व्रत या उपवास में कब्ज़ बढ़ जाती है? नवरात्रि में किन बातों का ध्यान रखें

Information By Dr. VD Aggarwal     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

नवरात्रि के पहले दिन सब कुछ ठीक था। दूसरे दिन साबूदाने की खिचड़ी खाई, शाम को कुट्टू की पूरी और आलू की सब्जी। तीसरे दिन सुबह बाथरूम गए, लेकिन पेट साफ नहीं हुआ।

पहले रोज़ सुबह आसानी से शौच हो जाता था। अब मल सख्त हो गया है, पेट भारी लगता है और टॉयलेट में काफी जोर लगाना पड़ता है।

अगर आपके साथ भी व्रत के दौरान ऐसा होता है, तो मन में सवाल आ सकता है-क्या उपवास रखने से कब्ज़ हो जाती है? क्या साबूदाना या कुट्टू पेट को बांध देते हैं?

व्रत रखने से हर व्यक्ति को कब्ज नहीं होती। लेकिन व्रत के दौरान भोजन, पानी और दिनचर्या में होने वाले बदलाव कुछ लोगों में कब्ज की परेशानी बढ़ा सकते हैं।

व्रत में खाना कम होता है, फिर भी पेट भारी क्यों लगता है?

सामान्य दिनों में आप रोटी, दाल, सब्जी और चावल खाते हैं। लेकिन नवरात्रि में अचानक इनकी जगह फल, दूध, साबूदाना और फलाहारी आटे से बनी चीजें खाने लगते हैं।

इस बदलाव के साथ भोजन की मात्रा और समय भी बदल सकते हैं।

कुछ लोग दिनभर बहुत कम खाते हैं और शाम को एक बार भरपेट फलाहारी भोजन करते हैं। कुछ लोग व्रत के दौरान पानी भी सामान्य से कम पीते हैं।

NIDDK के अनुसार, भोजन में पर्याप्त फाइबर न होना, पानी की कमी और दैनिक आदतों में बदलाव कब्ज के संभावित कारणों में शामिल हैं।

लेकिन एक महत्वपूर्ण बात समझें।

अगर आप सामान्य से काफी कम खाना खा रहे हैं, तो मल की मात्रा भी कम हो सकती है और शौच की आवृत्ति बदल सकती है।

सिर्फ एक दिन शौच न होना हमेशा कब्ज नहीं कहलाता।

कब्ज की पहचान में मल का सख्त होना, शौच के दौरान दर्द या जोर लगना और पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास भी महत्वपूर्ण है।

साबूदाने की खिचड़ी कब्ज बढ़ाती है क्या?

नवरात्रि में साबूदाने की खिचड़ी बहुत से घरों में बनती है। मूंगफली, आलू और घी के साथ इसे खाने पर पेट भी भर जाता है।

लेकिन साबूदाना मुख्य रूप से स्टार्च वाला खाद्य पदार्थ है और इसमें फाइबर अपेक्षाकृत कम होता है।

इसलिए अगर व्रत के दौरान आपकी डाइट का बड़ा हिस्सा साबूदाने की खिचड़ी, खीर और वड़े पर निर्भर है, जबकि फल और दूसरे फाइबर स्रोत बहुत कम हैं, तो कुल फाइबर सेवन कम हो सकता है।

इसका मतलब यह नहीं कि साबूदाना अपने आप कब्ज पैदा करता है।

समस्या पूरे दिन के भोजन की बनावट से भी जुड़ी हो सकती है।

मान लीजिए, आपने सुबह साबूदाना खिचड़ी खाई और शाम को साबूदाने के वड़े। बीच में फल या दूसरा संतुलित भोजन नहीं लिया।

ऐसी स्थिति में साबूदाना हमेशा के लिए बंद करने के बजाय व्रत की थाली में विविधता लाने की जरूरत हो सकती है।

एक बार में बहुत ज्यादा खाने के बजाय अपनी भूख और जरूरत के अनुसार मात्रा रखें।

कुट्टू और सिंघाड़े के आटे की पूरी बेहतर है या रोटी?

