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Digital Lifestyle Body Movement को कैसे खत्म कर रहा है?

Information By Dr. Keshav Chauhan

चाहे आप किसी हाई-रिज़ॉल्यूशन वीडियो के रेंडर (Render) होने का इंतज़ार कर रहे हों, अपने सिस्टम पर कोई नया ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर सेटअप कर रहे हों, या फिर लगातार बैठकर कोई लंबा आर्टिकल या प्रोजेक्ट ड्राफ्ट कर रहे हों, इन सबके बीच एक चीज़ जो पूरी तरह गायब हो जाती है, वह है आपके शरीर का प्राकृतिक मूवमेंट (Movement)। आज हमारी ज़िंदगी उंगलियों के कुछ टैप्स तक सिमट कर रह गई है। खाना ऑर्डर करने से लेकर कैब बुक करने और मनोरंजन तक, सब कुछ एक स्क्रीन के अंदर मौजूद है।

इस डिजिटल क्रांति ने हमारे दिमाग को तो पूरी दुनिया से जोड़ दिया है, लेकिन हमारे शरीर को एक ही कुर्सी या बिस्तर पर लकवाग्रस्त (Paralyzed) कर दिया है। मानव शरीर लाखों सालों के विकास के बाद लगातार चलने, दौड़ने और मेहनत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। लेकिन जब हम इस 'मूवमेंट मशीन' को दिन के 12-14 घंटे एक ही पोज़िशन में लॉक कर देते हैं, तो शरीर के अंदरूनी सिस्टम जंग खाने लगते हैं। जिसे हम 'स्मार्ट' और 'आरामदायक' लाइफस्टाइल समझ रहे हैं, वह असल में हमारी हड्डियों, मेटाबॉलिज़्म और इम्युनिटी को खामोशी से खत्म कर रही है। 

डिजिटल लाइफस्टाइल मूवमेंट को कैसे 'ज़ीरो' कर रहा है?

आजकल हमारा ज़्यादातर समय स्क्रीन्स (लैपटॉप, फोन, टीवी) के सामने गुज़रता है। इसने हमारे शरीर की 'NEAT' (Non-Exercise Activity Thermogenesis) यानी रोज़मर्रा की उन छोटी-छोटी हलचलों को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी होती हैं।

  • सुविधाओं का जाल: पहले हम बाज़ार जाते थे, सीढ़ियाँ चढ़ते थे, और छोटे-मोटे काम खुद करते थे। अब ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स (10-minute delivery) ने हमें अपनी जगह से उठने का कोई बहाना ही नहीं छोड़ा है।
  • बंज-वाचिंग (Binge-Watching) का नशा: वीकेंड्स पर बाहर जाने या टहलने के बजाय, हम घंटों एक ही पोज़िशन में बैठकर वेब सीरीज़ या रेसिंग इवेंट्स देखते रहते हैं। यह हमारे शरीर को लंबे समय तक पूरी तरह से 'फ्रीज़' (Freeze) कर देता है।
  • डिजिटल थकान (Screen Fatigue): दिमाग लगातार स्क्रीन पर फोकस करके इतना थक जाता है कि शरीर में असल में चलने-फिरने की कोई ऊर्जा ही नहीं बचती। इसे हम अक्सर शारीरिक थकान समझ लेते हैं, जबकि यह नर्वस सिस्टम की थकावट होती है।

'ज़ीरो मूवमेंट' से शरीर के अंदर क्या टूट रहा है?

लगातार स्क्रीन के सामने बैठे रहने से शरीर की संरचना (Anatomy) और कार्यप्रणाली (Physiology) दोनों बर्बाद हो रही हैं:

  • हड्डियों और मांसपेशियों का सूखना (Muscle Atrophy): जब आप शरीर से काम नहीं लेते, तो मांसपेशियाँ सिकुड़ने लगती हैं और हड्डियाँ कैल्शियम छोड़ने लगती हैं (Osteoporosis)। विशेष रूप से कूल्हे की मांसपेशियाँ (Hip flexors) छोटी और टाइट हो जाती हैं, जिससे कमर में दर्द रहने लगता है।
  • 'टेक्स्ट नेक' और सर्वाइकल: स्क्रीन में नीचे झुककर देखने से गर्दन पर सिर का वज़न कई गुना बढ़ जाता है। इससे रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक आकार बिगड़ जाता है और कंधों व गर्दन में 'सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस' (Cervical Spondylosis) की शुरुआत होती है।
  • सुस्त मेटाबॉलिज़्म और मोटापा: जब शरीर हिलता नहीं है, तो ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है। कोशिकाएं (Cells) ग्लूकोज़ को सोखना बंद कर देती हैं, जिससे खाया हुआ खाना सीधे चर्बी (Fat) में बदलता है और शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस (डायबिटीज़ का खतरा) पैदा होता है।

आयुर्वेद इस निष्क्रियता (Inactivity) को कैसे देखता है?

