com/health/how-to-reduce-uric-acid

https://www.healthline.com/nutrition/best-diet-for-gout

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK273/

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC3247913/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जी हाँ, टमाटर में प्यूरिन तो कम होता है, लेकिन यह शरीर में ग्लूटामेट को बढ़ाता है जो यूरिक एसिड के लेवल को तेज़ी से ऊपर ले जा सकता है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए।

बिलकुल, जब आप लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहते हैं, तो शरीर ऊर्जा के लिए अपनी ही मांसपेशियों को तोड़ने लगता है, जिससे खून में यूरिक एसिड बहुत तेज़ी से बढ़ने लगता है।

 हाँ, लो-फैट (कम चिकनाई वाले) दूध और दही का सेवन बहुत सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है क्योंकि डेयरी प्रोडक्ट्स यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं।

जब यूरिक एसिड बढ़ा हो या गाउट का अटैक आया हो, तो भारी वजन उठाने से बचना चाहिए। इससे जोड़ों पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है और सूजन व दर्द और ज़्यादा बिगड़ सकता है।

हाँ, अगर आपके माता-पिता या परिवार में किसी को गाउट या हाई यूरिक एसिड की समस्या रही है, तो आपके जीन में भी यह बीमारी विकसित होने की संभावना काफी अधिक होती है।

विटामिन सी के अलावा, विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स (विशेषकर फोलिक एसिड) और विटामिन ई भी जोड़ों की सूजन कम करने और यूरिक एसिड के मेटाबॉलिज़्म को सुधारने में बहुत मददगार होते हैं।

गाउट के दर्द के दौरान भूलकर भी मालिश (Massage) नहीं करनी चाहिए। मालिश करने से जोड़ों में फँसे यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स अपनी जगह से हिलकर और ज़्यादा भयंकर दर्द और सूजन पैदा कर सकते हैं।

हाँ, बहुत ही दुर्लभ मामलों में, बढ़ा हुआ यूरिक एसिड आँखों के पिछले हिस्से में क्रिस्टल्स के रूप में जमा हो सकता है, जिससे आँखों में सूखापन, लालिमा और देखने में दिक्कत आ सकती है।

जी हाँ, महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद करता है। मेनोपॉज़ के बाद जब एस्ट्रोजन कम हो जाता है, तो महिलाओं में भी गाउट का रिस्क पुरुषों के बराबर हो जाता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स शरीर के अंदर की सूजन (Inflammation) को कम करने में जादुई असर दिखाते हैं। अखरोट और अलसी खाने से जोड़ों का दर्द काफी हद तक शांत हो जाता है।

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