बवासीर और एनल फिशर में क्या फ़र्क है? सिर्फ़ दर्द से पहचानना क्यों मुश्किल है

Information By Dr. VD Aggarwal     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

कभी टॉयलेट जाते वक्त पेन होता है, कभी ब्लीडिंग दिख जाती है और कभी कुछ दिन सब नॉर्मल लगता है। ऐसे सिम्प्टम होने पर लोग अक्सर मान लेते हैं कि उन्हें बवासीर है, लेकिन हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं। इसकी वजह से एनल फिशर भी हो सकता है।

बाबा, ये गुदा के फिशर और गुदा के आस-पास की आम समस्याएँ हैं। इनके लक्षण कुछ हद तक समान हो सकते हैं, इसलिए सिर्फ दर्द के आधार पर इन्हें अलग समझना मुश्किल हो जाता है। दोनों के कारण और इलाज भी अलग हो सकते हैं।

बवासीर क्या होता है

बावासर जिसे पाईस या हेमरोइड भी कहते हैं, अनус और लोवर रेक्टम के अंदर या आसपास सूजे हुए ब्लड वेसल्स होती हैं। ये कॉन्स्टिपेशन, स्टूल पास करते वक्त बार-बार जोर लगाना और प्रेग्नेंसी जैसे फैक्टर्स से रिलेटेड हो सकती हैं।

बवासीर में ब्राइट रेड कलर आ सकता है, एनस के पास लम्प का स्वेलिंग महसूस हो सकती है और खुजली या इर्रिटेशन भी हो सकती है। इंटर्नल पाइल्स में अक्सर पेन नहीं होता, जबकि इंटर्नल पिल्स में पेन हो सकता है, स्पेशली अगर ब्लड क्लॉट बन जाए इसलिए।

इसलिए हर बार दर्द होना बवासीर का पक्का संकेत नहीं है |

एनल फिशर क्या होता है

एनल फिशर गुदा की नाजुक त्वचा में होने वाला एक छोटा सा कट या फट होता है। ये अक्सर हार्ड स्टूल पास करने की वजह से या कब्ज के कारण होता है। इसमें स्टूल करते वक्त तेज दर्द या कटिंग जैसा अनुभव हो सकता है। दर्द कभी-कभी टॉयलेट जाने के बाद कुछ समय तक रह सकता है। कभी-कभी टॉयलेट पेपर या स्टूल की सतह पर ब्राइट रेड रंग दिख सकता है।

फिसर में दर्द की वजह से कुछ लोग टॉयलेट जाने से बचते हैं, इससे कब्ज बढ़ सकता है और समस्या और असुविधाजनक हो सकती है |

दोनों में फर्क कैसे समझें

बवासीर और एनल फिशर के लक्षण ओवरलैप कर सकते हैं, लेकिन कुछ आम अंतर हैं।

  • पेन फिसर में स्टूल पास करते वक्त तेज़ दर्द आम है, इंटरनल पाइल्स में अक्सर दर्द नहीं होता जबकि एक्सटर्नल पाइल्स दर्दनाक हो सकती हैं |
  • ब्लीडिंग दोनों में राइट ब्लड का कलर आ सकता है, सिर्फ ब्लड के कलर से डायग्नोसिस नहीं किया जा सकता।
  • अनुस के पास लम्प पाइल्स हो सकते हैं, फिशर के साथ भी कभी छोटा स्किन टैग डेवलप हो सकता है।
  • खाज या चिढ़ना ये पाइल्स में आम हो सकते हैं, लेकिन दूसरी परिस्थितियों में भी हो सकते हैं।
  • फिसर में दर्द कितनी देर रहता है, दर्द बाउल मूवमेंट के बाद भी रह सकता है लेकिन हर व्यक्ति का अनुभव अलग होता है।

एक ही दर्द से डायग्नोसिस करना क्यों मुश्किल है

सबसे बड़ी प्रॉब्लम ये है कि हर पर्सन के सिम्प्टम्स अलग हो सकते हैं। किसी को पिवेस होने पर पेन नहीं होता, तो किसी को एक्सटर्नल पाइल्स में काफी डिस्कम्फर्ट हो सकता है। इसी तरह फिशर में पेन प्रॉमिनेंट हो सकता है, लेकिन हर फिशर में ब्लीडिंग जरूरी नहीं है।