आयुर्वेद में स्पष्ट कहा गया है कि 'अव्यायाम' (शारीरिक मेहनत न करना) और 'सुखशय्या' (लगातार आराम करना) सभी गंभीर बीमारियों की जननी है।

  • कफ दोष का भयंकर प्रकोप: बैठे रहने से शरीर में 'कफ दोष' बहुत तेज़ी से बढ़ता है। कफ का गुण भारीपन, सुस्ती और ब्लॉकेज पैदा करना है। यही कारण है कि शरीर में मोटापा, थायरॉयड और कोलेस्ट्रॉल आते हैं।
  • वात दोष का असंतुलन: जब आप स्क्रीन पर लगातार फोकस करते हैं, तो दिमाग का 'वात' भड़कता है (स्ट्रेस और एंग्जायटी)। साथ ही, जोड़ों में मूवमेंट न होने से वहाँ वात (रूखापन) भर जाता है, जिससे हड्डियाँ सुबह उठने पर कटकट करती हैं और जकड़ जाती हैं।
  • आम (Toxins) का निर्माण: मेहनत न करने से पेट की 'पाचन अग्नि' सुस्त पड़ जाती है। भोजन पचने के बजाय सड़ता है और 'आम' बनाता है, जो नसों और रक्त वाहिकाओं को ब्लॉक कर देता है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

हम आपको डिजिटल दुनिया पूरी तरह छोड़ने को नहीं कहते, बल्कि हम आपके शरीर को इस लाइफस्टाइल के दुष्प्रभावों से बचाने का कवच देते हैं।

  • अग्नि दीपन और डिटॉक्स: सबसे पहले आयुर्वेदिक औषधियों से आपकी सुस्त पड़ी पाचन अग्नि को जगाया जाता है, ताकि शरीर में जमा ज़िद्दी फैट और 'आम' (गंदगी) पिघल कर बाहर निकल सके।
  • दोषों का संतुलन: स्क्रीन से बढ़े हुए वात (मानसिक तनाव) और बैठे रहने से बढ़े हुए कफ (मोटापा/सुस्ती) को विशेष जड़ी-बूटियों और जीवनशैली में बदलाव के ज़रिए संतुलित किया जाता है।
  • नर्वस सिस्टम का पोषण: डिजिटल थकान से डैमेज हुए दिमाग और आँखों की नसों को रसायन औषधियों से प्राकृतिक ताक़त दी जाती है।

शरीर की जकड़न खोलने और ऊर्जा बढ़ाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें शरीर की सुस्ती तोड़ने और मेटाबॉलिज़्म को फास्ट करने के लिए कई चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ दी हैं।

  • गुग्गुलु: जो लोग दिन भर बैठे रहने के कारण मोटापे और हाई कोलेस्ट्रॉल का शिकार हो गए हैं, गुग्गुलु शरीर के अंदर गहराई में जाकर कफ और ज़िद्दी चर्बी को पिघलाने का काम करता है।
  • शल्लाकी और निर्गुंडी: लगातार गलत पोस्चर में बैठे रहने से कमर और गर्दन (सर्वाइकल) में जो भयंकर जकड़न आ जाती है, ये जड़ी-बूटियाँ उस सूजन को खींचकर वात दर्द को शांत करती हैं।
  • अश्वगंधा: स्क्रीन के सामने घंटों बिताने से नर्वस सिस्टम की जो ऊर्जा (Energy) खत्म हो जाती है, अश्वगंधा उसे रिस्टोर करता है और डिजिटल स्ट्रेस को कम करता है।
  • त्रिफला: मूवमेंट न होने से आंतों की गति रुक जाती है (कब्ज़)। त्रिफला आंतों की डीप क्लीनिंग करके पूरे शरीर को भारीपन से आज़ाद करता है।

पंचकर्म थेरेपी: 'डिजिटल लाइफस्टाइल' के डैमेज को रिपेयर करना

सालों तक कुर्सी पर बैठे रहने से जो मांसपेशियाँ सिकुड़ गई हैं और जो टॉक्सिन्स शरीर में भर गए हैं, पंचकर्म उन्हें जड़ से बाहर निकालता है।

