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क्या Stress PCOD को और बिगाड़ता है? कारण और समाधान

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 30 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 30 Apr, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5005

आप जिम जाती हैं, अनचाहे बालों से परेशान होकर लेज़र हेयर रिमूवल करवाती हैं और डाइट का ध्यान रखती हैं। फिर भी पीरियड्स नहीं आते। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर आप हैरान रह जाती हैं—आपको PCOD है! आप सोचती हैं कि जब सब सही है, तो यह कैसे हुआ? हम अक्सर PCOD का कारण खराब खान-पान या मोटापे को मानते हैं, लेकिन सबसे बड़े खामोश कारण क्रोनिक स्ट्रेस को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। तनाव हॉर्मोन्स का संतुलन बिगाड़ देता है। इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि स्ट्रेस और PCOD का संबंध क्या है, आयुर्वेद इसे कैसे समझता है, और इसे जड़ से कैसे खत्म करें।

स्ट्रेस (Stress) PCOD को कैसे बढ़ाता है?

जब आप लगातार तनाव में रहती हैं, तो आपके शरीर का एंडोक्राइन सिस्टम (Endocrine System) पूरी तरह गड़बड़ा जाता है:

  • कॉर्टिसोल (Cortisol) का बढ़ना: तनाव के समय शरीर कॉर्टिसोल नाम का स्ट्रेस हार्मोन छोड़ता है। जब यह हार्मोन लगातार बढ़ा रहता है, तो यह बाकी सभी हॉर्मोन्स (जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) के संतुलन को बिगाड़ देता है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance): बढ़ा हुआ कॉर्टिसोल शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करता है। कोशिकाएँ इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं, जिससे खून में शुगर और इंसुलिन दोनों का स्तर बढ़ने लगता है।
  • पुरुष हॉर्मोन (Androgens) का स्राव: बढ़ा हुआ इंसुलिन ओवरीज़ को टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) जैसे पुरुष हॉर्मोन ज़्यादा बनाने के लिए उकसाता है। इसी वजह से चेहरे पर अनचाहे बाल आने लगते हैं और सिर के बाल झड़ने लगते हैं।

PCOD में हार्मोनल असंतुलन: ओवरीज़ (Ovaries) में सिस्ट (Cysts) कैसे बनते हैं?

यह समझना बहुत ज़रूरी है कि PCOD में जो सिस्ट बनते हैं, वे असल में पानी या खून की गाँठें नहीं होतीं, बल्कि वे अविकसित अंडे (Immature follicles) होते हैं।

हर महीने ओवरी में एक अंडा विकसित होकर बाहर निकलता है (ओव्यूलेशन)। लेकिन जब तनाव और इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण पुरुष हॉर्मोन बढ़ जाते हैं, तो यह प्रक्रिया बीच में ही रुक जाती है। अंडा पूरी तरह विकसित होकर बाहर नहीं निकल पाता और ओवरी के किनारे पर एक छोटी थैली (सिस्ट) के रूप में चिपक जाता है। जब हर महीने ऐसा होता है, तो ओवरी मोतियों की माला (Polycystic) जैसी दिखने लगती है और पीरियड्स आना बंद हो जाते हैं।

आयुर्वेद PCOD और स्ट्रेस के संबंध को कैसे समझता है?

आयुर्वेद में PCOD को आर्तव क्षय और पुष्पघ्नी जातहारिणी के लक्षणों से जोड़कर देखा जाता है। आयुर्वेद इसे वात और कफ दोष के बिगड़ने का परिणाम मानता है, जिसमें स्ट्रेस एक बहुत बड़ा कारण है।

  • वात दोष का भड़कना: तनाव, चिंता और अत्यधिक सोचने से शरीर में वात दोष तेज़ी से भड़कता है। वात का काम है शरीर में सही गति (Movement) बनाए रखना। जब यह बिगड़ता है, तो ओवरी से अंडे के बाहर निकलने (Ovulation) की प्राकृतिक गति रुक जाती है।
  • कफ दोष से रुकावट: बढ़ा हुआ कफ दोष शरीर में भारीपन और चिपचिपाहट पैदा करता है। यह ओवरीज़ के आस-पास एक आवरण (रुकावट) बना देता है, जिससे सिस्ट बनने लगते हैं और वज़न बढ़ने लगता है।
  • अग्निमांद्य (मेटाबॉलिज़्म का गिरना): तनाव से जब पेट की पाचन अग्नि कमज़ोर होती है, तो शरीर में आम (Toxins) बनता है। यही आम रस और आर्तव धातु (प्रजनन तंत्र) को दूषित कर देता है।

 जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण क्या है?  

