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PCOD में मुंहासे और वज़न साथ-साथ क्यों बढ़ते हैं? आयुर्वेदिक जड़ विश्लेषण

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 23 Mar, 2026
  • category-iconUpdated on 23 Mar, 2026
  • category-iconWomen's Health
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PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज़) आज के समय में महिलाओं में होने वाली एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या बन गई है। जब अचानक से वज़न बढ़ने लगे और चेहरे पर जिद्दी मुंहासे निकलने लगें, तो इसे सिर्फ त्वचा या मोटापे की समस्या मानकर अनदेखा नहीं कर सकते। ये दोनों परेशानियाँ अक्सर एक साथ आती हैं और इसका सीधा कनेक्शन आपके हॉर्मोन्स और शरीर के अंदर चल रही गड़बड़ी से है। PCOD सिर्फ अनियमित पीरियड्स तक सीमित नहीं है, यह शरीर के पूरे मेटाबॉलिज़्म को बिगाड़ देता है। ज़रूरी है कि आप इसके मूल कारण को समझें और सही समय पर सही इलाज शुरू करें, तभी इस दोहरी परेशानी से पक्की राहत मिलेगी।

PCOD में मुंहासे और वज़न एक साथ क्यों बढ़ते हैं?

PCOD में मुंहासे और वज़न का एक साथ बढ़ना कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह एक चेन रिएक्शन है। जब शरीर में इंसुलिन का स्तर बिगड़ता है (इंसुलिन रेजिस्टेंस), तो शरीर खाए गए भोजन को ऊर्जा में बदलने के बजाय फैट (चर्बी) के रूप में जमा करने लगता है। इससे वज़न तेज़ी से बढ़ता है।

यही बढ़ा हुआ इंसुलिन ओवरीज़ (अंडाशय) को ज़्यादा एण्ड्रोजन (पुरुष हॉर्मोन) बनाने के लिए उकसाता है। जब शरीर में पुरुष हॉर्मोन बढ़ता है, तो त्वचा की तेल ग्रंथियां (Sebaceous glands) बहुत ज़्यादा सीबम (तेल) बनाने लगती हैं। इस अतिरिक्त तेल और डेड स्किन सेल्स की वजह से रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और चेहरे, पीठ या छाती पर बड़े और दर्दनाक मुंहासे फूट पड़ते हैं।

PCOD में मुंहासे और बढ़ते वज़न के लक्षण और संकेत

तेज़ी से वज़न बढ़ना – लाख कोशिशों और डाइटिंग के बावजूद वज़न कम न होना, खासकर पेट के आसपास चर्बी जमा होना।

जिद्दी और दर्दनाक मुंहासे – जॉलाइन (जबड़े), ठुड्डी, गालों और पीठ पर बड़े मुंहासे निकलना जो आसानी से ठीक नहीं होते।

अनियमित मासिक धर्म – पीरियड्स का समय पर न आना, बहुत कम आना या महीनों तक मिस हो जाना।

चेहरे पर अनचाहे बाल – हॉर्मोनल बदलाव के कारण चेहरे (ठुड्डी और अपर लिप्स) पर बालों की ग्रोथ बढ़ जाना।

त्वचा का काला पड़ना – गर्दन के पीछे, अंडरआर्म्स या जांघों के आसपास की त्वचा का मोटा और काला होना।

बालों का झड़ना – सिर के बाल पतले होना और पुरुषों की तरह बालों का झड़ना शुरू होना।

अत्यधिक थकान और सुस्ती – मेटाबॉलिज़्म धीमा होने के कारण दिनभर कमज़ोरी और थकान महसूस होना।

मूड स्विंग्स – चिड़चिड़ापन, तनाव और बिना वजह उदासी महसूस होना।

PCOD में मुंहासे और बढ़ते वज़न के मुख्य कारण

 कफ बढ़ाने वाला आहार – अधिक मीठा, मैदा, जंक फूड, डेयरी उत्पाद और ठंडी चीज़ों का ज़्यादा सेवन कफ और मेद (फैट) को बढ़ाता है।

