आजकल महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर यानी बच्चेदानी के मुँह के कैंसर के मामले बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह एक ऐसी गंभीर बीमारी है जो बहुत ही धीरे-धीरे शरीर में फैलती है, इसलिए शुरुआत में इसका पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन अगर महिलाएँ अपने शरीर में हो रहे छोटे बदलावों पर सही समय पर ध्यान दें, तो इस जानलेवा बीमारी को आसानी से रोका जा सकता है। Cervical Cancer के शुरुआती लक्षण क्या हैं? यह जानना हर उम्र की महिला के लिए बहुत ही ज़्यादा ज़रूरी है, ताकि समय रहते सही इलाज शुरू किया जा सके।
पीरियड्स के बीच या संबंध बनाने के बाद खून आना है बड़ा संकेत
इस बीमारी का सबसे पहला और बड़ा संकेत शरीर से असामान्य रूप से खून आना है। अगर आपको दो पीरियड्स के बीच में अचानक से खून आने लगता है, तो यह बिल्कुल भी सामान्य बात नहीं है। इसके अलावा संबंध बनाने के तुरंत बाद खून आना या भारी दर्द महसूस होना भी गर्भाशय में हो रही परेशानी का इशारा है। कई बार मेनोपॉज़ (माहवारी पूरी तरह बंद होना) के सालों बाद अचानक से खून आने लगता है। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो बिना शर्म किए तुरंत अपनी महिला डॉक्टर से जाकर पूरी जाँच करवाएँ।

सफेद पानी का ज़्यादा आना और उसमें से अजीब बदबू आना
महिलाओं में थोड़ा बहुत सफेद पानी (डिस्चार्ज) आना एक आम बात है, लेकिन सर्वाइकल कैंसर की स्थिति में इसमें भारी बदलाव आ जाता है। अगर सफेद पानी बहुत ज़्यादा मात्रा में आने लगे, उसका रंग लाल या भूरा हो जाए और उसमें से बहुत ही खराब बदबू आने लगे, तो तुरंत सावधान हो जाएँ। यह बच्चेदानी के मुँह पर इन्फेक्शन या ट्यूमर बनने का बहुत बड़ा संकेत होता है। ज़्यादातर महिलाएँ इसे आम कमज़ोरी समझकर साफ सफाई पर ध्यान नहीं देती हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा होना इस खतरनाक बीमारी की शुरुआत हो सकती है।
कमर और पेडू के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहना है खतरनाक
अक्सर महिलाएँ कमर दर्द को काम की भारी थकावट समझकर एकदम नज़रअंदाज़ कर देती हैं। लेकिन अगर आपको बिना किसी भारी काम के भी पेडू (पेट के निचले हिस्से) और कमर में लगातार तेज़ दर्द रहता है, तो यह खतरे की घंटी है। जब कैंसर की कोशिकाएँ बच्चेदानी के आस-पास फैलने लगती हैं, तो वे नसों पर भारी दबाव डालती हैं जिससे यह दर्द होता है। दर्द के साथ कई बार पैरों में भारीपन और सूजन भी आ जाती है। इस लगातार बने रहने वाले दर्द को कभी भी मामूली समझकर पेनकिलर खाने की गलती न करें।
बहुत ज़्यादा थकान और अचानक से वज़न कम होना भी है एक लक्षण
अगर आप भरपूर नींद ले रही हैं और सही खाना खा रही हैं, फिर भी आपको हर समय बहुत ज़्यादा थकान महसूस होती है, तो यह शरीर के अंदर पल रही किसी बड़ी बीमारी का संकेत है। कैंसर जैसी बीमारी शरीर की सारी ताकत और ऊर्जा को पूरी तरह सोख लेती है। इसके साथ ही बिना किसी कसरत या डाइटिंग के अगर आपका वज़न अचानक से बहुत तेज़ी से कम होने लगे, तो यह भी सर्वाइकल कैंसर का एक बड़ा लक्षण हो सकता है। शरीर के अंदरूनी बदलावों को समझें और समय पर अपना पूरा चेकअप करवाएँ।