नवरात्रि में कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से पूरियां, पकौड़ियां और रोटियां बनाई जाती हैं।

लेकिन अगर आप हर बार कुट्टू का आटा केवल डीप फ्राई करके खा रहे हैं, तो भोजन के साथ तेल की मात्रा भी बढ़ सकती है।

वहीं उसी आटे से बनी कम तेल वाली रोटी या चीला आपकी भोजन संबंधी जरूरतों के अनुसार दूसरा विकल्प हो सकता है।

यह कहना सही नहीं होगा कि कुट्टू की पूरी सीधे कब्ज करती है। लेकिन यदि पूरी थाली में फाइबर युक्त फल-सब्जियां कम हैं और भोजन मुख्य रूप से तली हुई चीजों पर आधारित है, तो कब्ज की देखभाल के लिहाज से बदलाव करना उपयोगी हो सकता है।

इसी तरह सिंघाड़े का आटा भी किसी एक बीमारी का इलाज नहीं है।

अगर आपके परिवार की व्रत परंपरा में अनुमति है, तो कुट्टू की रोटी के साथ लौकी, कद्दू या दूसरी उपयुक्त सब्जियां शामिल कर सकते हैं।

ध्यान रहे कि अलग-अलग परिवारों में व्रत के भोजन संबंधी धार्मिक नियम अलग होते हैं। अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार विकल्प चुनें।

व्रत में फल खाने के बावजूद कब्ज क्यों हो सकती है?

बहुत से लोग सोचते हैं कि फलाहार करने पर कब्ज हो ही नहीं सकती।

लेकिन केवल फल खाने से पर्याप्त फाइबर, प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व मिल रहे हैं या नहीं, यह कुल भोजन पर निर्भर करता है।

उदाहरण के लिए, दिनभर केवल फलों का रस पीने और साबुत फल खाने में अंतर होता है।

साबुत फल में मौजूद फाइबर मल त्याग के लिए उपयोगी हो सकता है। वहीं छने हुए जूस में फाइबर की मात्रा काफी कम हो सकती है।

NIDDK कब्ज में फाइबर के स्रोतों के रूप में फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और मेवों को शामिल करता है।

नवरात्रि में आप अपनी धार्मिक परंपरा और व्यक्तिगत सहनशीलता के अनुसार पपीता, संतरा, सेब या दूसरे मौसमी फल चुन सकते हैं।

लेकिन कोई एक फल ऐसा नहीं है जो हर व्यक्ति की कब्ज निश्चित रूप से ठीक कर दे।

अगर अचानक बहुत ज्यादा फल या फाइबर खाने से गैस और पेट फूलना बढ़ता है, तो मात्रा धीरे-धीरे समायोजित करें।

क्या व्रत में कम पानी पीने से मल सख्त हो सकता है?

मान लीजिए, आप सामान्य दिनों में कई बार पानी पीते हैं। लेकिन उपवास में पानी पीना याद नहीं रहता, या आप चाय और दूध को ही पर्याप्त समझ लेते हैं।

ऐसे में शरीर में तरल पदार्थ की कमी हो सकती है।

पर्याप्त पानी और दूसरे तरल पदार्थ मल को नरम रखने में मदद करते हैं। फाइबर बढ़ाने के साथ पर्याप्त तरल पदार्थ लेना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

लेकिन हर व्यक्ति को एक निश्चित संख्या में गिलास पानी पीने की जरूरत नहीं होती।

जरूरत शरीर के आकार, मौसम, गतिविधि, स्वास्थ्य और दूसरी परिस्थितियों के अनुसार बदलती है।

अगर आप निर्जला व्रत रख रहे हैं या पानी भी सीमित कर रहे हैं, तो डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक हो सकता है।

विशेष रूप से गर्म मौसम, बुखार या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में यह जोखिम बढ़ सकता है।

किडनी या हृदय की बीमारी के कारण जिन लोगों को तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह दी गई है, उन्हें डॉक्टर से अपनी जरूरत के अनुसार मार्गदर्शन लेना चाहिए।

Reddit पर भी सवाल-उपवास शुरू किया और कब्ज होने लगी, क्यों?