कमज़ोर पाचन शक्ति (मंद अग्नि) – जब पाचन सही नहीं होता, तो शरीर में 'आम' (विषाक्त पदार्थ/टॉक्सिन्स) बनने लगता है, जो हार्मोनल संतुलन बिगाड़ता है।

निष्क्रिय जीवनशैली – शारीरिक गतिविधि की कमी, दिनभर बैठे रहना और व्यायाम न करना वज़न और PCOD दोनों को बढ़ाता है।

अत्यधिक तनाव (स्ट्रेस) – तनाव से कोर्टिसोल हॉर्मोन बढ़ता है, जो इंसुलिन के स्तर को बिगाड़कर वज़न और मुंहासे दोनों को न्योता देता है।

नींद की कमी – रात को देर तक जागना और नींद पूरी न होना शरीर की प्राकृतिक लय (Biological Clock) को खराब कर देता है।

PCOD के जोखिम और जटिलताएं

 इन्फर्टिलिटी (बांझपन) – अंडे सही समय पर न बनने के कारण गर्भधारण करने में भारी परेशानी आ सकती है।

टाइप-2 डायबिटीज का खतरा – इंसुलिन रेजिस्टेंस लंबे समय तक रहे, तो यह आगे चलकर शुगर की बीमारी में बदल सकता है।

त्वचा पर गहरे दाग-धब्बे – मुंहासों के बार-बार निकलने और फूटने से चेहरे पर हमेशा के लिए गड्ढे और दाग रह जाते हैं।

डिप्रेशन और एंग्जायटी – लगातार बढ़ते वज़न और चेहरे के बिगड़ने से महिलाओं का आत्मविश्वास गिर जाता है और वे मानसिक तनाव का शिकार हो जाती हैं।

हृदय रोगों का जोखिम – बढ़ा हुआ वज़न और खराब कोलेस्ट्रॉल भविष्य में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है।

आधुनिक चिकित्सा में PCOD की पहचान कैसे करते हैं?

आधुनिक चिकित्सा में डॉक्टर सबसे पहले मरीज़ से बात करते हैं—पीरियड्स की साइकिल पूछते हैं, वज़न कब से बढ़ रहा है और मुंहासों की स्थिति देखते हैं। फिर डॉक्टर ओवरीज़ में सिस्ट (पानी की थैलियां) देखने के लिए पेल्विक अल्ट्रासाउंड (USG) कराते हैं।

असल वजह और हॉर्मोन्स का स्तर समझने के लिए ब्लड टेस्ट कराए जाते हैं, जिनमें एण्ड्रोजन, थायरॉइड, प्रोलैक्टिन और इंसुलिन की जांच शामिल होती है। इन सबका हिसाब-किताब मिलाकर डॉक्टर तय करते हैं कि PCOD की गंभीरता कितनी है, फिर उसी अनुसार दवाइयाँ (जैसे हॉर्मोनल पिल्स या मेटफॉर्मिन) शुरू करते हैं।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के हिसाब से PCOD मुख्य रूप से 'कफ' और 'वात' दोष के असंतुलन की वजह से होता है। जब जठराग्नि (पाचन) कमज़ोर होती है, तो शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स) बनता है। यह बढ़ा हुआ कफ और 'आम' जब शरीर के 'रस' और 'रक्त' धातु में मिल जाता है, तो ओवरीज़ के चैनलों (स्रोतों) में रुकावट पैदा करता है, जिससे सिस्ट बनते हैं और वज़न बढ़ता है। इसके साथ ही, जब खून में अशुद्धियां बढ़ती हैं और पित्त दोष भड़कता है, तो शरीर की गर्मी चेहरे पर मुंहासों के रूप में बाहर आती है।

आयुर्वेद सिर्फ लक्षणों (वज़न या मुंहासे) को दबाने का तरीका नहीं अपनाता—वो असली वजह ढूंढता है। इलाज के लिए पाचन सुधारना, दोषों को संतुलित करना और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालना ज़रूरी है।

