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PCOD में sugar normal है फिर भी weight क्यों बढ़ता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 30 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 30 Jul, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5007

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि डॉक्टर की रिपोर्ट में शुगर एकदम नॉर्मल आए, लेकिन फिर भी वजन लगातार बढ़ता ही चला जाए? PCOD की परेशानी झेल रही ज्यादातर महिलाएँ इसी बात से परेशान रहती हैं। वे मीठे से परहेज करती हैं, खाने-पीने का पूरा ध्यान रखती हैं, फिर भी  काम होने का नाम नहीं लेता। ऐसे में समझ ही नहीं आता कि जब रिपोर्ट में कोई खराबी नहीं है, तो फिर यह मोटापा आ कहाँ से रहा है?

क्या यह सिर्फ हॉर्मोन की गड़बड़ी है  है, या फिर शरीर अंदर ही अंदर किसी और बात का इशारा दे रहा है? चलिए, आज इस पूरी उलझन को आसान शब्दों में समझते हैं कि आखिर रिपोर्ट नॉर्मल होने के बावजूद वजन क्यों बढ़ता रहता है।

एक्सपर्ट की क्या राय है

स्त्री रोग विशेषज्ञ और मेडिकल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि PCOD में सिर्फ शुगर टेस्ट नॉर्मल आ जाने से पूरी सच्चाई पता नहीं चलती।असली गड़बड़ खून की शुगर में नहीं, बल्कि 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' में छुपी होती है। होता यह है कि आपका शरीर शुगर को नॉर्मल रखने के लिए ज़रूरत से बहुत ज़्यादा इंसुलिन बनाने लगता है। रिपोर्ट में शुगर तो ठीक दिख जाती है, लेकिन यही बढ़ा हुआ इंसुलिन शरीर में चर्बी (फैट) जमा करने का काम शुरू कर देता है।डॉक्टरों का भी यही मानना है कि यहाँ वजन बढ़ना सिर्फ ज़्यादा खाने या कैलोरी का खेल नहीं है, बल्कि शरीर के अंदर हॉर्मोन के बिगड़े संतुलन का नतीजा है।

कितनी प्रतिशत महिलाओं में बढ़ता है पीसीओडी के कारण वज़न? 

यह जानना बहुत दिलचस्प है कि पीसीओडी में कितनी महिलाएँ बढ़ते वज़न का शिकार होती हैं। स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के आँकड़े बताते हैं कि पीसीओडी वाली लगभग 80% महिलाएँ मोटापे की भयंकर शिकायत करती हैं। अगर हम इन कारणों को प्रतिशत में बाँटें, तो लगभग 50% मामलों में इसका सीधा कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है जो चर्बी बढ़ाता है। 30% मामलों में भारी मानसिक तनाव और खराब हॉर्मोन्स की वजह से वज़न बढ़ता है। वहीं बचे हुए 20% मामलों में लगातार गलत डाइट और व्यायाम न करने की खराब आदत मुख्य रूप से इस बीमारी के लिए ज़िम्मेदार होती है।

Sugar नॉर्मल होने पर भी बेचैनी क्यों होती है?

पीसीओडी में शुगर रिपोर्ट नॉर्मल आने के बावजूद महिलाओं को बहुत ज़्यादा बेचैनी महसूस होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर में इंसुलिन का स्तर लगातार ऊपर-नीचे होता है। जब आप खाना खाती हैं, तो शरीर ज़रूरत से ज़्यादा इंसुलिन छोड़ता है, जो खून से ऊर्जा को एकदम खींच लेता है। ऊर्जा के अचानक कम होने से दिमाग को ग्लूकोज़ नहीं मिल पाता। इसी वजह से शुगर नॉर्मल होने के बावजूद आपको अचानक पसीना आना, घबराहट होना, हाथ-पैर काँपना और बहुत तेज़ कमज़ोरी महसूस होने लगती है। यह सब शरीर के अंदर मचे हॉर्मोन्स के बड़े तूफान का असर होता है।

किन लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए?

