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आपकी daily routine ही आपकी बीमारी की वजह बन रही है? सच जानिए

Information By Dr. Keshav Chauhan

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी सुख-सुविधाओं के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि हमने अपने शरीर को एक 'मशीन' समझ लिया है। लेकिन कड़वा सच यह है कि आपकी यही थका देने वाली दिनचर्या—देर से सोकर उठना, प्रोसेस्ड फूड का सहारा लेना और घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना—धीरे-धीरे आपके शरीर के भीतर एक 'साइलेंट किलर' को पाल रही है। यह कोई साधारण थकान नहीं है, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की आहट है जो समय रहते न संभली गई, तो आपके भविष्य को अंधकार में डाल सकती है। अब समय आ गया है कि आप रुकें, सोचें और अपनी आदतों के उस जाल को समझें जो आपको धीरे-धीरे बीमारी की ओर धकेल रहा है।

क्या है 'लाइफस्टाइल डिज़ीज़' (Lifestyle Disease)?

सरल शब्दों में कहें तो यह वह बीमारी है जो किसी वायरस या बैक्टीरिया से नहीं, बल्कि आपकी गलत आदतों से पैदा होती है। जब आप प्रकृति के नियमों के विरुद्ध जाकर अपने शरीर का इस्तेमाल करते हैं, तो शरीर के आंतरिक अंग (जैसे मेटाबॉलिज्म और हार्ट) अपना संतुलन खोने लगते हैं। इसे 'मॉडर्न सिंड्रोम' भी कहा जा सकता है, जहाँ शरीर खुद को ही नुकसान पहुँचाने लगता है।

इसके अलग-अलग रूप: बीमारी के चेहरे

लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ अक्सर तीन चरणों में आती हैं:

  • प्रारंभिक असंतुलन: जब आपको केवल थकान, चिड़चिड़ापन या गैस महसूस होती है।
  • क्रोनिक अवस्था: जब यह डायबिटीज (Diabetes), हाइपरटेंशन (Hypertension) या पीसीओडी (PCOD) का रूप ले लेती है।
  • जटिल अवस्था: जब अंग (जैसे किडनी या दिल) काम करना कम कर देते हैं।

शरीर के ये 'अलार्म' नजरअंदाज न करें

आपका शरीर बीमार होने से पहले आपको कई संकेत देता है। क्या आप इन्हें महसूस कर रहे हैं?

  • बिना किसी मेहनत के भी लगातार थकान रहना।
  • पेट के आसपास बढ़ती चर्बी (Central Obesity)।
  • छोटी-छोटी बातों पर तनाव या घबराहट होना।
  • नींद का पूरा न होना या सुबह उठने पर ताजगी महसूस न करना।

बीमारी की असली जड़: क्यों और कैसे?

मुख्य अपराधी आपके आसपास ही छिपे हैं:

  • शारीरिक निष्क्रियता: दिन भर कुर्सी से चिपके रहना।
  • अनियमित खान-पान: पोषक तत्वों की जगह केवल कैलोरी का सेवन।
  • तनाव और नींद की कमी: जो आपके हार्मोनल बैलेंस को पूरी तरह बिगाड़ देती हैं।

खतरे की घंटी: जोखिम और जटिलताएँ

यदि आप आज नहीं सुधरे, तो कल की तस्वीर डरावनी हो सकती है। भय (Fear): अनुपचारित छोड़ देने पर ये बीमारियाँ हार्ट अटैक, स्ट्रोक या परमानेंट ऑर्गन डैमेज का कारण बन सकती हैं।

जोखिम कारक (Risk Factors)

संभावित जटिलता (Complications)

