भरपेट खाना खाने और अपनी भूख मिटाने के बाद, अक्सर ऐसा महसूस होता है कि कुछ अधूरा है, जैसे हमें वास्तव में कुछ और खाने की ज़रूरत है, और अधूरेपन की यह भावना तब तक बनी रहती है जब तक कि हम अंत में अपनी ज़ुबान को कुछ मीठा नहीं परोसते।
भोजन के बाद मिठाई खाने की लालसा की इस प्रवृत्ति को महज प्राथमिकता या शौक समझकर नजरअंदाज करना आम बात है, लेकिन हमें इस बात का एहसास नहीं है कि शरीर के अंदर कुछ ऐसी चीजें चल रही हैं जो हमें मिठाई खाने के लिए इतनी प्रेरित करती है।
मीठा खाने की इच्छा क्यों प्रकट होती है?
जब हम पेट भरकर भोजन करते हैं तो हमारा ब्लड शुगर बढ़ जाता है, खास कर जब हम कार्बोहाइड्रेट या स्टार्च से भरपूर भोजन करते हैं तो हमारे रक्त में शकरा की मात्रा तेज़ी से बढ़ जाती है, और फिर ये तेज़ी से गिर भी जाती है।
जब यह ब्लड शुगर गिरता है, तो शरीर और अधिक ग्लूकोज़ की तलाश करने लगता है और हमे मीठा खाने के लिए बेचैनी महसूस होती है। जब हमारी जठराग्नि हमारे धातुओं और कोशिकाओं को पोषण नहीं दे पाती है तो शरीर अधिक ऊर्जा की मांग करता है तथा मिठास की लालसा रखने लगता है।
शरीर इस मीठे खाने की इच्छा का संकेत किन रूपों में देता है?
हमारे शरीर के प्रत्येक असंतुलन को सरलता से नहीं बताया जा सकता, परन्तु जब शरीर हमे संकेत दें तो उसे पहचानना आवश्यक होता है। शरीर के द्वारा दिए गए कुछ संकेत है:
- खाना खाते ही बेचैनी: भोजन पूरा करने के पश्च्यात भी विचित्र प्रकार की असंतुष्टि का अनुभव होता है, ऐसा लगता है जैसे खाना तो खा लिया पर कुछ बाकी रह गया है।
- ऊर्जा स्तर का गिरना: पेट भर कर स्वस्थ भोजन करने के बाद भी शारीरिक ऊर्जा में उतार चढाव का लगे रहना भी शरीर के मीठे खाने की लालसा को दर्शाता है।
- बार बार ध्यान का भटकना: जब तक मीठा खाने को मिल नहीं जाता, व्यक्ति का किसी काम में मन नहीं लगता है, ऐसा प्रतीत होता है की सर्वप्रथम कार्य मीठा खाने की इच्छा को पूरा करना ही है।
- मूड का बदलना: अपना मनपसंद मीठा न मिलने पर क्रोध, चिड़चिड़ापन, आदि महसूस होना भी एक आम लक्षण है।
आगे चलकर यह इच्छा किन परेशानियों का कारण बन सकती है?