  • उद्वर्तन: यह एक विशेष हर्बल पाउडर की मालिश है। यह त्वचा के नीचे जमे हुए कफ (चर्बी) और सेल्युलाईट को तेज़ी से पिघलाती है और सुस्त मेटाबॉलिज़्म को तुरंत एक्टिव कर देती है।
  • ग्रीवा और कटि बस्ती: लैपटॉप पर झुककर काम करने से गर्दन और कमर की जो डिस्क सूख गई है, उसे औषधीय गर्म तेल से भारी नमी (Hydration) दी जाती है, जिससे जकड़न तुरंत खुल जाती है।
  • शिरोधारा: दिमाग की नसों को स्क्रीन की थकान से आज़ाद करने और गहरी प्राकृतिक नींद वापस लाने के लिए माथे पर तेल की धारा गिराई जाती है।

अपनी रूटीन में 'Movement' को वापस लाने के प्रैक्टिकल टिप्स

आपको जिम में घंटों पसीना बहाने की ज़रूरत नहीं है, बस दिन भर में कुछ जानबूझकर किए गए बदलाव आपको स्वस्थ रख सकते हैं।

बिंदु क्या करें कैसे लाभ मिलता है
स्टॉपवॉच मेथड (Stopwatch Method) हर 45–50 मिनट का अलार्म लगाएं; अलार्म बजते ही उठकर 2 मिनट स्ट्रेच करें या पानी पीकर आएं लंबे समय तक बैठने से होने वाले नुकसान कम होते हैं, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और नसों पर दबाव नहीं पड़ता
फोन कॉल्स पर टहलना फोन पर बात करते समय बैठने के बजाय कमरे या बालकनी में टहलें NEAT एक्टिविटी बढ़ती है, कैलोरी बर्न होती है और शरीर एक्टिव बना रहता है
डिजिटल सनसेट (Digital Sunset) सोने से 1 घंटा पहले सभी स्क्रीन बंद करें; इसके बाद हल्की वॉक या स्ट्रेचिंग करें नींद की गुणवत्ता सुधरती है, तनाव कम होता है और शरीर रिलैक्स होकर बेहतर रिकवरी करता है
फर्श पर बैठना दिन में कुछ समय कुर्सी की जगह ज़मीन पर पालथी मारकर बैठें कूल्हों और कमर की मांसपेशियां लचीली बनती हैं, पोस्चर सुधरता है और शरीर की प्राकृतिक मूवमेंट बनी रहती है

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

जब आप क्रोनिक थकान, कमर दर्द या बढ़ते वज़न की शिकायत लेकर आते हैं, तो हम उसे सिर्फ काम का स्ट्रेस मानकर नहीं छोड़ते।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह गहराई से समझना कि 'अग्नि' का स्तर कितना कमज़ोर हो चुका है और शरीर में कफ-वात का असंतुलन कितना गहरा है।
  • पोस्चर और चाल का विश्लेषण: डॉक्टर आपके बैठने के तरीके, रीढ़ की हड्डी की स्थिति और जोड़ों की जकड़न को देखकर मस्कुलोस्केलेटल (Musculoskeletal) डैमेज का पता लगाते हैं।
  • लाइफस्टाइल ऑडिट: आप दिन में कितने घंटे स्क्रीन देखते हैं, आपका खाना कैसा है, और आपकी नींद का पैटर्न क्या है—इसका पूरा विश्लेषण किया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको ऐसे नियम नहीं देते जो आपकी डिजिटल वर्किंग लाइफ के बीच बाधा बनें; हम आपको संतुलन सिखाते हैं।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर 0129 4264323 पर कॉल करें। हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपसे बहुत प्यार और धैर्य से बात करेंगे।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: अगर आप अपने सिस्टम के सामने से नहीं हट सकते, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें और अपना पर्सनलाइज्ड प्लान लें।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपकी प्रकृति और दिनचर्या के अनुसार खास मेटाबॉलिज़्म तेज़ करने वाली जड़ी-बूटियाँ, रसायन और एक संतुलित रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