जीवा आयुर्वेद में उपचार दृष्टिकोण

 जीवा आयुर्वेद में PCOD की समस्या को सुलझाने के लिए पहले मरीज़ की पूरी सेहत का जायज़ा लिया जाता है। हर इंसान की प्रकृति, पाचन शक्ति और जीवनशैली अलग होती है, तो इलाज भी बिल्कुल उसी हिसाब से तय होता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर यह जानने की कोशिश करते हैं कि হॉर्मोन बिगड़ने की असली वजह क्या है—कहीं पाचन कमज़ोर तो नहीं, तनाव ज़्यादा तो नहीं, या फिर खाने-पीने की आदतें गलत हैं?

इसके बाद इलाज में ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां दी जाती हैं, जो ओवरीज़ के काम को सुधारें, रक्त को साफ़ करें और मेटाबॉलिज़्म तेज़ करें। साथ में खाने-पीने और दिनचर्या में बदलाव की सलाह भी मिलती है। जीवा आयुर्वेद की सोच यही है कि सिर्फ मुंहासे या वज़न कम न किया जाए, बल्कि शरीर में जो अंदरूनी हॉर्मोनल असंतुलन है, उसे जड़ से ठीक किया जाए।

PCOD के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ

 शतावरी – महिलाओं के हॉर्मोन्स को संतुलित करने और ओवरीज़ को ताकत देने में सबसे बेहतरीन है।

 कांचनार गुग्गुल – शरीर में मौजूद सिस्ट्स (गांठों) को घोलने और कफ को कम करने में असरदार है।

 मंजिष्ठा और नीम – खून को साफ़ करते हैं, पित्त को शांत करते हैं और मुंहासों को जड़ से खत्म करते हैं।

 दालचीनी (Cinnamon) – इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करती है, जिससे वज़न घटाने में मदद मिलती है।

 अशोक और लोध्र – गर्भाशय की सफाई करते हैं और मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करते हैं।

 त्रिफला – पाचन को मज़बूत करता है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालकर पेट की चर्बी घटाता है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी

जब PCOD की समस्या बहुत पुरानी हो जाए और दवाइयों से आराम न मिल रहा हो, तो जीवा आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्सा की जाती है। वज़न और कफ को कम करने के लिए 'उद्वर्तन' (जड़ी-बूटियों के पाउडर से सूखी मालिश) की जाती है, जो फैट को पिघलाती है। शरीर की गहरी अंदरूनी सफ़ाई के लिए 'विरेचन' और 'वमन' का प्रयोग किया जाता है, जिससे लिवर और खून में जमा दूषित पित्त और कफ बाहर निकल जाता है। हॉर्मोन्स को सीधा संतुलित करने के लिए 'उत्तर बस्ती' जैसी विशेष चिकित्सा भी अपनाई जाती है, जिससे ओवरीज़ का फंक्शन फिर से सामान्य हो जाता है।

PCOD में रोगी के लिए सही आहार 

 गुनगुना पानी – दिनभर हल्का गर्म पानी पीना मेटाबॉलिज़्म तेज़ करता है और फैट पिघलाने में मदद करता है।

 फाइबर युक्त भोजन – ताज़ी सब्ज़ियाँ, फल, और साबुत अनाज (जौ, रागी) इंसुलिन को कंट्रोल करते हैं।

 करेला और आंवला – इनका जूस खून को साफ़ करता है, जिससे मुंहासे कम होते हैं और शुगर लेवल ठीक रहता है।

 बीज और मेवे – अलसी (Flaxseeds), कद्दू के बीज और बादाम हॉर्मोनल बैलेंस के लिए बहुत अच्छे हैं।

 हर्बल चाय – पुदीना, धनिया या सौंफ की चाय शरीर की गर्मी (पित्त) को कम कर मुंहासों से राहत देती है।

