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Moringa को superfood क्यों कहा जाता है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आजकल स्वस्थ रहने के लिए लोग महंगी दवाइयाँ और विदेशी चीजें खाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे अपने देश में एक ऐसा पौधा है, जिसे पूरी दुनिया जादुई मान रही है? हम बात कर रहे हैं सहजन की। इसे अंग्रेजी में मोरिंगा कहते हैं। अक्सर लोग पूछते हैं कि Moringa को superfood क्यों कहा जाता है? इसका सीधा जवाब इसके पौष्टिक तत्वों में छिपा है। यह हमारे शरीर की लगभग हर कमी को पूरा कर सकता है।

आजकल लोग बनावटी विटामिंस की जगह प्राकृतिक चीजें पसंद कर रहे हैं। ऐसे में मोरिंगा एक बहुत अच्छा और सस्ता विकल्प है। इस लेख में हम बहुत ही आसान शब्दों में समझेंगे कि यह साधारण सा दिखने वाला पेड़ हमारे लिए कितना ख़ास है।

सुपरफूड क्या होता है?

सुपरफूड का मतलब ऐसी चीजों से है जिनमें पोषक तत्व बहुत ज्यादा होते हैं। इनमें कैलोरी कम होती है और विटामिंस भरपूर होते हैं। मोरिंगा इस पैमाने पर बिल्कुल खरा उतरता है।

इस पेड़ की पत्तियां, फूल और फलियां सभी बहुत काम के हैं। यहाँ तक कि इसकी जड़ें भी पोषक तत्वों से भरी हैं। ज्यादातर सब्जियों से हमें केवल एक या दो विटामिंस ही मिलते हैं। लेकिन मोरिंगा के सेवन से शरीर को एक साथ कई जरूरी तत्व मिल जाते हैं। यही वजह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी कुपोषण से लड़ने के लिए मोरिंगा को बहुत उपयोगी माना है।

पोषक तत्वों का भंडार 

अगर मोरिंगा की तुलना हम रोज खाई जाने वाली चीजों से करें, तो परिणाम आपको हैरान कर देंगे। वैज्ञानिकों के अनुसार, मोरिंगा की सूखी पत्तियों में पोषक तत्वों का स्तर कुछ इस तरह होता है:

  • विटामिन सी: संतरे की तुलना में इसमें सात गुना ज्यादा विटामिन सी होता है। यह त्वचा के लिए बहुत अच्छा है।
  • विटामिन ए: गाजर की तुलना में इसमें दस गुना ज्यादा विटामिन ए होता है। यह आँखों की रोशनी बढ़ाता है।
  • कैल्शियम: दूध की तुलना में इसमें सत्रह गुना ज्यादा कैल्शियम होता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है।
  • पोटैशियम: केले की तुलना में इसमें पंद्रह गुना ज्यादा पोटैशियम होता है। यह दिल को स्वस्थ रखता है।
  • आयरन: पालक की तुलना में इसमें पच्चीस गुना ज्यादा आयरन होता है। यह खून की कमी दूर करता है।

इसके अलावा मोरिंगा में भरपूर मात्रा में प्रोटीन भी पाया जाता है। शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का सबसे अच्छा और प्राकृतिक स्रोत है।

मोरिंगा खाने के मुख्य फायदे

मोरिंगा हमारे शरीर के अंगों को सही तरीके से काम करने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से कई बड़े फायदे मिलते हैं:

1. इम्यूनिटी मजबूत बनाए

मोरिंगा की पत्तियों में भरपूर एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी होते हैं। ये तत्व हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को मजबूत करते हैं। इससे सर्दी, खांसी और मौसमी बीमारियां जल्दी नहीं होतीं।

2. ब्लड शुगर कंट्रोल करे

कई शोधों में पाया गया है कि मोरिंगा में खास तरह के एसिड होते हैं। ये तत्व भोजन के बाद खून में शुगर के स्तर को अचानक बढ़ने से रोकते हैं। इसलिए शुगर के मरीजों के लिए यह बहुत फायदेमंद है।