Reddit के r/Constipation community में एक व्यक्ति ने बताया कि उसने Intermittent Fasting शुरू की थी। चार-पांच दिनों के भीतर उसे कब्ज होने लगी।

उसने पूछा कि क्या कम समय में भोजन करना इसकी वजह हो सकता है और इस परेशानी से कैसे बचा जाए।

एक दूसरी चर्चा में व्यक्ति ने बताया कि वह व्रत या सीमित समय में भोजन करने के दौरान कब्ज महसूस करता था, जबकि सामान्य भोजन की दिनचर्या में लौटने पर मल त्याग बेहतर होता था।

वहीं कुछ लोगों ने इसके उलट अनुभव भी बताए-उन्हें सीमित समय में भोजन करने पर पेट की परेशानी कम लगती थी।

ये व्यक्तिगत अनुभव हैं, वैज्ञानिक प्रमाण नहीं। इनमें चर्चा Intermittent Fasting की थी, नवरात्रि के धार्मिक व्रत की नहीं।

फिर भी मरीजों का मूल सवाल मिलता-जुलता है: भोजन के समय और मात्रा में बदलाव के बाद मल त्याग क्यों बदल रहा है?

इसका उत्तर व्यक्ति की कुल डाइट, तरल सेवन, गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

इसलिए केवल यह सोचकर कि उपवास से शरीर अपने आप साफ हो जाएगा, कब्ज के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

नवरात्रि में एक दिन की फलाहारी थाली कैसी रख सकते हैं?

अगर आप ऐसा व्रत रखते हैं जिसमें फल, दूध, फलाहारी अनाज और चुनिंदा सब्जियां लेने की अनुमति है, तो सामान्य भोजन की तुलना में भी संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए:

  • सुबह: अपनी सहनशीलता के अनुसार साबुत फल और आवश्यक तरल पदार्थ।
  • दोपहर: कुट्टू या राजगिरा से बनी रोटी के साथ व्रत में अनुमत पकी हुई सब्जी और उपयुक्त मात्रा में दही।
  • शाम: मखाना, मूंगफली या दूसरे अनुमत खाद्य पदार्थों की सीमित मात्रा, अपनी पाचन क्षमता के अनुसार।
  • रात: साबूदाने की खिचड़ी या सामक के चावल के साथ अपनी परंपरा के अनुसार अनुमत सब्जी या दूसरा पौष्टिक विकल्प।

यह केवल सामान्य उदाहरण है, निर्धारित medical diet chart नहीं।

यदि दूध से गैस होती है, मूंगफली से एलर्जी है या किसी भोजन से पाचन संबंधी परेशानी होती है, तो उसे केवल व्रत में अनुमत होने के कारण खाने की जरूरत नहीं है।

प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्वों की जरूरत भी ध्यान में रखें, खासकर अगर कई दिन लगातार व्रत रख रहे हैं।

डायबिटीज या दूसरी बीमारी है तो उपवास में क्या सावधानी रखें?

नवरात्रि में कुछ लोग कई दिनों तक उपवास रखते हैं। लेकिन हर व्यक्ति के लिए ऐसा करना सुरक्षित नहीं होता।

NIDDK के अनुसार, डायबिटीज वाले लोगों में उपवास के दौरान ब्लड शुगर बहुत कम या बहुत ज्यादा होने, और डिहाइड्रेशन का जोखिम हो सकता है।

खासकर इंसुलिन या कुछ शुगर कम करने वाली दवाएं लेने वालों में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।

व्रत से पहले डॉक्टर से दवा, भोजन और शुगर मॉनिटरिंग की योजना समझें।

अपनी तरफ से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या दूसरी निर्धारित दवाएं बंद या कम न करें।

गर्भावस्था, स्तनपान, बुज़ुर्ग अवस्था, गंभीर किडनी या हृदय रोग तथा पहले से पोषण की कमी जैसी स्थितियों में भी लंबे या कठोर उपवास से पहले व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

अगर व्रत के दौरान चक्कर, कंपकंपी, पसीना, भ्रम, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी होने लगे, तो इसे केवल सामान्य व्रत की थकान न मानें। तत्काल उपयुक्त चिकित्सा सहायता लें और स्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

नवरात्रि में कब्ज हो जाए तो क्या करें?