शरीर की सालों की सुस्ती और जमे हुए कफ को तोड़ने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल और छोटे-मोटे मूवमेंट्स से आपका पाचन सुधरेगा, पेट की गैस व भारीपन खत्म होगा और सुबह उठने पर जकड़न कम महसूस होगी।
  • कुछ महीनों तक: शरीर का मेटाबॉलिज़्म तेज़ होगा। गर्दन और कमर का पुराना दर्द कम होने लगेगा। बढ़ा हुआ वज़न धीरे-धीरे कंट्रोल में आने लगेगा।
  • लंबे समय के लिए: आपकी लाइफस्टाइल में शामिल हुए एक्टिव बदलावों (NEAT) से आपकी इम्युनिटी और जॉइंट हेल्थ इतनी मज़बूत हो जाएगी कि आप क्रोनिक बीमारियों से हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाएंगे।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपको वज़न कम करने के लिए क्रैश डाइटिंग या दर्द के लिए हैवी पेनकिलर्स नहीं देते, जो शरीर को अंदर से कमज़ोर कर दें।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ दर्द या मोटापे को नहीं दबाते, हम आपके बिगड़े हुए मेटाबॉलिज़्म (अग्नि) को ठीक करते हैं और प्राकृतिक मूवमेंट वापस लाते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का बहुत ही शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों ऐसे केस देखे हैं जहाँ डिजिटल लाइफस्टाइल ने युवाओं को बीमारियों का घर बना दिया था, और हमने उन्हें सुरक्षित रूप से हील किया है।
  • कस्टमाइज्ड केयर: हर इंसान का काम और स्क्रीन टाइम अलग होता है। इसलिए हमारा डाइट, योग और ट्रीटमेंट प्लान भी बिल्कुल आपके रूटीन के हिसाब से तैयार किया जाता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: हमारी औषधियाँ पूरी तरह प्राकृतिक हैं, जो शरीर को बिना कोई नुकसान पहुँचाए अंदर से रिपेयर करती हैं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

बिंदु आधुनिक चिकित्सा (Modern Medicine) आयुर्वेद (Ayurveda)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द के लिए पेनकिलर्स और मोटापे के लिए केमिकल गोलियों से लक्षणों को नियंत्रित करना अग्नि को सुधारकर, कफ-वात को शांत करके और शारीरिक सक्रियता बढ़ाकर बीमारी को जड़ से खत्म करना
शरीर को देखने का नज़रिया शरीर को एक मशीन की तरह देखता है, जहाँ हर समस्या अलग-अलग पार्ट से जुड़ी होती है शरीर को वात, पित्त, कफ और अग्नि के संतुलन का एक जटिल सिस्टम मानता है, जिसे प्राकृतिक मूवमेंट की आवश्यकता होती है
डाइट और जीवनशैली की भूमिका दवाओं पर अधिक निर्भरता, डाइट और एक्टिविटी को सेकेंडरी माना जाता है ‘अव्यायाम’ को सबसे बड़ा कारण मानकर, रोज़मर्रा के मूवमेंट और सही दिनचर्या को ही असली दवा माना जाता है

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

अगर आप डिजिटल लाइफस्टाइल के शिकार हैं, तो शरीर के इन गंभीर संकेतों को कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए:

  • हाथों या पैरों का सुन्न पड़ जाना: अगर गर्दन या कमर दर्द के साथ आपके हाथों की उंगलियों में करंट दौड़े, झुनझुनी आए या चीज़ें हाथों से छूटने लगें (यह सीवियर नर्व कम्प्रेशन है)।
  • पैरों में भयंकर सूजन (Edema): लगातार बैठे रहने के कारण अगर पैरों और टखनों में सूजन आ जाए जो दबाने पर गड्ढा (Pitting edema) छोड़ दे।
  • अचानक सीने में भारीपन और सांस फूलना: बैठे-बैठे अचानक सीने में जकड़न होना, पसीना आना और सांस का फूलना (यह हार्ट ब्लॉकेज या डीवीटी का अलार्म हो सकता है)।
  • लगातार धुंधला दिखना और बहुत ज़्यादा प्यास लगना: अगर शरीर हमेशा थका रहे और बार-बार यूरिन आए, तो यह टाइप-2 डायबिटीज़ (Type-2 Diabetes) का खतरनाक संकेत है।

