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पीरियड्स अनियमित क्यों रहते हैं? क्रॉनिक कारण जानें

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 15 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 23 Apr, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5029

हार्मोनल पिल्स और तुरंत पीरियड लाने वाली दवाओं का इस्तेमाल अनियमित मासिक धर्म और पीसीओडी (PCOD) जैसी बीमारियों में काफी आम है। ये दवाएँ और गोलियाँ शरीर में कृत्रिम रूप से हार्मोन डालकर लक्षणों को कुछ समय के लिए दबा देती हैं और ब्लीडिंग ला देती हैं, जिससे मरीज़ को लगता है कि वह पूरी तरह ठीक हो गई है और उसकी परेशानी खत्म हो गई है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि मरीज़ को दवा छोड़ने के तुरंत बाद फिर से महीनों तक पीरियड्स नहीं आते और बीमारी पहले से भी बड़े रूप में वापस आ जाती है। इसके कारण कई हो सकते हैं जैसे लगातार हार्मोन की गोलियाँ (OCPs) खाने से प्रजनन तंत्र का कमज़ोर होना, बीमारी कितनी गंभीर है, दवाओं पर शरीर की निर्भरता, या सबसे महत्वपूर्ण शरीर में मौजूद अशुद्धियाँ और अंदर जमा टॉक्सिन्स जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं। इस बात को समझना ज़रूरी है, ताकि वक्त रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सके और गर्भाशय की सेहत प्राकृतिक रूप से बनी रहे।

अनियमित पीरियड्स क्या हैं?

एक स्वस्थ महिला का मासिक धर्म (मेंस्ट्रुअल साइकिल) आमतौर पर 21 से 35 दिनों का होता है। अनियमित पीरियड्स एक ऐसी स्थिति है, जहाँ यह चक्र बिगड़ जाता है। इसमें पीरियड्स का महीनों तक न आना, बहुत जल्दी-जल्दी आना, या फ्लो का बहुत कम या बहुत ज़्यादा होना शामिल है। आमतौर पर लड़कियाँ और महिलाएँ इसका शिकार खराब खान-पान, भयंकर तनाव, पीसीओएस (PCOS) या थायरॉइड असंतुलन के कारण होती हैं। हार्मोनल गोलियाँ खाने पर ब्लड रिपोर्ट और साइकिल कुछ समय के लिए नॉर्मल हो जाती है, लेकिन ये दवाएँ सिर्फ लक्षणों को ढकती हैं, शरीर के अंदर मौजूद उस अनुकूल माहौल को ठीक नहीं करतीं जिसमें हार्मोन बिगड़ रहे हैं। दवा को बिना सोचे-समझे लंबे समय तक इस्तेमाल करना ओवरीज़ (अंडाशय) और लिवर पर बुरा असर डालता है।

मासिक धर्म की बीमारियाँ कितने प्रकार की होती हैं?

स्त्री रोग और हार्मोन से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा में मुख्य रूप से ये बीमारियाँ देखी जाती हैं:

  • ओलिगोमेनोरिया (Oligomenorrhea): इसमें पीरियड्स बहुत देरी से आते हैं (35 दिनों से ज़्यादा का अंतर)।
  • एमेनोरिया (Amenorrhea): इसमें लगातार 3 या उससे अधिक महीनों तक पीरियड्स बिल्कुल नहीं आते।
  • मेनोरेजिया (Menorrhagia): इसमें समय पर पीरियड्स आते हैं लेकिन ब्लीडिंग बहुत ज़्यादा और लंबे समय (7 दिन से अधिक) तक होती है।
  • पॉलीमेनोरिया (Polymenorrhea): इसमें पीरियड्स बहुत जल्दी-जल्दी (21 दिनों से पहले) आ जाते हैं।

अनियमित पीरियड्स के लक्षण और संकेत

बार-बार साइकिल बिगड़ना या वज़न का बेतहाशा बढ़ना कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण और संकेत इस प्रकार हैं:

  • तारीख का आगे-पीछे होना: पीरियड्स का समय पर न आना या पूरी तरह से मिस हो जाना।
  • फ्लो में बदलाव: बहुत कम धब्बे (Spotting) आना या खून के बड़े-बड़े थक्के (Clots) निकलना।
  • वज़न का तेज़ी से बढ़ना: कमर और पेट के आसपास फैट जमा होना (विशेषकर PCOS में)।
  • चेहरे पर अनचाहे बाल और मुहाँसे: हार्मोनल असंतुलन के कारण ठुड्डी पर बाल आना और पिंपल्स होना।
  • दवा का असर खत्म होते ही वापसी: गोलियाँ बंद करते ही अगले महीने से फिर से पीरियड्स का रुक जाना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

पीरियड्स अनियमित रहने के क्रॉनिक कारण क्या हैं?

मासिक धर्म के बार-बार बिगड़ने के पीछे सिर्फ कमज़ोरी नहीं, बल्कि कई अंदरूनी क्रॉनिक कारण हो सकते हैं। मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

  • पीसीओएस/पीसीओडी (PCOS/PCOD): अंडाशय में छोटी-छोटी सिस्ट (गाँठें) बन जाना, जिससे पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) बढ़ जाता है और अंडे समय पर नहीं फूटते।
  • थायरॉइड असंतुलन: हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायरायडिज्म शरीर के मेटाबॉलिज़्म और पीरियड साइकिल को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।
  • मानसिक तनाव और एंग्जायटी: ज़्यादा तनाव (Stress) से कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो दिमाग को सिग्नल देने वाले तंत्र को रोक देता है, जिससे ओव्यूलेशन नहीं हो पाता।
  • गलत खान-पान और मोटापा: ज़्यादा जंक फूड, मैदा और चीनी खाने से शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है, जो हार्मोन को बिगाड़ता है।
  • दोषों का असंतुलन: आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात और कफ का पुराना असंतुलन 'आर्तव' (मेंस्ट्रुअल ब्लड) के निर्माण और स्राव को रोक देता है।

अनियमित पीरियड्स के जोखिम और जटिलताएँ क्या हैं?

इस समस्या को अगर अनदेखा किया जाए या सिर्फ बाहरी गोली पर निर्भर रहा जाए, तो यह कई जटिलताओं का कारण बन सकता है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • बाँझपन (Infertility): अंडे सही समय पर न बनने के कारण गर्भधारण करने में भयंकर परेशानी आती है।
  • एंडोमेट्रियल कैंसर का खतरा: लंबे समय तक पीरियड्स न आने से गर्भाशय की परत मोटी हो जाती है, जो भविष्य में कैंसर का रूप ले सकती है।
  • एनीमिया (खून की कमी): अगर पीरियड्स में बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग हो रही है, तो शरीर में हीमोग्लोबिन खतरनाक स्तर तक गिर सकता है।
  • हड्डियों का कमज़ोर होना: एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी से हड्डियाँ भुरभुरी और कमज़ोर हो जाती हैं (ऑस्टियोपोरोसिस)।
  • मानसिक तनाव और डिप्रेशन: लगातार हार्मोनल असंतुलन से मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और गंभीर डिप्रेशन हो सकता है।