आधुनिक चिकित्सा अक्सर PCOD के लिए सिर्फ हॉर्मोनल गोलियाँ (OCPs) या मेटफॉर्मिन देती है, जो पीरियड्स को ज़बरदस्ती लाती हैं। लेकिन जब तक स्ट्रेस और दोष असंतुलित हैं, असली समस्या कैसे ठीक हो सकती है? हम जीवा आयुर्वेद में जड़ पर काम करते हैं।

  • वात-शामक और मेध्य चिकित्सा: सबसे पहले तनाव कम करने और भड़के हुए नर्वस सिस्टम को शांत करने के लिए मेध्य (दिमाग को शांति देने वाली) औषधियाँ दी जाती हैं।
  • कफ का छेदन और अग्नि दीपन: ओवरीज़ के आस-पास जमे कफ और टॉक्सिन्स को काटने के लिए पाचन अग्नि को तेज़ किया जाता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होता है।
  • आर्तव जनन (प्रजनन तंत्र का कायाकल्प): गर्भाशय और ओवरीज़ को ताक़त देकर प्राकृतिक रूप से ओव्यूलेशन (अंडा निकलने की प्रक्रिया) को दोबारा शुरू किया जाता है।

PCOD और स्ट्रेस को एक साथ कंट्रोल करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसी जादुई औषधियाँ दी हैं जो दिमाग को शांत करने के साथ-साथ ओवरीज़ को भी स्वस्थ बनाती हैं:

  • शतावरी: यह महिलाओं के लिए सबसे उत्तम रसायन है। यह हॉर्मोन्स को बैलेंस करती है, फॉलिकल्स (अंडों) के विकास में मदद करती है और तनाव के कारण आई कमज़ोरी को दूर करती है।
  • अश्वगंधा: यह स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) को तेज़ी से गिराता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाता है। PCOD में वज़न और स्ट्रेस कंट्रोल करने के लिए यह अचूक है।
  • कांचनार गुग्गुल: इसका मुख्य काम शरीर में बनी किसी भी प्रकार की ग्रंथि (सिस्ट) या एक्स्ट्रा ग्रोथ को पिघलाना है। यह कफ को काटकर ओवरीज़ को साफ करता है।
  • पुष्पधन्वा रस: यह आयुर्वेदिक औषधि प्रजनन अंगों में खून का बहाव बढ़ाती है और प्राकृतिक रूप से पीरियड्स को नियमित करने में मदद करती है।

पंचकर्म थेरेपी: स्ट्रेस और PCOD की डीप क्लीनिंग

जब शरीर पूरी तरह हॉर्मोनल इम्बैलेंस का शिकार हो चुका हो, तो पंचकर्म शरीर को हार्ड रिसेट (Hard Reset) करता है।

  • शिरोधारा (Shirodhara): माथे पर औषधीय तेल की लगातार धारा गिराकर दिमाग के गहरे तनाव को खींचा जाता है। यह कॉर्टिसोल को कम करके हॉर्मोन्स के नियंत्रण कक्ष (Pituitary gland) को रिलैक्स करती है।
  • विरेचन (Virechana): PCOD में लिवर की भूमिका बहुत बड़ी होती है। विरेचन के ज़रिए शरीर में जमा अतिरिक्त पित्त और टॉक्सिन्स को मल के रास्ते बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस खत्म होता है और मेटाबॉलिज़्म नया हो जाता है।
  • उत्तर बस्ति (Uttara Basti): गर्भाशय और ओवरीज़ के अंदर औषधीय तेल पहुँचाकर वहाँ की रुकावटों (कफ दोष) को साफ किया जाता है ताकि अंडा प्राकृतिक रूप से बाहर आ सके।

PCOD और तनाव के रोगी के लिए शुद्ध आहार

जीवा आयुर्वेद के अनुसार, तनाव वात दोष बिगाड़कर हार्मोनल असंतुलन करता है, जिससे PCOD बढ़ता है। इसे दूर करने के लिए हल्का और वात-कफ शामक आहार चुनें:

क्या खाएँ?

  • ताज़ा भोजन: गाय का घी, मूंग दाल और हरी सब्ज़ियां हार्मोनल संतुलन सुधारती हैं।
  • बीज-मेवे: भीगे बादाम और अलसी नसों को शांत कर तनाव घटाते हैं।
  • दालचीनी: इसका पानी इंसुलिन और तनाव को नियंत्रित करता है।

क्या न खाएँ?