पीसीओडी में वज़न बढ़ना आम बात है जिसे आसानी से काबू किया जा सकता है। लेकिन जब शरीर कुछ गंभीर इशारे दे, तो हमें तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। इन खतरनाक लक्षणों को कभी अनदेखा नहीं करना चाहिए:

  • चेहरे पर मोटे बाल: अगर चेहरे और ठुड्डी पर अचानक से अनचाहे कड़े बाल उगने लगें।
  • त्वचा का काला पड़ना: अगर आपकी गर्दन के पीछे की त्वचा बहुत ज़्यादा काली और मोटी होने लगे।
  • लंबे समय तक पीरियड्स रुकना: अगर लगातार कई महीनों तक आपको पीरियड्स बिल्कुल न आएँ।
  • लगातार कमज़ोरी: अगर हल्का काम करने पर भी बहुत भारी कमज़ोरी और चक्कर आने लगे।

क्या PCOD की दवा इसका कारण हो सकती है?

जी हाँ, कई बार पीसीओडी को ठीक करने के लिए हम जो हॉर्मोन्स वाली गोलियाँ लेते हैं, वे ही वज़न बढ़ाने का कारण बन जाती हैं। इन दवाइयों का काम पीरियड्स को नियमित करना होता है। लेकिन इन हॉर्मोनल गोलियों के कुछ गंभीर साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। लगातार इन्हें खाने से महिलाओं के शरीर में पानी जमा होने लगता है, जिससे शरीर फूला हुआ लगता है। इसके अलावा कुछ खास दवाइयाँ भूख को बहुत बढ़ा देती हैं, जिससे आप ज़्यादा खाती हैं। अगर दवा खाने के बाद आपको अपना वज़न तेज़ी से बढ़ता हुआ लगे, तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के ग्रंथों के अनुसार, हमारा पूरा शरीर वात, पित्त और कफ इन तीन महत्वपूर्ण दोषों पर चलता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के मुताबिक, पीसीओडी और मोटापा मुख्य रूप से कफ और वात दोष के बहुत ज़्यादा असंतुलित होने का नतीजा है। जब आपका खानपान खराब होता है, तो शरीर में विषैले तत्व बनने लगते हैं। ये तत्व कफ दोष के साथ मिलकर शरीर का मेटाबॉलिज़्म बहुत धीमा कर देते हैं। इसी वजह से शरीर भारी होने लगता है और चर्बी जमने लगती है। आयुर्वेद स्पष्ट कहता है कि सिर्फ दवा खाने के बजाय शरीर के अंदर से कफ दोष को जड़ से शांत करना ज़रूरी है।

बढ़ते वज़न से राहत पाने के लिए क्या करना चाहिए?

पीसीओडी में बढ़ता वज़न परेशान करता है, लेकिन इसे कम करना बिल्कुल मुमकिन है। बाज़ार की तेज़ दवाइयाँ खाने के बजाय घर पर कुछ सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके अपनाकर आप इससे बहुत आसानी से राहत पा सकती हैं:

  • दालचीनी का इस्तेमाल: सुबह खाली पेट दालचीनी का पानी पिएँ, यह शरीर में इंसुलिन को बहुत अच्छे से कंट्रोल करता है।
  • प्रोटीन से भरपूर आहार: खाने में पनीर और दालें शामिल करें, जिससे भूख कम लगे और मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो।
  • फाइबर वाली सब्ज़ियाँ: सलाद की मात्रा बढ़ाएँ, जो खून में जमा एक्स्ट्रा चर्बी को काटकर पूरी तरह बाहर निकालता है।

क्या तनाव भी इसकी वजह हो सकती है?

