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Arrhythmia (अनियमित धड़कन) - दवा से आगे आयुर्वेद का रोल

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 21 May, 2026
  • category-iconUpdated on 27 Jun, 2026
  • category-iconHeart Health
  • blog-view-icon5058

    बैठे-बैठे अगर अचानक दिल की धड़कन बहुत तेज़, बहुत धीमी या अजीब सी लगने लगे, तो डॉक्टर इसे Arrhythmia (अरिदमिया) कहते हैं। अक्सर हम इसे मामूली घबराहट या थकान मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन अगर ऐसा बार-बार हो रहा है, तो समझ लीजिए शरीर के अंदर कुछ गड़बड़ है। आजकल की दवाइयां धड़कन को तुरंत कंट्रोल तो कर लेती हैं, जो इमरजेंसी में बहुत ज़रूरी भी है। लेकिन आयुर्वेद इसे सिर्फ दिल की बीमारी नहीं मानता। आयुर्वेद के हिसाब से इसका सीधा कनेक्शन आपकी दिमागी टेंशन, कच्ची नींद, खराब रूटीन और वात-पित्त के बिगड़ने से है। हमारा मकसद सिर्फ रोज़ की गोलियों से धड़कन दबाना नहीं है, बल्कि इस परेशानी को जड़ से मिटाकर शरीर को अंदर से मज़बूत बनाना है।

    Arrhythmia क्या है और इसे समझना क्यों ज़रूरी है? 

    जब दिल अपनी नॉर्मल गति भूलकर बहुत तेज़, धीमा या अजीब तरीके से धड़कने लगे, तो इसे Arrhythmia कहते हैं। कई लोग बस 'धड़कन बढ़ना' कहकर इसे टाल देते हैं, पर ये हमेशा नॉर्मल नहीं होता। दिल हमारे शरीर का मेन इंजन है, जिसकी चाल बिगड़ने पर पूरे शरीर का खून का दौरा हिल जाता है। कभी-कभी बस हल्की घबराहट होती है, तो कभी चक्कर, सांस फूलना या बेहोशी तक की नौबत आ जाती है। आज की भागदौड़, हर वक्त की टेंशन और उल्टे-सीधे रूटीन ने इस बीमारी को बहुत आम बना दिया है।

    सामान्य धड़कन और अनियमित धड़कन में अंतर 

    नॉर्मल हालत में हमारा दिल एक सेट स्पीड से धड़कता है। लेकिन जब यह बिना बात के अजीब तरह से धड़कने लगे, तो यह शरीर के बिगड़े हुए सिस्टम की निशानी है।

    • सामान्य धड़कन: आमतौर पर दिल एक पक्की ताल में धड़कता है। दौड़ने या डरने पर स्पीड थोड़ी बढ़ ज़रूर जाती है, पर कुछ देर में खुद ही नॉर्मल हो जाती है।
    • अनियमित धड़कन: इसमें दिल एकदम से बहुत तेज़, धीमा या रुक-रुक कर धड़कता है। कुछ लोगों को सीने में अजीब सी धक-धक या ऐसा लगता है जैसे दिल एक सेकंड के लिए रुक गया हो।

    Arrhythmia के प्रमुख प्रकार क्या हैं? 

    यह बीमारी सिर्फ एक तरह की नहीं होती। हर किसी में इसके लक्षण अलग होते हैं। कुछ लोगों को ये कभी-कभार होती है, तो कुछ को लंबे समय तक परेशान करती है।

    • Tachycardia: इसमें दिल नॉर्मल से बहुत ज़्यादा तेज़ धड़कने लगता है। इंसान को सीने में भारी धक-धक और बेचैनी होने लगती है।
    • Bradycardia: जब दिल की चाल एकदम सुस्त पड़ जाए। ऐसे में शरीर कमज़ोर लगने लगता है, चक्कर आते हैं और हमेशा थकावट छाई रहती है।
    • Atrial Fibrillation: इसमें दिल की धड़कन कांपती हुई और बेतरतीब लगती है। सीने में अजीब सी हलचल महसूस होती है।
    • Premature Beats: इसमें बीच-बीच में कोई एक्स्ट्रा धड़कन आ जाती है। लोग बताते हैं कि ऐसा लगता है जैसे दिल अचानक 'उछल' गया हो या 'रुककर' चला हो।

    शरीर कौन-कौन से शुरुआती संकेत देता है? 

