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दोपहर के बाद energy crash रोज़ एक ही समय पर क्यों होता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

क्या आपको रोज़ दोपहर के खाने के बाद लगभग 2 से 4 बजे के बीच अचानक थकान, नींद या कमजोरी महसूस होती है? सुबह आप ठीक रहते हैं, काम भी आसानी से हो जाता है, लेकिन दोपहर के बाद energy अचानक गिरने लगती है। अगर यह लगभग हर दिन एक ही समय पर होता है, तो इसे केवल “आलस” समझना सही नहीं है।

दोपहर के बाद energy कम होने के पीछे शरीर की natural body clock, भोजन, नींद, hydration और daily routine जैसे कई कारण हो सकते हैं। अच्छी बात यह है कि छोटे-छोटे बदलाव कई लोगों में इस समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं।

Body clock भी दोपहर में energy कम कर सकती है

हमारे शरीर में एक natural biological clock होती है, जिसे circadian rhythm कहा जाता है। यह नींद, जागना, शरीर के तापमान और alertness को प्रभावित करती है।

सुबह शरीर अधिक alert महसूस कर सकता है। दोपहर के बाद, खासकर lunch के कुछ समय बाद, alertness में naturally कमी आ सकती है। इसलिए अगर आपका energy crash रोज़ लगभग एक ही समय पर होता है, तो आपकी body clock भी इसका एक कारण हो सकती है।

यह जरूरी नहीं कि हर बार कोई बीमारी हो।

Lunch के बाद ज्यादा नींद क्यों आती है?

दोपहर के भजन का असर भी एनर्जी पर पड़ सकता है अगर लंच बहुत भारी है तो उसमें रिफाइन कार्बोहाइड्रेट मीठे खाद्य पदार्थ या बहुत अधिक तेल है, तो खाने के बाद सुस्ती अधिक महसूस हो सकती है बहुत बड़ा मिल पचाने के लिए शरीर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है इसके कारण आपको कुछ समय के लिए भारीपन नींद या काम में मन ना लगे जैसा महसूस हो सकता है इसलिए लंच का मतलब पेट पूरी तरह भर लेना नहीं है बल्कि संतुलन भोजन लेना है

इसलिए lunch का मतलब पेट पूरी तरह भर लेना नहीं, बल्कि संतुलित भोजन लेना होना चाहिए।

सुबह की नींद पूरी न होना भी कारण हो सकता है

अगर आप रोज देर रात तक जागते हैं या आपकी नींद बार-बार टूटती है तो शरीर दोपहर तक अपनी कमी दिखाना शुरू कर सकता है|

कई लोग सुबह कॉफी या चाय से खुद को एक्टिव रखते हैं लेकिन क्या caffeine  का असर कम होने के बाद दोपहर में थकान ज्यादा महसूस हो सकती है इसलिए केवल के caffeine बढ़ाने की बजाय अपनी स्लिप रूटिंग पर भी ध्यान देना चाहिए ताकि आपको पूरा दिन थका थका महसूस ना हो|

पानी कम पीना भी energy गिरा सकता है

हल्का डिहाइड्रेशन भी कुछ लोगों में थकान सर दर्द चक्कर या कंसंट्रेशन कम होने जैसी समस्या से जुड़ा हो सकता है|

अगर आपका काम लंबे समय तक बैठकर करने वाला है और आप पानी पीना भूल जाते हैं तो दोपहर तक शरीर में  fluids की कमी हो सकती है या पानी की कमी हो सकती है, पूरे दिन नियमित रूप से पानी पीना बेहतर है बजाय इसके की एक साथ बहुत सारा पानी पिया जाए और यह आपके शरीर में पानी की पूर्ति करता है |

लगातार बैठे रहने से भी शरीर सुस्त हो जाता है

सुबह से लगातार कंप्यूटर या अपने desk पर बैठकर काम करना भी दोपहर की fatigue को बढ़ा सकता है लंच के तुरंत बाद कई घंटे तक बैठने की वजह 5-10 मिनट की हल्की वह क्या स्ट्रेचिंग करना हेल्पफुल हो सकता है थोड़ी फिजिकल एक्टिविटी शरीर और दिमाग दोनों को फिर से अलर्ट महसूस करने में मदद कर सकती है तो सुस्ती से बैठे ना रहे 15,20 मिनट घूम फिर के आए

Breakfast और lunch के बीच बहुत लंबा gap

अगर सुबह का ब्रेकफास्ट बहुत कम है और आप उसे स्किप कर देते हैं

तो दोपहर तक बहुत ज्यादा भूख लग सकती है इसके बाद व्यक्ति जल्दी-जल्दी और जरूरत से ज्यादा खाना खा सकता है लेकिन इसका एक नुकसान भी है 

इससे लंच के बाद भारीपन और स्लिपीनेस बढ़ सकते हैं|

इसलिए सुबह और दोपहर के भोजन के बीच बहुत लंबा गैप रखने से बच्चे और अपने शरीर की भूख के संकेत पर ध्यान दें

कब यह केवल routine की बात नहीं हो सकती?

