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ऑफिस से घर लौटते ही सिर भारी और चिड़चिड़ापन क्यों बढ़ जाता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 11 Aug, 2026
  • category-iconUpdated on 11 Aug, 2026
  • category-iconMental Health
  • blog-view-icon5004

क्या आपने कभी महसूस किया है कि आप ऑफिस में पूरा दिन काम करने के बाद जैसे ही घर पहुंचते हैं सर भारी लगने लगता है,छोटी सी बात पर गुस्सा आता है ,और किसी से भी बात करने का मन नहीं करता कई लोगों को लगता है कि यह सिर्फ काम का तनाव है लेकिन इसके पीछे नींद की कमी, लंबे समय तक स्क्रीन देखना पानी कम पीना देर से खाना और लगातार सारा दिन बैठे रहना और मानसिक थकान जैसे कई कारण हो सकते हैं|

दिन भर शरीर और दिमाग एक ही समय में कई काम संभालते हैं ऑफिस से निकलने के बाद जब काम का दबाव कम होता है तब शरीर को अपनी थकान महसूस होने लगती है इसलिए घर पहुंचने-फटे फिर भारी हो जाता है और मूड खराब हो सकता है

दिनभर का मानसिक तनाव

ऑफिस में लगातार ईमेल, मीटिंग ,फोन कॉल, डेडलाइन और निर्णय लेने के लिए जरूरत दिमाग पर दबाव डाल सकती है भले ही आपको शारीरिक मेहनत कम करनी पड़े लेकिन दिमाग लगातार सक्रिय रहता है |

दिन खत्म होने तक यह मेंटल फेटिंग चिड़चिड़ापन ध्यान लगाने में परेशानी फिर भारी लगने के रूप में दिखाई दे सकती है|

कई बार ऑफिस की समस्या घर तक दिमाग में चलती रहती है इससे शरीर घर पहुंचने के बाद भी पूरी तरह रिलैक्स नहीं रह पाता||

स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना

कंप्यूटर मोबाइल स्क्रीन को कई घंटे तक देखने से आंखों में स्ट्रेन और सर दर्द हो सकता है लगातार पास की चीज पर ध्यान केंद्रित करने से आंखों के आसपास मांसपेशियों पर थकान बढ़ सकती है | 

अगर आप ऑफिस के बाद भी मोबाइल पर लगातार स्क्रोलिंग या काम चलता रहता है तो दिमाग को आराम का मौका नहीं मिलता

 इसलिए हर कुछ समय में स्क्रीन से नजर हटाना थोड़ी देर दूर देखना आंखों को आराम देना बहुत जरूरी हो सकता है इसलिए अपना स्क्रीन time कम करने की कोशिश कर सकते हैं

पानी कम पीना भी कारण हो सकता है

ऑफिस में इतने बिजी हो जाते हैं लोग , कि वह पानी पीना भूल जाते हैं हल्की डिहाइड्रेशन भी थकान, कमजोरी से दर्द और कंसंट्रेशन की कमी से जुड़ी हो सकती है 

अगर आपको शाम के समय से सिर भारी लगता है और साथ में मुंह सूख जाता है ज्यादा प्यास या गहरे रंग का यूरिन दिखाई देता है तो अपना water इनटेक पर ध्यान दें ,पानी की जरूरत हर व्यक्ति में अलग होती है इसलिए केवल एक मात्र को लक्ष्य बनाने की बजाय अपनी प्यास और शरीर के संकेत पर भी ध्यान देना चाहिए और पानी की कमी को पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए जिससे आपको स्वास्थ्य में लाभ मिलेगा

खाना देर से या गलत तरीके से खाना

सुबह का नाश्ता छोड़ना, दोपहर का खाना बहुत देर से खाना या लंबे समय तक कुछ ना खाना शाम तक थकान को बढ़ा सकता है|

बहुत ज्यादा मीठा या अत्यधिक processed food  खाने से भी कुछ लोगों को थोड़ी देर बाद एनर्जी में गिरावट महसूस होने लगती है |

ऑफिस में कोशिश करें कि भोजन को बहुत देर तक ना टालें | दाल, सब्जियां, whole grains, फल, दही या अन्य पौष्टिक आहार वाला भजन दिनभर एनर्जी बनाए रखने में मदद कर सकता है 

लगातार बैठे रहना

ऑफिस में 8-9 घंटे लगातार बैठना शरीर को थका सकता है गर्दन और कंधों की muscles में stiffness आने से टेंशन टाइप headache या  सिर में भारीपन महसूस हो सकता है|

हर 45, 60 मिनट में कुछ मिनट के लिए उठना, थोड़ा चलना  posture बदलना मददगार हो सकता है जिससे आपको  posture से रिलेटेड कोई भी समस्या नहीं आएगी |

अगर आप कंप्यूटर पर है तो मॉनिटर की हाइट, चेयर की पोजीशन और बैठने की मुद्रा का भी ध्यान दें इससे आपके पोस्ट पर काफी फर्क पड़ता है

नींद पूरी नहीं होना

अगर रात में पर्याप्त और अच्छी quality की नींद नहीं मिलती, तो अगले दिन दिमाग पहले से ही थका हुआ रहता है। दिनभर काम करने के बाद यह थकान शाम को ज्यादा स्पष्ट महसूस हो सकती है।

नींद की कमी mood को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए छोटी बातों पर irritability बढ़ना केवल personality का हिस्सा नहीं, बल्कि थकान का संकेत भी हो सकता है।

रोज लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें और सोने से पहले लंबे समय तक फोन या लैपटॉप इस्तेमाल करने से बचें।

आयुर्वेद के नजरिए से क्या समझें?