    यह दिक्कत अक्सर बहुत दबे पांव आती है। शुरुआत में इसके लक्षण इतने हल्के होते हैं कि लोग इसे आम थकावट समझ लेते हैं।

    • अचानक धड़कन तेज़ होना: बैठे-बैठे बिना वजह ऐसा लगना कि सीने में दिल बहुत ज़ोर से धक-धक कर रहा है।
    • सीने में कंपन: कुछ लोगों को लगता है जैसे सीने के अंदर कुछ कांप रहा है या धड़कन की ताल टूट गई है।
    • सांस फूलना: ज़रा सा चलने-फिरने पर ही सांस उखड़ने लगती है और सीने में भारीपन आ जाता है।
    • हमेशा थका-थका लगना: शरीर में बिल्कुल जान न लगना और बिना मेहनत किए ही थकान हावी रहना।
    • चक्कर या सिर घूमना: अचानक से आंखों के आगे अंधेरा छाना या सिर हल्का महसूस होना।
    • घबराहट और बेचैनी: बिना किसी साफ़ वजह के अंदर ही अंदर घबराहट होना।
    • नींद खराब होना: रात को लेटते ही धड़कन कुछ ज़्यादा ही महसूस होती है, जिससे नींद टूट जाती है।
    • रुक-रुक कर धड़कना: ऐसा लगना जैसे दिल एक पल को रुक गया और फिर झटके से चालू हुआ।

    Arrhythmia के प्रमुख कारण क्या हो सकते हैं? 

    इसके पीछे हमेशा दिल की कोई बड़ी बीमारी हो, ऐसा कतई नहीं है। कई बार हमारी लाइफस्टाइल, टेंशन और शरीर के अंदर की गड़बड़ियां भी दिल की चाल बिगाड़ देती हैं।

    • लगातार टेंशन और फिक्र: हर वक्त दिमाग पर बोझ रखने से शरीर हमेशा अलर्ट रहता है, जिससे धड़कन तेज़ या अजीब हो जाती है।
    • नींद की कमी: अगर नींद पूरी न हो, तो शरीर और दिल दोनों को आराम नहीं मिलता, जो धड़कन को बिगाड़ता है।
    • चाय-कॉफी की लत: बहुत ज़्यादा चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक पीने से भी दिल की धड़कन बेकाबू हो जाती है।
    • सिगरेट और शराब: ये दोनों चीज़ें खून के दौरे को बिगाड़ती हैं, जिससे अरिदमिया का खतरा काफी बढ़ जाता है।
    • बीपी और शुगर: हाई बीपी और शुगर में दिल पर हर वक्त प्रेशर बना रहता है, जो उसकी चाल खराब कर देता है।
    • हार्मोन का ऊपर-नीचे होना: शरीर में हार्मोन्स के बिगड़ने से भी कुछ लोगों की धड़कन डगमगा जाती है।
    • भारी थकावट: शरीर को आराम न देने से आपका पाचन और पूरा सिस्टम ही कमज़ोर पड़ जाता है।
    • खराब रूटीन: देर रात तक उल्लू की तरह जागना, बाहर का उल्टा-सीधा खाना और कसरत न करना इसे और बढ़ावा देते हैं।

    केवल दवाओं से आगे क्यों सोचना ज़रूरी है? 

    ये सच है कि दवाइयां धड़कन को तुरंत कंट्रोल कर लेती हैं, लेकिन सिर्फ़ गोलियों के भरोसे बैठे रहना बिल्कुल भी सही नहीं है। क्योंकि धड़कन बिगड़ने के पीछे सिर्फ़ दिल नहीं, बल्कि आपकी दिमागी उलझन, अधूरी नींद और खराब लाइफस्टाइल भी है। अगर आप हमेशा टेंशन में रहेंगे और शरीर को आराम नहीं देंगे, तो ये बीमारी बार-बार लौटकर आएगी। इसलिए आज के समय में सिर्फ़ बीमारी के लक्षणों को दबाने के बजाय, पूरे शरीर, मन और रूटीन को सुधारने पर सबसे ज़्यादा ध्यान दिया जाता है।

    Arrhythmia को नज़रअंदाज़ करने से क्या नुकसान हो सकते हैं? 