अगर व्रत के दौरान मल सख्त हो गया है या शौच में जोर लग रहा है, तो सबसे पहले देखें कि पूरे दिन आपने क्या खाया-पिया।

कम फाइबर वाले भोजन पर निर्भरता कम करें और अपनी व्रत परंपरा के अनुसार फाइबर वाले अनुमत विकल्प शामिल करें।

यदि पानी पीने पर धार्मिक या चिकित्सकीय प्रतिबंध नहीं है, तो दिनभर पर्याप्त तरल पदार्थ लें।

अपनी क्षमता के अनुसार हल्का चलना-फिरना भी मददगार हो सकता है।

मल त्याग की इच्छा हो तो उसे रोकें नहीं। टॉयलेट में लंबे समय तक बैठकर जबरदस्ती जोर लगाने से बचें।

कब्ज के लिए इसबगोल, चूर्ण या जुलाब बिना सलाह के बार-बार इस्तेमाल न करें, खासकर जब पानी कम पी रहे हों या पेट बहुत ज्यादा फूला हो।

व्रत खोलने के बाद भी अचानक बहुत भारी भोजन करने के बजाय अपनी सामान्य संतुलित डाइट में लौटना बेहतर है।

कब कब्ज को केवल व्रत का असर मानना गलत हो सकता है?

अगर नवरात्रि में कब्ज शुरू हुई है, तब भी जरूरी नहीं कि उसकी एकमात्र वजह उपवास हो।

कभी दवाओं, थायरॉइड से जुड़ी समस्या, पहले से मौजूद कब्ज या दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों के कारण भी मल त्याग प्रभावित हो सकता है।

NIDDK के अनुसार, कब्ज के साथ इन लक्षणों में तत्काल चिकित्सकीय जांच की जरूरत हो सकती है:

  • मल में खून आना।
  • लगातार या गंभीर पेट दर्द होना।
  • बार-बार उल्टी होना।
  • गैस का बिल्कुल न निकलना।
  • बुखार या बिना वजह वजन कम होना।

तेज पेट दर्द, बहुत अधिक पेट फूलने, उल्टी और गैस या मल बंद होने जैसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन सहायता लें।

कब्ज व्रत खत्म होने के बाद भी बनी रहे या लगातार बढ़ रही हो, तो डॉक्टर से जांच कराएं।

व्रत के दौरान कब्ज बार-बार परेशान करती है? Jiva Ayurveda से सलाह लें

अगर नवरात्रि या दूसरे व्रतों के दौरान आपको कब्ज, पेट भारी रहने, गैस या शौच में जोर लगाने की समस्या होती है, तो केवल किसी एक फलाहारी भोजन को जिम्मेदार मानने के बजाय अपनी पूरी डाइट और दिनचर्या की समीक्षा करना उपयोगी है।

Jiva Ayurveda में आप योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से पाचन, कब्ज, खानपान और उपवास के दौरान अपनी दिनचर्या को लेकर परामर्श ले सकते हैं। डॉक्टर आपकी स्वास्थ्य स्थिति और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार भोजन, जीवनशैली तथा उपयुक्त आयुर्वेदिक देखभाल के विकल्प समझा सकते हैं। डायबिटीज या दूसरी पुरानी बीमारी में उपवास का निर्णय अपने नियमित उपचार करने वाले डॉक्टर के साथ लेना भी जरूरी है।

अगर व्रत के दौरान या उसके बाद बार-बार कब्ज की परेशानी होती है, तो Jiva Ayurveda के डॉक्टर से परामर्श के लिए फॉर्म भरें और अपनी समस्या विस्तार से बताएं और अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे हमारे नंबर +919266714040 पर।

नवरात्रि का व्रत रखते समय पेट की देखभाल के लिए साबूदाना, कुट्टू या आलू पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है। ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आपकी फलाहारी थाली में विविधता हो, पर्याप्त तरल पदार्थ मिलें और शरीर के परेशान करने वाले संकेतों को नजरअंदाज न किया जाए।