 मीठे और डेयरी से परहेज – दूध, पनीर, चीनी, और मैदे से बनी चीज़ें पूरी तरह से कम कर देनी चाहिए, क्योंकि ये कफ और मुंहासे दोनों बढ़ाती हैं।

जीवा आयुर्वेद में PCOD के मरीज़ों की जांच कैसे करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में PCOD की जांच पूरी तरह से मरीज़ की हालत, आदतें, और शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान देकर की जाती है। डॉक्टर पहले मरीज़ से पूछेंगे कि वज़न कब से बढ़ रहा है, मुंहासे कितने दर्दनाक हैं, और पीरियड्स का क्या हाल है। वो आपकी दिनचर्या, तनाव का स्तर, खाने-पीने की आदतें और जीवनशैली भी समझते हैं। नाड़ी परीक्षा, जीभ की जांच, और पाचन शक्ति देखकर पता लगाया जाता है कि वात, पित्त या कफ में से कौन सा दोष कितना बढ़ गया है। फिर इसी आधार पर सही आयुर्वेदिक इलाज, खान-पान और दिनचर्या की व्यक्तिगत सलाह दी जाती है।

जीवा आयुर्वेद में उपचार और देखभाल की प्रक्रिया

जीवा आयुर्वेद में इलाज बिल्कुल व्यवस्थित और आसान तरीके से होता है, जिससे आपको पूरी तरह निजी और असरदार आयुर्वेदिक अनुभव मिलता है।

 पहला कदम—अपनी जानकारी दें: आप हमें कॉल कर सकते हैं, बातचीत की शुरुआत के लिए 0129 4264323 पर सीधे संपर्क करें।

 मिलने का समय तय करें: हमारे अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टरों के साथ अपॉइंटमेंट तय होता है। बातचीत का तरीका आप खुद चुन सकते हैं—

   क्लिनिक: जीवा आयुर्वेद के 88 से ज़्यादा क्लिनिक अलग-अलग शहरों में हैं। आपके सबसे नज़दीकी क्लिनिक में जाइये और आमने-सामने डॉक्टर से मिलिये।

   वीडियो कॉल—सिर्फ 49 रुपये में: अगर आपके शहर में क्लिनिक नहीं है, तो घर बैठे डॉक्टर से ऑनलाइन वीडियो कॉल पर बात कर सकते हैं। ये सेवा भारी छूट के साथ सिर्फ 49 रुपये में मिलती है (पहले कीमत 299 रुपये थी)। बस 0129 4264323 पर फोन करें और आराम से डॉक्टर से जुड़िए।

 समस्या की गहराई से पहचान: हमारे डॉक्टर आपके लक्षण और परेशानी को पूरी तरह समझने की कोशिश करते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुंचा जा सके।

 जड़ से इलाज: समस्या पता चलने के बाद, आपके लिए खास इलाज की योजना बनती है, जिसमें प्राकृतिक जड़ी-बूटियों वाली दवाएं दी जाती हैं।

 नज़र रखते हैं सुधार पर: हम लगातार संपर्क में रहते हैं और आपके बदलते स्वास्थ्य के हिसाब से इलाज में ज़रूरी बदलाव भी करते हैं।

ठीक होने में लगने वाला समय

आयुर्वेद के मुताबिक, PCOD के ठीक होने में कितना वक्त लगता है, ये आपके शरीर   दोषों की स्थिति और दिनचर्या पर टिका रहता है। अगर आप सही खाने-पीने, रोज़ एक्सरसाइज, योग और आयुर्वेदिक दवाएं लेते हैं, तो करीब 2–3 महीने में मुंहासे और वज़न में बदलाव दिखने लगता है। कफ और वात दोष ठीक से बैलेंस होने और पाचन शक्ति (अग्नि) अच्छी बनने में 4–6 महीने लग जाते हैं। हार्मोनल बैलेंस और नियमित पीरियड्स पाने के लिए 6–12 महीने तक लग सकते हैं। रोज़ की रूटीन और तनाव कम रखने से रिजल्ट्स अच्छे और टिकाऊ मिलते हैं।