3. जोड़ों के दर्द में राहत

मोरिंगा में सूजन को कम करने वाले प्राकृतिक गुण होते हैं। यह शरीर के जोड़ों में होने वाले दर्द और सूजन को कम करता है। जिन लोगों को घुटनों में दर्द रहता है, उन्हें इससे काफी आराम मिलता है।

4. पेट और लिवर के लिए अच्छा

यह हमारे लिवर को साफ रखता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त करते हैं। इसके सेवन से कब्ज, गैस और पेट फूलने जैसी समस्याएं धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं।

आयुर्वेद में मोरिंगा का महत्व

भारतीय आयुर्वेद में सहजन को एक चमत्कारी पेड़ माना गया है। आयुर्वेद में इसे 'शिग्रु' कहा जाता है। ग्रंथों के अनुसार, यह अकेले ही शरीर के कई रोगों को दूर करने की क्षमता रखता है। इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए यह शरीर के वात और कफ दोष को शांत करता है।

आयुर्वेद के मुताबिक, मोरिंगा हमारे पेट की पाचक अग्नि को तेज करता है। जब पेट का पाचन सही रहता है, तो शरीर में गंदगी या टॉक्सिन्स जमा नहीं हो पाते। इसी वजह से इंसान लंबे समय तक ऊर्जावान बना रहता है।

मोरिंगा का इस्तेमाल कैसे करें?

मोरिंगा को अपनी डाइट में शामिल करना बहुत आसान है। आप बाजार से इसका पाउडर ला सकते हैं या घर पर भी तैयार कर सकते हैं।

  • मोरिंगा पाउडर: रोज सुबह खाली पेट आधा छोटा चम्मच (3-5 ग्राम) पाउडर गुनगुने पानी के साथ लें।
  • ताजी पत्तियां: इसकी पत्तियों को आप दाल, सूप या पराठे के आटे में मिलाकर खा सकते हैं।
  • फलियां: सहजन की फलियों का उपयोग सब्जी या सांभर बनाने में किया जा सकता है।

ज़रूरी सलाह: चूंकि इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए शुरुआत हमेशा बहुत कम मात्रा से करें। धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ाएं ताकि शरीर को इसकी आदत हो जाए।

निष्कर्ष

सब कुछ समझने के बाद यह साफ हो जाता है कि Moringa को superfood क्यों कहा जाता है। यह प्रकृति का दिया हुआ एक ऐसा अनोखा उपहार है, जो कम खर्च में हमें सबसे ज्यादा पोषण देता है। सिंथेटिक सप्लीमेंट्स और महंगी गोलियां खाने के बजाय इस देसी सुपरफूड को अपनी रसोई का हिस्सा बनाना सेहत के लिए सबसे बेस्ट फैसला है। अपनी दिनचर्या में इसे शामिल करें और स्वस्थ रहें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

 हाँ, एक स्वस्थ व्यक्ति इसका सीमित मात्रा में रोज सेवन कर सकता है।

इसे सुबह खाली पेट हल्के गुनगुने पानी के साथ लेना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।

गर्भावस्था के दौरान इसके अधिक सेवन या इसकी छाल को खाने से बचना चाहिए। डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

हाँ, इसमें मौजूद फाइबर भूख को नियंत्रित करते हैं और मेटाबॉलिज्म तेज करके वजन घटाने में मदद करते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार मोरिंगा की तासीर गर्म (उष्ण) होती है।

 हाँ, इसमें मौजूद जिंक और विटामिन ए बालों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं और बालों का झड़ना रोकते हैं।

हाँ, इसमें मौजूद पोटैशियम रक्त वाहिकाओं को आराम देता है और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखता है।

बच्चों को इसकी पत्तियों का सूप या दाल में मिलाकर देना अच्छा होता है। नियमित पाउडर देने से पहले डॉक्टर से पूछें।

दोनों एक ही हैं। सहजन इसका स्थानीय हिंदी नाम है और मोरिंगा इसका अंग्रेजी या वानस्पतिक नाम है।

ज्यादा खाने से पेट में जलन, एसिडिटी या दस्त की समस्या हो सकती है। इसलिए रोज केवल 3-5 ग्राम ही लें।

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