मीठा खाने की यह इच्छा जब लम्बे समय तक रहती है और एक आदत बन जाती है, तो यह धीरे धीरे कई बिमारियों तथा विकारों का रूप ले लेती है। अधिक मीठे की आदत लगने से यह परेशानियां हो सकती हैं:
- वज़न का बढ़ना और चर्बी: अधिक मीठा खाने से जो अतिरिक्त शक्कर होता है वह लिवर में जाकर जमा हो जाता है जिससे फैटी लिवर तथा चर्बी की समस्या हो सकती है।
- मधुमेह का खतरा: मीठा खाने से सबसे अधिक खतरा होता है डायबिटीज का। यह बीमारी लंबे समय में कई अंगों को नुक्सान पहुँचती है, इसीलिए इससे बचना आवश्यक है।
- पाचन तंत्र का नुकसान: जब हम अत्यधिक मीठा खाते हैं तो वह शक्कर हमारी पाचन अग्नि पर एक बोझ बन जाता है, और यदि हमारी अग्नि उस समय सक्षम नहीं हुई तो वह शक्कर धीरे धीरे हमारे पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाने लगता हैं।
- त्वचा पर असर: लम्बे समय तक मीठा खाने से त्वचा को स्वस्थ रखने वाले कोलेजन के उत्त्पन्न होने की गति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
मिठास की चाह पर आयुर्वेद का दृष्टिकोण
आयुर्वेद यह मानता है की एक सम्पूर्ण और स्वस्थ भोजन का सेहतमंद होने के साथ ही उसमे सभी छह रसों का होना भी आवश्यक होता है। यह छह रस है:
- मधुर ( मीठा)
- अम्ल ( खट्टा)
- लवण (नमकीन)
- कटु (चरपरा)
- तिक्त (कड़वा, नीम जैसा)
- कषाय (कसैला)
जब हमारी स्वाद कालिकाओं को इन सभी रसों का स्वाद प्राप्त नहीं हो पाता है तो वह भोजन के पश्च्यात भी मधुर स्वाद की तरफ आकर्षित होने लगती है और व्यक्ति कुछ मीठा खाने को उत्सुक हो जाता हैं।
इसके अलावा, पाचन अग्नि के कमज़ोर होने पर बनने वाला विषैला पदार्थ (आम) शरीर के कई चैनल्स पर रोक लगा सकता है, जिससे एक गहरे इलाज की आवश्यकता बढ़ जाती है। इसीलिए आयुर्वेद केवल इस मीठा खाने की इच्छा या प्रवृति को दबाने की नहीं, बल्कि पाचन अग्नि को मज़बूत बनाने और आम को शरीर से हटाने पर ध्यान देता है।
डॉक्टर से परामर्श कब लें?
हालाँकि इस परेशानी में भोजन तथा जीवनशैली में बदलाव करके भी सुधार संभव है, पर कभी कभी यह किसी गंभीर बीमारी का कारण भी बन सकती है, तो यदि आपको ऐसे कोई लक्षण दिखे तो डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य से शीघ्र ही संपर्क करें:
- अत्यधिक प्यास और बार बार पेशाब आना: यदि आपको सामान्य से अधिक प्यास लग्ग रही है और बार बार पेशाब की परिस्थिति बन रही है तो यह रक्त में शुगर की अधिक मात्रा का एक संकेत हो सकता हैं। इस पड़ाव पर इस संकेत को नज़रअंदाज़ करना एक बड़ी गलती साबित हो सकती है।
- चक्कर आना और घबराहट होना: चक्कर आने के पीछे कई कारन हो सकते है, पर एक मीठा खाने की आदत रखने वाले व्यक्ति को अपना बीपी और शुगर के स्तर की जांच अवश्य करवा लेनी चाहिए। घबराहट मानसिक स्वास्थ के लिए एक नकारात्मक संकेत है।
- वज़न का लगातार बढ़ना या घटना: वज़न का विचित्र उतार चढाव मेटाबॉलिज़्म की समस्या का संकेत हो सकता है, इसे हलके में नहीं लेना चाहिए।
- थकान का बने रहना: भरपूर स्वास्थ भोजन करने के बाद भी यदि थकान बना रहे तो यह थाइरोइड या मधुमेह का लक्षण भी हो सकता है, बिना देर किये डॉक्टर की परामर्श लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
मीठा खाने की इच्छा अपने आप में कोई बुरी बात नहीं होती है, परन्तु जब यह इच्छा हर बार भोजन के बाद होने लगे तो समझ जाना चाहिए की भोजन में आवश्यक रसों की कमी है, और यदि इन रसों की पूर्ती जल्द ही न की गई तो यह इच्छा एक आदत में भी बदल सकती है और अधिक मीठा खाने के दुष्प्रभावों का सामना भी करना पड़ सकता है। यह ज़रूरी हो जाता है की हम ऐसी इच्छा का सही समाधान करे और यदि मीठा खाने की आदत हो गयी हो तो डॉक्टर से अवश्य परामर्श लें।