    शुरू में भले ही ये मामूली घबराहट लगे और लोग इसे थकावट मानकर टाल दें। लेकिन दिल की चाल का लंबे समय तक बिगड़ा रहना शरीर को अंदर से खोखला कर देता है।

    • हर वक्त कमज़ोरी: जब दिल सही से नहीं धड़केगा, तो शरीर को पूरा खून और ऑक्सीजन नहीं मिलेगी, जिससे आप हमेशा थके-थके रहेंगे।
    • चक्कर और बेहोशी: धड़कन बहुत धीमी या अजीब होने पर अचानक से चक्कर आना या बेहोश होकर गिर पड़ने का खतरा रहता है।
    • सांस की दिक्कत: ज़रा सा काम करने या सीढ़ियां चढ़ने पर ही सांस बुरी तरह फूलने लगती है।
    • डर और घबराहट: बार-बार सीने में अजीब सी धड़कन महसूस होने से इंसान अंदर ही अंदर डरा रहता है।
    • नींद की बर्बादी: रात को बिस्तर पर लेटते ही धड़कन परेशान करती है, जिससे नींद खराब होती है।
    • दिल पर ज़ोर: लंबे समय तक ऐसा चलने से बेचारे दिल को ज़रूरत से ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
    • बड़ी बीमारी का डर: अगर इसे यूं ही छोड़ दिया जाए, तो आगे चलकर दिल की कोई बहुत बड़ी बीमारी होने का खतरा बना रहता है।

    आयुर्वेद में हृदय और “हृदय धातु” को कैसे देखा जाता है? 

    आयुर्वेद दिल को सिर्फ खून सप्लाई करने की कोई मशीन नहीं मानता। इसके हिसाब से दिल हमारी भावनाओं, जान और दिमागी शांति का सबसे बड़ा केंद्र है। दिल की सेहत सीधे तौर पर हमारी अंदरूनी ताक़त से जुड़ी है। जब शरीर में वात, पित्त और कफ का बैलेंस बिगड़ता है, तो दिल की चाल भी डगमगा जाती है। खासकर जब शरीर में वात बहुत ज़्यादा भड़कता है, तो दिल की धड़कन ऊपर-नीचे होने लगती है। यही वजह है कि डर, हर वक्त की टेंशन और खराब रूटीन का सीधा असर हमारे दिल पर पड़ता है, जिसे हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

    आयुर्वेद में इलाज का असली तरीका

    आयुर्वेद इसे सिर्फ दिल की कोई बीमारी नहीं मानता। असल में, यह आपके अंदर की घबराहट, दिनभर की दिमागी उलझन और शरीर की भयंकर थकावट का नतीजा है। इसीलिए आयुर्वेद सिर्फ धड़कन को कंट्रोल करने के पीछे नहीं भागता। इसका सीधा सा फंडा है आपके शरीर में इतनी जान फूंक देना कि आपका दिमाग अपने आप एकदम शांत पड़ जाए:

    • वात को काबू में लाना: धड़कन के अचानक ऊपर-नीचे होने के पीछे सबसे बड़ा हाथ शरीर में बेकाबू हुई 'वात' यानी गैस का होता है। इलाज की शुरुआत ही इस भड़की हुई वात को शांत करने से होती है। जैसे ही वात अपनी जगह पर आती है, दिल की चाल अपने आप पुरानी वाली लय पकड़ लेती है।
    • दिमाग को ठंडा रखना: दिन-रात की टेंशन और मन में बैठा हुआ कोई अनजाना सा डर सीधा आपके दिल पर हथौड़ा मारता है। यही वजह है कि इलाज के दौरान मन को बिल्कुल शांत और रिलैक्स रखने की सबसे ज़्यादा सलाह दी जाती है।
    • शरीर की खोई हुई जान लौटाना: जब शरीर अंदर से पूरी तरह निचोड़ चुका होता है और थक जाता है, तो मजबूरी में सारा एक्स्ट्रा भार सीधे बेचारे दिल पर आ गिरता है। आयुर्वेद बस आपके शरीर की उसी खत्म हो चुकी बैटरी को दोबारा चार्ज करने का काम करता है, ताकि कमज़ोरी दूर हो सके।
    • हाज़मा ठीक करना: यह बात तो हम सब जानते हैं कि अगर सुबह पेट साफ न हो या गैस बने, तो पूरा शरीर ही हिल जाता है। इसीलिए इस बीमारी को जड़ से ठीक करने की पहली सीढ़ी आपके हाज़मे को बिल्कुल दुरुस्त रखना है।
    • रूटीन की मरम्मत: आधी-आधी रात तक जागकर फोन चलाना और भूख न होने पर भी कुछ न कुछ खाते रहना। सच बताऊं तो जब तक आप अपना ये बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल नहीं सुधारेंगे, धड़कन नॉर्मल नहीं होने वाली। सही वक़्त पर सोना और सुबह समय पर उठना ही इसका सबसे पक्का इलाज है।

    इलाज में काम आने वाली असरदार जड़ी-बूटियाँ  

    हमारे आस-पास कुछ ऐसी कमाल की देसी जड़ी-बूटियां हैं, जो शरीर को अंदर से रिलैक्स करके नई जान डाल देती हैं:

    • अर्जुन: दिल की मजबूती की बात हो और अर्जुन की छाल का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। यह दिल को ताक़त देकर धड़कन को एकदम सही लय में बांधकर रखती है।
    • अश्वगंधा: शरीर की थकावट और दिमागी टेंशन को जड़ से खत्म करने में इसका कोई जवाब नहीं।
    • ब्राह्मी: दिमाग को एकदम कूल और शांत रखने के लिए ब्राह्मी सबसे बेहतरीन है। यह हर तरह की बेचैनी को खत्म कर देती है।
    • जटामांसी: टेंशन की वजह से अगर रातों की नींद उड़ चुकी है, तो यह मन को शांत करके बहुत सुकून भरी नींद लाती है।
    • शंखपुष्पी: दिमागी उलझन को सुलझाने और नर्वस सिस्टम का बैलेंस बनाने में यह गज़ब का काम करती है।

    सुकून देने वाली आयुर्वेदिक थेरेपी 

    दवाओं से परे, कुछ ऐसे पुराने देसी तरीके भी हैं जो शरीर की सारी थकावट निचोड़ कर पक्की वाली शांति देते हैं:

    • अभ्यंग (गुनगुने तेल की मालिश): जड़ी-बूटियों वाले हल्के गर्म तेल से जब शरीर की मालिश होती है, तो सारी जकड़न और टेंशन वहीं खत्म हो जाती है और बदन एकदम हल्का लगने लगता है।
    • शिरोधारा: जब माथे के बीचों-बीच लगातार औषधीय तेल की धार गिरती है, तो ऐसा लगता है मानो दिमाग का सारा स्ट्रेस, डर और बेचैनी पानी के साथ बह गई हो।
    • स्वेदन (हल्की भाप): हल्की गर्माहट और भाप से शरीर का भारीपन दूर होता है और इंसान खुद को एकदम रिलैक्स महसूस करता है।
    • योग और प्राणायाम: लंबी-गहरी सांसें लेने और हल्का योग करने से मन तुरंत शांत होता है और दिल की धड़कन अपने आप कंट्रोल में आ जाती है।

    सहायक आहार: क्या खाएं / क्या न खाएं

    संतुलित आहार शरीर और हृदय दोनों को स्थिर बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    क्या खाएं?

    • ताजा और हल्का भोजन
    • हरी सब्जियाँ और मौसमी फल
    • मूंग दाल और सुपाच्य भोजन
    • पर्याप्त पानी और हल्के पेय
    • सीमित मात्रा में घी
    • सूखे मेवे और पौष्टिक आहार

    क्या न खाएं?

    • बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन
    • अत्यधिक चाय, कॉफी और कैफीन
    • बहुत ज्यादा मसालेदार और भारी भोजन
    • पैकेट बंद और कृत्रिम खाद्य पदार्थ
    • लंबे समय तक खाली पेट रहना

    डॉक्टर से कब सलाह लें?

    अनियमित धड़कन को केवल तनाव या थकान समझकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, खासकर जब यह बार-बार महसूस होने लगे या रोज़मर्रा की जिंदगी को प्रभावित करे।

    • दिल की धड़कन बार-बार तेज़ या अस्थिर महसूस होना
    • सीने में कंपन या भारीपन महसूस होना
    • अचानक चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस होना
    • हल्का काम करने पर भी सांस फूलना
    • लगातार बेचैनी और घबराहट बने रहना
    • बार-बार कमजोरी और थकान महसूस होना
    • रात में धड़कन बढ़ने से नींद प्रभावित होना
    • लक्षण कई दिनों या हफ्तों तक बने रहना

    निष्कर्ष

    Arrhythmia यानी अनियमित धड़कन केवल दिल की समस्या नहीं मानी जाती, बल्कि यह शरीर, मन और जीवनशैली के असंतुलन से भी जुड़ी हो सकती है। आधुनिक चिकित्सा इसे हृदय की विद्युत गतिविधि में गड़बड़ी और धड़कन की लय में बदलाव से जोड़कर देखती है, जबकि आयुर्वेद इसे मुख्य रूप से वात दोष असंतुलन, मानसिक तनाव और शरीर की अस्थिरता से संबंधित मानता है।

    लगातार तनाव, अनियमित दिनचर्या, कम नींद और अत्यधिक मानसिक दबाव इस स्थिति को और बढ़ा सकते हैं। इसलिए केवल धड़कन नियंत्रित करने के बजाय शरीर, मन और जीवनशैली के संतुलन पर ध्यान देना लंबे समय तक बेहतर हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

