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क्या Ayurveda बहुत slow काम करता है? Chronic disease में सही expectation क्या होनी चाहिए

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

लोग अक्सर सोचते हैं कि आयुर्वेदिक इलाज बहुत सुस्त होता है। जब भी हम किसी पुरानी बीमारी से परेशान होते हैं तो मन में यही सवाल आता है कि क्या जड़ी-बूटियाँ सच में जल्दी फायदा पहुँचाएंगी। असल में आयुर्वेद सिर्फ बीमारी के लक्षणों को नहीं दबाता, बल्कि यह बीमारी की जड़ तक जाता है। शरीर के दोष वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में थोड़ा समय लगता है। इसलिए इसे धीमा मान लिया जाता है। लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं है। इस लेख में हम यही समझेंगे कि पुरानी बीमारियों में आयुर्वेद से आपको क्या उम्मीद रखनी चाहिए।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं

वरिष्ठ आयुर्वेदिक डॉक्टरों का मानना है कि आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोगों के पास सब्र नहीं बचा है। वे चाहते हैं कि गोली खाते ही बीमारी दूर हो जाए। एक्सपर्ट कहते हैं कि जब आप पाँच साल से गलत खानपान से शरीर को खराब कर रहे हैं तो उसे ठीक होने के लिए कम से कम पाँच महीने तो देने ही चाहिए। सही उम्मीद यही है कि आप आयुर्वेद को जीवन जीने का एक तरीका मानें न कि सिर्फ कोई जादुई दवा। जो लोग अपनी डाइट ठीक रखते हैं और डॉक्टर की हर बात मानते हैं वे बहुत जल्दी और बेहतर नतीजे देखते हैं।

क्या सच में आयुर्वेद बहुत धीमा असर करता है

यह एक बहुत बड़ा भ्रम है कि आयुर्वेद हमेशा धीमा काम करता है। अगर आपको सर्दी खाँसी या बुखार जैसी कोई नई और छोटी समस्या है तो सही आयुर्वेदिक दवा कुछ ही घंटों या दिनों में असर दिखा सकती है। दिक्कत तब आती है जब बीमारी बहुत पुरानी हो चुकी होती है। सालों पुरानी बीमारी को शरीर से बाहर निकालने में शरीर को वक्त चाहिए होता है। आयुर्वेद आपके शरीर की अंदरूनी सफाई करता है और इम्युनिटी को मजबूत बनाता है। इस पूरी प्रक्रिया में समय लगता है जिसे लोग अक्सर दवा का धीमा असर मान लेते हैं।

पुरानी बीमारियाँ क्या हैं और आयुर्वेद इन्हें कैसे देखता है

पुरानी बीमारियाँ वे होती हैं जो लंबे समय से आपके शरीर में घर कर चुकी हैं। जैसे गठिया शुगर ब्लड प्रेशर या थायराइड। आधुनिक इलाज में अक्सर इन बीमारियों को सिर्फ कंट्रोल किया जाता है। लेकिन आयुर्वेद का नज़रिया अलग है। आयुर्वेद मानता है कि ये बीमारियाँ खराब लाइफस्टाइल गलत खानपान और शरीर में जमे हुए ज़हरीले तत्वों की वजह से होती हैं। आयुर्वेद का लक्ष्य इन ज़हरीले तत्वों को शरीर से बाहर निकालकर अंगों को दोबारा से मजबूत बनाना है। जड़ से काम करने की इसी सोच की वजह से पुरानी बीमारियों के इलाज में ज़्यादा धैर्य की ज़रूरत होती है।

पुरानी बीमारियों में सही उम्मीदें क्या होनी चाहिए

अगर आप किसी पुरानी बीमारी के लिए आयुर्वेद अपना रहे हैं तो कुछ बातें साफ होनी चाहिए।

  • रातों-रात चमत्कार की उम्मीद न रखें। बीमारी जितने साल पुरानी है उसे ठीक होने में उतने ही महीने लग सकते हैं।
  • इलाज के दौरान सिर्फ दवा पर निर्भर न रहें। आपकी डाइट और दिनचर्या भी उतनी ही ज़रूरी है।
  • शुरुआत में कभी-कभी लक्षण थोड़े बढ़ सकते हैं क्योंकि शरीर अंदर की गंदगी बाहर निकालता है इसे देखकर घबराएँ नहीं।
  • धैर्य रखें और डॉक्टर के बताए गए समय तक पूरा कोर्स ज़रूर करें बीच में दवा छोड़ने से कोई फायदा नहीं होगा।