अत्यधिक तनाव

स्ट्रोक और मानसिक अवसाद

जंक फूड का सेवन

फैटी लिवर और कोलेस्ट्रॉल

नींद की कमी

कमजोर इम्यून सिस्टम और हार्ट फेलियर

धूम्रपान/शराब

कैंसर और सांस की गंभीर बीमारियाँ

कैसे होती है पहचान? मॉडर्न और आयुर्वेद का संगम

बीमारी का पता लगाना केवल रिपोर्ट पढ़ना नहीं है, बल्कि यह समझना है कि आपके शरीर की स्वाभाविक लय (Rhythm) कहाँ टूटी है। आधुनिक चिकित्सा जहाँ शरीर के अंगों की भौतिक स्थिति को देखती है, वहीं आयुर्वेद जड़ तक पहुँचने की कोशिश करता है।

आधुनिक चिकित्सा पद्धति (Modern Medical Diagnosis)

  • ब्लड बायोमार्कर: खून की जांच से कोलेस्ट्रॉल, शुगर लेवल और इन्फ्लेमेशन (जैसे CRP) का पता लगाया जाता है।
  • इमेजिंग टेस्ट: अल्ट्रासाउंड या MRI के जरिए अंगों की बनावट में आए बदलावों को देखा जाता है।
  • हार्मोनल प्रोफाइल: यह समझने के लिए कि क्या तनाव ने आपके सिस्टम को बिगाड़ दिया है।

आयुर्वेदिक पहचान: "Identify Your Dosha"

आयुर्वेद के अनुसार, आपकी बीमारी आपके 'दोष' के बिगड़ने से होती है। नीचे दी गई श्रेणियों से पहचानें अपना मुख्य दोष:

  1. वात (Vata): यदि आप बहुत अधिक सोचते हैं, गैस की समस्या है, त्वचा में रूखापन है और नींद कम आती है।
  2. पित्त (Pitta): यदि आपको गुस्सा जल्दी आता है, एसिडिटी रहती है, पसीना अधिक आता है और शरीर में गर्मी महसूस होती है।
  3. कफ (Kapha): यदि आप सुस्त महसूस करते हैं, वजन तेजी से बढ़ता है और शरीर में हमेशा भारीपन रहता है।

चूंकि 'लाइफस्टाइल डिज़ीज़' कोई एक बीमारी नहीं बल्कि आदतों का एक समूह है, आयुर्वेद इसे बहुत गहराई से देखता है। यहाँ बताया गया है कि कैसे प्राचीन विज्ञान और जीवा आयुर्वेद की आधुनिक पद्धति इसे जड़ से खत्म करने में आपकी मदद करती है।

आयुर्वेद की दृष्टि में लाइफस्टाइल डिज़ीज़: असंतुलन की कहानी

आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर प्रकृति का एक छोटा रूप है। जब हम अपनी प्रज्ञा (बुद्धि) के विरुद्ध जाकर गलत समय पर खाते या सोते हैं, तो उसे 'प्रज्ञापराध' कहा जाता है। यही बीमारियों की असली जड़ है।

  • दोषों का प्रकोप: गलत दिनचर्या सबसे पहले आपकी जठराग्नि (पाचन अग्नि) को मंद करती है।
  • आम (Toxins) का बनना: जब भोजन ठीक से नहीं पचता, तो शरीर में 'आम' यानी चिपचिपे विषाक्त पदार्थ बनने लगते हैं।
  • स्रोतों में अवरोध: यह 'आम' आपके शरीर की सूक्ष्म नलिकाओं (Channels) को ब्लॉक कर देता है, जिससे ओज (Immunity) कम हो जाती है और बीमारियाँ घर कर लेती हैं।

जीवा आयुर्वेद का इलाज: केवल दवा नहीं, जड़ पर प्रहार

जीवा आयुर्वेद में हम केवल लक्षणों को नहीं दबाते, बल्कि 'आयुनीक' (Ayunique™) दृष्टिकोण अपनाते हैं। यह मानता है कि हर व्यक्ति की प्रकृति अलग है, इसलिए इलाज भी पूरी तरह व्यक्तिगत होना चाहिए।