मरीज़ों के अनुभव 

मैं PCOD से पीड़ित थी, जिसके लक्षणों में चेहरे पर बाल आना, अनियमित पीरियड्स और वज़न बढ़ना शामिल थे। मैंने एलोपैथिक और होम्योपैथिक डॉक्टरों से सलाह ली और हिर्सुटिज़्म (चेहरे पर ज़्यादा बाल) के लिए लेज़र थेरेपी भी करवाई, लेकिन सब बेकार रहा। मैंने YouTube पर Jiva के कुछ वीडियो देखे और डॉक्टर से सलाह ली। उन्होंने मेरी शिकायत को बड़े धैर्य से सुना और मेरे पूरे इलाज के दौरान मेरा पूरा साथ दिया। मैंने अपनी जीवनशैली में भी कुछ बदलाव किए, जिससे मेरी सेहत ठीक होने में मदद मिली। धन्यवाद Jiva Ayurveda!

डॉ. खुशबू गुप्ता

फरीदाबाद

लोग जीवा आयुर्वेदा पर भरोसा क्यों करते है?

लोग Jiva Ayurveda पर इस वजह से भरोसा करते हैं, क्योंकि यहाँ सिर्फ लक्षण दबाने का नहीं, बल्कि बीमारी की जड़ तक पहुंच कर इलाज करने का नज़रिया है। सालों से Jiva अपनी अनुभवी डाक्टरों की टीम और व्यक्तिगत इलाज के कारण हज़ारो लोगों की मदद कर रहा है, खासकर PCOD, महिलाओं की समस्याओं और त्वचा रोगों जैसी परेशानियों में।

यहां आयुर्वेद के उस मुख्य सिद्धांत को अपनाया जाता है, जिसमें बीमारी का मूल कारण समझा जाता है। मरीज़ की प्रकृति, उसकी लाइफस्टाइल और उसकी सेहत—हर चीज़ को ध्यान में रखते हुए ही इलाज तय किया जाता है। Jiva का “Ayunique” तरीका यही है कि हर इंसान की ज़रूरत अलग होती है, तो इलाज भी अलग होना चाहिए।

Jiva की थेरेपी सिर्फ दवा देने तक सीमित नहीं रहती। यहां खाने-पीने की सलाह, योग के अभ्यास, लाइफस्टाइल में ज़रूरी बदलाव, और तनाव कम करने के लिए अलग तकनीकें दी जाती हैं। इससे पूरे शरीर और मन का संतुलन बेहतर होता है। यही वजह है कि देश भर के हजारों मरीज़ Jiva Ayurveda की सलाह और इलाज को सबसे ज़्यादा भरोसेमंद मानते आए हैं।

कई मरीज़ों ने खुद माना है कि सिर्फ तीन महीने में ही उन्होंने अपनी सेहत, वज़न और त्वचा में बड़ा बदलाव महसूस किया। लगभग 95% मरीज़ों को इतनी जल्दी फर्क नजर आया, और करीब 88% लोगों को समय के साथ दूसरी दवाएं कम करनी पड़ीं। यही भरोसा Jiva Ayurveda को अलग बनाता है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

 अपना इलाज करवाने से पहले खर्च की बात तो हर किसी को जानना चाहिए। जीवा आयुर्वेद में, हम सब कुछ साफ-साफ बताते हैं, ताकि आप बिना किसी झंझट के अपने लिए सही इलाज चुन सकें।

अगर आपको रेगुलर दवा और डॉक्टर से सलाह चाहिए, तो महीने भर का खर्च करीब ₹3,000 से ₹3,500 के बीच आता है। यह बस एक औसत है — असली रकम आपके केस की गंभीरता और ज़रूरतों पर निर्भर करती है।