आयुर्वेद में दिनभर की अधिक मानसिक गतिविधि, अनियमित दिनचर्या, कम आराम और गलत खान-पान को शरीर के संतुलन पर असर डालने वाला माना जाता है। खासकर वात से जुड़े लक्षणों में बेचैनी, थकान, नींद में परेशानी और मानसिक अस्थिरता जैसी शिकायतें बताई जाती हैं।

इसलिए नियमित भोजन, पर्याप्त आराम, हल्का व्यायाम, योग या प्राणायाम और एक स्थिर daily routine को महत्व दिया जाता है।

हालांकि, किसी भी लगातार या गंभीर सिरदर्द को केवल “वात” या stress मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

घर पहुंचने के बाद 20 मिनट का आसान routine

आप एक छोटा-सा “work-to-home reset” बना सकते हैं:

  • घर पहुंचकर एक गिलास पानी पिएं।
  • 5–10 मिनट आराम से बैठें या हल्की walk करें।
  • गर्दन और कंधों की gentle stretching करें।
  • कुछ मिनट deep breathing करें।
  • तुरंत फोन या laptop खोलने से बचें।
  • अगर भूख लगी है तो हल्का, पौष्टिक snack लें।
  • रात को पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

अगर सिर भारी या सिरदर्द बार-बार होता है, बहुत तेज होता है, लगातार बढ़ रहा है या रोजमर्रा के काम को प्रभावित करता है, तो medical evaluation जरूरी हो सकती है।

खासकर अचानक बहुत तेज सिरदर्द, देखने में परेशानी, कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में दिक्कत, बेहोशी, तेज बुखार या लगातार उल्टी जैसे लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

निष्कर्ष

ऑफिस से घर लौटते ही सिर भारी और चिड़चिड़ापन बढ़ना हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। अक्सर mental stress, screen time, dehydration, irregular meals, poor posture, physical inactivity और inadequate sleep मिलकर शाम की थकान को बढ़ाते हैं।

अपने दिन में छोटे बदलाव,समय पर भोजन, पर्याप्त fluids, regular movement, screen breaks और बेहतर sleep routine,काफी मदद कर सकते हैं। लेकिन अगर समस्या लगातार बनी रहती है, तो केवल stress मानने के बजाय इसके कारण की जांच कराना बेहतर है।

References

Work-related fatigue: A hazard for workers experiencing disproportionate occupational risks - PMC

Long Work Hours, Extended or Irregular Shifts, and Worker Fatigue - Hazards | Occupational Safety and Health Administration

Sick building syndrome - NHS

9 Tips to Help You Manage Daytime Sleepiness at Work

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

यह मानसिक तनाव, स्क्रीन समय, नींद की कमी, देर से खाना और लगातार बैठना जैसे कारणों से होता है। साथ ही dehydration और थकान भी भूमिका निभाते हैं।

अक्सर यह थकान, मानसिक तनाव और स्क्रीन-समय से जुड़ा चिड़चिड़ापन होता है। अगर लक्षण लगातार रहते हैं, एक medical evaluation बेहतर है।

हर 20–30 मिनट के बाद आंखों के लिए 20 सेकंड दूर देखने की तकनीक (20-20-20) मदद कर सकती है; मॉनिटर ऊंचाई और बैठने की मुद्रा भी फर्क डालते हैं।

थकान, मिचली, ध्यान में कमी, सिरदर्द, मुँह सूखना और यूरिन का गहरा रंग आना पानी की कमी के संकेत हैं।

देरी से खाने से ऊर्जा स्लाइस गिरती है, अचानक रक्त शर्करा उतार-चढ़ाव होते हैं, और शाम तक थकान बढ़ सकती है।

बहुत मीठा/प्रोसेस्ड फूड कुछ लोगों में थोड़ी देर के लिए ऊर्जा गिरावट दे सकता है; भूख के मुताबिक हल्का पौष्टिक भोजन मददगार रहता है।

गर्दन में stiffness, tension-type headache, और पूरे दिन थकान को बढ़ा सकती है। हर 45–60 मिनट में हिलना-डुलना अच्छा रहता है।

अगला दिन पहले से थका हुआ रहता है, मूड और कॉन्कंट्रेशन प्रभावित होते हैं। रोज एक समान सोने-उठने की आदत मदद करती है।

वात-सम्बन्धी असंतुलन, अनियमित दिनचर्या, कम आराम, गलत खान-पान को कारण माना गया है; संतुलित दिनचर्या, हल्का व्यायाम और प्राणायाम फायदेमंद होते हैं।

20 मिनट का हल्का रेस्ट: पानी पिएं, हल्की.walk करें, neck/shoulder stretch करें, deep breathing करें, स्क्रीन से दूरी रखें, हल्का स्नैक लें, अच्छी नींद की तैयारी करें।

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