  • मैदा-मीठा: चीनी और मैदे की चीज़ें कफ और PCOD में वजन बढ़ाती हैं।
  • जंक फूड: बाज़ार का तला-भुना खाना हार्मोनल सिस्टम को बिगाड़ता है।
  • कैफीन: ज़्यादा चाय-कॉफी तनाव (कोर्टिसोल) बढ़ाकर पीरियड्स अनियमित करते हैं।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

जब आप अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट लेकर आती हैं, तो हम केवल सिस्ट का साइज़ नहीं देखते, हम आपके दिमाग और नाड़ी को गहराई से पढ़ते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह समझना कि वात (तनाव) और कफ (वज़न/सिस्ट) में से कौन सा दोष आपकी ओवरीज़ को ब्लॉक कर रहा है।
  • लाइफस्टाइल ऑडिट: आप दिन भर में कितनी बार मीठा खाती हैं, आपकी नींद कैसी है, और आप करियर का कितना स्ट्रेस लेती हैं—इन सबका बहुत बारीकी से विश्लेषण किया जाता है।
  • मासिक धर्म और त्वचा का विश्लेषण: अनचाहे बाल, मुहाँसे और पीरियड्स की अनियमितता को देखकर हॉर्मोनल इम्बैलेंस का स्तर जाँचा जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद केवल हॉर्मोन्स को गोलियों से नहीं दबाता, बल्कि उस सिस्टम को ठीक करता है जो उन्हें बना रहा है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: शिरोधारा और अश्वगंधा के प्रभाव से आपकी नींद सुधरेगी और स्ट्रेस कम होगा। पाचन तंत्र बेहतर होने लगेगा।
  • 1 से 3 महीने तक: आपके शरीर का इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होने लगेगा। वज़न में गिरावट आ सकती है और मुहाँसों में कमी दिखने लगेगी।
  • 3 से 6 महीने तक: ओवरीज़ अपना काम प्राकृतिक तरीके से शुरू कर देंगी। सिस्ट्स सिकुड़ने लगेंगी और पीरियड्स का चक्र धीरे-धीरे नियमित हो जाएगा।

मरीज़ों का अनुभव

मेरा नाम श्वेता है और मैं नोएडा की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 30 साल है। मुझे साल 2006 से पीसीओडी (PCOD) की शिकायत थी, जिसके लिए मैंने काफी सालों तक एलोपैथिक ट्रीटमेंट किया, लेकिन मुझे कोई रिजल्ट नहीं मिला। फिर मैंने होम्योपैथिक ट्रीटमेंट भी लिया, पर उससे भी कोई आराम नहीं मिला। तभी मैंने टीवी पर जीवा आयुर्वेदा का प्रोग्राम देखा। उसके बाद मैं जीवा के नोएडा ब्रांच में गई, जहाँ मेरी मुलाकात डॉक्टर अभिलाषा तिवारी से हुई। उन्होंने मेरी प्रॉब्लम को बहुत अच्छे से समझा और मेरा ट्रीटमेंट शुरू किया।

मैंने साल 2017 से यह ट्रीटमेंट शुरू किया था। डेढ़ साल तक इलाज लेने के बाद मुझे पीसीओडी में बहुत अच्छा सुधार और रिजल्ट मिला। पीसीओडी का ट्रीटमेंट खत्म होने के बाद मैंने इनफर्टिलिटी के लिए ट्रीटमेंट शुरू किया। जीवा के इलाज की मदद से आज मेरा एक छोटा सा बेटा है। मैं इस सबके लिए डॉक्टर अभिलाषा तिवारी और पूरे जीवा परिवार को धन्यवाद करना चाहती हूँ।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य OCPs से पीरियड्स को कृत्रिम रूप से लाना स्ट्रेस (कॉर्टिसोल) कम करके और अग्नि सुधारकर ओव्यूलेशन को प्राकृतिक रूप से बहाल करना
शरीर को देखने का नज़रिया ओवरी/इंसुलिन की समस्या के रूप में देखना माइंड-बॉडी कनेक्शन: वात (तनाव) + कफ (मेटाबॉलिज़्म) असंतुलन से आर्तव धातु प्रभावित
डाइट और जीवनशैली की भूमिका मुख्यतः वज़न कम करने की सलाह संतुलित डाइट, गहरी नींद, योग, शिरोधारा जैसी रिलैक्सिंग थेरेपी
लंबा असर दवा छोड़ने पर लक्षण/PCOD वापस आ सकता है नर्वस सिस्टम शांत और दोष संतुलन से दीर्घकालिक सुधार

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

PCOD को नज़रअंदाज़ करने से यह आगे चलकर गंभीर रूप ले सकता है। अगर आपको ये संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • आपके पीरियड्स लगातार 3 महीने या उससे ज़्यादा समय तक बिल्कुल न आएँ।
  • आपके चेहरे, छाती या पेट पर अचानक बहुत ज़्यादा और कड़े बाल उगने लगें।
  • बिना ज़्यादा खाए आपका वज़न तेज़ी से बढ़ने लगे और कम करने पर भी कम न हो।
  • आपको बहुत ज़्यादा थकान, डिप्रेशन या एंग्जायटी महसूस होने लगे।