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब आप किसी बात को लेकर लगातार चिंता में रहती हैं, तो शरीर को जरा सा भी आराम नहीं मिल पाता। इस लगातार बनी रहने वाली मानसिक परेशानी की वजह से शरीर में 'कोर्टिसोल' नाम का स्ट्रेस हार्मोन काफी बढ़ जाता है।यह हार्मोन बढ़ते ही शरीर में इंसुलिन का संतुलन पूरी तरह बिगाड़ देता है। नतीजा यह होता है कि शरीर में जमा चर्बी घटने के बजाय और तेजी से बढ़ने लगती है।

इसके अलावा, जब दिमाग तनाव में होता है, तो न चाहते हुए भी उल्टे-सीधे और अनहेल्दी खाने की क्रेविंग होने लगती है। सीधे शब्दों में कहें, तो आपका दिमागी तनाव ही आपके बढ़ते मोटापे की आग में घी डालने का काम करता है। 

PCOD में बढ़ते वज़न से बचने के उपाय क्या हैं?

अगर आप पीसीओडी में बढ़ते वज़न से हमेशा के लिए बचना चाहती हैं, तो आपको अपनी दिनचर्या में कुछ असरदार बदलाव करने होंगे। एक अच्छी जीवनशैली अपनाकर आप बहुत आसानी से फिट रह सकती हैं:

  • मीठा खाना बंद करें: चीनी और मैदे वाली चीज़ें बिल्कुल छोड़ दें, क्योंकि ये पीसीओडी में ज़हर के समान काम करती हैं।
  • नियमित हल्का व्यायाम: रोज़ाना तीस मिनट तेज़ वॉक या योगा ज़रूर करें, जिससे शरीर में जमा चर्बी तेज़ी से पिघलने लगे।
  • सही समय पर खाएँ: अपने खाने का एक सही समय तय करें ताकि हॉर्मोन्स बिल्कुल संतुलित रहें।
  • तनाव से दूर रहें: खुश रहने की पूरी कोशिश करें।

आयुर्वेदिक और आधुनिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
नज़रिया पीसीओडी के हार्मोनल बदलाव, लक्षणों और संबंधित समस्याओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर उपचार किया जाता है। समग्र स्वास्थ्य, आहार-विहार, जीवनशैली और व्यक्ति की प्रकृति के संतुलन पर ध्यान दिया जाता है।
उपचार का तरीका आवश्यकता के अनुसार दवाइयाँ, हार्मोनल उपचार, वजन प्रबंधन और अन्य चिकित्सकीय उपाय अपनाए जाते हैं। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, योग, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार पर ज़ोर दिया जाता है।
सुरक्षा दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह से दी जाती हैं और उनके लाभ व संभावित दुष्प्रभावों की नियमित निगरानी की जाती है। आयुर्वेदिक औषधियाँ भी केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह और सही मात्रा में ही लेनी चाहिए।
जीवनशैली का महत्व संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ वजन बनाए रखना उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आहार, योग, नियमित दिनचर्या और समग्र स्वास्थ्य सुधार को उपचार का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
दीर्घकालिक लक्ष्य हार्मोन संतुलन, मासिक धर्म में सुधार और पीसीओडी से जुड़ी जटिलताओं का प्रबंधन। समग्र स्वास्थ्य, संतुलित जीवनशैली और दीर्घकालिक स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल।

तुरंत डॉक्टर से कब मिलना चाहिए ?

पीसीओडी में वज़न का बढ़ना और हॉर्मोन्स का बिगड़ना आम बात है। लेकिन हमें हमेशा इस बात का अंदाज़ा होना चाहिए कि कब स्थिति गंभीर रूप ले सकती है और हमें तुरंत अपने डॉक्टर के पास जाना चाहिए:

  • अचानक बहुत वज़न बढ़ना: अगर आप सही डाइट ले रही हैं फिर भी एक महीने में ही बहुत ज़्यादा वज़न बढ़ जाए।
  • लगातार पेल्विक दर्द: अगर आपके पेट के निचले हिस्से में हमेशा एक भयंकर और चुभने वाला दर्द रहने लगे।
  • भारी ब्लीडिंग होना: पीरियड्स के दौरान अगर आपको बहुत ज़्यादा खून आए जो किसी भी तरह से रुक न रहा हो।

