याद कीजिए कि पिछली बार जब आप किसी शादी या पार्टी में बिल्कुल सज-धजकर पहुंचे थे, तो किसी ने आपसे यह कहा था "अरे भाई, क्या बात है? रात भर सोए नहीं क्या? आंखें कितनी थकी हुई लग रही हैं और नीचे ये काले घेरे कैसे आ गए?" उस वक्त मन तो करता है कि सामने वाले को पकड़कर समझाएं कि भाई, मैं तो रात को पूरे नौ घंटे घोड़े बेचकर सोया हूँ! फिर भी ये कम्बख्त काले घेरे आईने में सुबह-सुबह सबसे पहले मुंह चिढ़ाने आ जाते हैं। हम अक्सर अपनी आँखों के नीचे छाने वाले इस अंधेरे का सारा दोष बेचारी नींद के सिर मढ़ देते हैं। लेकिन सच तो यह है कि नींद की कमी इस कहानी का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है।
यह बड़ी अजीब उलझन है कि हम अपनी त्वचा का कितना भी ख्याल रख लें, महंगे से महंगा क्रीम लगा लें, लेकिन ये जिद्दी घेरे जाने का नाम ही नहीं लेते। कभी-कभी तो लोग बिना सोचे-समझे टोक देते हैं जिससे अच्छा-खासा मूड भी खराब हो जाता है।
परिवार का प्रभाव
कई बार आँखों के नीचे का यह कालापन आपकी किसी गलती की वजह से नहीं होता, बल्कि यह आपको अपने माता-पिता या दादा-दादी से तोहफे में मिलता है। सीधे शब्दों में कहें तो हमारे शरीर की बनावट कैसी होगी, यह हमारे जींस तय करते हैं। अगर आपके परिवार में शुरुआत से ही लोगों की आँखों के नीचे की त्वचा पतली है या वहां का रंग थोड़ा गहरा है, तो बहुत मुमकिन है कि आपके चेहरे पर भी वह असर दिखाई दे।
इस तरह के काले घेरों का आपकी नींद या थकान से कोई लेना-देना नहीं होता। यह आपकी त्वचा की प्राकृतिक बनावट का हिस्सा होते हैं। ऐसे में आप कितनी भी कोशिश कर लें या दिन भर सोते रहें, यह पूरी तरह गायब नहीं होते क्योंकि यह आपके शरीर की बनावट से जुड़े हैं।
उम्र का बढ़ना और त्वचा का ढीला होना
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे चेहरे की त्वचा में बहुत से प्राकृतिक बदलाव आने लगते हैं। हमारी आँखों के ठीक नीचे की जो त्वचा होती है, वह पूरे शरीर में सबसे ज्यादा नाजुक और पतली होती है। जवानी में इस त्वचा के नीचे कोलेजन नाम का एक तत्व और हल्का सा फैट होता है, जो इसे उभरा हुआ और चमकदार बनाए रखता है। लेकिन उम्र के साथ यह कोलेजन और फैट धीरे-धीरे कम होने लगते हैं।
जब यह अंदरूनी परत पतली हो जाती है, तो त्वचा के ठीक नीचे मौजूद खून की बारीक नसें साफ दिखाई देने लगती हैं। यही नसें बाहर से देखने पर गहरे नीले, बैंगनी या काले रंग के घेरे जैसी नजर आती हैं। इसे आप उम्र का एक खूबसूरत और स्वाभाविक पड़ाव मान सकते हैं, जिसे रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन सही खान-पान से इसकी रफ्तार को थोड़ा धीमा जरूर किया जा सकता है।
काले घेरों के लिए जिम्मेदार अन्य मुख्य कारण
नींद के अलावा हमारी कुछ रोजमर्रा की आदतें और शरीर के अंदरूनी बदलाव भी इन काले घेरों को न्योता देते हैं:
- पानी की कमी: शरीर में पानी कम होने से आँखों के नीचे की त्वचा बेजान और धँसी हुई दिखने लगती है जिससे वहां छाया सी बन जाती है।
- नजर का तनाव: घंटों लगातार मोबाइल या कंप्यूटर देखने से आँखों की नसें फैल जाती हैं और उनके आस-पास कालापन बढ़ने लगता है।
- खून की कमी: शरीर में आयरन की कमी होने से आँखों के आस-पास की कोशिकाओं को पूरा ऑक्सीजन नहीं मिल पाता और रंग गहरा हो जाता है।
- एलर्जी और खुजली: किसी चीज से एलर्जी होने पर जब हम बार-बार आँखों को रगड़ते हैं, तो वहां की नाजुक नसें टूट जाती हैं और कालापन आता है।
- तेज धूप का असर: बिना चश्मे के तेज धूप में घूमने से आँखों के आस-पास मेलेनिन नाम का तत्व बढ़ जाता है जो त्वचा को डार्क बना देता है।
आयुर्वेद का नजरिया और वात-पित्त का खेल