    FAQs

    हर अनियमित धड़कन का मतलब गंभीर हृदय रोग नहीं होता। कई बार तनाव, नींद की कमी, कमजोरी या अत्यधिक कैफीन के कारण भी धड़कन अस्थायी रूप से बदल सकती है। हालांकि यदि धड़कन बार-बार असामान्य महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। शरीर के संकेतों को समझना जरूरी माना जाता है। लगातार समस्या बने रहने पर जांच कराना बेहतर होता है।

    लंबे समय तक खाली पेट रहने पर शरीर में कमजोरी और अस्थिरता महसूस हो सकती है। इससे कुछ लोगों को धड़कन तेज या घबराहट जैसी अनुभूति हो सकती है। शरीर की ऊर्जा कम होने पर nervous system अधिक संवेदनशील हो सकता है। इसलिए बहुत लंबे अंतराल तक भोजन न करना बेहतर माना जाता है। संतुलित और समय पर भोजन शरीर को स्थिर रखने में मदद कर सकता है।

    लगातार चिंता और मानसिक दबाव शरीर को तनाव की स्थिति में बनाए रख सकते हैं। इससे दिल की धड़कन तेज, भारी या अनियमित महसूस हो सकती है। कई लोगों में घबराहट के समय सीने में कंपन जैसा अनुभव भी होता है। यदि मन लंबे समय तक अस्थिर रहे, तो शरीर पर उसका असर दिखाई देने लगता है। इसलिए मानसिक शांति को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

    लगातार स्क्रीन देखने, देर रात तक जागने और मानसिक थकान के कारण शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। इससे तनाव और नींद की गड़बड़ी बढ़ सकती है, जिसका असर धड़कन की लय पर भी महसूस हो सकता है। लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर की सक्रियता भी कम हो जाती है। इसलिए बीच-बीच में आराम और शारीरिक गतिविधि जरूरी मानी जाती है।

    कुछ लोगों में गैस, भारीपन और पाचन गड़बड़ी के दौरान धड़कन अधिक महसूस हो सकती है। जब पाचन कमजोर होता है, तो शरीर में बेचैनी और अस्थिरता बढ़ सकती है। कई बार पेट में दबाव बढ़ने से सीने में असहजता भी महसूस होती है। इसलिए पाचन संतुलन को भी शरीर की स्थिरता से जुड़ा माना जाता है।

    कुछ लोगों को बहुत ज्यादा गर्मी, उमस या ठंड के दौरान धड़कन में बदलाव महसूस हो सकता है। मौसम बदलने पर शरीर को संतुलन बनाए रखने के लिए अधिक प्रयास करना पड़ता है। यदि शरीर पहले से कमजोर या तनाव में हो, तो यह प्रभाव अधिक महसूस हो सकता है। पर्याप्त पानी, आराम और संतुलित दिनचर्या शरीर को स्थिर रखने में मदद कर सकती हैं।

    जब दिल की धड़कन लंबे समय तक अस्थिर रहती है, तो शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और आराम महसूस नहीं हो पाता। इससे व्यक्ति को बिना ज्यादा काम के भी थकान महसूस हो सकती है। कई लोगों में कमजोरी और शरीर भारी लगने की शिकायत भी रहती है। लगातार थकान को केवल सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    कुछ लोगों में अनियमित धड़कन के दौरान अचानक बेचैनी, पसीना या डर जैसा महसूस हो सकता है। यह शरीर की अचानक प्रतिक्रिया का हिस्सा हो सकता है। कई बार व्यक्ति को ऐसा लगता है कि शरीर पर नियंत्रण कम हो रहा है। यदि यह स्थिति बार-बार महसूस हो, तो इसे समझना और उचित सलाह लेना जरूरी माना जाता है।

    हल्की शारीरिक गतिविधि शरीर और मन दोनों को स्थिर रखने में सहायक मानी जाती है। नियमित चलना, हल्का योग और श्वास अभ्यास तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं। इससे शरीर की ऊर्जा और सहनशक्ति बेहतर महसूस हो सकती हैं। हालांकि बहुत ज्यादा मेहनत वाले व्यायाम बिना सलाह के नहीं करने चाहिए। संतुलित गतिविधि अधिक उपयोगी मानी जाती है।

    नींद शरीर और हृदय दोनों के संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। कम नींद लेने पर शरीर लगातार तनाव की स्थिति में बना रह सकता है। इससे धड़कन तेज या अस्थिर महसूस होने की संभावना बढ़ सकती है। समय पर सोना और पर्याप्त आराम लेना शरीर को स्थिर रखने में मदद कर सकता है। अच्छी नींद मानसिक शांति और ऊर्जा दोनों को बेहतर बना सकती है।

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