अब अगर आप थोड़ा ज़्यादा गहराई से इलाज करवाना चाहते हैं, तो हमारे पास खास पैकेज प्रोटोकॉल मिलते हैं। इनमें सिर्फ दवा और परामर्श ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य सेशन, योग-ध्यान और खानपान सब शामिल रहता है। ऐसे पैकेज का खर्च ₹15,000 से ₹40,000 तक है, जो पूरे 3 से 4 महीने के इलाज को कवर करता है।

कुछ लोगों को तो और भी ज़्यादा ध्यान और देखभाल चाहिए होती है। ऐसे में हमारा जीवाग्राम सेंटर आगे आता है। यहाँ आपको असली पंचकर्म थेरेपी, सात्विक खाना, मॉडर्न ट्रीटमेंट, आरामदायक जगह और और भी कई सुविधाएँ मिलती हैं। सात दिन का स्टे करीब ₹1 लाख का होता है — और आपका बॉडी-माइंड दोनों एकदम रिफ्रेश हो जाता है।

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए? 

 लगातार वज़न बढ़ रहा हो और डाइट/एक्सरसाइज के बाद भी कम न हो रहा हो।

 चेहरे, पीठ और छाती पर बड़े, लाल और दर्दनाक मुंहासे भर गए हों।

 मासिक धर्म (Periods) 2-3 महीने तक न आएँ या ब्लीडिंग बहुत असामान्य हो।

 चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल (Hirsutism) बहुत तेज़ी से बढ़ने लगें।

 बहुत ज़्यादा थकान रहने लगे और रोज़मर्रा के काम करने में भी सुस्ती आए।

 अगर आप गर्भधारण करने की कोशिश कर रही हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही है।

 अगर घरेलू उपायों से मुंहासे या वज़न में कोई सुधार न दिखे, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।

निष्कर्ष

PCOD में वज़न का बढ़ना और मुंहासों का निकलना कोई ऊपरी समस्या नहीं है, यह आपके हॉर्मोन्स और कमज़ोर पाचन तंत्र की चीख-पुकार है। आयुर्वेद कहता है—कफ का बढ़ना, पाचन की कमज़ोरी और खून में अशुद्धि इसके बड़े कारण हैं। जो भी परेशानी हो, वक्त रहते उसकी जड़ को पहचानना ज़रूरी है। सही डाइट, एक्टिव लाइफस्टाइल, योग और तनाव मुक्त रहना—ये सब मिलकर बहुत मदद करते हैं। लेकिन अगर वज़न कंट्रोल से बाहर हो जाए और चेहरे पर मुंहासे डिप्रेशन का कारण बनने लगें, तो तुरंत किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर से मिलना चाहिए। सही जड़ी-बूटियों और जीवनशैली में बदलाव के साथ PCOD को पूरी तरह से मैनेज किया जा सकता है।

FAQs

यह हार्मोनल असंतुलन की स्थिति है जिसमें अंडाशय में सिस्ट बन जाते हैं।

आयुर्वेद में सही इलाज और जीवनशैली से इसे कंट्रोल और संतुलित किया जा सकता है।

कफ दोष और इंसुलिन असंतुलन के कारण शरीर में चर्बी जमा होती है।

पित्त और बढ़े हुए एंड्रोजन हार्मोन से त्वचा में तेल बढ़ता है, जिससे मुंहासे होते हैं।

हाँ, सही इलाज और हार्मोन संतुलन से गर्भधारण संभव है।

हल्का, सात्विक, फाइबर युक्त और कम मीठा भोजन लेना चाहिए।

जंक फूड, ज़्यादा मीठा, डेयरी और ठंडी चीज़ों से बचना चाहिए।

योग और प्राणायाम हार्मोन संतुलन और वजन नियंत्रण में मदद करते हैं।

2–3 महीने में शुरुआती और 6–12 महीने में अच्छा सुधार दिख सकता है।

जब पीरियड्स अनियमित हों, वजन तेज़ी से बढ़े या मुंहासे बहुत ज़्यादा हों।

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