अब थोड़े अपने पुराने आयुर्वेद के पन्नों को पलटते हैं, जहां सेहत की हर छोटी-बड़ी बात का बहुत ही सुंदर जवाब छिपा है। आयुर्वेद के अनुसार, हमारी आँखों के नीचे की त्वचा का काला पड़ना शरीर में 'वात' और 'पित्त' दोष के असंतुलन को दर्शाता है। जब हम बहुत ज्यादा सूखा, ठंडा या बासी खाना खाते हैं, तो शरीर में वात यानी हवा का रूखापन बढ़ जाता है, जिससे त्वचा अपनी चमक खोने लगती है और वहां श्यामता यानी कालापन आने लगता है।
ठीक इसी तरह, बहुत ज्यादा गुस्सा करने, रात को देर तक जागने या गर्म और मिर्च-मसालेदार खाना खाने से शरीर में पित्त यानी गर्मी बढ़ जाती है। यह बढ़ी हुई गर्मी हमारी आँखों के आस-पास की नाजुक नसों में सूजन और कालापन पैदा करती है। इसके अलावा, जब हमारा पाचन तंत्र ठीक नहीं होता और पेट में कब्ज बनी रहती है, तो शरीर के अंदर हानिकारक टॉक्सिंस जमा होने लगते हैं। यह टॉक्सिंस सबसे पहले हमारी आँखों के नीचे की पतली त्वचा पर ही काले घेरों के रूप में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं।
मन की चिंता और मानसिक थकावट
हम अक्सर शरीर की थकावट को तो गिन लेते हैं, लेकिन मन की थकावट को भूल जाते हैं। जब आपका दिमाग किसी न किसी चिंता में लगातार डूबा रहता है, तो उसका सीधा असर आपके चेहरे पर दिखता है। मानसिक तनाव के समय हमारा शरीर एक खास तरह का हार्मोन बनाता है जो खून के बहाव को मुख्य अंगों की तरफ मोड़ देता है। इसके कारण चेहरे की नसों में खून का दौरा धीमा पड़ जाता है।
जब आँखों के नीचे की नसों में खून सही रफ्तार से नहीं दौड़ता, तो वहां एक तरह का ठहराव आ जाता है। यही ठहराव बाहर से देखने पर काले साए की तरह नजर आता है। इसलिए कई बार सब कुछ ठीक होने के बाद भी सिर्फ मन की उदासी या काम का प्रेशर आपके चेहरे की रौनक छीन लेता है। दिल को खुश रखना और दिमाग को शांत रखना भी इन काले घेरों की एक बहुत बड़ी दवा है।
इन काले घेरों से निपटने के सरल और घरेलू रास्ते
अगर आप भी इन जिद्दी घेरों से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो बाजार की केमिकल वाली चीजों के पीछे भागने के बजाय अपने घर की रसोई की तरफ रुख कीजिए। रोज रात को सोने से पहले अपनी अनामिका उंगली यानी रिंग फिंगर में शुद्ध बादाम का तेल या गाय का देसी घी लेकर आँखों के आस-पास बहुत हल्के हाथों से गोल-गोल मालिश करें। इससे वहां रुका हुआ खून दोबारा से ठीक से बहने लगेगा और त्वचा को पोषण मिलेगा।
इसके साथ ही, हफ्ते में दो बार कच्चे आलू या खीरे के पतले टुकड़े काटकर अपनी बंद आँखों पर रखकर दस मिनट के लिए लेट जाएं। आलू और खीरे की प्राकृतिक ठंडक आँखों के आस-पास की बढ़ी हुई गर्मी और सूजन को सोख लेती है। सबसे जरूरी बात यह है कि अपने दिनभर के रूटीन में पानी की मात्रा बढ़ाएं और हरी पत्तेदार सब्जियों को अपनी थाली में जगह दें, ताकि शरीर अंदर से साफ और सेहतमंद बना रहे।
निष्कर्ष
तो जनाब, पूरी बात का सीधा सा मतलब यही है कि आईने में दिखने वाले इन काले घेरों को देखकर खुद को कोसना या परेशान होना बंद कर दीजिए। यह कोई बहुत बड़ी बीमारी नहीं है, बल्कि आपके शरीर का एक प्यारा सा इशारा है कि उसे आपकी थोड़ी और ज्यादा परवाह की जरूरत है। चाहे वह पानी सही मात्रा में पीना हो, धूप से बचना हो, या फिर मन की चिंताओं को थोड़ा कम करना हो।
अपनी त्वचा से प्यार करना सीखिए और यह याद रखिए कि हर चेहरे की अपनी एक अलग कहानी और खूबसूरती होती है। चाय की आखिरी चुस्की के साथ बस यही कहूँगा कि थोड़ा हंसिए, थोड़ा मुस्कुराइए, गैजेट्स से अपनी आँखों को थोड़ा आराम दीजिए और खुद को अंदर से सेहतमंद बनाइए। जब आपका मन अंदर से खुश और शांत रहेगा, तो चेहरे पर चमक अपने आप लौट आएगी और ये काले घेरे खुद-ब-खुद विदा हो जाएंगे!
References
Ministry of Ayush, Government of India