निष्कर्ष

"शरीर रुकने के लिए नहीं, चलने के लिए बना है।" आज का 'डिजिटल लाइफस्टाइल' हमें दुनिया की सारी जानकारी और सुविधाएं एक स्क्रीन पर तो दे रहा है, लेकिन बदले में यह हमारे शरीर की सबसे अहम चीज़; 'मूवमेंट' (Movement), छीन रहा है। घंटों तक एक ही कुर्सी पर जमे रहना, भारी खाना खाकर बैठे रहना और स्क्रीन्स से नज़रें न हटाना हमारे शरीर में कफ दोष बढ़ा रहा है, 'पाचन अग्नि' को बुझा रहा है और हमारी हड्डियों को अंदर से खोखला कर रहा है। जब हम शरीर से काम लेना बंद कर देते हैं, तो वह जंग लगी मशीन की तरह बीमार पड़ने लगता है। इस डिजिटल जाल से पूरी तरह बाहर आना शायद मुमकिन न हो, लेकिन इसके डैमेज से बचना पूरी तरह आपके हाथ में है। अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जानबूझकर 'हलचल' शामिल करें। आयुर्वेद आपको इस आरामदायक तबाही से बाहर निकलने का सबसे सुरक्षित रास्ता दिखाता है। सही आयुर्वेदिक उपचार, गुग्गुलु और अश्वगंधा जैसी शक्तिशाली जड़ी-बूटियों, पंचकर्म डिटॉक्स और 'स्टॉपवॉच मेथड' जैसे अनुशासन को अपनाकर आप अपने शरीर को दोबारा एक्टिव और मज़बूत बना सकते हैं। स्क्रीन्स को अपने काम के लिए इस्तेमाल करें, अपने शरीर को लकवाग्रस्त करने के लिए नहीं; और जीवा आयुर्वेद के साथ एक चलता-फिरता, ऊर्जावान जीवन जिएं।

FAQs

लगातार स्क्रीन्स के सामने बैठे रहने और हर चीज़ की होम डिलीवरी होने से शरीर की रोज़मर्रा की हलचल (NEAT) लगभग शून्य हो जाती है। इससे मेटाबॉलिज़्म सुस्त पड़ जाता है और शरीर कैलोरी बर्न करने के बजाय चर्बी जमा करने लगता है।

लगातार नीचे स्क्रीन की तरफ देखने से गर्दन की हड्डियों पर सिर का वज़न कई गुना बढ़ जाता है। इसे टेक्स्ट नेक कहते हैं। यह रीढ़ की हड्डी का आकार बिगाड़कर भयंकर सर्वाइकल और नसों के दबने (Nerve compression) का कारण बनता है।

पाचन एक सक्रिय (Active) प्रक्रिया है। जब आप दिन भर कुर्सी पर बैठे रहते हैं, तो आंतों की सिकुड़ने और फैलने की प्राकृतिक गति (Peristalsis) धीमी पड़ जाती है। इससे खाना पचने के बजाय पेट में सड़कर आम और गैस बनाता है।

आयुर्वेद में इसे सुखशय्या (अत्यधिक आराम) और अव्यायाम (मेहनत न करना) कहा गया है। यह शरीर में भारीपन और सुस्ती (कफ दोष) को बहुत तेज़ी से बढ़ाता है, जो मोटापे और शुगर की जड़ है।

यह काम के बीच में मूवमेंट वापस लाने का तरीका है। हर 45-50 मिनट का टाइमर सेट करें। जैसे ही अलार्म बजे, उठकर 2 मिनट के लिए शरीर को स्ट्रेच करें या टहलें। यह ब्लड सर्कुलेशन को दोबारा नॉर्मल कर देता है।

आँखों की नसों और दिमाग को रिलैक्स करने के लिए आयुर्वेद में ब्राह्मी और अश्वगंधा जैसी मेध्य औषधियाँ बेहतरीन हैं। साथ ही, स्क्रीन से हर 20 मिनट में नज़रें हटाना (20-20-20 नियम) बहुत ज़रूरी है।

बिल्कुल! घंटों कुर्सी पर बैठने से हिप फ्लेक्सर्स (Hip flexors) छोटी और टाइट हो जाती हैं, जबकि ग्लूट्स (हिप की मांसपेशियाँ) कमज़ोर पड़ जाती हैं। यही असंतुलन कमर के भयंकर दर्द का सबसे बड़ा कारण है।

उद्वर्तन में विशेष हर्बल पाउडर से पूरे शरीर की सूखी मालिश की जाती है। यह सीधे त्वचा के नीचे जमे हुए कफ (चर्बी) और सेल्युलाईट को पिघलाती है, रक्त संचार बढ़ाती है और सुस्त मेटाबॉलिज़्म को तुरंत किकस्टार्ट कर देती है।

जी हाँ! यह एक बहुत ही शानदार NEAT एक्टिविटी है। जब भी कॉल आए, अपनी कुर्सी से उठें और टहलते हुए बात करें। इससे बिना किसी जिम के आपका शरीर दिन भर में हज़ारों कदम चल लेता है।

सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी स्क्रीन्स बंद कर दें (डिजिटल सनसेट)। ब्लू लाइट से बचें और रात को सोने से पहले पैरों के तलवों की तिल या सरसों के तेल से मालिश (पादभ्यंग) करें, इससे वात शांत होगा और गहरी नींद आएगी।

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