  • मूल कारण की पहचान: डॉक्टर आपकी शारीरिक प्रकृति, मानसिक स्थिति और जीवनशैली का विश्लेषण करते हैं।
  • संपूर्ण समाधान: उपचार में दवाइयों के साथ-साथ कस्टमाइज्ड डाइट चार्ट और लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन शामिल होता है।
  • दीर्घकालिक राहत: इसका उद्देश्य शरीर की अपनी हीलिंग पावर को वापस सक्रिय करना है ताकि बीमारी दोबारा न लौटे।

प्रकृति का खजाना: प्रभावी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

ये जड़ी-बूटियाँ न केवल बीमारी को नियंत्रित करती हैं, बल्कि शरीर के अंगों को पोषण भी देती हैं:

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): तनाव को कम करने और कोर्टिसोल लेवल को संतुलित करने के लिए रामबाण।
  • त्रिफला (Triphala): पाचन तंत्र को साफ करने और 'आम' (Toxins) को बाहर निकालने के लिए श्रेष्ठ।
  • गिलोय (Giloy): रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने और मेटाबॉलिज्म को ठीक करने में सहायक।
  • हल्दी (Curcumin): शरीर के भीतर की सूजन (Inflammation) को खत्म करने के लिए।

आयुर्वेदिक थेरेपी: पंचकर्म और बाहरी उपचार

जब बीमारी गहरी हो जाती है, तो केवल दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। तब शरीर की 'सर्विसिंग' यानी शुद्धिकरण की आवश्यकता होती है:

  • अभ्यंग (Abhyanga): औषधीय तेलों से मालिश, जो रक्त संचार बढ़ाती है और नर्वस सिस्टम को शांत करती है।
  • शिरोधारा (Shirodhara): तनाव और मानसिक थकान के लिए, जहाँ माथे पर तेल की धार गिराई जाती है।
  • बस्ती (Basti): वात रोगों के लिए सबसे प्रभावी उपचार, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को जड़ से बाहर निकालता है।

आपका भोजन ही आपकी औषधि है: डाइट चार्ट

एक पुरानी कहावत है, "यदि भोजन सही है, तो दवा की जरूरत नहीं; और यदि भोजन गलत है, तो दवा काम नहीं करेगी।"

क्या खाएं (Recommended Foods)

क्या न खाएं (Foods to Avoid)

ताजा और गर्म भोजन: आसानी से पचने वाला।

प्रोसेस्ड/जंक फूड: पिज्जा, बर्गर, चिप्स।

मौसमी फल व सब्जियां: लौकी, तोरई, पपीता, सेब।

ठंडी चीजें: फ्रिज का पानी, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिक्स।

साबुत अनाज: जौ, रागी, पुराना चावल, मूंग दाल।

मैदा और रिफाइंड शुगर: सफेद ब्रेड, बिस्किट, मिठाई।

हर्बल चाय: अदरक, तुलसी और दालचीनी का काढ़ा।

विरुद्ध आहार: दूध के साथ मछली या खट्टे फल।

जीवा आयुर्वेद में मरीजों का परीक्षण: जड़ तक पहुँचने की कला

जब आप जीवा आयुर्वेद में कदम रखते हैं, तो हमारी जाँच प्रक्रिया केवल आपकी रिपोर्ट्स तक सीमित नहीं रहती। हम 'आयुनीक' (Ayunique™) प्रोटोकॉल का पालन करते हैं:

  • प्रकृति विश्लेषण (Prakriti Analysis): हर व्यक्ति का शरीर 5 तत्वों के अलग संयोजन से बना है। हम यह पता लगाते हैं कि आपकी जन्मजात प्रकृति क्या है।
  • नाड़ी परीक्षा (Pulse Diagnosis): हमारे अनुभवी डॉक्टर आपकी कलाई की धड़कन (नाड़ी) के जरिए शरीर के आंतरिक अंगों की स्थिति और दोषों के असंतुलन को पहचानते हैं।
  • प्रश्नावली (Deep Consultation): हम आपकी मानसिक स्थिति, तनाव के स्तर, पाचन शक्ति और पारिवारिक इतिहास पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