इसके अलावा रेक्टल ब्लीडिंग और एनल पेन के पीछे इन्फेक्शन, स्किन कंडीशंस और आंत से जुड़ी दूसरी प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं, इसलिए सिर्फ़ सिम्पटम्स देखकर खुद से डायग्नोसिस करना या हर प्रॉब्लम को पाइल्स समझ लेना सही नहीं है। डॉक्टर सिम्पटम्स और फिजिकल एग्ज़ामिनेशन के जरिए कारण पहचान सकते हैं।

राहत के लिए क्या कर सकते हैं

अगर कब्ज़ या सख्त पख़ानों की समस्या है तो कुछ आसान आदतें मददगार हो सकती हैं 

  • अपने आहार में फल, सब्जियाँ और साबुत अनाज जैसे फाइबर युक्त भोजन शामिल करें।
  • पर्याप्त पानी पिएँ अगर किसी मेडिकल कंडीशन की वजह से फ्लूइड लिमिट नहीं है।
  • पाखाना करते समय ज्यादा जोर लगाने से बचो |
  • गर्म पानी में दस-पंद्रह मिनट बैठने यानी सीधा बैठने से असुविधा में राहत मिल सकती है |
  • वीना, डॉक्टर की डिवाइस के पाइल्स की क्रीम में दूसरी दवा मत लगाना।

अगर ब्लीडिंग बार-बार हो रही है, पेन गंभीर है या लक्षण सुधार नहीं हो रहे हैं तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। भारी ब्लीडिंग, चक्कर आना, बेहोशी या काले तार जैसी पाखाने होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें।

आयुर्वेद क्या कहता है

आयुर्वेद में बाउल हैबिट, सुझाव और डेली रूटीन को महत्व दिया जाता है। ट्रेडिशनल आयुर्वेदिक प्रैक्टिसेज में कॉन्स्टिपेशन को मैनेज करने के लिए डाइट और लाइफस्टाइल पर फोकस किया जाता है—फाइबर रिच फूड, पर्याप्त हाइड्रेशन और रेगुलर मूवमेंट जैसी आदतें। ये मॉडर्न मेडिकल एडवाइस के साथ भी मेल खाती हैं। लेकिन बवासीर और एनल फिशर अलग हैं और दोनों का ट्रीटमेंट भी अलग होता है। इसलिए हर्बल रेमेडीज़ पर निर्भर न रहें और डायग्नोसिस कराएँ।

निष्कर्ष

बाबा सिम्पटम्स और एनल फिशर के सिम्पटम्स सिमिलर हो सकते हैं, लेकिन दोनों एक ही प्रॉब्लम नहीं हैं। फिशर में स्टूल पास करते वक्त शार्प पेन कॉमन है जबकि इनरनल पाइल्स में ब्लीडिंग बिना पेन के भी हो सकती है। सिर्फ पेन या ब्लीडिंग के बेसिस पर ये तय नहीं किया जा सकता कि प्रॉब्लम बाबा सर की है या फिशर। सही डायग्नोसिस की, अप्रोप्रियेट ट्रीटमेंट और लॉन्ग टर्म रिलीफ की दिशा में पहला स्टेप है।

संदर्भ

Anal Fissures - StatPearls - NCBI Bookshelf

Constipation - StatPearls - NCBI Bookshelf

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, किसी व्यक्ति को दोनों परिस्थितियाँ एक साथ हो सकती हैं।

कई तीव्र फिशर उचित देखभाल और कब्ज़ को मैनेज करने से ठीक हो सकते हैं, लगातार फिशर के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है।

हाँ, इंटरनल पाइल्स में बिना किसी खास दर्द के ब्लीडिंग हो सकती है।

नहीं, फिशर और डाइजेस्टिव ट्रैक की दूसरी कंडीशन्स भी ब्लीडिंग का कारण हो सकती हैं।

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