समय पर डॉक्टर से परामर्श और उचित इलाज लेने से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के हिसाब से अनियमित पीरियड्स सिर्फ गर्भाशय की दिक्कत नहीं है। आयुर्वेद में इसे 'आर्तव क्षय' या 'आर्तव दृष्टि' कहा जाता है और यह माना जाता है कि जब शरीर में वात और कफ दोष बिगड़ जाते हैं, तब ऐसी परेशानी आती है। कफ दोष के बढ़ने से शरीर में रुकावट (Blockage) पैदा होती है और बढ़ा हुआ वात दोष पीरियड्स के सही समय पर आने वाले चक्र को बिगाड़ देता है। डॉक्टर नाड़ी और जीभ देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं। वे ढूँढते हैं कि कहीं शरीर में कमज़ोर पाचन अग्नि के कारण टॉक्सिन्स (आम) तो नहीं जमा हो गए हैं, जिसने गर्भाशय तक पहुँचने वाले पोषण मार्गों (Artavavaha Srotas) को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है। जब तक यह दूषित 'आम' शरीर में रहेगा, साइकिल बदलता रहेगा। आयुर्वेद में बस ब्लड रिपोर्ट को ठीक करना और कृत्रिम हार्मोन की गोली देना मकसद नहीं है, वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, शरीर की अंदरूनी शुद्धि हो और ओवरीज़ प्राकृतिक रूप से स्वस्थ बनें।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण क्या है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर महिला का शरीर और स्वास्थ्य अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके शरीर के अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: महिला को दिख रहे सभी लक्षणों, ब्लीडिंग की मात्रा और दर्द की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: पिछली रिपोर्ट्स और सालों से खाई जा रही हार्मोनल पिल्स का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • जीवनशैली का विश्लेषण: रोज़ाना के खान-पान, तनाव के स्तर और वज़न को परखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: इन सभी बातों का अच्छे से विश्लेषण करने और दूषित दोषों को पकड़ने के बाद ही गर्भाशय की रुकावट खोलने और शरीर साफ करने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

अनियमित पीरियड्स के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में हार्मोन को प्राकृतिक रूप से संतुलित करने और गर्भाशय को ताकत देने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • अशोक: यह गर्भाशय के लिए सबसे बेहतरीन टॉनिक है। यह हार्मोन को संतुलित करता है और ब्लीडिंग को नियमित करता है।
  • शतावरी: आयुर्वेद में इसे महिलाओं की सेहत के लिए बहुत शक्तिशाली माना गया है। यह प्रजनन अंगों को ताकत देती है और अंडे बनने की प्रक्रिया को सुधारती है।
  • कुमारी (एलोवेरा): यह रुके हुए पीरियड्स को लाने और गर्भाशय की रुकावटों (कफ दोष) को साफ करने में बहुत असरदार है।
  • दशमूल: दस जड़ी-बूटियों का यह मिश्रण बढ़े हुए वात दोष को शांत करता है, सूजन कम करता है और पीरियड्स के दौरान होने वाले भयंकर दर्द से राहत देता है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म: शरीर की अंदरूनी सफाई

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, दूषित दोषों को बाहर निकालकर संपूर्ण स्वास्थ्य और स्वस्थ गर्भाशय पाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • गहरी सफाई और शरीर शोधन: जब पीसीओडी (PCOD) या पीरियड्स की समस्या सालों पुरानी हो और दवा के डोज़ लगातार बढ़ रहे हों, तो जीवा आयुर्वेद में शरीर के दोषों को संतुलित करने के लिए विशेष पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • बस्ती कर्म: यह अपान वात को शांत करने का सबसे असरदार तरीका है। इसमें औषधीय काढ़े का एनीमा दिया जाता है जो सीधा प्रजनन अंगों को ताकत देता है।
  • उत्तर बस्ती: गर्भाशय की रुकावट खोलने और बाँझपन दूर करने के लिए औषधीय तेल को सीधा गर्भाशय के अंदर पहुँचाया जाता है।
  • उद्वर्तन: अगर वज़न बहुत ज़्यादा बढ़ गया है, तो जड़ी-बूटियों के सूखे चूर्ण से मालिश की जाती है जिससे कफ और फैट पिघलता है।

अनियमित पीरियड्स की रोगी के लिए शुद्ध आहार

जीवा आयुर्वेद और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, हार्मोन को संतुलित करने के लिए सुपाच्य, हल्का और शरीर की अग्नि को बढ़ाने वाला आहार चुनना महत्वपूर्ण है:

1. क्या खाएँ?

  • पपीता और तिल: कच्चा पपीता और भुने हुए तिल गुड़ के साथ खाएँ, इनकी तासीर गर्म होती है जो रुके हुए पीरियड्स को लाने में मदद करती है।
  • साबुत अनाज और दालें: ओट्स, दलिया और मूंग की दाल खाएँ, जो पचने में हल्के होते हैं और इंसुलिन लेवल को सही रखते हैं।
  • अदरक और सौंफ का पानी: अदरक और सौंफ को उबालकर इसका पानी पिएँ, यह पाचन अग्नि को तेज़ करता है और वात शांत करता है।

2. क्या न खाएँ?