हमारी मरीज़ों की देखभाल की चरण-दर-चरण प्रक्रिया:

कॉल की उम्मीद करें: अपनी संपर्क जानकारी जमा करें, या आप हमें 0129 4264323 पर कॉल भी कर सकते हैं।

अपॉइंटमेंट की पुष्टि।

आप अपॉइंटमेंट तय कर सकते हैं और हमारे आयुर्वेदिक विशेषज्ञों से सलाह लेने के लिए हमारे क्लिनिक आ सकते हैं।

अगर आपको अपने आस-पास हमारा क्लिनिक नहीं मिल रहा है, तो आप 0129 4264323 पर ऑनलाइन सलाह भी ले सकते हैं। इसकी कीमत सिर्फ़ 49 रुपये (नियमित कीमत 299 रुपये) है और आप घर बैठे ही हमारे डॉक्टरों से सलाह ले सकते हैं।

विस्तृत जाँच

जीवा डॉक्टर आपकी स्वास्थ्य समस्या की असली वजह जानने के लिए पूरी और विस्तृत जाँच करेंगे।

असली वजह पर आधारित इलाज

जीवा डॉक्टर लक्षणों और असली वजह को ठीक करने के लिए बहुत असरदार, प्राकृतिक और आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल करके आपके लिए खास इलाज सुझाएँगे।

स्वास्थ्य लाभ की समय सीमा (Healing Timeline)

चूँकि आयुर्वेदिक उपचार बीमारी की जड़ पर काम करता है, इसलिए इसमें थोड़ा धैर्य आवश्यक है:

  • शुरुआती सुधार (1-4 सप्ताह): ऊर्जा के स्तर में सुधार, बेहतर पाचन और गहरी नींद।
  • रोग नियंत्रण (1-3 महीने): मुख्य लक्षणों (जैसे बढ़ा हुआ शुगर या तनाव) में स्थिरता आना।
  • स्थायी लाभ (4-6 महीने+): शरीर का पुनरुद्धार और बीमारी के दोबारा लौटने की संभावना में कमी।

क्या परिणाम उम्मीद कर सकते हैं? (Problem vs. Solution)

यहाँ एक तुलना दी गई है कि इलाज से पहले और बाद में आप क्या बदलाव महसूस करेंगे:

समस्या (इलाज से पहले)

समाधान (जीवा उपचार के बाद)

थकान और सुस्ती: दिन भर ऊर्जा की कमी महसूस होना।

स्फूर्ति और उत्साह: सुबह उठते ही ताजगी और दिन भर सक्रियता।

पाचन की गड़बड़ी: गैस, एसिडिटी और कब्ज की पुरानी समस्या।

स्वस्थ मेटाबॉलिज्म: भोजन का सही पाचन और शरीर को पोषण मिलना।

दवाओं पर निर्भरता: केवल लक्षणों को दबाने वाली गोलियाँ।

प्राकृतिक नियंत्रण: बीमारी के जड़ से खत्म होने के कारण दवाओं में कमी।

मानसिक तनाव: चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या।

मानसिक शांति: बेहतर फोकस, धैर्य और सुकून भरी नींद।

जीवा आयुर्वेद में इलाज की अनुमानित लागत

अपनी सेहत के लिए ज़रूरी आर्थिक निवेश को समझना ज़रूरी है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं की लागत में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी मेडिकल ज़रूरतों के हिसाब से सबसे सही विकल्प चुन सकें।

इलाज की लागत

जो मरीज़ नियमित, लगातार देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और कंसल्टेशन की मासिक लागत आमतौर पर 3,000 रुपये से 3,500 रुपये के बीच होती है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित शुरुआती लागत है। अंतिम लागत मरीज़ की बीमारी की सही प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करती है।

प्रोटोकॉल

ज़्यादा व्यापक और व्यवस्थित तरीके के लिए, हम खास पैकेज प्रोटोकॉल देते हैं। ये प्लान शारीरिक लक्षणों और पूरी जीवनशैली में सुधार, दोनों पर ध्यान देने के लिए बनाए गए हैं। पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल की लागत में एक बार में 15,000 रुपये से 40,000 रुपये तक का पेमेंट शामिल होता है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