चिकित्सकीय सूचना: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है और व्यक्तिगत निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। उपवास के दौरान गंभीर कमजोरी, डिहाइड्रेशन, गंभीर कब्ज या पेट दर्द होने पर चिकित्सकीय सलाह लें। डायबिटीज, गर्भावस्था या दूसरी गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों में उपवास से पहले अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त करें।

Medical Sources & Research References

  1. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) - Eating, Diet & Nutrition for Constipation

Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/constipation/eating-diet-nutrition

Content Reference: कब्ज में पर्याप्त फाइबर, फल-सब्जियों और तरल पदार्थों की भूमिका। फाइबर को धीरे-धीरे बढ़ाना और डिहाइड्रेशन से बचना।

  1. NIDDK - Symptoms & Causes of Constipation

Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/constipation/symptoms-causes

Content Reference: मल का सख्त होना, शौच में जोर लगना और अधूरा मल त्याग होने का एहसास। भोजन और दिनचर्या में बदलाव तथा कब्ज के गंभीर warning signs।

  1. NHS - Constipation

Source: https://www.nhs.uk/conditions/constipation/

Content Reference: कब्ज के लक्षण, भोजन और पानी में बदलाव, शारीरिक गतिविधि तथा लंबे समय तक कब्ज बने रहने पर चिकित्सकीय जांच की जरूरत।

  1. NIDDK - Fasting Safely with Diabetes

Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/professionals/diabetes-discoveries-practice/fasting-safely-with-diabetes

Content Reference: धार्मिक उपवास सहित अन्य प्रकार के fasting में डायबिटीज वाले लोगों के लिए Hypoglycemia, Hyperglycemia और डिहाइड्रेशन के जोखिम। व्रत से पहले डॉक्टर के साथ दवाओं और ग्लूकोज मॉनिटरिंग की योजना बनाना।

  1. Loksatta - Sabudana or Bhagar During Fasting: Nutritional Differences (2026)

Source: https://www.loksatta.com/lifestyle/sabudana-or-bhagar-during-fasting-which-one-is-more-beneficial-for-health-learn-about-the-difference-in-nutritional-values-sap-20-6190947/

Content Reference: साबूदाने का मुख्य रूप से स्टार्च वाला खाद्य पदार्थ होना और उपवास में केवल साबूदाने पर निर्भर न रहकर दूसरे अनुमत पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना। यह पोषण संबंधी सामान्य संदर्भ है, साबूदाने से कब्ज होने का प्रत्यक्ष clinical प्रमाण नहीं।

Patient Forum Research

  1. Reddit - r/Constipation

Discussion: I got constipated 4 days into intermittent fasting. Any advice on how I can avoid it?

Source: https://www.reddit.com/r/Constipation/comments/12twikr/

Content Reference: Intermittent Fasting शुरू करने के कुछ दिनों बाद कब्ज होने और भोजन का समय बदलने के प्रभाव को लेकर मरीज की चिंता।

  1. Reddit - r/Constipation

Discussion: Intermittent Fasting

Source: https://www.reddit.com/r/Constipation/comments/rxfkaf/

Content Reference: कुछ लोगों को उपवास के दौरान कब्ज बढ़ने और अन्य लोगों को भोजन की नियमितता बदलने से राहत महसूस होने के विपरीत अनुभव।

  1. Reddit - r/Constipation

Discussion: Intermittent fasting problems

Source: https://www.reddit.com/r/Constipation/comments/1dadrtg/

Content Reference: शाम का भोजन बंद करने के बाद नई कब्ज शुरू होने और दोबारा सामान्य दिनचर्या में बदलाव करने की चिंता।

Research Note: Reddit पर चर्चा मुख्यतः Intermittent Fasting के अनुभवों की है, नवरात्रि के धार्मिक व्रत पर प्रत्यक्ष शोध नहीं। इन व्यक्तिगत अनुभवों को चिकित्सकीय प्रमाण नहीं माना गया है। नवरात्रि के भोजन और कब्ज से जुड़े सुझाव सामान्य फाइबर, तरल सेवन और पोषण संबंधी स्थापित जानकारी पर आधारित हैं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

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