  • जंक फूड और मैदा: पिज्जा, बर्गर और मैदे से बनी चीज़ें बिल्कुल बंद कर दें, ये शरीर में कफ और रुकावट पैदा करती हैं।
  • चीनी और कोल्ड ड्रिंक्स: मीठी चीज़ें पीसीओएस (PCOS) में सबसे ज़्यादा नुकसान करती हैं, क्योंकि यह वज़न और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाती हैं।
  • ठंडी और भारी चीज़ें: फ्रिज का ठंडा पानी और बासी खाना खाने से वात बढ़ता है, जो समस्या को और खराब करता है।

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है। यहाँ कोशिश होती है कि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जाए।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, पीरियड्स मिस होने के समय और लक्षणों को आराम से सुना जाता है।
  • आपकी पुरानी रिपोर्ट्स और पहले खाई गई हार्मोन की गोलियों के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके खाने-पीने और तनाव लेने की आदतों को समझा जाता है।
  • आपकी नींद और पेट साफ होने (कब्ज़) की स्थिति पर ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जाना जाता है।
  • शरीर में जमा गंदगी और कफ-वात असंतुलन के संकेत देखे जाते हैं।

इन सब चीज़ों को समझने के बाद आपके लिए एक ऐसा इलाज प्लान बनाया जाता है, जो आपके गर्भाशय को पूरी तरह शुद्ध और सक्रिय करे।

जीवा आयुर्वेद से संपर्क कैसे करें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

1. अपनी जानकारी हमारे साथ साझा करें: सबसे पहले आपको अपनी सेहत से जुड़ी बुनियादी जानकारी हमें देने के लिए, आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपने इलाज के सफर की शुरुआत कर सकते हैं।

2. डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करना: आपकी सुविधा के अनुसार, हमारे अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर से बातचीत करने का समय तय किया जाता है। आप अपनी पसंद के हिसाब से नीचे दिए गए दो तरीकों में से कोई भी चुन सकते हैं:

  • क्लिनिक पर जाकर: अगर आप आमने-सामने बैठकर बात करना चाहते हैं, तो अपने नज़दीकी जीवा क्लिनिक पर जा सकते हैं।
  • वीडियो कंसल्टेशन (सिर्फ ₹49 में): अगर क्लिनिक आना मुमकिन न हो, तो आप घर बैठे ही वीडियो कॉल के ज़रिए डॉक्टर से जुड़ सकते हैं। यह खास सुविधा अभी सिर्फ ₹49 में उपलब्ध है।

3. बीमारी को गहराई से समझना: हमारे डॉक्टर आपसे तसल्ली से बात करते हैं ताकि आपकी तकलीफों और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को अच्छे से समझ सकें। हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को ठीक करना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह (Root Cause) तक पहुँचना है।

4. आपके लिए खास इलाज की योजना: पूरी जाँच के बाद, डॉक्टर सिर्फ आपके लिए एक कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान तैयार करते हैं। इसमें शुद्ध जड़ी-बूटियों से बनी दवाइयाँ दी जाती हैं, जो आपके शरीर के दोषों को संतुलित करने और आपको अंदर से सेहतमंद बनाने में मदद करती हैं।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में रोगों का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करता है:

  • बीमारी और शरीर की स्थिति: ठीक होने का वक्त कई बातों से तय होता है जैसे आप कितने सालों से कृत्रिम हार्मोन की गोलियाँ खा रही हैं, और आपका कफ दोष कितना बढ़ा हुआ है।
  • हल्की समस्या में सुधार: अगर पीरियड्स अभी बिगड़ना शुरू हुए हैं, तो आमतौर पर 2 से 3 महीने में ही साइकिल सुधरने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर पीसीओडी (PCOD) सालों पुराना है और वज़न बहुत ज़्यादा है, तो शरीर को पूरी तरह शुद्ध होने और ओवरीज़ को खुद काम करने में 6 महीने से 1 साल तक का समय भी लग सकता है।
  • उपचार का तरीका: इस प्राकृतिक इलाज में मुख्य रूप से ओवरीज़ को ताकत देने वाली जड़ी-बूटियाँ, सही खानपान और व्यायाम शामिल होता है।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर अपनी डाइट का कड़ाई से पालन करता है, तो दोष संतुलित हो जाते हैं और भविष्य में गोलियों पर निर्भरता हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मैं PCOD से पीड़ित थी, जिसके लक्षणों में चेहरे पर बाल आना, अनियमित पीरियड्स और वज़न बढ़ना शामिल थे। मैंने एलोपैथिक और होम्योपैथिक डॉक्टरों से सलाह ली और हिर्सुटिज़्म (चेहरे पर ज़्यादा बाल) के लिए लेज़र थेरेपी भी करवाई, लेकिन सब बेकार रहा। मैंने YouTube पर Jiva के कुछ वीडियो देखे और डॉक्टर से सलाह ली। उन्होंने मेरी शिकायत को बड़े धैर्य से सुना और मेरे पूरे इलाज के दौरान मेरा पूरा साथ दिया। मैंने अपनी जीवनशैली में भी कुछ बदलाव किए, जिससे मेरी सेहत ठीक होने में मदद मिली। धन्यवाद Jiva Ayurveda!

डॉ. खुशबू गुप्ता (फरीदाबाद)

अनियमित पीरियड्स के लिए जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

अपने इलाज पर कितना खर्च आएगा, यह जानना हर मरीज़ के लिए ज़रूरी होता है। जीवा आयुर्वेद में हम खर्च की जानकारी साफ और आसान तरीके से देते हैं, ताकि आप बिना किसी उलझन के सही फैसला ले सकें।

इलाज का सामान्य खर्च:

जो लोग अपनी बीमारी के लिए नियमित (regular) इलाज शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए दवाइयों और डॉक्टर की सलाह का महीने का खर्च लगभग ₹3,000 से ₹3,500 के बीच आता है। यह एक औसत अंदाज़ा है। असल खर्च आपकी बीमारी कितनी पुरानी है और उसकी स्थिति कैसी है, इस पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल (स्पेशल पैकेज):

अगर आप अपनी बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए थोड़ा ज़्यादा गहराई और विस्तार से इलाज करना चाहते हैं, तो हमारे 'विशेष पैकेज' आपके लिए सबसे अच्छे हैं। इसमें हम सिर्फ बीमारी को नहीं दबाते, बल्कि आपकी पूरी लाइफस्टाइल को सुधारने पर काम करते हैं। इसमें शामिल हैं:

  • खास दवाइयाँ (Customized Medicines)
  • सीनियर डॉक्टर से कंसल्टेशन
  • मन को शांत रखने के सेशन्स (Stress Management)
  • योग और फर्टिलिटी एक्सरसाइज़ की ट्रेनिंग
  • पर्सनल डाइट प्लान (जो सिर्फ आपके लिए बना हो)

इन पैकेजेस का खर्च आमतौर पर ₹15,000 से ₹40,000 के बीच होता है, जो आपके 3 से 4 महीने के पूरे इलाज को कवर करता है।

जीवाग्राम (24x7 देखभाल वाला इलाज):

जिन लोगों को बीमारी से लड़ने के लिए ज़्यादा ध्यान, शांति और आराम के साथ इलाज (पंचकर्म व शोधन) चाहिए, उनके लिए हमारा जीवाग्राम सेंटर सबसे बेहतरीन विकल्प है। यह प्रकृति के करीब बना एक ऐसा सेंटर है जहाँ आपको घर जैसा सुकून और अस्पताल जैसी केयर मिलती है। यहाँ आपको मिलता है:

  • पंचकर्म थेरेपी (उत्तर बस्ती, विरेचन और अंदरूनी सफाई)
  • सादा और पौष्टिक 'सात्विक' खाना
  • इलाज की आधुनिक और बेहतर सुविधाएँ
  • आरामदायक रहने की व्यवस्था

यहाँ 7 दिन का प्रोग्राम लगभग ₹1 लाख का होता है। इसमें आपको हर समय विशेषज्ञों की देखभाल मिलती है, ताकि आपका शरीर और मन दोनों पूरी तरह से तरोताज़ा (rejuvenated) होकर स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए तैयार हो सकें।

लोग जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • असली कारण पर आधारित इलाज: हमारा पूरा ध्यान इस बात पर होता है कि बीमारी की जड़ (Root Cause) क्या है। हम सिर्फ बाहरी हार्मोन नहीं देते, बल्कि शरीर के अंदर जाकर उस प्रजनन समस्या को ठीक करते हैं जिससे बांझपन शुरू हुआ है।
  • हर मरीज़ के लिए एक खास प्लान: आयुर्वेद मानता है कि हर इंसान का शरीर अलग होता है। इसलिए, हम सबको एक ही दवा नहीं देते। आपका इलाज आपकी अपनी प्रकृति, खान-पान और आपकी लाइफस्टाइल के हिसाब से खास आपके लिए तैयार किया जाता है।
  • जाँच और इलाज का सही तरीका: हम एक बहुत ही व्यवस्थित (systematic) प्रक्रिया का पालन करते हैं। इससे शरीर के वात दोष और मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी समस्याओं को गहराई से समझकर उन्हें बैलेंस करने में मदद मिलती है।
  • शुद्ध और सुरक्षित दवाइयाँ: जीवा की सभी आयुर्वेदिक दवाइयाँ पूरी तरह से शुद्ध जड़ी-बूटियों से बनी होती हैं। इनके बनाने में सुरक्षा और क्वालिटी के कड़े मानकों का पालन किया जाता है ताकि आपको या आपके होने वाले बच्चे को कोई नुकसान न हो।
  • अनुभवी डॉक्टरों की टीम: हमारे पास ऐसे डॉक्टरों की एक बड़ी टीम है जिन्हें आयुर्वेद का सालों का अनुभव है। ये एक्सपर्ट्स हर दिन हज़ारों मरीज़ों की मुश्किल समस्याओं को सुलझाने में उनकी मदद करते हैं।
  • परिणाम जो सच में दिखते हैं: हमारे 90% से ज़्यादा मरीज़ों ने अपने स्वास्थ्य में बड़ा और सकारात्मक सुधार महसूस किया है।
  • दवाइयों पर निर्भरता में कमी: हमारा लक्ष्य आपको अंदर से सेहतमंद बनाना है। हमारे 88% मरीज़ धीरे-धीरे कृत्रिम दवाओं और भारी-भरकम हार्मोनल इंजेक्शन्स पर अपनी निर्भरता कम करने में सफल रहे हैं और एक नेचुरल लाइफस्टाइल की ओर बढ़े हैं।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

मासिक धर्म की बीमारी में आधुनिक और आयुर्वेदिक इलाज का नज़रिया बिल्कुल अलग है:

तुलना का आधार आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक चिकित्सा
उपचार का दृष्टिकोण हार्मोन देकर पीरियड्स को नियंत्रित करना बीमारी की जड़ पर काम करना
कार्य करने का तरीका कृत्रिम हार्मोन (OCPs) से पीरियड्स लाना शरीर को अंदर से संतुलित कर साइकिल को प्राकृतिक बनाना
मूल कारण पर प्रभाव ओवरीज़ को खुद काम करने के लिए प्रेरित नहीं करता कफ-वात असंतुलन और टॉक्सिन्स को संतुलित करता है
उपचार विधियाँ हार्मोनल दवाइयाँ (OCPs) जड़ी-बूटियाँ और संतुलित आहार
दुष्प्रभाव दवा छोड़ते ही पीरियड्स रुकना, लिवर पर असर सामान्यतः सुरक्षित, प्राकृतिक सुधार
परिणाम अस्थायी नियंत्रण शरीर का प्राकृतिक साइकिल नियमित होना
समय जल्दी असर थोड़ा समय लगता है, लेकिन दीर्घकालिक लाभ