जिन मरीज़ों को गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की ज़रूरत होती है, उनके लिए हमारे जीवाग्राम केंद्र बेहतरीन इलाज का अनुभव देते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में बना एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है, और यह ये सुविधाएँ देता है:

  • असली पंचकर्म थेरेपी
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक इलाज सेवाएँ
  • आरामदायक रहने की जगह
  • और भी कई जीवन-स्तर सुधारने वाली सुविधाएँ

जीवाग्राम में 7 दिनों के लिए पूरी तरह से समर्पित वेलनेस स्टे की लागत लगभग 1 लाख रुपये है, जो आपके शरीर और मन को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए लगातार, व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

पिछले कुछ सालों में, जीवा आयुर्वेद ने हज़ारों ऐसे मरीजों का भरोसा जीता है जो प्राकृतिक और पर्सनलाइज़्ड हेल्थकेयर समाधान ढूंढ रहे हैं। जीवा आयुर्वेद पर मरीजों के भरोसे के कुछ मुख्य कारण ये हैं:

  • बीमारी की जड़ पर आधारित इलाज

पारंपरिक इलाज के उलट, जो सिर्फ़ बीमारी के लक्षणों पर ध्यान देते हैं, आयुर्वेदिक इलाज बीमारी की जड़ को ठीक करने और शरीर में मौजूद उन अंदरूनी असंतुलनों को ठीक करने पर ज़ोर देता है जिनकी वजह से बीमारी होती है।

  • अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर

जीवा आयुर्वेद के पास अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टरों की एक बहुत बड़ी टीम है, जो किसी भी बीमारी के लिए इलाज सुझाने से पहले हर मरीज की स्थिति की अच्छी तरह से जांच करते हैं।

  • पर्सनलाइज़्ड "Ayunique" इलाज का तरीका

आयुर्वेदिक इलाज बहुत ज़्यादा पर्सनलाइज़्ड होता है और हर व्यक्ति की प्रकृति और जीवनशैली के हिसाब से तैयार किया जाता है।

  • संपूर्ण इलाज

आयुर्वेदिक इलाज सिर्फ़ दवाओं तक ही सीमित नहीं है; इसमें खान-पान और जीवनशैली में बदलाव, सांस लेने की तकनीकें, और तनाव को मैनेज करने के तरीके भी शामिल हैं, ताकि शरीर और मन का पूरी तरह से इलाज हो सके।

  • पूरे भारत में मरीजों का भरोसा

बहुत बड़ी संख्या में मरीजों ने Jiva के इलाज के तरीकों और सुझावों को अपनाने के बाद अपनी सेहत में सुधार देखा है। इससे पता चलता है कि आयुर्वेदिक इलाज के लिए लोग जीवा आयुर्वेद पर कितना भरोसा करते हैं।

  • 95% मरीजों ने इलाज शुरू करने के 3 महीने के अंदर ही अपनी सेहत में काफ़ी सुधार देखा।
  • 88% मरीजों ने एलोपैथिक दवाएँ पूरी तरह से लेना बंद कर दिया।
  • हर दिन 8000+ मरीजों का कंसल्टेशन होता है।
  • दुनिया भर में 15 लाख से ज़्यादा संतुष्ट मरीज़
  • 30+ वर्षों की आयुर्वेदिक विशेषज्ञता
  • पूरे भारत में 80+ क्लिनिक

आधुनिक उपचार vs आयुर्वेदिक उपचार: कौन सा बेहतर है?