निष्कर्ष

पीसीओडी में शुगर नॉर्मल होने पर भी वज़न का बढ़ना कोई जादू नहीं है, बल्कि यह इंसुलिन रेजिस्टेंस नाम की अंदरूनी समस्या का साफ इशारा है। यह बताता है कि आपका शरीर खाने को ऊर्जा में बदलने के बजाय चर्बी में बदल रहा है। इस बीमारी को सिर्फ भूखे रहकर या तेज़ दवाइयाँ खाकर ठीक नहीं किया जा सकता है। अपने शरीर की ज़रूरतों को अच्छे से समझें। पौष्टिक खानपान, नियमित हल्का व्यायाम और तनाव-मुक्त जीवन ही आपका सच्चा साथी है। अगर परेशानी ज़्यादा तंग करे, तो हमेशा डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि खुद को खुश रखना ही सबसे बड़ी दवा है।

References:

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/polycystic-ovary-syndrome

https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S1530891X25009358

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC12232814/

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/polycystic-ovary-syndrome

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, यह बिल्कुल नामुमकिन नहीं है। यह सच है कि इंसुलिन की वजह से वज़न धीरे घटता है, लेकिन अगर आप सही डाइट लें और चीनी छोड़ दें, तो वज़न आसानी से कम किया जा सकता है।

जी हाँ, अगर इंसुलिन रेजिस्टेंस को लंबे समय तक ऐसे ही छोड़ दिया जाए, तो भविष्य में यह टाइप 2 डायबिटीज़ में बदल सकता है। इसलिए वज़न कंट्रोल करना बहुत ज़रूरी होता है।

पीसीओडी में बहुत ज़्यादा भारी कसरत करने के बजाय हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, तेज़ वॉक और योगा (जैसे सूर्य नमस्कार) करना सबसे ज़्यादा फायदेमंद होता है। इससे हॉर्मोन्स जल्दी संतुलित होते हैं

सफेद चावल में बहुत ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट होता है जो सीधा शुगर बनाता है। इसकी जगह आप थोड़ा सा ब्राउन राइस खा सकती हैं, जिससे शरीर को फाइबर मिलता है और वज़न नहीं बढ़ता है।

इसको ठीक करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपनी डाइट में प्रोटीन बढ़ा दें, जंक फूड पूरी तरह छोड़ दें और रोज़ाना व्यायाम करें ताकि शरीर अपनी इंसुलिन का सही इस्तेमाल कर सके।

जी हाँ, भूखे रहने या क्रैश डाइटिंग करने से शरीर में तनाव बढ़ता है। इससे इंसुलिन का लेवल अचानक गिरता और बढ़ता है, जिससे वज़न कम होने के बजाय और ज़्यादा तेज़ी से बढ़ने लगता है।

हाँ, ग्रीन टी में बहुत अच्छे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो आपके धीमे मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करते हैं। इसे दिन में एक या दो बार पीने से शरीर में जमा फालतू चर्बी को पिघलने में काफी मदद मिलती है।

इंसुलिन ऊपर-नीचे होने के कारण ही मीठा खाने का मन करता है। जब भी ऐसा हो, तो चीनी खाने के बजाय आप थोड़ा सा गुड़, खजूर या कोई ताज़ा फल खा सकती हैं, इससे तलब तुरंत शांत हो जाएगी।

बिल्कुल, जब आप सात घंटे की गहरी नींद नहीं लेती हैं, तो शरीर का स्ट्रेस लेवल काफी बढ़ जाता है। नींद की कमी से भूख बढ़ाने वाले हॉर्मोन्स ज़्यादा निकलते हैं, जिससे आप ज़्यादा खाती हैं और मोटी होती हैं।

पीसीओडी एक लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्या है। इसे हमेशा के लिए शरीर से तो नहीं निकाला जा सकता, लेकिन अगर आप सही डाइट और व्यायाम को जीवन भर अपना लें, तो इसके सारे लक्षण पूरी तरह से गायब हो जाते हैं।

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