निष्कर्ष

PCOD केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं है, यह एक चेतावनी है कि आपका शरीर और दिमाग दोनों संतुलन खो चुके हैं। जब हम करियर, टारगेट्स और सफलता की दौड़ में अपने दिमाग को आराम देना भूल जाते हैं, तो शरीर कॉर्टिसोल के प्रभाव में आकर ओवरीज़ के सामान्य काम को रोक देता है। आप सिर्फ गोलियाँ खाकर या क्रैश डाइटिंग करके इस स्ट्रेस-इंड्यूस्ड PCOD को नहीं हरा सकतीं। जब तक आपका दिमाग शांत नहीं होगा और इंसुलिन का स्तर सही नहीं होगा, आपकी ओवरीज़ में सिस्ट बनते रहेंगे। इन लक्षणों को केवल दवाओं से दबाकर आप भविष्य में इनफर्टिलिटी (Infertility) जैसी समस्याओं को बुलावा दे रही हैं। आयुर्वेद आपको इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने का सबसे तार्किक और प्राकृतिक रास्ता दिखाता है। शतावरी, अश्वगंधा और कांचनार जैसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, पंचकर्म से शरीर को डिटॉक्स करें और एक अनुशासित जीवनशैली अपनाएँ। अपने दिमाग को शांत करें, और जीवा आयुर्वेद के साथ PCOD-मुक्त एक स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।

FAQs

तनाव के समय शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करता है। बढ़ा हुआ इंसुलिन ओवरीज़ को पुरुष हॉर्मोन (टेस्टोस्टेरोन) बनाने के लिए मजबूर करता है, जिससे अंडों का विकास रुक जाता है और वे सिस्ट बन जाते हैं।

जी हाँ, बिल्कुल। इसे लीन (Lean) PCOD कहा जाता है। यह अक्सर मोटापे से नहीं, बल्कि भयंकर मानसिक तनाव, नींद की कमी और इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण होता है।

आयुर्वेद में PCOD का सीधा वर्णन एक नाम से नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को आर्तव क्षय (मासिक धर्म की कमी), नष्टार्तव और पुष्पघ्नी जातहारिणी के अंतर्गत देखा जाता है, जो वात और कफ दोष के बिगड़ने से होता है।

हाँ, कांचनार गुग्गुल आयुर्वेद की सबसे बेहतरीन ग्रंथि-नाशक औषधि है। यह कफ दोष को काटकर ओवरीज़ में जमी हुई सिस्ट (अविकसित अंडों) की रुकावट को धीरे-धीरे खत्म करने में मदद करता है।

बिल्कुल। नींद पूरी न होने से शरीर इसे भारी तनाव मान लेता है। इससे इंसुलिन का स्तर और कॉर्टिसोल दोनों बढ़ जाते हैं, जो PCOD के लक्षणों (जैसे वज़न बढ़ना और बाल झड़ना) को और भयंकर बना देते हैं।

शिरोधारा में माथे पर लगातार औषधीय तेल गिराया जाता है। यह नर्वस सिस्टम को तुरंत रिलैक्स करती है और पिट्यूटरी ग्रंथि (जो ओवरीज़ को सिग्नल देती है) के तनाव को खत्म करती है, जिससे हॉर्मोन्स प्राकृतिक रूप से बैलेंस होने लगते हैं।

हाँ, यह 100% रिवर्स हो सकता है। अगर आप आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का सेवन करें, सही डाइट लें और योग या ध्यान के ज़रिए अपने तनाव को मैनेज करना सीख लें, तो ओवरीज़ दोबारा सामान्य काम करने लगती हैं।

वात शरीर में गति (Movement) को नियंत्रित करता है। जब तनाव से वात भड़कता है, तो यह ओवरी से अंडे के बाहर निकलने की प्राकृतिक गति (ओव्यूलेशन) को रोक देता है, जिससे पीरियड्स रुक जाते हैं।

नहीं। आयुर्वेदिक इलाज शुरू करते ही एलोपैथिक दवाइयाँ एकदम से बंद नहीं करनी चाहिए। जैसे-जैसे आयुर्वेद से आपका सिस्टम सुधरेगा और प्राकृतिक पीरियड्स आने लगेंगे, आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से आपकी एलोपैथिक डोज़ धीरे-धीरे बंद की जाती है।

सुबह उठकर मोबाइल देखने से बचें। सबसे पहले 15-20 मिनट गहरी साँसें (अनुलोम-विलोम प्राणायाम) लें ताकि नर्वस सिस्टम शांत हो। इसके बाद हल्का गुनगुना पानी पिएँ और कम से कम 30 मिनट योग (जैसे सूर्य नमस्कार और बद्धकोणासन) ज़रूर करें।

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