जब बात लंबी बीमारियों की आती है, तो दोनों पद्धतियों का अपना महत्व है, लेकिन आयुर्वेद का दृष्टिकोण अधिक गहरा होता है।

विशेषता

आधुनिक चिकित्सा (Modern)

आयुर्वेदिक उपचार (Ayurveda)

दृष्टिकोण (Approach)

लक्षणों को दबाना (Symptomatic Relief)।

बीमारी की जड़ (Root Cause) का इलाज।

दवाइयाँ

केमिकल और सिंथेटिक ड्रग्स।

शुद्ध जड़ी-बूटियाँ और प्राकृतिक अर्क।

साइड इफेक्ट्स

लंबे समय तक इस्तेमाल से अन्य अंगों पर असर।

सही तरीके से लेने पर कोई दुष्प्रभाव नहीं।

इलाज का तरीका

'वन साइज फिट्स ऑल' (सबके लिए एक जैसी दवा)।

'Ayunique': आपकी प्रकृति के अनुसार व्यक्तिगत इलाज।

फोकस

केवल बीमारी को नियंत्रित करना।

शरीर के शोधन (Detox) और कायाकल्प पर।

डॉक्टर से कब मिलें? (खतरे के संकेत)

यदि आप अपनी दिनचर्या में नीचे दिए गए बदलाव महसूस कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है:

  • अचानक वजन बढ़ना या कम होना।
  • सीने में जकड़न या सांस लेने में तकलीफ।
  • लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर या शुगर लेवल।
  • रात को नींद न आना और हर वक्त चिड़चिड़पन।

अभी संपर्क करें (CTA):

अपनी सेहत के साथ समझौता न करें। जीवा आयुर्वेद के विशेषज्ञों से परामर्श लें:

  • कॉल करें: +91-129-4040404
  • वेबसाइट: www.jiva.com
  • ईमेल: info@jiva.com

निष्कर्ष 

आपकी सेहत एक निवेश है, कोई खर्च नहीं। आज की छोटी सी लापरवाही कल एक बड़ी बीमारी बन सकती है। आयुर्वेद हमें सिखाता है कि हम प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर न केवल बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि एक ऊर्जावान जीवन जी सकते हैं। देर न करें, अपनी 'प्रकृति' को जानें और जड़ से स्वस्थ होने की दिशा में पहला कदम उठाएं।

References:

FAQs

जी हाँ, बिल्कुल! जीवा के डॉक्टर आपकी वर्तमान दवाओं को ध्यान में रखते हुए ही आपका ट्रीटमेंट प्लान बनाते हैं।

नहीं, आयुर्वेद सबके लिए है। यह आपके खान-पान को आपकी बीमारी के अनुसार संतुलित करने में मदद करता है।

यह एक मिथक है। अगर बीमारी नई है, तो सुधार तुरंत दिखता है। पुरानी बीमारियों में जड़ तक पहुँचने में थोड़ा समय लगता है।

नहीं! आयुर्वेद का लक्ष्य आपको दवाओं से मुक्त करना है। एक बार शरीर का संतुलन सुधर जाए, तो दवाएं बंद की जा सकती हैं।

हाँ, नाड़ी परीक्षा आपके शरीर के दोषों की पूरी कुंडली बता देती है, यहाँ तक कि उन बीमारियों की भी जो अभी पनप रही हैं।

परहेज 'सजा' नहीं, बल्कि 'उपचार' है। हम आपको ऐसे विकल्प देते हैं जो स्वादिष्ट भी हों और स्वस्थ भी।

दवाएं असर करती हैं, लेकिन पंचकर्म रिकवरी की गति को 10 गुना बढ़ा देता है। आप वीकेंड थेरेपी भी ले सकते हैं।

जी हाँ, जीवा की वीडियो कंसल्टेशन प्रक्रिया बहुत गहन है और हमारे डॉक्टर हर बारीक जानकारी का विश्लेषण करते हैं।

 जीवा में बच्चों की ग्रोथ और इम्यूनिटी के लिए विशेष और सुरक्षित उपचार उपलब्ध हैं।

यदि आप बिना डॉक्टर की सलाह के खुद दवाएं लेते हैं, तो नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञ की सलाह पर ली गई दवा पूरी तरह सुरक्षित है।

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