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

अनियमित पीरियड्स होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • लगातार 3 महीने या उससे अधिक समय तक पीरियड्स बिल्कुल न आएँ।
  • पीरियड्स के दौरान इतना भयंकर दर्द हो कि उल्टी आने लगे और आप बिस्तर से न उठ पाएँ।
  • ब्लीडिंग 7-8 दिनों से ज़्यादा चले और खून के बड़े-बड़े थक्के गिरें।
  • वज़न इतनी तेज़ी से बढ़े कि कंट्रोल करना मुश्किल हो जाए।
  • चेहरे और शरीर पर बहुत ज़्यादा अनचाहे बाल आने लगें।

समय पर सलाह लेने से रोग का सही निदान होता है और बाँझपन जैसी जटिलताओं से बचा जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के हिसाब से अनियमित पीरियड्स और पीसीओडी मुख्य रूप से वात व कफ दोष के बिगड़ने तथा शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स) के जमा होने से जुड़ा होता है। जंक फूड खाने, व्यायाम न करने और तनाव लेने से ओवरीज़ और गर्भाशय के मार्गों में रुकावट आती है। सिर्फ रोज़ाना हार्मोन की गोली खाने से महीने में ब्लीडिंग तो हो जाती है, लेकिन शरीर अंदर से प्राकृतिक रूप से काम करना भूल जाता है। इलाज में शरीर की अंदरूनी शुद्धि और दोषों को संतुलित करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। इसमें अशोक-शतावरी जैसी जड़ी-बूटियाँ इस्तेमाल करना, पपीता-तिल खाना और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना शामिल है जिससे गर्भाशय प्राकृतिक रूप से काम करे और बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके।

FAQs

हाँ, अगर बीमारी की शुरुआत में ही सही आयुर्वेदिक इलाज और डाइट का पालन किया जाए, तो ओवरीज़ को प्राकृतिक रूप से काम करने लायक बनाया जा सकता है।

आधुनिक चिकित्सा में यह दी जाती हैं, लेकिन ये सिर्फ कृत्रिम साइकिल बनाती हैं। आयुर्वेद से बिना इन गोलियों के गर्भाशय को ठीक किया जा सकता है।

हाँ, आयुर्वेद में इनकी तासीर गर्म मानी गई है जो शरीर में रुकावट (कफ) को दूर कर रुके हुए पीरियड्स को लाने में मदद करती है।

हाँ, ज़्यादा तनाव और चिंता सीधे तौर पर आपके हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करते हैं, जिससे ओव्यूलेशन नहीं होता और साइकिल रुक जाता है।

हाँ, मैदा और चीनी से बनी चीज़ें इंसुलिन का स्तर बढ़ाती हैं, जो पीसीओडी में हार्मोन बिगाड़ने का सबसे बड़ा कारण है।

हाँ, अशोक महिलाओं के लिए सबसे अच्छी आयुर्वेदिक औषधि है जो गर्भाशय को ताकत देती है और ब्लीडिंग को नियमित करती है।

हाँ, अगर अंडे सही समय पर नहीं बन रहे हैं (ओव्यूलेशन नहीं हो रहा है), तो गर्भधारण करने में परेशानी आ सकती है।

हाँ, थायरॉइड हार्मोन की कमी (हाइपोथाइरॉइड) मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देती है, जिसका सीधा असर मेंस्ट्रुअल साइकिल पर पड़ता है।

हाँ, एलोवेरा गर्भाशय की सफाई करता है और प्राकृतिक रूप से पीरियड्स को नियमित करने में बहुत कारगर है।

हाँ, सिर्फ 5-10% वज़न कम करने से शरीर का इंसुलिन और हार्मोन लेवल काफी हद तक सुधर जाता है, जिससे पीरियड्स समय पर आने लगते हैं।

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