कभी-कभी रोज़ होने वाली थकान के पीछे कोई हेल्थ प्रॉब्लम भी हो सकती है उदाहरण के लिए खून की कमी ,थायराइड जैसी दिक्कत डायबिटीज ,स्लीप डिसऑर्डर या न्यूट्रीशनल डिफिशिएंसी से भी लगातार थकान हो सकती है अगर energy crash बहुत ज्यादा है लंबे समय से बना हुआ है तो उसके साथ वजन में भी बदलाव बहुत ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब आना , सांस फूलना ,चक्कर, दिल की धड़कन तेज होना या अन्य सिंपटम दिखाई दे रहे थे तो

डॉक्टर से सलाह लेना अनिवार्य है सिर्फ थकान और किसी डिफिशिएंसी या बीमारी का diagonse खुद ना करें

दोपहर की energy बनाए रखने के आसान तरीके

आप अपने दिन के कार्यक्रम में कुछ छोटे बदलाव आजमा सकते हैं:

  • लंच कुछ भारी न बनाएं
  • भोजन में प्रोटीन, सब्जियां और फाइबर शामिल करें
  • अधिक से अधिक मिठाई वाले खाद्य पदार्थ और प्रक्रिया किए गए कार्बोहाइड्रेट कम करें
  • दिन भर बराबर पानी पिएं
  • लंच के बाद 5 से 10 मिनट की हल्की चलने की कोशिश करें
  • लंबे समय तक बैठे रहने से बचें
  • हर दिन लगभग एक ही समय पर सोएं और उठें
  • सुबह के स्वाभाविक रोशनी का लाभ उठाएं
  • थकान होने पर लगातार कॉफी या ऊर्जा ड्रिंक्स पर निर्भर न रहें

Ayurveda के नजरिए से क्या समझें?

आयुर्वेद में पाचन और एनर्जी के लिए अग्नि को महत्वपूर्ण माना जाता है अग्नि का मतलब पाचन अग्नि से है बहुत भारी भोजन और अनियमित ईटिंग पैटर्न और ग़लत फूड कांबिनेशन कुछ लोगों में भोजन के बाद heavyness और स्लो बॉडी की भावना बढ़ा देता है या बड़ा सकता है

आयुर्वेदिक एप्रोच में भोजन की मात्रा, भोजन का समय, डाइजेशन के अनुसार डाइट और डेली रूटीन पर ध्यान दिया जाता है हालांकि लगातार या गंभीर थकान को केवल भी करनी मानकर medical causes को नजअंदाज नहीं करना चाहिए 

आखिर रोज़ एक ही समय पर energy crash क्यों होता है?

अगर आपकी energy रोज़ लगभग एक ही समय पर गिरती है, तो सबसे पहले body clock, lunch pattern, sleep, hydration और physical activity को देखें। अक्सर समस्या इन दैनिक आदतों के combination से होती है।

लेकिन अगर पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और बेहतर routine के बावजूद fatigue बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज न करें। बार-बार होने वाली unexplained fatigue शरीर का signal हो सकती है और जरूरत पड़ने पर medical evaluation जरूरी है।

दोपहर में थोड़ी natural tiredness सामान्य हो सकती है, लेकिन ऐसी थकान जो रोज़ आपके काम, concentration या daily life को प्रभावित करे, उसे समझना और उसका कारण जानना ज्यादा महत्वपूर्ण है

References

Overcoming Your Midafternoon Energy Slump | Johns Hopkins Medicine

The role of IL-1 in postprandial fatigue - PMC

Why Do I Feel Tired After Eating?

Food Poisoning Symptoms | Food Safety | CDC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

यह आपके circadian rhythm (body clock) और भोजन के बाद की प्रक्रियाओं के संयुक्त असर से होता है लंच के बाद alertness naturally कम हो सकती है।

भारी भोजन, refined carbs, मीठे पदार्थ या अधिक तेल से पाचन पर ज़्यादा मेहनत पड़ती है, जिससे हल्का भारीपन और सुस्ती लगती है।

अचानक चक्कर आना, आँखों में नींद, फोकस की कमी, सिरदर्द या कमजोरी महसूस होना।

सही है; अगर यह नियमित है, तो केवल आलस मानना गलत है,यह body clock, खाने की आदतें, नींद, hydration आदि का मिलाजुला प्रभाव हो सकता है।

हल्का डिहाइड्रेशन भी थकान, सिरदर्द और ध्यान केंद्रित करने में कमी कर सकता है; दिनभर धीरे-धीरे पानी पिएं।

caffeine का असर समय के साथ घट सकता है; साथ में sleep routine और hydration पर भी ध्यान दें; केवल caffeine बढ़ाने से समस्या ठीक नहीं होगी।

हाँ, लंच के बाद 5–10 मिनट हल्की गर्मजोशी/चलना,Stretching या छोटी brisk walk alertness बढ़ा सकते हैं।

हाँ; देर रात सोना या नींद बार-बार टूटना दिनभर energy गिराने में बड़ा कारण बनता है।

लंच में संतुलित प्लान रखें: प्रोटीन, मौसमी सब्जियाँ, फाइबर; रिफाइन्ड कार्बोहाइड्रेट और मीठे पदार्थ कम करें।

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