पेशाब करते समय भारी दर्द या जलन होना कर रहा है इशारा
यह लक्षण थोड़ा बाद में दिखाई देता है, लेकिन यह बहुत ही गंभीर है। जब कैंसर गर्भाशय से बाहर निकलकर पेशाब की थैली तक पहुँचने लगता है, तो पेशाब करते समय भारी जलन और तेज़ दर्द होने लगता है। कई बार पेशाब के साथ खून भी आने लगता है या पेशाब करने की आदत में अचानक से बड़ा बदलाव आ जाता है। ज़्यादातर महिलाएँ इसे यूरिन इन्फेक्शन मानकर खुद से आम दवाइयाँ खाने लगती हैं, जिससे असली बीमारी अंदर ही अंदर बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है। इसलिए डॉक्टर से सही जाँच कराना ही सबसे अक्लमंदी का काम है।
इन संकेतों को भूलकर भी न करें नज़रअंदाज़ वरना बढ़ जाएगी बीमारी
ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण को छोटी परेशानी समझना आप पर बहुत भारी पड़ सकता है। क्योंकि अगर कैंसर पहली स्टेज में ही पकड़ में आ जाए, तो इसका इलाज पूरी तरह से संभव है। लेकिन शर्म या डर की वजह से डॉक्टर के पास न जाना बीमारी को आखिरी स्टेज तक पहुँचा देता है, जहाँ से जान बचाना काफी मुश्किल हो जाता है। अपने शरीर से प्यार करें और कोई भी अजीब संकेत दिखने पर बिना किसी देरी के अच्छे अस्पताल में जाकर अपना टेस्ट ज़रूर करवाएँ।
साफ सफाई और सही खानपान से सर्वाइकल कैंसर से करें अपना बचाव
इस बीमारी से बचने के लिए महिलाओं को अपनी जीवनशैली और साफ-सफाई पर खास ध्यान देना चाहिए। हमेशा ताज़े फल, हरी सब्ज़ियाँ और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाना खाएँ, ताकि आपका इम्यून सिस्टम मज़बूत रहे और वायरस से लड़ सके। इसके अलावा कम उम्र की लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने वाली वैक्सीन ज़रूर लगवानी चाहिए। यह वैक्सीन इस बीमारी को जड़ से रोकने में बहुत ही ज़्यादा असरदार है। अपनी सेहत को हमेशा सबसे ऊपर रखें और जंक फूड या सिगरेट जैसी खराब आदतों से खुद को एकदम दूर रखें।

आयुर्वेद के इन प्राकृतिक उपायों से गर्भाशय को रखें हमेशा सेहतमंद
आयुर्वेद के अनुसार शरीर में कफ और वात दोष बढ़ने से बच्चेदानी में अशुद्धियाँ जमा होने लगती हैं। आयुर्वेद में गर्भाशय को प्राकृतिक रूप से सेहतमंद रखने के लिए अशोक की छाल और शतावरी का इस्तेमाल बहुत ही फायदेमंद बताया गया है। रोज़ाना अशोक की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से बच्चेदानी की सूजन और भारी दर्द पूरी तरह दूर हो जाता है। इसके अलावा हल्दी और नीम का ताज़ा पानी अशुद्धियों को साफ करता है।
डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी संकेत दिखे, तो बिना झिझक तुरंत महिला डॉक्टर (Gynecologist) को दिखाएँ। खास तौर पर अगर संबंध बनाने के बाद या मेनोपॉज़ के बाद खून आए, डिस्चार्ज से बहुत बदबू आए, या बिना वजह पेडू में लगातार दर्द रहे तो देर बिल्कुल न करें।
शुरुआती स्टेज में इस बीमारी की पहचान के लिए पैप स्मीयर (Pap Smear) टेस्ट बहुत आसान और असरदार तरीका है। सही समय पर जाँच करवाने से बीमारी का समय रहते इलाज संभव है। इसलिए डर या शर्म छोड़कर अपनी सेहत को पहली प्राथमिकता दें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
निष्कर्ष
शरीर में पनपने वाली किसी भी गंभीर बीमारी को उसके शुरुआती लक्षणों से बहुत आसानी से पहचाना जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से बचने के लिए महिलाओं को अपने शरीर के प्रति बहुत ज़्यादा जागरूक होना पड़ेगा। असामान्य खून आना, तेज़ कमर दर्द या खराब बदबू वाले डिस्चार्ज जैसे इन संकेतों को भूलकर भी न करें नज़रअंदाज़। समय पर पैप स्मियर टेस्ट करवाकर और सही डॉक्टर से सलाह लेकर आप अपनी जान बचा सकती हैं। इसके साथ ही साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें, एचपीवी वैक्सीन लगवाएँ और आयुर्वेद के प्राकृतिक उपाय अपनाकर अपने शरीर को हमेशा स्वस्थ और मज़बूत बनाए रखें।
References
https://www.who.int/health-topics/cervical-cancer
https://cancerindia.org.in/cervical-cancer/
https://www.cancer.gov/types/cervical/causes-risk-prevention






