किन चीज़ों से सख्त परहेज़ करना ज़रूरी है

अगर आप चाहते हैं कि दवा जल्दी असर करे तो कुछ चीज़ों से पूरी तरह दूर रहना होगा।

  • फ्रिज का ठंडा पानी और बासी खाना बिल्कुल न खाएँ यह पाचन की आग को बुझा देता है।
  • जंक फूड मैदा और बहुत ज़्यादा तली-भुनी चीज़ों से बचें।
  • रात के समय दही और भारी खाना खाने से शरीर में कफ बढ़ता है इसे रोकें।
  • दूध और खट्टे फलों को कभी भी एक साथ न खाएँ यह शरीर को नुकसान पहुँचाता है।
  • शराब और सिगरेट जैसी आदतों को पूरी तरह छोड़ दें वरना दवा का कोई असर नहीं होगा।

बीमारी के लक्षणों में कैसे पहचान करें कि असर हो रहा है

आयुर्वेदिक इलाज शुरू करने के बाद शरीर में कई बदलाव आते हैं जिन्हें पहचानना ज़रूरी है। सबसे पहले आपकी नींद में सुधार आता है और सुबह उठने पर शरीर में हल्कापन महसूस होता है। पेट का हाजमा बेहतर होने लगता है और गैस या कब्ज़ की शिकायत दूर होने लगती है। आपकी ऊर्जा का स्तर बढ़ता है और दिनभर थकान नहीं होती। अगर आपको ये सब लक्षण दिख रहे हैं तो समझ जाइए कि दवा सही दिशा में काम कर रही है। भले ही मुख्य बीमारी का दर्द अभी कम न हुआ हो पर शरीर अंदर से ठीक हो रहा है।

इलाज के दौरान क्या खाना चाहिए

आयुर्वेद में खानपान का बहुत महत्व है। सही खाना आधी दवा का काम करता है।

  • हमेशा ताज़ा और घर का बना गरम खाना ही खाएँ।
  • खाने में घी और गुनगुने पानी का इस्तेमाल बढ़ाएँ, जिससे पाचन सही रहे।
  • मौसमी फल और हरी सब्ज़ियाँ अपनी डाइट में ज़रूर शामिल करें।
  • रात का खाना हमेशा हल्का रखें और सोने से कम से कम दो घंटे पहले खा लें।
  • मूंग की दाल और दलिया जैसी आसानी से पचने वाली चीज़ें खाएँ ताकि पेट पर ज़्यादा ज़ोर न पड़े।

क्या हर आयुर्वेदिक दवा का असर देर से होता है

यह सोच बिल्कुल गलत है कि हर आयुर्वेदिक दवा महीनों में असर करती है।

  • पेट दर्द, गैस या एसिडिटी जैसी दिक्कतों में कुछ चूर्ण या सिरप तुरंत राहत देते हैं।
  • बुखार या सर्दी में काढ़ा पीने से कुछ ही घंटों में शरीर को आराम मिलने लगता है।
  • जोड़ों के दर्द में आयुर्वेदिक तेल की मालिश से तुरंत फायदा महसूस होता है।
  • असल में असर इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी नई है या पुरानी और आपकी पाचन शक्ति कितनी मज़बूत है। कमज़ोर पाचन वाले लोगों पर दवा थोड़ा धीरे काम करती है।

इलाज में कौन-सी गलतियाँ परेशानी बढ़ा देती हैं

अक्सर लोग जाने-अनजाने में कुछ ऐसी गलतियाँ करते हैं जिनसे दवा का असर रुक जाता है।

  • डॉक्टर से बिना पूछे खुद ही इंटरनेट से पढ़कर कोई भी जड़ी-बूटी खाना शुरू कर देना।
  • परहेज़ का पालन न करना और सोचते रहना कि दवा तो खा ही रहे हैं सब ठीक हो जाएगा।
  • दो दिन दवा खाना फिर भूल जाना आयुर्वेद में नियम और समय की बहुत अहमियत होती है।
  • अपनी पुरानी दवाइयों को बिना डॉक्टर की सलाह के अचानक से बंद कर देना इससे शरीर को बड़ा नुकसान हो सकता है।
  • अपनी नींद पूरी न करना और बहुत ज़्यादा तनाव लेना।

तुरंत डॉक्टर से कब मिलना चाहिए

आयुर्वेद पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन कुछ स्थितियों में आपको तुरंत सतर्क होने की ज़रूरत होती है।

  • अगर दवा खाने के बाद शरीर पर लाल चकत्ते पड़ जाएँ या तेज़ खुजली होने लगे।
  • अगर अचानक से उल्टी, दस्त या चक्कर आने की शिकायत बहुत ज़्यादा बढ़ जाए।
  • पुरानी बीमारी का दर्द बर्दाश्त से बाहर हो जाए और कोई आराम न मिल रहा हो।
  • अगर आपका ब्लड प्रेशर या शुगर लेवल अचानक से बहुत ज़्यादा घट या बढ़ जाए।
  • साँस लेने में दिक्कत महसूस हो या छाती में भारीपन लगे, ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल जाएँ।

आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा में क्या अंतर है

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य बीमारी के कारण की पहचान कर वैज्ञानिक उपचार और लक्षणों को नियंत्रित करना। समग्र स्वास्थ्य, आहार-विहार और शरीर के संतुलन पर ध्यान देना।
उपचार का तरीका जाँच, दवाइयाँ और आवश्यकतानुसार अन्य चिकित्सकीय उपचार। जड़ी-बूटियाँ, आहार, योग, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार।
व्यक्ति का मूल्यांकन उपचार रोग, जाँच रिपोर्ट और मरीज की स्थिति के आधार पर तय किया जाता है। उपचार व्यक्ति की प्रकृति, लक्षण और समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर किया जाता है।
असर होने की गति कई स्थितियों में अपेक्षाकृत जल्दी राहत मिल सकती है। नियमित पालन के साथ धीरे-धीरे समग्र स्वास्थ्य में सुधार पर ध्यान दिया जाता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण रोग नियंत्रण, नियमित फॉलो-अप और जटिलताओं की रोकथाम पर ज़ोर। संतुलित जीवनशैली और स्वस्थ आदतों के माध्यम से लंबे समय तक स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर आयुर्वेद धीमा नहीं है बल्कि यह बहुत गहराई से काम करता है। यह आपके शरीर को एक मशीन की तरह नहीं बल्कि कुदरत के एक हिस्से की तरह देखता है। पुरानी बीमारियों को ठीक होने में वक्त लगता है क्योंकि शरीर को खुद को अंदर से रिपेयर करना होता है। अगर आप सही डाइट अच्छा लाइफस्टाइल और डॉक्टर के बताए गए नियमों का पूरी तरह से पालन करते हैं तो आयुर्वेद आपको हमेशा के लिए एक सेहतमंद ज़िंदगी दे सकता है। बस ज़रूरत है तो थोड़े धैर्य की और अपने शरीर पर भरोसा रखने की।

References

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC13075593/

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC3149400/

https://www.healthline.com/nutrition/ayurvedic-diet

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, यह एक भ्रम है। सर्दी, खाँसी या पेट दर्द जैसी नई समस्याओं में आयुर्वेदिक दवाएँ कुछ ही घंटों या दिनों में असर दिखाती हैं। केवल पुरानी (Chronic) बीमारियों की जड़ पर काम करने में समय लगता है।

बीमारी जितने साल पुरानी होती है, उसे ठीक होने में लगभग उतने ही महीने लग सकते हैं। जैसे—5 साल पुरानी बीमारी के लिए कम से कम 5 महीने का समय देना सही Expectation है।

बिल्कुल नहीं। अपने डॉक्टर की सलाह के बिना पुरानी दवाइयाँ अचानक बंद न करें, इससे शरीर को नुकसान हो सकता है।

फ्रिज का ठंडा पानी, बासी खाना, जंक फूड, मैदा, तली-भुनी चीज़ें, रात में दही, दूध के साथ खट्टे फल और शराब-सिगरेट से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।

जब आयुर्वेदिक दवा काम करना शुरू करती है, तो वह शरीर के अंदर जमे विषैले तत्वों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालती है। इस डिटॉक्स प्रक्रिया के कारण शुरुआत में लक्षण थोड़े उभरे हुए महसूस हो सकते हैं।

मुख्य बीमारी का असर दिखने से पहले आपकी नींद में सुधार होने लगता है, सुबह शरीर हल्का महसूस होता है, पेट का हाजमा ठीक रहता है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है।

नहीं। एसिडिटी, पेट दर्द, साधारण बुखार या जोड़ों के दर्द में मालिश के तेल जैसी चीज़ों का असर तुरंत या कुछ ही घंटों में महसूस होने लगता है।

गलत खानपान पाचन शक्ति (अग्नि) को कमजोर करता है। यदि आप परहेज नहीं करेंगे, तो शरीर में दवा का अवशोषण सही से नहीं हो पाएगा और असर रुक जाएगा।

ताज़ा और गर्म भोजन, मूंग दाल, दलिया, हरी सब्जियाँ, थोड़ा देसी घी और गुनगुने पानी का सेवन करना फायदेमंद होता है।

त्वचा पर चकत्ते/खुजली होने, चक्कर आने, सांस लेने में तकलीफ होने या अचानक ब्लड प्रेशर/शुगर बहुत ज़्यादा घटने-बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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